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कक्षा 1: माइंडफुलनेस

ध्यान देने की प्रक्रिया (Mindfulness) – एक परिचय

किताब के इस पृष्ठ को पढ़ने के लिए थोड़ा सा कुछ अलग करते हैं...
यदि आप भी मेरी तरह किसी किताब का परिचय वाला पन्ना छोड़ देते हैं, तो आप इस क्षण नीचे दिए गए प्रयोग को करके देखें -
आप यह पढ़ते समय ध्यान दें कि आपका ध्यान कहाँ है? आपने जो इस पल अपने हाथ में किताब पकड़ी हुई है, उसके प्रति सजग हो जाएँ। देखें, क्या आप इस किताब के भार को महसूस कर पा रहे हैं? इस किताब के पन्ने के रंग को देखें; हर अनुच्छेद (paragraph) के बीच के अंतर पर ध्यान दें; हर वाक्य के बीच के अंतर पर ध्यान दें; अक्षर की बनावट को देखें।
अब अपना ध्यान अपनी बैठने की स्थिति पर दें। यदि आप कुर्सी पर बैठें हैं तो आप अपने शरीर और कुर्सी के संपर्क को महसूस करें। ध्यान दें कि आप इस क्षण कैसा महसूस कर रहे हैं? यदि मन में किसी तरह के विचार और भावनाएँ हैं, तो एक क्षण के लिए उन पर ध्यान दें। बिना किसी तरह के विचार में उलझे हुए अपना ध्यान अपने अंदर आती हुई साँस पर ले आएँ और फिर बाहर जाती हुई साँस के साथ अपने आस-पास के वातावरण में मौजूद आवाज़ों के प्रति सजग हो जाएँ।
स्वयं के साथ बिताए गए इस क्षण के लिए आप, अपने आप की सराहना करें। आपने अभी जो अनुभव किया, यह ध्यान देने की प्रक्रिया का एक उदाहरण है।
जब हम अपना ध्यान अपने आस-पास के वातावरण व स्वयं पर लेकर जाते हैं तब हम अपने अंदर एक नई ऊर्जा एवं स्थिरता का अनुभव करते हैं और वह हमारी अंतर्दृष्टि विकसित करता है।
अन्य किसी भी कौशल की तरह ही ध्यान की प्रक्रिया को भी सीखा जा सकता है। जिस तरह से संगीत, नृत्य, गाड़ी चलाना, आदि को सीखने के लिए निरंतर अभ्यास की आवश्यकता पड़ती है, ठीक उसी तरह ध्यान के लिए भी अभ्यास की आवश्यकता होती है। ध्यान के माध्यम से हम मन की स्थिरता व संतुलन का अनुभव कर सकते हैं।

बच्चे एवं ध्यान देने की प्रक्रिया (Mindfulness)
बच्चों का मूल स्वभाव रचनात्मक एवं कल्पनाशील होता है। उनकी सहज प्रवृत्ति (natural tendency) वर्तमान में रहने की ही होती है। जब वे कोई भी कार्य करते हैं तो वे उसी के बारे में सोचते हैं। जैसे - अगर वे खेल रहे हैं, तो वे उस समय खेलने के बारे में ही सोचते हैं। जब वे खा रहे हैं तो वे केवल खाने के बारे में ही सोचते हैं। परन्तु आजकल की भाग-दौड़ और प्रतियोगिता के दौर में, बच्चों पर कई प्रकार के दबाव बनने शुरू हो जाते हैं। जैसे-जैसे वे बड़े होने लगते हैं, स्कूल जाने लगते हैं, उनके ऊपर उम्मीदों का बोझ बढ़ने लगता है। ऐसे में, खेलते समय उनके मन में पढ़ाई का विचार आ जाना या फिर पढ़ाई करते समय घर की किसी और बात का विचार आ जाना अब सामान्य बात होने लगी है। उनका ध्यान और मन भटकने लगता है। वे या तो गुज़रे हुए समय के बारे में सोच रहे होते हैं, या फिर उनका ध्यान भविष्य की योजना में लगा होता है। ध्यान देने के अभ्यास में हम बच्चों को वर्तमान में रहना सिखाएंगे। इस अभ्यास की एक और विशेषता यह भी है कि वे इसमें बिना किसी पूर्वधारणा के, अच्छे - बुरे का निर्णय लिए बिना, वस्तुओं और परिस्थितियों को अपने वास्तविक रूप में देखना सीखेंगे।
ध्यान देने के अभ्यास में हम अलग-अलग गतिविधियों के माध्यम से बच्चों का ध्यान केंद्रित करवाएँगे, जैसे- ध्यान दे कर सुनना, जिसमें बच्चे अपने वातावरण में मौजूद आवाज़ों के प्रति जागरूक (aware) होंगे; ध्यान दे कर देखना, जिसमें बच्चे अपने वातावरण या किसी वस्तु को देखेंगे; श्वास पर ध्यान देना, जिसमें बच्चे अपना ध्यान अपनी साँसों की प्रक्रिया पर केंद्रित करेंगे; शरीर के खिंचाव पर ध्यान देना, जिसमें हाथ या पैर की अलग-अलग स्थिति में शरीर के खिंचाव की ओर ध्यान देंगे; विचारों पर ध्यान देना, जिसमें बच्चे अपने विचारों को पहचानेंगे और वर्तमान क्षण में अपने विचारों को आते-जाते देखेंगे।
ध्यान के अभ्यास से बच्चों को कई तरह के लाभ होते हैं, जैसे-

  • लम्बी अवधि के लिए एक कार्य पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता का विकास (sustained attention)
  • शैक्षिक प्रदर्शन (academic performance) का बेहतर होना
  • भावनात्मक सुढृढ़ता (emotional stability) का बेहतर होना
  • शांति और ख़ुशी का एहसास बढ़ाना (sustained happiness)
  • हाइपर-एक्टिविटी (hyperactivity) कम होना
  • क्रोध कम आना
  • एक-दूसरे को समझने की क्षमता का विकास (empathy)
  • वर्तमान में जीने की क्षमता का विकास
  • सोच-समझ कर निर्णय लेने की क्षमता का विकास

हैप्पीनेस पाठ्यक्रम के तहत पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों रोज़ाना का एक पीरियड हैप्पीनेस विषय का होगा। इस पाठ्यक्रम के तहत विभिन्न गतिविधियाँ होंगी, उनमें से एक महत्त्वपूर्ण गतिविधि है - “ध्यान देने का अभ्यास”। आज पूरी दुनिया में शायद ही ऐसा कोई देश होगा जहाँ ध्यान का अभ्यास न किया जाता हो। प्राचीन भारतीय शिक्षा परंपरा में ‘ध्यान करने’ पर नहीं, बल्कि ‘ध्यान देने’ पर ज़ोर रहा है। हैप्पीनेस कार्यक्रम के तहत स्कूल में आने वाला हर बच्चा, ध्यान देने का अभ्यास करेगा।

ध्यान की कार्यप्रणाली (Methodology):

  • ध्यान की कक्षा का अभ्यास सार्वभौमिक एवं लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है। इसका किसी भी तरह के धर्म, संप्रदाय, जाति या वर्ग से कोई संबंध नहीं है।
  • कक्षा 1 में हर सप्ताह 2 दिन (सोमवार व गुरूवार) ‘ध्यान देने’ का पीरियड होगा। हर पीरियड में एक सत्र करवाएँ। इस सत्र को सप्ताह के दूसरे पीरियड भी दोहराएँ। इस प्रकार एक सप्ताह में एक सत्र करवाएँ। 
  • इस सत्र के दौरान 25 मिनट के पीरियड में तीन प्रमुख चरण होंगे:

1.a. शुरुआत में 3 से 5 मिनट का माइंडफुलनेस चेक इन।

1.b. 5 मिनट की ध्यान देने की प्रक्रिया पर चर्चा- इसमें हर सप्ताह कुछ अलग अलग बच्चों से उनका अनुभव पूछे और चर्चा करें।
शिक्षक से अनुरोध है कि वे बच्चों को किसी भी अपेक्षित परिणाम का सुझाव न दे बल्कि बच्चों को स्वयं के अंदर खोज कर जवाब देने में मदद करें।

2. माइंडफुलनेस के अभ्यास के तहत शरीर में चल रही घटनाओं/अपने विचार या भावनाओं के प्रति सजगता के अभ्यास के लिए दी गई अलग-अलग गतिविधि को कक्षा में करवाएँ। ये गतिविधियाँ हर सत्र में अलग-अलग होंगी। इसके बाद किए गए अभ्यास पर चर्चा होगी। शिक्षक से अनुरोध है कि प्रति सप्ताह होने वाले इस अभ्यास उपरांत चर्चा में अलग-अलग छात्रों को अपनी बात रखने के लिए प्रोत्साहित करें और कोशिश करें कि 3 से 4 सप्ताह में हर बच्चा अपनी बात ज़रूर रखे।

3. कक्षा अंत करते हुए आखिर में हर रोज़ की तरह 2 मिनट का माइंडफुलनेस का अभ्यास करवाएँ।

ध्यान रखने की बातें :

  • ध्यान रखें कि इस दौरान बच्चों को किसी शब्द या मंत्र का उच्चारण करने को न कहें।
  • हैप्पीनेस व ध्यान की कक्षा में किसी तरह की तनावपूर्ण अभिव्यक्ति जैसे- किसी बात पर बच्चों को सख़्त शब्दों में निर्देश न दें व उनपर किसी प्रकार का दबाव न डालें।
  • चर्चा के दौरान सभी विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करें।

शिक्षक के लिए कुछ विशेष ध्यान में रखने की बातें:

  • ध्यान की इस कक्षा में आप स्वयं भी सक्रिय भागीदार बनें। जैसे, ध्यान का अभ्यास करवाते समय आप भी अभ्यास करें।
  • जब कक्षा में प्रवेश करें तो अपनी मनःस्थिति को लेकर सजग रहें व कोशिश करें कि आपके विचार और भावनाएँ स्थिर रहें। याद रखें कि बच्चा शिक्षक के व्यवहार पर भी ध्यान देता है।
  • बच्चों के साथ प्यार, सौहार्द व विनम्रता के साथ पेश आएँ और मधुर भाषा में बात करें।
  • ध्यान की प्रक्रिया शुरू होने के पहले यह सुनिश्चित करें कि कक्षा का वातावरण शांत हो और हर बच्चा अपने आप को सहज महसूस करे। यह भी देखें कि ध्यान के पश्चात वह अपने अनुभव साझा कर सके। कोई भी बच्चा एक सुरक्षित और सहज वातावरण में ही अपनी बात कहना चाहता है या कह पाता है।
  • ध्यान के अभ्यास से हमारा उद्देश्य विचारों या भावनाओं से दूर होना या उनको दबाना नहीं हैं। हमारे इस प्रयास का उद्देश्य बच्चों को अपने वातावरण, संवेदनाओं, विचारों एवं भावनाओं के प्रति सजग करना है जिससे वे अपने सामान्य व्यवहार में सोच-विचार करके बेहतर प्रतिक्रिया देने में सक्षम हो जाएँ।

------------------------

  • सत्र 1 (Understanding Breathing)
  • सत्र 2 (साइमन कहता है)
  • सत्र 3 (आलाप)
  • सत्र 4 (निर्देश अनुसार कार्य करना)
  • सत्र 5 (Mindful Listening)-I
  • सत्र 6 ध्यान दे कर सुनना(Mindful Listening)- II
  • सत्र 7 ध्यान दे कर सुनना (Mindful Listening)- III
  • सत्र 8 ध्यान दे कर सुनना (Mindful Listening)- IV
  • सत्र 9 Mindful Seeing- I
  • सत्र 10 ध्यान दे कर देखना (Mindful Seeing)- II
  • सत्र 11 (Heartbeat Activity)
  • सत्र 12 (Mindful Touch)
  • सत्र 13 (Mindful Scribbling)
  • सत्र 14 ध्यान पूर्वक खिंचाव ( Mindful Stretching-I)
  • सत्र 15 ध्यान पूर्वक खिंचाव( Mindful Stretching-II)
  • सत्र 16 (Mindful Walking)
  • सत्र 17 (Mindfulness of Feelings)
  • सत्र 18 (Mindfulness of Feelings- II)

