2. स्नेह (Affection)

उद्देश्य: भाई-बहन, मित्र और सहपाठियों के साथ आपसी सहयोग और ख़ुशीपूर्वक साथ-साथ जीना देख पाना, एक-दूसरे के लिए स्नेह महसूस करना और व्यक्त करना।

शिक्षक के संदर्भ के लिए नोट:
हमारे जीवन का अधिकतर सुख-दु:ख अपने और अपनों के साथ जुड़ा हुआ है। ज़िंदगी में यह अपनों की संख्या भी बदलती रहती है। साथ ही अपना-पराया की मानसिकता भी हमारे सुख-दु:ख का एक बड़ा कारण है। संबंधों में दूरियाँ अपनेपन के एहसास का अभाव पैदा करती हैं जो बड़ा पीड़ादायक होता है। अत: एक ख़ुशहाल जीवन के लिए अपनों के प्रति अपनापन का एहसास बहुत ज़रूरी है। इसके साथ ही अपनी ख़ुशी का दायरा बढ़ाने के लिए अपनेपन का विस्तार भी ज़रूरी है ताकि सारा परायापन ख़त्म हो जाए, क्योंकि आज समाज में सबसे ज़्यादा भय इनसान के द्वारा बनाई गई अपने-पराए की दीवारों के कारण ही है।
सभी इनसान किसी न किसी रूप में एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। हम जैसे ही उस जुड़ाव या संबंध को स्वीकार करते हैं तो इससे अपने अंदर अपनेपन और सुरक्षा की भावना आती है, जिसे हम ख़ुशी के रूप में महसूस करते हैं।
जब हम किसी व्यक्ति के साथ कोई संबंध स्वीकार कर लेते हैं, जैसे- भाई, बहन, मित्र आदि तो अब उस व्यक्ति से मिलने पर या उसे याद करने पर हमारा बेचैन मन भी प्रसन्न हो जाता है।
जिन लोगों के प्रति हमारे अंदर स्नेह का भाव होता है उनसे कोई काम न होने पर भी सिर्फ़ ख़ुशी के लिए, ख़ुशी से और ख़ुशी में मिलने का मन करता है।
किसी व्यक्ति की मूल चाहत (ख़ुशी) के प्रति आश्वस्त (assure) होने पर उसके प्रति विश्वास का भाव विकसित होता है। विश्वास के आधार पर उसे एक व्यक्ति के रूप में अपने जैसा स्वीकार करने पर उसके प्रति सम्मान का भाव विकसित होता है। विश्वास और सम्मान के आधार पर उसके साथ किसी संबंध की स्वीकृति होने पर स्नेह का भाव विकसित होता है। अत: संबंधों में विश्वास (trust) और सम्मान (respect) होने पर ही स्नेह (affection) हो पाता है।
प्रकृति में सब कुछ एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है, इसलिए ख़ुशी से जीने के लिए प्रकृति में अकेले का कोई कार्यक्रम नहीं है बल्कि मिल-जुलकर रहने का ही प्रावधान है। अत: जो हमसे आगे हैं उनसे सहयोग लेकर और जो हमसे पीछे हैं उनका सहयोग करके हम सभी निर्विरोधपूर्वक अर्थात स्नेहपूर्वक ख़ुशहाल जीवन जी सकते हैं।
जब हम किसी के प्रति स्नेह के भाव के साथ होते हैं तो हम उसके प्रति निष्ठावान (committed) बने रहते हैं अर्थात हर हाल में हम उसके साथ ठहरे रहते हैं।
स्नेह के भाव (feeling of affection) को पहचानने (to explore), महसूस करने (to experience) और व्यक्त करने (to express) के लिए निम्नलिखित सत्र (sessions) रखे गए हैं।

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सत्र 1

उद्देश्य: बच्चे परिवार में अपने भाई-बहनों के साथ आपने सहयोग और साथ-साथ रहने को देख पाए।
समय: प्रत्येक सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए एक से दो दिन (अभिव्यक्ति दिन ) का समय निर्धारित किया गया है बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए।

शिक्षक के लिए नोट: बच्चे परिवार में अपने भाई-बहनों के साथ सहयोग करते हुए बड़े होते हैं मिलकर खेलते हैं, खाते हैं, पढ़ते हैं तथा और बहुत सारे काम करते हैं। बच्चों का ध्यान परस्पर अपनापन पर जाए और वो उसके साथ बने रहें और उसे व्यक्त भी कर सकें।

कक्षा की शुरूआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की प्रक्रिया से की जाए।