कक्षा 2: माइंडफुलनेस

ध्यान देने की प्रक्रिया (Mindfulness) – एक परिचय

किताब के इस पृष्ठ को पढ़ने के लिए थोड़ा-सा कुछ अलग करते हैं...
यदि आप भी मेरी तरह किसी किताब का परिचय वाला पन्ना छोड़ देते हैं, तो आप इस क्षण नीचे दिए गए प्रयोग को करके देखें -
आप यह पढ़ते समय ध्यान दें कि आपका ध्यान कहाँ है? आपने जो इस पल अपने हाथ में किताब पकड़ी हुई है, उसके प्रति सजग हो जाएँ। देखें, क्या आप इस किताब के भार को महसूस कर पा रहे हैं? इस किताब के पन्ने के रंग को देखें; हर अनुच्छेद (paragraph) के बीच के अंतर पर ध्यान दें; हर वाक्य के बीच के अंतर पर ध्यान दें; अक्षर की बनावट को देखें।
अब अपना ध्यान अपनी बैठने की स्थिति पर दें। यदि आप कुर्सी पर बैठे हैं तो आप अपने शरीर और कुर्सी के संपर्क को महसूस करें। ध्यान दें कि आप इस क्षण कैसा महसूस कर रहे हैं? यदि मन में किसी विचार और भावनाएँ हैं, तो एक क्षण के लिए उन पर ध्यान दें। बिना किसी तरह के विचार में उलझे हुए अपना ध्यान अपने अंदर आती हुई साँस पर ले आएँ और फिर बाहर जाती हुई साँस के साथ अपने आस-पास के वातावरण में मौजूद आवाज़ों के प्रति सजग हो जाएँ।
स्वयं के साथ बिताए गए इस क्षण के लिए आप, अपने आप की सराहना करें। आपने अभी जो अनुभव किया, यह ध्यान देने की प्रक्रिया का एक उदाहरण है।
जब हम अपना ध्यान अपने आस-पास के वातावरण व स्वयं पर लेकर जाते हैं तब हम अपने अंदर एक नई ऊर्जा एवं स्थिरता का अनुभव करते हैं और वह हमारी अंतर्दृष्टि विकसित करता है।
अन्य किसी भी कौशल की तरह ही ध्यान की प्रक्रिया को भी सीखा जा सकता है। जिस तरह से संगीत, नृत्य, गाड़ी चलाना, आदि को सीखने के लिए निरंतर अभ्यास की आवश्यकता पड़ती है, ठीक उसी तरह ध्यान के लिए भी अभ्यास की आवश्यकता होती है। ध्यान के माध्यम से हम मन की स्थिरता व संतुलन का अनुभव कर सकते हैं।

बच्चे एवं ध्यान देने की प्रक्रिया (Mindfulness)
बच्चों का मूल स्वभाव रचनात्मक एवं कल्पनाशील होता है। उनकी सहज प्रवृत्ति (natural tendency) वर्तमान में रहने की ही होती है। जब वे कोई भी कार्य करते हैं तो वे उसी के बारे में सोचते हैं। जैसे - अगर वे खेल रहे हैं, तो वे उस समय खेलने के बारे में ही सोचते हैं। जब वे खा रहे हैं तो वे केवल खाने के बारे में ही सोचते हैं। परन्तु आजकल की भाग-दौड़ और प्रतियोगिता के दौर में, बच्चों पर कई प्रकार के दबाव बनने शुरू हो जाते हैं। जैसे-जैसे वे बड़े होने लगते हैं, स्कूल जाने लगते हैं, उनके ऊपर उम्मीदों का बोझ बढ़ने लगता है। ऐसे में, खेलते समय उनके मन में पढ़ाई का विचार आ जाना या फिर पढ़ाई करते समय घर की किसी और बात का विचार आ जाना अब सामान्य बात होने लगी है। उनका ध्यान और मन भटकने लगता है। वे या तो गुज़रे हुए समय के बारे में सोच रहे होते हैं, या फिर उनका ध्यान भविष्य की योजना में लगा होता है। ध्यान देने के अभ्यास में हम बच्चों को वर्तमान में रहना सिखाएंगे। इस अभ्यास की एक और विशेषता यह भी है कि वे इसमें बिना किसी पूर्वधारणा के, अच्छे - बुरे का निर्णय लिए बिना, वस्तुओं और परिस्थितियों को अपने वास्तविक रूप में देखना सीखेंगे।
ध्यान देने के अभ्यास में हम अलग-अलग गतिविधियों के माध्यम से बच्चों का ध्यान केंद्रित करवाएंगे, जैसे- ध्यान दे कर सुनना, जिसमें बच्चे अपने वातावरण में मौजूद आवाज़ों के प्रति जागरूक (aware) होंगे; ध्यान दे कर देखना, जिसमें बच्चे अपने वातावरण या किसी वस्तु को देखेंगे; श्वास पर ध्यान देना, जिसमें बच्चे अपना ध्यान अपनी साँसों की प्रक्रिया पर केंद्रित करेंगे; शरीर के खिंचाव पर ध्यान देना, जिसमें हाथ या पैर की अलग-अलग स्थिति में शरीर के खिंचाव की ओर ध्यान देंगे; विचारों पर ध्यान देना, जिसमें बच्चे अपने विचारों को पहचानेंगे और वर्तमान क्षण में अपने विचारों को आते-जाते देखेंगे।
ध्यान के अभ्यास से बच्चों को कई तरह के लाभ होते हैं, जैसे-
  • लम्बी अवधि के लिए एक कार्य पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता का विकास (sustained attention)
  • शैक्षिक प्रदर्शन (academic performance) का बेहतर होना
  • भावनात्मक सुदृढ़ता (emotional stability) का बेहतर होना
  • शांति और ख़ुशी का एहसास बढ़ना (sustained happiness)
  • हाइपर-एक्टिविटी (hyperactivity) कम होना
  • क्रोध कम आना
  • एक-दूसरे को समझने की क्षमता का विकास (empathy)
  • वर्तमान में जीने की क्षमता का विकास
  • सोच-समझ कर निर्णय लेने की क्षमता का विकास
हैप्पीनेस पाठ्यक्रम के तहत पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों रोज़ाना का एक पीरियड हैप्पीनेस विषय का होगा। इस पाठ्यक्रम के तहत विभिन्न गतिविधियाँ होंगी, उनमें से एक महत्वपूर्ण गतिविधि है - “ध्यान देने का अभ्यास”। आज पूरी दुनिया में शायद ही ऐसा कोई देश होगा जहाँ ध्यान का अभ्यास न किया जाता हो। प्राचीन भारतीय शिक्षा परम्परा में ‘ध्यान करने’ पर नहीं, बल्कि ‘ध्यान देने’ पर जोर रहा है। हैप्पीनेस कार्यक्रम के तहत स्कूल में आने वाला हर बच्चा, ध्यान देने का अभ्यास करेगा।

ध्यान की कार्यप्रणाली (Methodology):
  • ध्यान की कक्षा का अभ्यास सार्वभौमिक एवं लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है। इसका किसी भी तरह के धर्म, संप्रदाय, जाति या वर्ग से कोई संबंध नहीं है।
  • कक्षा 1 में हर सप्ताह 2 दिन (सोमवार व गुरूवार) ‘ध्यान देने’ का पीरियड होगा। हर पीरियड में एक सेशन करवाएँ। इस सेशन को सप्ताह के दूसरे पीरियड भी दोहराएँ। इस प्रकार एक सप्ताह में एक सेशन करवाएँ।
  • इस सेशन के दौरान 25 मिनट के पीरियड में तीन प्रमुख चरण होंगे:
1.a. शुरुआत में 3 से 5 मिनट का माइंडफुलनेस चेक इन।

1.b. 5 मिनट की ध्यान देने की प्रक्रिया पर चर्चा- इसमें हर सप्ताह कुछ अलग अलग बच्चों से उनका अनुभव पूछे और चर्चा करें।
शिक्षक से अनुरोध है कि वे बच्चों को किसी भी अपेक्षित परिणाम का सुझाव न दे बल्कि बच्चों को स्वयं के अंदर खोज कर जवाब देने में मदद करें।
2. माइंडफुलनेस के अभ्यास के तहत शरीर में चल रही घटनाओं/अपने विचार या भावनाओं के प्रति सजगता के अभ्यास के लिए दिए गए अलग-अलग गतिविधि को क्लास में करवाएं। ये गतिविधियाँ हर सत्र (session) में अलग-अलग होंगी। इसके बाद किए गए अभ्यास पर चर्चा होगी। शिक्षक से अनुरोध है की प्रति सप्ताह होने वाले इस अभ्यास उपरांत चर्चा में अलग-अलग छात्रों को अपनी बात रखने के लिए प्रोत्साहित करें और कोशिश करें कि 3 से 4 सप्ताह में हर बच्चा अपनी बात ज़रूर रखें।

3. क्लास अंत करते हुए आख़िर में हर रोज़ की तरह 2 मिनट का माइंडफुलनेस का अभ्यास

ध्यान रखने की बातें :
  • ध्यान रखें कि इस दौरान बच्चों को किसी शब्द या मंत्र का उच्चारण करने को न कहें।
  • हैप्पीनेस व ध्यान की कक्षा में किसी तरह के तनावपूर्ण अभिव्यक्ति जैसे- किसी बात पर बच्चों को सख़्त शब्दों में निर्देश न दें व उनपर किसी प्रकार का दबाव न डालें।
  • चर्चा के दौरान सभी विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करें।
शिक्षक के लिए कुछ विशेष ध्यान में रखने की बातें:
  • ध्यान की इस कक्षा में आप स्वयं भी सक्रिय भागीदार बनें। जैसे, ध्यान का अभ्यास करवाते समय आप भी अभ्यास करें।
  • जब कक्षा में प्रवेश करें तो अपनी मनःस्थिति को लेकर सजग रहें व कोशिश करें कि आपके विचार और भावनाएँ स्थिर रहें। याद रखें कि बच्चा शिक्षक के व्यवहार पर भी ध्यान देता है।
  • बच्चों के साथ प्यार, सौहार्द व विनम्रता के साथ पेश आएँ और मधुर भाषा में बात करें।
  • ध्यान की प्रक्रिया शुरू होने के पहले यह सुनिश्चित करें कि कक्षा का वातावरण शांत हो और हर बच्चा अपने आप को सहज महसूस करे। यह भी देखें कि ध्यान के पश्चात वह अपने अनुभव साझा कर सके। कोई भी बच्चा एक सुरक्षित और सहज वातावरण में ही अपनी बात कहना चाहता है या कह पाता है।
  • ध्यान के अभ्यास से हमारा उद्देश्य विचारों या भावनाओं से दूर होना या उनको दबाना नहीं हैं। हमारे इस प्रयास का उद्देश्य बच्चों को अपने वातावरण, संवेदनाओं, विचारों एवं भावनाओं के प्रति सजग करना है जिससे वे अपने सामान्य व्यवहार में सोच-विचार करके बेहतर प्रतिक्रिया देने में सक्षम हो जाएँ।  
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  • सत्र 1 (Understanding Breathing)
  • सत्र 2 (साइमन कहता है)
  • सत्र 3 (आलाप)
  • सत्र 4 (Mindful Breathing)
  • सत्र 5 (निर्देश अनुसार कार्य करना)
  • सत्र 6 (Mindful Listening)-I
  • सत्र 7 (Mindful Listening)-II
  • सत्र 8 (Mindful Smelling)
  • सत्र 9 (Mindful seeing)-I
  • सत्र 10 (Mindful seeing)-II
  • सत्र 11 (Heartbeat Activity)
  • सत्र 12 (Mindful Touch)
  • सत्र 13 (Mindful Scribbling)
  • सत्र 14 (Mindful Stretching-I )
  • सत्र 15 (Mindful Stretching-II )
  • सत्र 16 (Mindful Walking)
  • सत्र 17 (Mindfulness of Feelings)
  • सत्र 18 (Mindfulness of Feelings- II)

कक्षा 3: माइंडफुलनेस

शिक्षकों के लिए: सभी शिक्षक माइंडफुलनेस की क्लास लेने से पहले इस चैप्टर को ध्यान से पढ़ लें। इससे पूरे वर्ष माइंडफुलनेस की क्लास चलाने में आपको मदद मिलेगी।

माइंडफुलनेस क्या है?
इसे समझने के लिए 2 शब्दों को ध्यान से समझ लें।

माइंडफुलनेस (Mindfulness) और माइंड-फुल्ल (Mind-full)
  • माइंडफुलनेस (Mindfulness) का अर्थ है पूरा दिमाग लगाकर वर्तमान के प्रति सजग बने रहने की अवस्था।
  • माइंड-फुल्ल (Mind-full) का अर्थ है तरह-तरह के विचारों में डूबा दिमाग जिसे विचारों की उलझन में ख़याल ही नहीं है कि वह क्या कर रहा है।
इसलिए वर्तमान में बने रहना, अभी के प्रति सजग-सचेत रहना ही माइंडफुलनेस है।
माइंडफुलनेस ही हैप्पीनेस का आधार है।

इस क्लास के बारे में कुछ ख़ास बिंदु समझ लें:
माइंडफुलनेस क्लास हर सप्ताह के पहले दिन सोमवार या फिर उसके अगले दिन (यदि सोमवार को छुट्टी हुई) ली जाएगी। इस क्लास के दौरान 30-35 मिनट के पीरियड में तीन प्रमुख चरण होंगे:

1.a. शुरूआत में 3-5 मिनट का माइंडफुलनेस चेक इन।

1.b. इस अभ्यास के बाद बच्चों के अनुभव पर लगभग 5-8 मिनट की चर्चा। इसमें हर सप्ताह कुछ अलग-अलग बच्चों से उनका अनुभव पूछें और माइंडफुलनेस से उनके कार्य या बरताव में आए बदलाव पर चर्चा करें। शिक्षक से अनुरोध है कि वे बच्चों को किसी भी अपेक्षित परिणाम का सुझाव न दें बल्कि बच्चों को स्वयं के अंदर खोज कर जवाब देने में मदद करें।

2. माइंडफुलनेस के अभ्यास के तहत लगभग 5 मिनट अपने विचारों या शरीर में चल रही घटनाओं के प्रति सजगता के अभ्यास के लिए दी गई अलग-अलग गतिविधि को क्लास में करवाएँ। ये गतिविधियाँ हर सप्ताह अलग-अलग होंगी। इसके बाद किए गए अभ्यास पर विद्यार्थियों से लगभग 15 मिनट की चर्चा करें। शिक्षक से अनुरोध है कि प्रति सप्ताह होने वाले इस अभ्यास के उपरांत चर्चा में अलग-अलग विद्यार्थियों को अपनी बात रखने के लिए प्रोत्साहित करें और कोशिश करें कि 3 से 4 सप्ताह में हर बच्चा अपनी बात ज़रूर रखे।

3. क्लास के अंत में हर रोज़ की तरह 1-2 मिनट का माइंडफुलनेस का अभ्यास।

माइंडफुलनेस के अभ्यास से कई फायदे हैं, जैसे:
  • पढ़ाई के दौरान कक्षा में ध्यान बनाए रखने में मदद।
  • अध्यापक की बातों को ध्यान से सुनने में मदद।
  • स्कूल तथा घर पर पढ़ाई करते वक्त पढ़ाई पर फोकस बनाए रखने में मदद।
  • सोचने समझने की क्षमता और स्मरण-शक्ति में सुधार
  • पढ़ाई के अलावा भी किसी और काम को करते समय,, उस काम में ध्यान लगा कर रखने में सहायता
  • हर वक्त सजग रहने की क्षमता का बढ़ना
  • बात करते वक्त, खाते वक्त या कोई कार्य करते वक्त यह ध्यान रखने में मदद मिलना कि कहीं हम कुछ गलत काम तो नहीं कर रहे या गलत बात तो नहीं कह रहे।
विद्यार्थियों के लिए माइंडफुलनेस का अभ्यास:
माइंडफुलनेस के अभ्यास से विद्यार्थियों को कुछ ऐसी गतिविधियाँ करने का अभ्यास होगा जो वे अपने निजी जीवन में इस्तेमाल कर पाएँगे व लाभान्वित होंगे। यह ध्यान में रखा जाए कि प्रत्येक विद्यार्थी अलग-अलग गतिविधियों से कनेक्ट (connect) कर पाएँ ।

शिक्षक के लिए कुछ विशेष निर्देश (ऐसा करें):
  • ध्यान की इस कक्षा में ध्यान का अभ्यास करवाते समय आप स्वयं भी सक्रिय भागीदार बनें।
  • जब कक्षा में प्रवेश करें तो अपनी मनःस्थिति को लेकर सजग रहें व कोशिश करें कि आपके विचार और भावनाएँ स्थिर रहें। याद रखें कि बच्चा शिक्षक के व्यवहार पर भी ध्यान देता है।
  • विद्यार्थियों के साथ प्यार, सौहार्द व विनम्रता के साथ पेश आएँ और मधुर भाषा में बात करें।
  • ध्यान की प्रक्रिया शुरू होने के पहले यह सुनिश्चित करें कि कक्षा का वातावरण शांत हो और हर विद्यार्थी अपने आप को सहज महसूस करे।
  • यह भी देखें कि ध्यान के पश्चात वह अपने अनुभव साझा कर सके। कोई भी विद्यार्थी एक सुरक्षित और सहज वातावरण में ही अपनी बात कहना चाहता है या कह पाता है।
  • ध्यान दें कि आपके धैर्य और व्यवहार की आवश्यकता सिर्फ ध्यान की कक्षा में ही नहीं है, बल्कि दिन भर में कई बार आपके समक्ष ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं जहाँ पर आपको सहजता, सरलता और धैर्य की आवश्यकता होगी।
  • आपका विद्यार्थी न सिर्फ कक्षा में बल्कि कक्षा के बाहर भी आपके व्यवहार से सीख रहा होता है।
  • ध्यान के अभ्यास से हमारा उद्देश्य विचारों या भावनाओं से दूर होना या उनको दबाना कदापि नहीं हैं। हमारे इस प्रयास का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपने वातावरण, संवेदनाओं, विचारों एवं भावनाओं के प्रति सजग करना है जिससे वे अपने सामान्य व्यवहार में सोच-विचार करके बेहतर प्रतिक्रिया देने में सक्षम हो जाएँ।
  • विद्यार्थियों के शांत होने का इंतज़ार करें। उनके शांत होने पर ही ध्यान की गतिविधि शुरू करें।
ध्यान रखने की बातें (ऐसा न करें):
  • ध्यान रखें कि इस दौरान विद्यार्थियों को किसी शब्द या मंत्र का उच्चारण करने को न कहें।
  • हैप्पीनेस व ध्यान की कक्षा में किसी तरह के तनावपूर्ण अभिव्यक्ति जैसे- किसी बात पर विद्यार्थियों को डाँटने या सख्त शब्दों में निर्देश देने से बचें।
  • ध्यान देने के अभ्यास के लिए किसी भी तरह से किसी भी बच्चे पर दबाव न डालें।
  • ध्यान देने के अभ्यास को बच्चे कोई साधना न समझ लें।
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  • सत्र 1 (Understanding Breathing)
  • सत्र 2 (Mindful Listening- I)
  • सत्र 3 (Mindful Listening- II)
  • सत्र 4 (Mindful Breathing)
  • सत्र 5 (Temperature of Breath)
  • सत्र 6 (Smiling Breath)
  • सत्र 7 (Mindful Touch)
  • सत्र 8 ( Mindful Seeing- I)
  • सत्र 9 ( Mindful Seeing- II)
  • सत्र 10 (Mindful Smelling)
  • सत्र 11 (Mindful Scribbling)
  • सत्र 12 (Mindful Drawing/Scribbling)
  • सत्र 13 (Heartbeat Activity)
  • सत्र 14 (Mindful Stretching-I)
  • सत्र 15 (Mindful Stretching-II)
  • सत्र 16 (Mindful Sitting)
  • सत्र 17 (Mindful Standing)
  • सत्र 18 (Mindful Walking)
  • सत्र 19 (Mindfulness of Feelings-I)
  • सत्र 20 (Mindfulness of Feelings- II)  

कक्षा 4: माइंडफुलनेस

शिक्षकों के लिए: सभी शिक्षक माइंडफुलनेस की क्लास लेने से पहले इस चैप्टर को ध्यान से पढ़ लें। इससे पूरे वर्ष माइंडफुलनेस की क्लास चलाने में आपको मदद मिलेगी।

माइंडफुलनेस क्या है?
इसे समझने के लिए 2 शब्दों को ध्यान से समझ लें।

माइंडफुलनेस (Mindfulness) और माइंड-फुल्ल (Mind-full)
  • माइंडफुलनेस (Mindfulness) का अर्थ है पूरा दिमाग लगाकर वर्तमान के प्रति सजग बने रहने की अवस्था।
  • माइंड-फुल्ल (Mind-full) का अर्थ है तरह-तरह के विचारों में डूबा दिमाग जिसे विचारों की उलझन में ख़याल ही नहीं है कि वह क्या कर रहा है।
इसलिए वर्तमान में बने रहना, अभी के प्रति सजग-सचेत रहना ही माइंडफुलनेस है।
माइंडफुलनेस ही हैप्पीनेस का आधार है।

इस क्लास के बारे में कुछ ख़ास बिंदु समझ लें:
माइंडफुलनेस क्लास हर सप्ताह के पहले दिन सोमवार या फिर उसके अगले दिन (यदि सोमवार को छुट्टी हुई) ली जाएगी। इस क्लास के दौरान 30-35 मिनट के पीरियड में तीन प्रमुख चरण होंगे:
1.a. शुरूआत में 3-5 मिनट का माइंडफुलनेस चेक इन।

1.b. इस अभ्यास के बाद बच्चों के अनुभव पर लगभग 5-8 मिनट की चर्चा। इसमें हर सप्ताह कुछ अलग-अलग बच्चों से उनका अनुभव पूछें और माइंडफुलनेस से उनके कार्य या बरताव में आए बदलाव पर चर्चा करें। शिक्षक से अनुरोध है कि वे बच्चों को किसी भी अपेक्षित परिणाम का सुझाव न दें बल्कि बच्चों को स्वयं के अंदर खोज कर जवाब देने में मदद करें।

2. माइंडफुलनेस के अभ्यास के तहत लगभग 5 मिनट अपने विचारों या शरीर में चल रही घटनाओं के प्रति सजगता के अभ्यास के लिए दी गई अलग-अलग गतिविधि को क्लास में करवाएँ। ये गतिविधियाँ हर सप्ताह अलग-अलग होंगी। इसके बाद किए गए अभ्यास पर विद्यार्थियों से लगभग 15 मिनट की चर्चा करें। शिक्षक से अनुरोध है कि प्रति सप्ताह होने वाले इस अभ्यास के उपरांत चर्चा में अलग-अलग विद्यार्थियों को अपनी बात रखने के लिए प्रोत्साहित करें और कोशिश करें कि 3 से 4 सप्ताह में हर बच्चा अपनी बात ज़रूर रखे।