बच्चों द्वारा अभिव्यक्ति:
निम्न प्रश्नों के माध्यम से बच्चों में दूसरों के प्रति अपनापन की अभिव्यक्ति के अवसर दिए जाएँ।
  • आप अपने भाई-बहन के साथ कब और कौन-कौन से खेल खेलते हैं? ( यहाँ भाई-बहन से आशय सगे, चचेरे, ममेरे, फुफेरे आदि से है।)
  • आप अपने भाई-बहन के साथ अपनी कौन-कौन सी वस्तुएँ बाँटते ( साझा करते) हो? और क्यों?
  • आप अपने भाई-बहनों के साथ कौन-कौन से काम मिल-जुलकर करते हो? और कब-कब?
  • आपके भाई बहन आपकी किन ज़रूरतों का ध्यान रखते है? (जैसे: आपके खाना पीना ,पढ़ाई, आपके खिलोने)
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य:
अगले सप्ताह आप अपने मित्रों के व्यवहार पर ध्यान दे कि वो किन किन कार्यों में आपकी मदद करते हैं। और आप उनके साथ कौन-कौन से कार्य मिलकर करते हैं। अगले अभिव्यक्ति दिवस पर हम बातचीत करेंगें।

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठकर आज की अपनी अभिव्यक्ति के बारे में विचार करें।

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सत्र: 2
उद्देश्य: बच्चे अपने आस-पड़ोस में मित्रों के साथ अपनापन का भाव और अपने व्यवहार को देख पाए।
समय: प्रत्येक सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए एक से दो दिन (अभिव्यक्ति दिन ) का समय निर्धारित किया गया है बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए।

शिक्षक के लिए नोट: बच्चे पड़ोस में रहने वाले मित्रों और साथियों के साथ सहयोग करते हैं, त्यौहार मानते हैं, खेलते हैं और साथ मिलकर बड़े होते हैं और अपनापन के साथ जीते हैं। बच्चों का ध्यान मिलकर रहने, आपसी सहयोग करने और पूरकता पर जाए।

कक्षा की शुरूआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की प्रक्रिया से की जाए।

बच्चों द्वारा अभिव्यक्ति:
निम्न प्रश्नों के माध्यम से बच्चों में दूसरों के प्रति अपनापन की अभिव्यक्ति के अवसर दिए जाएँ।
  • आपके पड़ोस में कितने दोस्त हैं और आपने उनसे दोस्ती कैसे की?
  • आप अपने मित्रों से कौन सी वस्तुएँ साझा करते हैं?
  • कौन-कौन से त्यौहार आप अपने पड़ोसी मित्रों के साथ मनाते हो? और कैसे?
  • दोस्त बनने से पहले आपका व्यवहार उनसे कैसा था? और दोस्ती होने के बाद आपके व्यवहार में क्या बदला?
  • आपने अपने नाराज मित्र को कैसे मनाया? और क्यों?
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य:
अगले पूरे सप्ताह आप अपनी कक्षा के मित्र और साथियों के साथ अपने सहयोग और उनके प्रति अपने व्यवहार पर ध्यान दें। अगले अभिव्यक्ति दिवस पर हम इस पर बात करेंगें।

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठकर आज की अपनी अभिव्यक्ति के बारे में विचार करें।

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सत्र 3

उद्देश्य: बच्चे अपनी कक्षा में मित्र और साथियों के साथ अपनापन और अपना व्यवहार देख पाएँ।
समय: प्रत्येक सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए एक से दो दिन (अभिव्यक्ति दिन ) का समय निर्धारित किया गया है बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए।

शिक्षक नोट: बच्चों का ध्यान अपनी कक्षा में मित्रों तथा दूसरे बच्चों के साथ अपने व्यवहार पर जाए कि वो किस प्रकार एक दूसरे की छोटी छोटी ज़रूरतों को पूरा करते हैं और अपनापन के साथ मिलकर अपनी समझ के लिए एक दूसरे का सहयोग करते हैं।

कक्षा की शुरूआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की प्रक्रिया से की जाए।

बच्चों द्वारा अभिव्यक्ति:
निम्न प्रश्नों के माध्यम से बच्चों में दूसरों के प्रति अपनापन की अभिव्यक्ति के अवसर दिए जाएँ।
  • आप कक्षा में किसके साथ बैठते हो और क्यों?
  • आप किन साथियों या मित्रों के साथ घर से विद्यालय आते हो?
  • आप मिडडे मील या अपना टिफ़िन किसके साथ बैठ कर खाते हो?
  • आप कक्षा में किस-किस को अपनी कॉपी या पढ़ाई का दूसरा सामान साझा ( शेयर) करते हो?
  • आप अपनी कक्षा के एक दोस्त के बारे में बताए कि आपकी उससे दोस्ती कैसे हुई?
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य:
अगले पूरे सप्ताह आप अपने परिवार में भाई-बहन और पड़ोस में रहने वाले दोस्तों के व्यवहार और सहयोग पर ध्यान दें हम अगले अभिव्यक्ति दिवस पर इससे संबंधित बातचीत करेंगें।