3. क्लास के अंत में हर रोज़ की तरह 1-2 मिनट का माइंडफुलनेस का अभ्यास।
माइंडफुलनेस के अभ्यास से कई फायदे हैं, जैसे:
  • पढ़ाई के दौरान कक्षा में ध्यान बनाए रखने में मदद।
  • अध्यापक की बातों को ध्यान से सुनने में मदद।
  • स्कूल तथा घर पर पढ़ाई करते वक्त पढ़ाई पर फोकस बनाए रखने में मदद।
  • सोचने समझने की क्षमता और स्मरण-शक्ति में सुधार
  • पढ़ाई के अलावा भी किसी और काम को करते समय,, उस काम में ध्यान लगा कर रखने में सहायता
  • हर वक्त सजग रहने की क्षमता का बढ़ना
  • बात करते वक्त, खाते वक्त या कोई कार्य करते वक्त यह ध्यान रखने में मदद मिलना कि कहीं हम कुछ गलत काम तो नहीं कर रहे या गलत बात तो नहीं कह रहे।
विद्यार्थियों के लिए माइंडफुलनेस का अभ्यास:
माइंडफुलनेस के अभ्यास से विद्यार्थियों को कुछ ऐसी गतिविधियाँ करने का अभ्यास होगा जो वे अपने निजी जीवन में इस्तेमाल कर पाएँगे व लाभान्वित होंगे। यह ध्यान में रखा जाए कि प्रत्येक विद्यार्थी अलग-अलग गतिविधियों से कनेक्ट (connect) कर पाएँ ।

शिक्षक के लिए कुछ विशेष निर्देश (ऐसा करें):
  • ध्यान की इस कक्षा में ध्यान का अभ्यास करवाते समय आप स्वयं भी सक्रिय भागीदार बनें।
  • जब कक्षा में प्रवेश करें तो अपनी मनःस्थिति को लेकर सजग रहें व कोशिश करें कि आपके विचार और भावनाएँ स्थिर रहें। याद रखें कि बच्चा शिक्षक के व्यवहार पर भी ध्यान देता है।
  • विद्यार्थियों के साथ प्यार, सौहार्द व विनम्रता के साथ पेश आएँ और मधुर भाषा में बात करें।
  • ध्यान की प्रक्रिया शुरू होने के पहले यह सुनिश्चित करें कि कक्षा का वातावरण शांत हो और हर विद्यार्थी अपने आप को सहज महसूस करे।
  • यह भी देखें कि ध्यान के पश्चात वह अपने अनुभव साझा कर सके। कोई भी विद्यार्थी एक सुरक्षित और सहज वातावरण में ही अपनी बात कहना चाहता है या कह पाता है।
  • ध्यान दें कि आपके धैर्य और व्यवहार की आवश्यकता सिर्फ ध्यान की कक्षा में ही नहीं है, बल्कि दिन भर में कई बार आपके समक्ष ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं जहाँ पर आपको सहजता, सरलता और धैर्य की आवश्यकता होगी।
  • आपका विद्यार्थी न सिर्फ कक्षा में बल्कि कक्षा के बाहर भी आपके व्यवहार से सीख रहा होता है।
  • ध्यान के अभ्यास से हमारा उद्देश्य विचारों या भावनाओं से दूर होना या उनको दबाना कदापि नहीं हैं। हमारे इस प्रयास का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपने वातावरण, संवेदनाओं, विचारों एवं भावनाओं के प्रति सजग करना है जिससे वे अपने सामान्य व्यवहार में सोच-विचार करके बेहतर प्रतिक्रिया देने में सक्षम हो जाएँ।
  • विद्यार्थियों के शांत होने का इंतज़ार करें। उनके शांत होने पर ही ध्यान की गतिविधि शुरू करें।
ध्यान रखने की बातें (ऐसा न करें):
  • ध्यान रखें कि इस दौरान विद्यार्थियों को किसी शब्द या मंत्र का उच्चारण करने को न कहें।
  • हैप्पीनेस व ध्यान की कक्षा में किसी तरह के तनावपूर्ण अभिव्यक्ति जैसे- किसी बात पर विद्यार्थियों को डाँटने या सख्त शब्दों में निर्देश देने से बचें।
  • ध्यान देने के अभ्यास के लिए किसी भी तरह से किसी भी बच्चे पर दबाव न डालें।
  • ध्यान देने के अभ्यास को बच्चे कोई साधना न समझ लें।  
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  • सत्र 1 (Understanding Breathing)
  • सत्र 2 (Mindful Listening)
  • सत्र 3 (Mindful Listening-II)
  • सत्र 4 (MIndful Breathing)
  • सत्र 5 (Temperature of Breath)
  • सत्र 7 (Mindful Touch)
  • सत्र 8 (Mindful Seeing -I)
  • सत्र 9 (Mindful Seeing- II)
  • सत्र 10 (Mindful Seeing -III)
  • सत्र 11 (Mindful Smelling)
  • सत्र 12 (Mindful Scribbling)
  • सत्र 13 (Mindful Drawing/Scribbling)
  • सत्र 14 (Heartbeat Activity)
  • सत्र 15 (Mindful Stretching-I)
  • सत्र 16 ( Mindful Stretching-II)
  • सत्र 17 (Mindful Sitting)
  • सत्र 18 ( Mindful Walking )
  • सत्र 19 (Mindfulness of Feelings-I)
  • सत्र 20 (Mindfulness of Feelings- II)

सत्र 20 (बादल की तरह विचार)

समय वितरण 
1. a. माइंडफुल चेक-इन (Mindful Check In): 3-5 मिनट
b. ध्यान देने की प्रक्रिया पर चर्चा: 10 मिनट
2. a. बादल की तरह विचार: 5 मिनट
b. बादल की तरह विचार पर चर्चा: 10 मिनट
3. साइलेंट चेक आउट (Silent Check Out): 1-2 मिनट

1 a) माइंडफुल चेक-इन (Mindful Check In): 3-5 मिनट

उद्देश्य: इस गतिविधि के माध्यम से शिक्षक विद्यार्थियों को ध्यान देने की कक्षा के लिए तैयार करेंगे।

गतिविधि के चरण
  • शिक्षक विद्यार्थियों को बताएँ कि इस गतिविधि के द्वारा विद्यार्थी अपना ध्यान पहले से कर रहे कार्य से हटाकर, वर्तमान में लेकर आते हैं। इसका अभ्यास विद्यार्थी कभी भी, कहीं भी कर सकते हैं।
  • शिक्षक सभी विद्यार्थियों से कहें कि वे आरामदायक स्थिति में बैठकर, चाहें तो कमर सीधी करके आँखें बंद कर लें। अगर किसी को आँखें बंद करने में मुश्किल महसूस हो रही हो तो वह नीचे की ओर देख सकता है।
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपने हाथ डेस्क पर या अपने पैरों पर रख सकते हैं।
  • शिक्षक विद्यार्थियों से कहें कि हम शुरूआत माइंडफुल चेक इन गतिविधि से करेंगे। यह गतिविधि हम लगभग 3 मिनट तक करेंगे।
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपना ध्यान पहले अपने आस-पास के वातावरण में उत्पन्न हो रही आवाज़ों पर ले जाएँ और उसके बाद अपनी साँसों की प्रक्रिया पर ले जाएँगे।
  • विद्यार्थियों को बताएँ कि ये आवाज़ें धीमी हो सकती हैं...या तेज़, रुक-रुककर आ सकती हैं...या लगातार।
(20 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि जैसी भी हों, इन आवाज़ों के प्रति सजग हो जाएँ। ध्यान दें कि ये आवाज़ें कहाँ से आ रही हैं।
(30 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि अब वे अपना ध्यान अपनी साँसों पर लेकर जाएँ। साँसों के आने और जाने पर ध्यान दें।
  • विद्यार्थियों को बताएँ कि वे साँसों को किसी प्रकार बदलने की कोशिश न करें। केवल अपनी साँसों के प्रति सजग हो जाएँ।
(10 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे ध्यान दें कि साँस कब अंदर आ रही है और कब बाहर जा रही है। अंदर आने और बाहर जाने वाली साँस में कोई अंतर है या नहीं। क्या ये साँसें ठंडी हैं या गरम...तेज़ी से आ रही हैं या आराम से….हल्की हैं या गहरी। 
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपनी हर साँस के प्रति सजग हो जाएँ।
(20 सेकंड रुकें)
  • अब विद्यार्थियों से कहें कि वे धीरे-धीरे अपना ध्यान अपने बैठने की स्थिति पर ले आएँ और जब भी ठीक लगे, वे अपनी आँखें खोल सकते हैं।
क्या करें और क्या नहीं करें:
  • चेक इन शुरू करने के पहले विद्यार्थियों को अपनी जगह पर आराम से बैठने का वक़्त दें।
  • गतिविधि के दौरान यदि किसी विद्यार्थी का ध्यान आपको भटकता हुआ प्रतीत हो तो उसका नाम लिए बिना, पूरी कक्षा को ध्यान देने के लिए कहें।
1 b) ध्यान देने की प्रक्रिया पर चर्चा: 10 मिनट

उद्देश्य: माइंडफुलनेस की प्रक्रिया और उसके फ़ायदों पर विद्यार्थियों के अनुभव जानना।

चर्चा के लिए प्रस्तावित बिंदु:
  • शिक्षक विद्यार्थियों से चर्चा कर सकते हैं कि माइंडफुलनेस सीखने से विद्यार्थी अपने जीवन में क्या सुधार महसूस कर रहे हैं।
    • मन के अंदर तनाव की कमी
    • क्लास में ध्यान देने में मदद
    • इस बात का एहसास होना कि मेरे अंदर क्या चल रहा है (सुख, दुःख, क्रोध आदि)
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपने विचार अपनी नोटबुक में लिख सकते हैं। इसके बाद कुछ विद्यार्थियों को अपने विचार साझा करने के लिए कहें।
  • इस दौरान माइंडफुलनेस गतिविधि से संबंधित विद्यार्थियों के विशेष अनुभव, चुनौतियों या प्रश्नों पर भी चर्चा की जा सकती है।
क्या करें और क्या नहीं करें:
  • सभी विद्यार्थियों को उत्तर देने के लिए प्रेरित करें।
  • शिक्षक सभी विद्यार्थियों के उत्तर स्वीकार करें।
  • विद्यार्थियों द्वारा दिए गए उत्तर पर कोई नकारात्मक टिप्पणी न करें।
2. a. बादल की तरह विचार : 5 मिनट

उद्देश्य: विचारों के प्रति सजगता।

क्या करें क्या न करें:
शिक्षक बच्चों को अभ्यास शुरू करवाने से पहले, उन्हें क्या-क्या करना है, बता सकते हैं।

गतिविधि के चरण
  • शिक्षक विद्यार्थियों को बताएँ कि:
    • पिछले 2-3 महीनों में हम सब अपने वातावरण के प्रति सजग हुए थे, अब हम अपना ध्यान अपने भीतर लेकर जाएँगे एवं अपने विचारों के प्रति सजग होंगे।
    • विचारों को बदलने की, रोकने की, अच्छा-बुरा सोचने की और विचारों की गति बदलने की कोशिश बिलकुल न करें। जैसे विचार आ रहे हैं, उन्हें वैसे ही आने दें और अपना ध्यान उन पर केंद्रित करें।
    • विचारों पर ध्यान देने का मतलब विचारों को समाप्त करना नहीं है।
    •  अब हम अपने मन को आसमान की तरह देख सकते हैं और मन में आने वाले विचारों को बादल की तरह। ऐसा अभ्यास करते हुए हम जानेंगे कि हमारे मन में कितने विचार आते हैं।
  • शिक्षक विद्यार्थियों को कहें कि अब वे एक आरामदायक स्थिति में बैठ जाएँ। अपनी पीठ को सीधा करें और कंधो को ढीला छोड़ें। धीरे से अपनी आँखें बंद करें।
  • अब छात्रों को तीन लम्बी गहरी साँस लेने के लिए और मुँह से छोड़ने के लिए कहा जाए। अगर किसी भी तरह का तनाव शरीर में महसूस हो रहा हो तो अगली साँस के साथ उसे शरीर से बाहर करेंगे।
  • जैसे साँस अंदर-बाहर अपने आप आ-जा रही है, उसी प्रकार हमारे मन में कई विचार आते और जाते रहते हैं। ये विचार हो सकता है बीते हुए कल से या फिर आने वाले कल से संबंधित हों, या फिर किसी घटना से संबंधित हो सकते हैं। इन विचारों को आने दें और जाने दें। और इन्हें शांत मन से देखते रहें। किसी भी विचार को रोकें नहीं। विचार जैसे भी हैं उनकी वैसे ही आने दें।
  • ऐसा अभ्यास करते हुए अगर आपको शरीर में किसी तरह की बेचैनी या हलचल महसूस हो तो आप अपना ध्यान अपनी साँसों की प्रक्रिया पर ला सकते हैं।
  • विद्यार्थियों को कहें कि आप अपने मन को कल्पना में आसमान की तरह मान सकते है व हर विचार को बादल की तरह। जिस तरह आसमान में बादल घूमते रहते हैं उसी प्रकार हमारे मन रूपी आसमान में विचारों के बादल आते व जाते रहते हैं। आप शांत मन से बादल रूपी विचारों को देखें। विचार आ रहे हैं और जा रहे हैं।
  • विद्यार्थियों को कहें कि जब भी आपका मन विचारों में उलझ जाए तो आप अपना ध्यान अपनी साँसों की प्रक्रिया पर ला सकते हैं
  • अब उन्हें कहें कि वे अगली साँस के साथ अपना ध्यान अपने बैठने की स्थिति की ओर ले जाएँ, वातावरण में हो रही आवाज़ों के प्रति सजग हो जाएँ। धीरे-धीरे पैर की उँगलियों को हिलाएँ और अब जब भी अच्छा महसूस करें तब अपनी आँखें खोल सकते हैं।
2. b. बादल की तरह विचार पर चर्चा: 10 मिनट
  • आप कैसा महसूस कर रहे हैं?
  • आपने अपने विचारों के बारे में क्या जाना?
  • यह अभ्यास कठिन था या आसान? क्यों?
3. साइलेंट चेक आउट (Silent Check Out): 1-2 मिनट 

उद्देश्य: इस गतिविधि का उद्देश्य है कि विद्यार्थी हैप्पीनेस कक्षा में आज की गई गतिविधियों से उत्पन्न हुए विचारों और भावनाओं पर मनन (reflection) कर पाएँ।

गतिविधि के चरण:
  • ध्यान की कक्षा का अंत शांत बैठकर किया जाए। 
  • इस दौरान विद्यार्थी आज की गई गतिविधियों से उत्पन्न विचारों और भावनाओं पर मनन (reflection) करें।
  • इस दौरान विद्यार्थियों को कोई अन्य निर्देश न दिया जाए।
  • विद्यार्थी आँखें बंद रखें या खुली रखकर नीचे की ओर देखें, यह उनकी इच्छा पर छोड़ दें। 
क्या करें और क्या नहीं करें: 
  • साइलेंट चेक आउट के बाद शिक्षक कोई भी प्रश्न न पूछें।
  • अगर कोई विद्यार्थी अपना अनुभव साझा करना चाहता है तो शिक्षक उसे मौका दे सकते हैं।
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सत्र 19 (Mindfulness of Thoughts)

समय वितरण
1. a. माइंडफुल चेक-इन (Mindful Check In): 3-5 मिनट
b. ध्यान देने की प्रक्रिया पर चर्चा: 10 मिनट
2. a. Mindfulness of Thoughts: 5 मिनट
b. Mindfulness of Thoughts पर चर्चा: 10 मिनट
3. साइलेंट चेक आउट (Silent Check Out): 1-2 मिनट

1 a) माइंडफुल चेक-इन (Mindful Check In): 3-5 मिनट

उद्देश्य: इस गतिविधि के माध्यम से शिक्षक विद्यार्थियों को ध्यान देने की कक्षा के लिए तैयार करेंगे।

गतिविधि के चरण
  • शिक्षक विद्यार्थियों को बताएँ कि इस गतिविधि के द्वारा विद्यार्थी अपना ध्यान पहले से कर रहे कार्य से हटाकर, वर्तमान में लेकर आते हैं। इसका अभ्यास विद्यार्थी कभी भी, कहीं भी कर सकते हैं।
  • शिक्षक सभी विद्यार्थियों से कहें कि वे आरामदायक स्थिति में बैठकर, चाहें तो कमर सीधी करके आँखें बंद कर लें। अगर किसी को आँखें बंद करने में मुश्किल महसूस हो रही हो तो वह नीचे की ओर देख सकता है।
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपने हाथ डेस्क पर या अपने पैरों पर रख सकते हैं।
  • शिक्षक विद्यार्थियों से कहें कि हम शुरूआत माइंडफुल चेक इन गतिविधि से करेंगे। यह गतिविधि हम लगभग 3 मिनट तक करेंगे।
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपना ध्यान पहले अपने आस-पास के वातावरण में उत्पन्न हो रही आवाज़ों पर ले जाएँ और उसके बाद अपनी साँसों की प्रक्रिया पर ले जाएँगे।
  • विद्यार्थियों को बताएँ कि ये आवाज़ें धीमी हो सकती हैं...या तेज़, रुक-रुककर आ सकती हैं...या लगातार।
(20 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि जैसी भी हों, इन आवाज़ों के प्रति सजग हो जाएँ। ध्यान दें कि ये आवाज़ें कहाँ से आ रही हैं।
(30 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि अब वे अपना ध्यान अपनी साँसों पर लेकर जाएँ। साँसों के आने और जाने पर ध्यान दें।
  • विद्यार्थियों को बताएँ कि वे साँसों को किसी प्रकार बदलने की कोशिश न करें। केवल अपनी साँसों के प्रति सजग हो जाएँ।
(10 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे ध्यान दें कि साँस कब अंदर आ रही है और कब बाहर जा रही है। अंदर आने और बाहर जाने वाली साँस में कोई अंतर है या नहीं। क्या ये साँसें ठंडी हैं या गरम...तेज़ी से आ रही हैं या आराम से….हल्की हैं या गहरी। 
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपनी हर साँस के प्रति सजग हो जाएँ।
(20 सेकंड रुकें)
  • अब विद्यार्थियों से कहें कि वे धीरे-धीरे अपना ध्यान अपने बैठने की स्थिति पर ले आएँ और जब भी ठीक लगे, वे अपनी आँखें खोल सकते हैं।
क्या करें और क्या नहीं करें:
  • चेक इन शुरू करने के पहले विद्यार्थियों को अपनी जगह पर आराम से बैठने का वक़्त दें।
  • गतिविधि के दौरान यदि किसी विद्यार्थी का ध्यान आपको भटकता हुआ प्रतीत हो तो उसका नाम लिए बिना, पूरी कक्षा को ध्यान देने के लिए कहें।
1 b) ध्यान देने की प्रक्रिया पर चर्चा: 10 मिनट

उद्देश्य: माइंडफुलनेस की प्रक्रिया और उसके फ़ायदों पर विद्यार्थियों के अनुभव जानना।

चर्चा के लिए प्रस्तावित बिंदु:
  • शिक्षक विद्यार्थियों से चर्चा कर सकते हैं कि माइंडफुलनेस सीखने से विद्यार्थी अपने जीवन में क्या सुधार महसूस कर रहे हैं।
    • मन के अंदर तनाव की कमी
    • क्लास में ध्यान देने में मदद
    • इस बात का एहसास होना कि मेरे अंदर क्या चल रहा है (सुख, दुःख, क्रोध आदि)
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपने विचार अपनी नोटबुक में लिख सकते हैं। इसके बाद कुछ विद्यार्थियों को अपने विचार साझा करने के लिए कहें।
  • इस दौरान माइंडफुलनेस गतिविधि से संबंधित विद्यार्थियों के विशेष अनुभव, चुनौतियों या प्रश्नों पर भी चर्चा की जा सकती है।
क्या करें और क्या नहीं करें:
  • सभी विद्यार्थियों को उत्तर देने के लिए प्रेरित करें।
  • शिक्षक सभी विद्यार्थियों के उत्तर स्वीकार करें।
  • विद्यार्थियों द्वारा दिए गए उत्तर पर कोई नकारात्मक टिप्पणी न करें।
2. a. Mindfulness of Thoughts: 5 मिनट

उद्देश्य- विद्यार्थियों को अपने विचारों के प्रति सजग करवाना।

गतिविधि के चरण:
  • शिक्षक विद्यार्थियों को कहें कि अब वे Mindfulness of Thoughts का अभ्यास करेंगे। इस के द्वारा वे अपने विचारों पर ध्यान लेकर जाएँगे। इस अभ्यास को करने के लिए अब सभी विद्यार्थी शांत भाव से एक आरामदायक स्थिति में बैठ जाएँ। अब अपने हाथों को अपनी टांगों पर रखें।
  • शिक्षक विद्यार्थियों को कहें कि अब 2 से 3 लम्बी गहरी साँस लें और अपनी आँखें बंद करें। जो विद्यार्थी आँखें बंद करने में असहज महसूस कर रहे हैं वह नीचे की ओर देख सकते हैं।
  • शिक्षक विद्यार्थियों को कहें कि इस अभ्यास में वे अपना ध्यान अपने विचारों की ओर लेकर जाएँ। विद्यार्थी ध्यान दें इस समय आपके मन में कई विचार आ और जा रहे होंगे। ध्यान दें, क्या यह विचार बीते हुए कल या आने वाले कल से संबंधित हैं? या फिर हो सकता है ये विचार उनके साथ हुई किसी घटना से संबंधित हैं।
(1 मिनट रुकें)
  • शिक्षक विद्यार्थियों को कहें कि अब जो भी विचार आ रहे हैं, इन विचारों को आने और जाने दें। विचारों पर किसी भी प्रकार की पाबन्दी न लगाएँ, एवं उन्हें अच्छा या बुरा आँकने की कोशिश न करें। अगर किसी विचार को अच्छा या बुरा आँकने का मन भी करे, तो इस बारे में सजग हो जाएँ और अपना ध्यान विचारों पर ही रखें।
(1 मिनट रुकें)
  • शिक्षक विद्यार्थियों को कहें कि जैसे साँस अंदर बाहर आ जा रही है, ठीक उसी प्रकार विचार भी आ जा रहे हैं। विचारों के आवागमन को देखने का प्रयास करें, उन्हें रोके नहीं।
(1 मिनट रुकें)
  • शिक्षक विद्यार्थियों को कहें कि जब भी उनको लगे कि वे विचारों में उलझ गए हैं,तो जानने की कोशिश करें कि उनका ध्यान कहाँ है और फिर से सहजता पूर्वक अपना ध्यान विचारों के आवागमन पर ले आएं। 
(1 मिनट रुकें)
  • शिक्षक विद्यार्थियों को कहें कि अब वे अपना ध्यान धीरे धीरे अपने बैठने की स्थिति पर ले आएं और आस पास के वातावरण के लिए सजग हो जायें। विद्यार्थियों को कहें कि जब भी वे अच्छा महसूस करें, धीरे धीरे अपनी आँखें खोल लें।
2. b. Mindfulness of Thoughts पर चर्चा: 10 मिनट
(शिक्षक अपनी तरफ़ से भी प्रश्न पूछ सकते हैं जिससे इस गतिविधि के उद्देश्य प्राप्त किए जा सकें। )
  • आप कैसा महसूस कर रहे हैं?
  • क्या आपके मन में एक ही विचार था या अलग अलग विचार आ रहे थे ?
  • गतिविधि के शुरू में एवं अंत में क्या आपने अपने विचारों में कोई अंतर पाया?
क्या करें और क्या न करें
  • शिक्षक सुनिश्चित करें कि निर्देश देते वक़्त एक शांत स्वर का उपयोग करें।
  • अगर कोई विद्यार्थी यह गतिविधि न करना चाहे तो उसके साथ जबरदस्ती न की जाए।
  • विद्यार्थियों पर आँखें बंद करने के लिए दबाव न डाला जाये। वह अपनी आँखें नीचे की ओर करके भी यह प्रयास कर सकते हैं।
  • शिक्षक बच्चों से उत्तर लेते हुए समय उनके द्वारा दिए गए सभी उत्तरों को स्वीकारें एवं उनपर सही या गलत होने की टिप्पणी न दें।
  • शिक्षक विद्यार्थियों को बता सकते हैं की यह अभ्यास हमें वर्तमान में चल रहे विचारों के प्रति सजग रहने में मदद करता है और विचारों की गति और स्वभाव के बारे में मालूम कराता है। इस प्रक्रिया के निरंतर अभ्यास से विचारों में स्थिरता आती है व मन शांत होता है। याद रखें, इस अभ्यास से हम विचारों को रोकने या ख़त्म करने का प्रयास नहीं कर रहे हैं।
3. साइलेंट चेक आउट (Silent Check Out): 1-2 मिनट 