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठकर आज की अपनी अभिव्यक्ति के बारे में विचार करें।

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सत्र: 4

उद्देश्य: बच्चे अपने परिवार में भाई-बहन और पड़ोस के दोस्तों के व्यवहार और सहयोग को देख पाए |
समय: प्रत्येक सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए एक से दो दिन (अभिव्यक्ति दिन ) का समय निर्धारित किया गया है बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए।

शिक्षक नोट: बच्चों का ध्यान जाए कि वो अपने भाई-बहन और आसपास के बच्चों के साथ रहकर भी बहुत कुछ सीखते हैं। हम अक्सर सोचते हैं कि हम ही दूसरों की सहायता करते हैं जबकि दूसरे भी हमारे लिए पूरक होते हैं क्योंकि अकेले हम रहना पसंद ही नहीं करते हम ज़्यादातर कार्य अपने साथियों के साथ मिलकर करना पसंद करते हैं।

कक्षा की शुरूआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की प्रक्रिया से की जाए।

बच्चों द्वारा अभिव्यक्ति:
निम्न प्रश्नों के माध्यम से बच्चों में दूसरों के प्रति अपनापन की अभिव्यक्ति के अवसर दिए जाएँ।
  • आपने अपने बड़े भाई-बहनों की सहायता से क्या-क्या सीखा? (उदाहरण: चलना, बोलना, लिखना, खेलना, पढ़ना,दौड़ना आदि।)
  • ऐसी कौन-कौन समान है जो हमारे भाई-बहन हमारे साथ साझा करते हैं?
  • आपके भाई-बहन कौन- कौन से काम आपके साथ करने के लिए आपका इंतजार करते हैं?
  • कौन से खेल आपके पड़ोसी दोस्त आपके साथ खेलते है? किन-किन खिलौने/सामान से?
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य:
अगले पूरे सप्ताह आप अपनी कक्षा के मित्रों और साथियों के आपके प्रति अपनापन और सहयोग पर ध्यान दे।अगले अभिव्यक्ति दिवस वाले दिन हम इस पर बातचीत करेंगें।

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठकर आज की अपनी अभिव्यक्ति के बारे में विचार करें।

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सत्र: 5

उद्देश्य: बच्चे अपनी कक्षा के मित्रों और साथियों के अपनापन और सहयोग पर ध्यान देंगे।
समय: प्रत्येक सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए एक से दो दिन (अभिव्यक्ति दिन ) का समय निर्धारित किया गया है बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए।

शिक्षक नोट: बच्चों का ध्यान अपने साथियों के सहयोग पर जाए कि वो हमारे लिए समय समय पर बहुत कुछ करते हैं जैसे अपनी वस्तुएँ प्रयोग के लिए देते हैं, हमारी छोटी छोटी बातों का ध्यान रखते हैं, विभिन्न कार्यों में सहयोग करते हैं, हमारा इंतज़ार करते हैं, खेलने हैं, मिलकर जीते हैं और हम ख़ुशहाल होते हैं।

कक्षा की शुरूआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की प्रक्रिया से की जाए।

बच्चों द्वारा अभिव्यक्ति:
निम्न प्रश्नों के माध्यम से बच्चों में दूसरों के प्रति अपनापन की अभिव्यक्ति के अवसर दिए जाएँ।
  • कौन-कौन से दोस्त आपके साथ अपने मन की बात या अपनी ख़ुशी का कारण साझा करता है?
  • जो आपके मित्र नहीं हैं वो किस तरह से बातचीत करते हैं?
  • आपके कौन से दोस्त आपका कक्षा में इंतजार करते हैं?
  • आपके दोस्त आपको अपना कौन-कौन सा सामान साझा करते हैं?
  • कौन साथी आप के साथ विद्यालय आते और घर जाते है?
  • आपके दोस्त आपसे लड़ाई किस प्रकार खत्म करते हैं?
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य:
अगले पूरे सप्ताह आप अपने भाई-बहन,आस-पड़ोस और कक्षा के दोस्तों तथा साथियों के प्रति अपने भावों को महसूस करें और उन पर ध्यान दें। अगले अभिव्यक्ति दिवस पर हम इस पर बातचीत करेंगें।

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठकर आज की अपनी अभिव्यक्ति के बारे में विचार करें।