उद्देश्य: इस गतिविधि का उद्देश्य है कि विद्यार्थी हैप्पीनेस कक्षा में आज की गई गतिविधियों से उत्पन्न हुए विचारों और भावनाओं पर मनन (reflection) कर पाएँ।

गतिविधि के चरण:
  • ध्यान की कक्षा का अंत शांत बैठकर किया जाए। 
  • इस दौरान विद्यार्थी आज की गई गतिविधियों से उत्पन्न विचारों और भावनाओं पर मनन (reflection) करें।
  • इस दौरान विद्यार्थियों को कोई अन्य निर्देश न दिया जाए।
  • विद्यार्थी आँखें बंद रखें या खुली रखकर नीचे की ओर देखें, यह उनकी इच्छा पर छोड़ दें। 
क्या करें और क्या नहीं करें: 
  • साइलेंट चेक आउट के बाद शिक्षक कोई भी प्रश्न न पूछें।
  • अगर कोई विद्यार्थी अपना अनुभव साझा करना चाहता है तो शिक्षक उसे मौका दे सकते हैं।
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सत्र 18 (Word Association)

समय वितरण
1. a. माइंडफुल चेक-इन (Mindful Check In): 3-5 मिनट
b. ध्यान देने की प्रक्रिया पर चर्चा: 10 मिनट
2. a. Word Association: 5 मिनट
b. Word Association पर चर्चा: 10 मिनट
3. साइलेंट चेक आउट (Silent Check Out): 1-2 मिनट

1 a) माइंडफुल चेक-इन (Mindful Check In): 3-5 मिनट

उद्देश्य: इस गतिविधि के माध्यम से शिक्षक विद्यार्थियों को ध्यान देने की कक्षा के लिए तैयार करेंगे।

गतिविधि के चरण
  • शिक्षक विद्यार्थियों को बताएँ कि इस गतिविधि के द्वारा विद्यार्थी अपना ध्यान पहले से कर रहे कार्य से हटाकर, वर्तमान में लेकर आते हैं। इसका अभ्यास विद्यार्थी कभी भी, कहीं भी कर सकते हैं।
  • शिक्षक सभी विद्यार्थियों से कहें कि वे आरामदायक स्थिति में बैठकर, चाहें तो कमर सीधी करके आँखें बंद कर लें। अगर किसी को आँखें बंद करने में मुश्किल महसूस हो रही हो तो वह नीचे की ओर देख सकता है।
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपने हाथ डेस्क पर या अपने पैरों पर रख सकते हैं।
  • शिक्षक विद्यार्थियों से कहें कि हम शुरूआत माइंडफुल चेक इन गतिविधि से करेंगे। यह गतिविधि हम लगभग 3 मिनट तक करेंगे।
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपना ध्यान पहले अपने आस-पास के वातावरण में उत्पन्न हो रही आवाज़ों पर ले जाएँ और उसके बाद अपनी साँसों की प्रक्रिया पर ले जाएँगे।
  • विद्यार्थियों को बताएँ कि ये आवाज़ें धीमी हो सकती हैं...या तेज़, रुक-रुककर आ सकती हैं...या लगातार।
(20 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि जैसी भी हों, इन आवाज़ों के प्रति सजग हो जाएँ। ध्यान दें कि ये आवाज़ें कहाँ से आ रही हैं।
(30 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि अब वे अपना ध्यान अपनी साँसों पर लेकर जाएँ। साँसों के आने और जाने पर ध्यान दें।
  • विद्यार्थियों को बताएँ कि वे साँसों को किसी प्रकार बदलने की कोशिश न करें। केवल अपनी साँसों के प्रति सजग हो जाएँ।
(10 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे ध्यान दें कि साँस कब अंदर आ रही है और कब बाहर जा रही है। अंदर आने और बाहर जाने वाली साँस में कोई अंतर है या नहीं। क्या ये साँसें ठंडी हैं या गरम...तेज़ी से आ रही हैं या आराम से….हल्की हैं या गहरी। 
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपनी हर साँस के प्रति सजग हो जाएँ।
(20 सेकंड रुकें)
  • अब विद्यार्थियों से कहें कि वे धीरे-धीरे अपना ध्यान अपने बैठने की स्थिति पर ले आएँ और जब भी ठीक लगे, वे अपनी आँखें खोल सकते हैं।
क्या करें और क्या नहीं करें:
  • चेक इन शुरू करने के पहले विद्यार्थियों को अपनी जगह पर आराम से बैठने का वक़्त दें।
  • गतिविधि के दौरान यदि किसी विद्यार्थी का ध्यान आपको भटकता हुआ प्रतीत हो तो उसका नाम लिए बिना, पूरी कक्षा को ध्यान देने के लिए कहें।
1 b) ध्यान देने की प्रक्रिया पर चर्चा: 10 मिनट

उद्देश्य: माइंडफुलनेस की प्रक्रिया और उसके फ़ायदों पर विद्यार्थियों के अनुभव जानना।

चर्चा के लिए प्रस्तावित बिंदु:
  • शिक्षक विद्यार्थियों से चर्चा कर सकते हैं कि माइंडफुलनेस सीखने से विद्यार्थी अपने जीवन में क्या सुधार महसूस कर रहे हैं।
    • मन के अंदर तनाव की कमी
    • क्लास में ध्यान देने में मदद
    • इस बात का एहसास होना कि मेरे अंदर क्या चल रहा है (सुख, दुःख, क्रोध आदि)
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपने विचार अपनी नोटबुक में लिख सकते हैं। इसके बाद कुछ विद्यार्थियों को अपने विचार साझा करने के लिए कहें।
  • इस दौरान माइंडफुलनेस गतिविधि से संबंधित विद्यार्थियों के विशेष अनुभव, चुनौतियों या प्रश्नों पर भी चर्चा की जा सकती है।
क्या करें और क्या नहीं करें:
  • सभी विद्यार्थियों को उत्तर देने के लिए प्रेरित करें।
  • शिक्षक सभी विद्यार्थियों के उत्तर स्वीकार करें।
  • विद्यार्थियों द्वारा दिए गए उत्तर पर कोई नकारात्मक टिप्पणी न करें।
2. a. शब्द-संयोजन (Word Association): 5 मिनट

उद्देश्य- विद्यार्थियों को विचारों की पहचान करवाना।

गतिविधि के चरण:
  • शिक्षक सबसे पहले एक शब्द बोलें और इससे संबंधित जो कुछ भी विचार या चित्र विद्यार्थियों के मन में आ रहें हों, उन्हें व्यक्त करने के लिए कहें । शिक्षक उन शब्दों को ब्लैकबोर्ड पर लिख दे। जैसे - ’बादल’ शब्द सुनने पर मन में बहुत से ख़याल आ सकते हैं- आसमान, बारिश, नीला, पानी, सफ़ेद, घने बादल, आदि। ये सभी विचार हैं।
  • शिक्षक द्वारा कुछ और शब्द जो इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जैसे- फूल, भोजन, दिन, किताब, दोस्त, शिक्षक, साँस, ख़ुशी, पढ़ाई आदि। शिक्षक चाहें तो अपने विवेक से अन्य शब्दों का भी प्रयोग कर सकते हैं। 
  • शिक्षक ऐसे पाँच-छः शब्दों के साथ यह प्रक्रिया करें।
2. b. शब्द-संयोजन (Word Association) पर चर्चा: 10 मिनट
  • क्या आपके मन में भी कई तरह के विचार आते रहते हैं? (जैसे कुछ विचार बीते हुए कल से संबंधित होते हैं और कुछ आने वाले कल से। कुछ विचार तनाव, चिंता, ग़ुस्सा, आशा,ख़ुशी वाले होते हैं। हम सबको दिन भर में हज़ारों विचार आते हैं जिनके प्रति हम सजग (Aware) नहीं होते हैं और जिन पर हम ध्यान नहीं देते हैं।)
  • क्या आपने कभी ध्यान दिया है की आपके मन में कितने तरह के और कितने सारे विचार आते हैं?
  • वैज्ञानिकों ने मनुष्य के मन को Monkey mind कहा है। जिस प्रकार बन्दर एक जगह पर टिक कर नहीं बैठ सकता व एक जगह से दूसरी जगह उछलता-कूदता रहता है उसी प्रकार हमारा मन भी दौड़ता रहता है।
  • विद्यार्थियों से पूछें कि वे आज ख़ुद के विचारों पर ध्यान दे और जाने की उनका मन भी monkey mind जैसा है क्या?
क्या करें और क्या न करें
  • शिक्षक सुनिश्चित करें कि निर्देश देते वक़्त एक मधुर स्वर का उपयोग करें।
  • अगर कोई विद्यार्थी यह गतिविधि न करना चाहे तो उसके साथ ज़बरदस्ती न की जाए।
3. साइलेंट चेक आउट (Silent Check Out): 1-2 मिनट 

उद्देश्य: इस गतिविधि का उद्देश्य है कि विद्यार्थी हैप्पीनेस कक्षा में आज की गई गतिविधियों से उत्पन्न हुए विचारों और भावनाओं पर मनन (reflection) कर पाएँ।

गतिविधि के चरण:
  • ध्यान की कक्षा का अंत शांत बैठकर किया जाए। 
  • इस दौरान विद्यार्थी आज की गई गतिविधियों से उत्पन्न विचारों और भावनाओं पर मनन (reflection) करें।
  • इस दौरान विद्यार्थियों को कोई अन्य निर्देश न दिया जाए।
  • विद्यार्थी आँखें बंद रखें या खुली रखकर नीचे की ओर देखें, यह उनकी इच्छा पर छोड़ दें। 
क्या करें और क्या नहीं करें: 
  • साइलेंट चेक आउट के बाद शिक्षक कोई भी प्रश्न न पूछें।
  • अगर कोई विद्यार्थी अपना अनुभव साझा करना चाहता है तो शिक्षक उसे मौका दे सकते हैं।
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सत्र 17 (Happy Experiences)

समय वितरण
1. a. माइंडफुल चेक-इन (Mindful Check In): 3-5 मिनट
b. ध्यान देने की प्रक्रिया पर चर्चा: 10 मिनट
2. a. Happy Experiences: 5 मिनट
b. Happy Experiences पर चर्चा: 10 मिनट
3. साइलेंट चेक आउट (Silent Check Out): 1-2 मिनट

1 a) माइंडफुल चेक-इन (Mindful Check In): 3-5 मिनट

उद्देश्य: इस गतिविधि के माध्यम से शिक्षक विद्यार्थियों को ध्यान देने की कक्षा के लिए तैयार करेंगे।

गतिविधि के चरण
  • शिक्षक विद्यार्थियों को बताएँ कि इस गतिविधि के द्वारा विद्यार्थी अपना ध्यान पहले से कर रहे कार्य से हटाकर, वर्तमान में लेकर आते हैं। इसका अभ्यास विद्यार्थी कभी भी, कहीं भी कर सकते हैं।
  • शिक्षक सभी विद्यार्थियों से कहें कि वे आरामदायक स्थिति में बैठकर, चाहें तो कमर सीधी करके आँखें बंद कर लें। अगर किसी को आँखें बंद करने में मुश्किल महसूस हो रही हो तो वह नीचे की ओर देख सकता है।
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपने हाथ डेस्क पर या अपने पैरों पर रख सकते हैं।
  • शिक्षक विद्यार्थियों से कहें कि हम शुरूआत माइंडफुल चेक इन गतिविधि से करेंगे। यह गतिविधि हम लगभग 3 मिनट तक करेंगे।
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपना ध्यान पहले अपने आस-पास के वातावरण में उत्पन्न हो रही आवाज़ों पर ले जाएँ और उसके बाद अपनी साँसों की प्रक्रिया पर ले जाएँगे।
  • विद्यार्थियों को बताएँ कि ये आवाज़ें धीमी हो सकती हैं...या तेज़, रुक-रुककर आ सकती हैं...या लगातार।
(20 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि जैसी भी हों, इन आवाज़ों के प्रति सजग हो जाएँ। ध्यान दें कि ये आवाज़ें कहाँ से आ रही हैं।
(30 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि अब वे अपना ध्यान अपनी साँसों पर लेकर जाएँ। साँसों के आने और जाने पर ध्यान दें।
  • विद्यार्थियों को बताएँ कि वे साँसों को किसी प्रकार बदलने की कोशिश न करें। केवल अपनी साँसों के प्रति सजग हो जाएँ।
(10 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे ध्यान दें कि साँस कब अंदर आ रही है और कब बाहर जा रही है। अंदर आने और बाहर जाने वाली साँस में कोई अंतर है या नहीं। क्या ये साँसें ठंडी हैं या गरम...तेज़ी से आ रही हैं या आराम से….हल्की हैं या गहरी। 
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपनी हर साँस के प्रति सजग हो जाएँ।
(20 सेकंड रुकें)
  • अब विद्यार्थियों से कहें कि वे धीरे-धीरे अपना ध्यान अपने बैठने की स्थिति पर ले आएँ और जब भी ठीक लगे, वे अपनी आँखें खोल सकते हैं।
क्या करें और क्या नहीं करें:
  • चेक इन शुरू करने के पहले विद्यार्थियों को अपनी जगह पर आराम से बैठने का वक़्त दें।
  • गतिविधि के दौरान यदि किसी विद्यार्थी का ध्यान आपको भटकता हुआ प्रतीत हो तो उसका नाम लिए बिना, पूरी कक्षा को ध्यान देने के लिए कहें।
1 b) ध्यान देने की प्रक्रिया पर चर्चा: 10 मिनट

उद्देश्य: माइंडफुलनेस की प्रक्रिया और उसके फ़ायदों पर विद्यार्थियों के अनुभव जानना।

चर्चा के लिए प्रस्तावित बिंदु:
  • शिक्षक विद्यार्थियों से चर्चा कर सकते हैं कि माइंडफुलनेस सीखने से विद्यार्थी अपने जीवन में क्या सुधार महसूस कर रहे हैं।
    • मन के अंदर तनाव की कमी
    • क्लास में ध्यान देने में मदद
    • इस बात का एहसास होना कि मेरे अंदर क्या चल रहा है (सुख, दुःख, क्रोध आदि)
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपने विचार अपनी नोटबुक में लिख सकते हैं। इसके बाद कुछ विद्यार्थियों को अपने विचार साझा करने के लिए कहें।
  • इस दौरान माइंडफुलनेस गतिविधि से संबंधित विद्यार्थियों के विशेष अनुभव, चुनौतियों या प्रश्नों पर भी चर्चा की जा सकती है।
क्या करें और क्या नहीं करें:
  • सभी विद्यार्थियों को उत्तर देने के लिए प्रेरित करें।
  • शिक्षक सभी विद्यार्थियों के उत्तर स्वीकार करें।
  • विद्यार्थियों द्वारा दिए गए उत्तर पर कोई नकारात्मक टिप्पणी न करें।
2. a. Happy Experiences : 5 मिनट
उद्देश्य: विद्यार्थियों को शरीर एवं मन में ख़ुशी का अनुभव करवाना। इस गतिविधि से हमारी सजगता बढ़ती है - ख़ुशी के समय पर हमारा शरीर, हमारे विचार, हमारी भावना, हमारा व्यवहार कैसा होता है। इस अभ्यास को हम कभी भी कहीं भी करके, ख़ुशी महसूस कर सकते हैं।

शिक्षक विद्यार्थियों को बताएँ कि:
  • अब आप और हम एक गतिविधि करेंगे जो हमें खुशी का अनुभव करने में मदद करेगी।
  • शिक्षक विद्यार्थियों को कहें कि अब वे एक आरामदायक स्थिति में बैठ जाएँ। अपनी पीठ को सीधा करें और कंधो को ढीला छोड़ें। धीरे से अपनी आँखें बंद करें। अब एक ग़हरी सास अंदर लें और मुँह के द्वारा सांस बाहर छोड़ें। इसे एक- दो बार फिर से दोहराएँ। ग़हरी साँस अंदर लें और मुँह से साँस बाहर छोड़ें।
  • विद्यार्थियों को कहें कि वे विद्यार्थी अब एक ऐसी जगह या स्थिति की कल्पना करें जहाँ उन्हें ख़ुशी और सुकून महसूस होता है। कल्पना कीजिये की वे इस जगह या स्थिति में क्या कर रहे है? वे किसके साथ हैं?
10 सेकंड रुकें
  • शिक्षक विद्यार्थियों को कहें कि अब वे खोजें और पता लगाएँ कि उनके शरीर में वे कहाँ ख़ुशी महसूस कर रहे हैं। क्या यह दिल में है, यह उनके पेट में है या उनके हाथों में है?
10 सेकंड रुकें
  • शिक्षक विद्यार्थियों को कहें कि अब वे अपने शरीर में इस ख़ुशी के एहसास को महसूस करते रहें। विद्यार्थियों को कहें कि वे ध्यान दें कि उनको कैसा महसूस हो रहा है। उनके शरीर में क्या प्रक्रिया चल रही है।
  • विद्यार्थियों को कहें कि इसके साथ-साथ, वे अपना ध्यान अपने विचारों पर भी लाने का प्रयास करें। इस पल उनके मन में क्या विचार आ रहे हैं? क्या एक ही विचार आ रहा है या अलग अलग विचार आ रहे हैं। विद्यार्थी कुछ समय इन विचारों के साथ रहें।
10 सेकंड रुकें
  • शिक्षक विद्यार्थियों को कहें कि अब वे धीरे से सांस अंदर लें..... और साँस छोड़े। सांस अंदर लेते हुए सोचें, ‘मैं मुस्कुरा रहा/रही हूँ।’ सांस बाहर छोड़ते हुए सोचें, ‘मैं मुस्कुरा रहा/ रही हूँ।’
  • अब विद्यार्थियों को धीरे-धीरे अपना ध्यान अपने आसपास के वातावरण में वापस लाने को कहें आएं और जब विद्यार्थी तैयार हों तो वे अपनी आँखें खोल सकते हैं।
  • अब विद्यार्थी एक दूसरे को देखें और कोमल मुस्कान दें।
2. b. Happy Experiences पर चर्चा: 10 मिनट
  • आप कैसा महसूस कर रहे है?
  • आपने जिस जगह में खुश रहने की कल्पना की उसमे आप क्या करके खुशी महसूस कर रहे थे?
  • इस गतिविधि के अभ्यास से आपको क्या लाभ हो सकता है? (इस गतिविधि के लगातार अभ्यास से हम सकारात्मक भावनाओं (Positive Feelings) को ज़्यादा महसूस कर पाते हैं, जैसे की ख़ुशी, प्यार, संतोष, आभार, गर्व, आशा, रुचि, इत्यादि। इससे, हमारी संतुष्टि भी बेहतर रहती है और हमारी Well Being भी बढ़ता है।)
3. साइलेंट चेक आउट (Silent Check Out): 1-2 मिनट 

उद्देश्य: इस गतिविधि का उद्देश्य है कि विद्यार्थी हैप्पीनेस कक्षा में आज की गई गतिविधियों से उत्पन्न हुए विचारों और भावनाओं पर मनन (reflection) कर पाएँ।

गतिविधि के चरण:
  • ध्यान की कक्षा का अंत शांत बैठकर किया जाए। 
  • इस दौरान विद्यार्थी आज की गई गतिविधियों से उत्पन्न विचारों और भावनाओं पर मनन (reflection) करें।
  • इस दौरान विद्यार्थियों को कोई अन्य निर्देश न दिया जाए।
  • विद्यार्थी आँखें बंद रखें या खुली रखकर नीचे की ओर देखें, यह उनकी इच्छा पर छोड़ दें। 
क्या करें और क्या नहीं करें: 
  • साइलेंट चेक आउट के बाद शिक्षक कोई भी प्रश्न न पूछें।
  • अगर कोई विद्यार्थी अपना अनुभव साझा करना चाहता है तो शिक्षक उसे मौका दे सकते हैं।
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सत्र 16 (Breathing Colours)

समय वितरण
1. a. माइंडफुल चेक-इन (Mindful Check In): 3-5 मिनट
b. ध्यान देने की प्रक्रिया पर चर्चा: 10 मिनट
2. a. Breathing Colours: 5 मिनट
b. Breathing Colours पर चर्चा: 10 मिनट
3. साइलेंट चेक आउट (Silent Check Out): 1-2 मिनट

1 a) माइंडफुल चेक-इन (Mindful Check In): 3-5 मिनट

उद्देश्य: इस गतिविधि के माध्यम से शिक्षक विद्यार्थियों को ध्यान देने की कक्षा के लिए तैयार करेंगे।

गतिविधि के चरण
  • शिक्षक विद्यार्थियों को बताएँ कि इस गतिविधि के द्वारा विद्यार्थी अपना ध्यान पहले से कर रहे कार्य से हटाकर, वर्तमान में लेकर आते हैं। इसका अभ्यास विद्यार्थी कभी भी, कहीं भी कर सकते हैं।
  • शिक्षक सभी विद्यार्थियों से कहें कि वे आरामदायक स्थिति में बैठकर, चाहें तो कमर सीधी करके आँखें बंद कर लें। अगर किसी को आँखें बंद करने में मुश्किल महसूस हो रही हो तो वह नीचे की ओर देख सकता है।
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपने हाथ डेस्क पर या अपने पैरों पर रख सकते हैं।
  • शिक्षक विद्यार्थियों से कहें कि हम शुरूआत माइंडफुल चेक इन गतिविधि से करेंगे। यह गतिविधि हम लगभग 3 मिनट तक करेंगे।
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपना ध्यान पहले अपने आस-पास के वातावरण में उत्पन्न हो रही आवाज़ों पर ले जाएँ और उसके बाद अपनी साँसों की प्रक्रिया पर ले जाएँगे।
  • विद्यार्थियों को बताएँ कि ये आवाज़ें धीमी हो सकती हैं...या तेज़, रुक-रुककर आ सकती हैं...या लगातार।
(20 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि जैसी भी हों, इन आवाज़ों के प्रति सजग हो जाएँ। ध्यान दें कि ये आवाज़ें कहाँ से आ रही हैं।
(30 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि अब वे अपना ध्यान अपनी साँसों पर लेकर जाएँ। साँसों के आने और जाने पर ध्यान दें।
  • विद्यार्थियों को बताएँ कि वे साँसों को किसी प्रकार बदलने की कोशिश न करें। केवल अपनी साँसों के प्रति सजग हो जाएँ।
(10 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे ध्यान दें कि साँस कब अंदर आ रही है और कब बाहर जा रही है। अंदर आने और बाहर जाने वाली साँस में कोई अंतर है या नहीं। क्या ये साँसें ठंडी हैं या गरम...तेज़ी से आ रही हैं या आराम से….हल्की हैं या गहरी। 
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपनी हर साँस के प्रति सजग हो जाएँ।
(20 सेकंड रुकें)
  • अब विद्यार्थियों से कहें कि वे धीरे-धीरे अपना ध्यान अपने बैठने की स्थिति पर ले आएँ और जब भी ठीक लगे, वे अपनी आँखें खोल सकते हैं।
क्या करें और क्या नहीं करें:
  • चेक इन शुरू करने के पहले विद्यार्थियों को अपनी जगह पर आराम से बैठने का वक़्त दें।
  • गतिविधि के दौरान यदि किसी विद्यार्थी का ध्यान आपको भटकता हुआ प्रतीत हो तो उसका नाम लिए बिना, पूरी कक्षा को ध्यान देने के लिए कहें।
1 b) ध्यान देने की प्रक्रिया पर चर्चा: 10 मिनट