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सत्र: 6

उद्देश्य: बच्चे अपने भाई-बहन,आस-पड़ोस के दोस्तों, तथा कक्षा के दोस्त और साथियों के प्रति अपनापन और सहयोग के भाव को महसूस कर सकें।
समय: प्रत्येक सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए एक से दो दिन (अभिव्यक्ति दिन) का समय निर्धारित किया गया है बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए।

शिक्षक नोट: बच्चे अपने मित्रों साथियों के साथ मिलकर जीते हुए जब सहयोग करते या सहयोग लेते हैं तो हमें खुशी और अपनापन महसूस होता है उस भाव पर बच्चों का ध्यान उस पर जाए। और अपने जीवन में अपनापन का विस्तार करते हुए अपनी ख़ुशी का दायरा बढ़ाते रहें।

कक्षा की शुरूआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की प्रक्रिया से की जाए।

बच्चों द्वारा अभिव्यक्ति:
निम्न प्रश्नों के माध्यम से बच्चों में दूसरों के प्रति अपनापन की अभिव्यक्ति के अवसर दिए जाएँ।
  • जिस दिन आपके दोस्त विद्यालय नहीं आए उस दिन आपको आपको कैसा महसूस हुआ?
  • उस दिन आपको अपने दोस्तों की कमी कब-कब महसूस हुई?
  • अपने दोस्त की परेशानी में मदद करने पर आप को कैसा लगा?
  • किसी साथी को अपने साथ खेल खिलाकर आपको कैसा महसूस हुआ? (साथी जो आपका दोस्त नहीं है।)
  • आप अपनी कोई खास बात अपने दोस्त को बता कर कैसा लगता है?
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य :
अगले पूरे सप्ताह आप अपने भाई-बहन,आस-पड़ोस और कक्षा के दोस्तों तथा साथियों के प्रति अपनापन के भाव को महसूस करें और ध्यान दें कि हम उनकी मदद करने पर उनका व्यवहार साथियों के प्रति कैसा रहता है।अगले अभिव्यक्ति दिवस पर हम बातचीत करेंगें।

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठकर आज की अपनी अभिव्यक्ति के बारे में विचार करें।

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सत्र: 7

उद्देश्य: बच्चे अपने भाई-बहन,आस-पड़ोस के दोस्तों, तथा कक्षा के दोस्त और साथियों के द्वारा सहयोग और अपनापन मिलने पर उनके प्रति अपने भाव और व्यवहार पर ध्यान दे।
समय: प्रत्येक सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए एक से दो दिन (अभिव्यक्ति दिन ) का समय निर्धारित किया गया है बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए।

शिक्षक नोट: सत्र के द्वारा बच्चों का ध्यान इस बात पर ले जाने की कोशिश है कि जब हमारे भाई बहन, मित्र साथी जो कुछ भी हमारे लिए करते हैं वो हमारे प्रति अपनापन और लगाव के कारण करते हैं साथ ही साथ उनके कुछ करने पर हमारा व्यवहार उनके प्रति पहले से ज्यादा नम्र हो जाता है और हम किस किस प्रकार से उनका धन्यवाद करते हैं उस पर भी हमारा ध्यान जाए।

कक्षा की शुरूआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की प्रक्रिया से की जाए।

बच्चों द्वारा अभिव्यक्ति:
निम्न प्रश्नों के माध्यम से बच्चों में दूसरों के प्रति अपनापन की अभिव्यक्ति के अवसर दिए जाएँ।
  • जिस दिन आपके दोस्त विद्यालय नहीं आए उस दिन दूसरे साथियों के साथ रहने पर उनके साथ आपको कैसा महसूस हुआ? और आपने उनके साथ कैसा व्यवहार किया?
  • अपने भाई-बहन के द्वारा घर पर आपकी सहायता करने पर आपने क्या किया?
  • आपके भाई-बहन या दोस्त के द्वारा birthday की बधाई देने पर आपको अच्छा लगा। तब आपने किस प्रकार उनका आभार व्यक्त किया?
  • जो साथी आपके दोस्त नहीं हैं लेकिन उन्होंने आपको पढ़ाई का सामान साझा किया तब आपको कैसा महसूस हुआ और आपने उनका आभार कैसे व्यक्त किया?
  • नाराज़गी होने पर जब आपके भाई-बहन या दोस्त आपको मनाया तब आपको कैसा लगा? और आपने क्या किया?
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य अगले पूरे सप्ताह आप अपने घर में ध्यान दें कि आपके लिए भोजन तैयार तथा दिनभर के आपके काम कौन करता है और वे कितनी मेहनत करते हैं। अगले अभिव्यक्ति दिवस पर हम बातचीत करेंगे।

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठकर आज की अपनी अभिव्यक्ति के बारे में विचार करें।

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