उद्देश्य: माइंडफुलनेस की प्रक्रिया और उसके फ़ायदों पर विद्यार्थियों के अनुभव जानना।

चर्चा के लिए प्रस्तावित बिंदु:
  • शिक्षक विद्यार्थियों से चर्चा कर सकते हैं कि माइंडफुलनेस सीखने से विद्यार्थी अपने जीवन में क्या सुधार महसूस कर रहे हैं।
    • मन के अंदर तनाव की कमी
    • क्लास में ध्यान देने में मदद
    • इस बात का एहसास होना कि मेरे अंदर क्या चल रहा है (सुख, दुःख, क्रोध आदि)
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपने विचार अपनी नोटबुक में लिख सकते हैं। इसके बाद कुछ विद्यार्थियों को अपने विचार साझा करने के लिए कहें।
  • इस दौरान माइंडफुलनेस गतिविधि से संबंधित विद्यार्थियों के विशेष अनुभव, चुनौतियों या प्रश्नों पर भी चर्चा की जा सकती है।
क्या करें और क्या नहीं करें:
  • सभी विद्यार्थियों को उत्तर देने के लिए प्रेरित करें।
  • शिक्षक सभी विद्यार्थियों के उत्तर स्वीकार करें।
  • विद्यार्थियों द्वारा दिए गए उत्तर पर कोई नकारात्मक टिप्पणी न करें।
2. a. Breathing Colours: 5 मिनट

उद्देश्य: विद्यार्थी रंगों की कल्पना के द्वारा अपना ध्यान अपने भावों पर ले जा पाएँ और अपने भावों को नियंत्रित कर पाएँ।

गतिविधि के चरण:
  • विद्यार्थियों को आरामदायक स्थिति में बैठकर अपनी आँखें बंद करने को कहें। अगर किसी को आँखें बंद करने में असहज महसूस हो रहा हो तो वह नीचे की ओर देख सकता है।
  • अब अपने साँसों पर ध्यान दें। लंबी गहरी साँस अंदर लें और धीरे से छोड़ दें।
  • इस गतिविधि के दौरान अपनी साँस को सामान्य(normal) तरीक़े से आने और जाने दें। उसमें कोई बदलाव न करें।
  • अब एक ऐसे रंग के बारे में सोचें जो आपको अच्छा लगता है। ये कोई भी ऐसा रंग हो सकता है जो आपके मन को अच्छा लगे।
  • अब एक ऐसा रंग सोचिए जो आपको अच्छा न लगता हो। ऐसा रंग जो आपको ग़ुस्सा दिलाता हो।
  • अब सोचिए की आपकी पसंद का (favourite) रंग आपके चारों तरफ़ है। हवा में हर जगह यह रंग फैला हुआ है।
  • अब एक लम्बी गहरी साँस अंदर लें और सोचें कि यह रंग आपकी साँस के साथ अंदर आ रहा है, और पूरे शरीर में फैल रहा है।
  • साँस छोड़ने पर, वह रंग बाहर जा रहा है जो आपको अच्छा नहीं लगता।
  • अब यह रंग आपके पसंद के (favourite) रंग के साथ जाकर हवा में, आपके आस पास मिक्स हो रहा है और धीरे धीरे उसमें घुलकर ग़ायब हो रहा है।
  • शिक्षक अगले 3 मिनट तक विद्यार्थियों से कहें कि वे अपने पसंद के (favourite) रंग को अपनी साँस के साथ अंदर लें और अच्छे न लगने वाले रंग को साँस के साथ बाहर छोड़ें।
  • अब धीरे धीरे अपनी जब अच्छा महसूस करें तो आँखें खोल सकते हैं।
2.b. Breathing Colours पर चर्चा: 10 मिनट
  • आपको कैसा लग रहा है?
  • अंदर जाती हुई साँस आपको कैसी महसूस हुई?
  • बाहर जाती हुई साँस आपको कैसी महसूस हुई?
  • यह गतिविधि आप कब कब कर सकते हैं? (जब आपको अच्छा न लग रहा हो, सोने से पहले, पढ़ने से पहले)
क्या करें और क्या न करें:
विद्यार्थियों को कहा जा सकता है कि निरंतर, थोड़े-थोड़े अभ्यास से हम अपनी साँस पर ध्यान देना सीख सकते हैं।

3. साइलेंट चेक आउट (Silent Check Out): 1-2 मिनट 

उद्देश्य: इस गतिविधि का उद्देश्य है कि विद्यार्थी हैप्पीनेस कक्षा में आज की गई गतिविधियों से उत्पन्न हुए विचारों और भावनाओं पर मनन (reflection) कर पाएँ।

गतिविधि के चरण:
  • ध्यान की कक्षा का अंत शांत बैठकर किया जाए। 
  • इस दौरान विद्यार्थी आज की गई गतिविधियों से उत्पन्न विचारों और भावनाओं पर मनन (reflection) करें।
  • इस दौरान विद्यार्थियों को कोई अन्य निर्देश न दिया जाए।
  • विद्यार्थी आँखें बंद रखें या खुली रखकर नीचे की ओर देखें, यह उनकी इच्छा पर छोड़ दें। 
क्या करें और क्या नहीं करें: 
  • साइलेंट चेक आउट के बाद शिक्षक कोई भी प्रश्न न पूछें।
  • अगर कोई विद्यार्थी अपना अनुभव साझा करना चाहता है तो शिक्षक उसे मौका दे सकते हैं।
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सत्र 15 (Mindfulness of Feelings)

समय वितरण
1. a. माइंडफुल चेक-इन (Mindful Check In): 3-5 मिनट
b. ध्यान देने की प्रक्रिया पर चर्चा: 10 मिनट
2. a. Mindfulness of Feelings- II : 5 मिनट
b. Mindfulness of Feelings- II पर चर्चा: 10 मिनट
3. साइलेंट चेक आउट (Silent Check Out): 1-2 मिनट

1 a) माइंडफुल चेक-इन (Mindful Check In): 3-5 मिनट

उद्देश्य: इस गतिविधि के माध्यम से शिक्षक विद्यार्थियों को ध्यान देने की कक्षा के लिए तैयार करेंगे।

गतिविधि के चरण
  • शिक्षक विद्यार्थियों को बताएँ कि इस गतिविधि के द्वारा विद्यार्थी अपना ध्यान पहले से कर रहे कार्य से हटाकर, वर्तमान में लेकर आते हैं। इसका अभ्यास विद्यार्थी कभी भी, कहीं भी कर सकते हैं।
  • शिक्षक सभी विद्यार्थियों से कहें कि वे आरामदायक स्थिति में बैठकर, चाहें तो कमर सीधी करके आँखें बंद कर लें। अगर किसी को आँखें बंद करने में मुश्किल महसूस हो रही हो तो वह नीचे की ओर देख सकता है।
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपने हाथ डेस्क पर या अपने पैरों पर रख सकते हैं।
  • शिक्षक विद्यार्थियों से कहें कि हम शुरूआत माइंडफुल चेक इन गतिविधि से करेंगे। यह गतिविधि हम लगभग 3 मिनट तक करेंगे।
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपना ध्यान पहले अपने आस-पास के वातावरण में उत्पन्न हो रही आवाज़ों पर ले जाएँ और उसके बाद अपनी साँसों की प्रक्रिया पर ले जाएँगे।
  • विद्यार्थियों को बताएँ कि ये आवाज़ें धीमी हो सकती हैं...या तेज़, रुक-रुककर आ सकती हैं...या लगातार।
(20 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि जैसी भी हों, इन आवाज़ों के प्रति सजग हो जाएँ। ध्यान दें कि ये आवाज़ें कहाँ से आ रही हैं।
(30 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि अब वे अपना ध्यान अपनी साँसों पर लेकर जाएँ। साँसों के आने और जाने पर ध्यान दें।
  • विद्यार्थियों को बताएँ कि वे साँसों को किसी प्रकार बदलने की कोशिश न करें। केवल अपनी साँसों के प्रति सजग हो जाएँ।
(10 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे ध्यान दें कि साँस कब अंदर आ रही है और कब बाहर जा रही है। अंदर आने और बाहर जाने वाली साँस में कोई अंतर है या नहीं। क्या ये साँसें ठंडी हैं या गरम...तेज़ी से आ रही हैं या आराम से….हल्की हैं या गहरी। 
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपनी हर साँस के प्रति सजग हो जाएँ।
(20 सेकंड रुकें)
  • अब विद्यार्थियों से कहें कि वे धीरे-धीरे अपना ध्यान अपने बैठने की स्थिति पर ले आएँ और जब भी ठीक लगे, वे अपनी आँखें खोल सकते हैं।
क्या करें और क्या नहीं करें:
  • चेक इन शुरू करने के पहले विद्यार्थियों को अपनी जगह पर आराम से बैठने का वक़्त दें।
  • गतिविधि के दौरान यदि किसी विद्यार्थी का ध्यान आपको भटकता हुआ प्रतीत हो तो उसका नाम लिए बिना, पूरी कक्षा को ध्यान देने के लिए कहें।
1 b) ध्यान देने की प्रक्रिया पर चर्चा: 10 मिनट

उद्देश्य: माइंडफुलनेस की प्रक्रिया और उसके फ़ायदों पर विद्यार्थियों के अनुभव जानना।

चर्चा के लिए प्रस्तावित बिंदु:
  • शिक्षक विद्यार्थियों से चर्चा कर सकते हैं कि माइंडफुलनेस सीखने से विद्यार्थी अपने जीवन में क्या सुधार महसूस कर रहे हैं।
    • मन के अंदर तनाव की कमी
    • क्लास में ध्यान देने में मदद
    • इस बात का एहसास होना कि मेरे अंदर क्या चल रहा है (सुख, दुःख, क्रोध आदि)
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपने विचार अपनी नोटबुक में लिख सकते हैं। इसके बाद कुछ विद्यार्थियों को अपने विचार साझा करने के लिए कहें।
  • इस दौरान माइंडफुलनेस गतिविधि से संबंधित विद्यार्थियों के विशेष अनुभव, चुनौतियों या प्रश्नों पर भी चर्चा की जा सकती है।
क्या करें और क्या नहीं करें:
  • सभी विद्यार्थियों को उत्तर देने के लिए प्रेरित करें।
  • शिक्षक सभी विद्यार्थियों के उत्तर स्वीकार करें।
  • विद्यार्थियों द्वारा दिए गए उत्तर पर कोई नकारात्मक टिप्पणी न करें।
2. a. Mindfulness of Feelings- II : 5 मिनट

उद्देश्य:
  • भावनाओं की पहचान करवाना।
  • भावनाओं के बारे में चर्चा करना और उन्हें बेहतर समझ पाना।
गतिविधि के चरण:
शिक्षक द्वारा विद्यार्थियों को यह बताया जाए कि
  • “अब हम एक गतिविधि करेंगे जो हमें खुशी का अनुभव करने में मदद करेगी”
  • “अब सभी विद्यार्थी एक आरामदायक स्थिति में बैठ जाएँ । सभी अपनी पीठ को सीधा करें और कंधो को ढीला छोड़े । धीरे से अपनी आँखें बंद करे। अब एक ग़हरी साँस अंदर ले और मुंह के द्वारा सांस बाहर छोड़े। इस क्रिया को एक- दो बार फिर से दोहराइये। ग़हरी सास अंदर ले और मुंह के द्वारा साँस बाहर छोड़े।”
  • “अब विद्यार्थियों को एक ऐसी जगह या स्थिति की कल्पना करने को कहें जहाँ वे ख़ुशी और शांति महसूस करते है।
  • विद्यार्थियों को यह कल्पना करने को कहें कि वे इस जगह या स्थिति में क्या कर रहे है? किसके साथ है ?
  • विद्यार्थियों को कहें कि वे पता लगाए कि अपने शरीर में वे कहाँ ख़ुशी महसूस कर रहे है। क्या यह ख़ुशी दिल में है, यह आपके पेट में है या आपके हाथों में है? अपने शरीर में इस ख़ुशी के एहसास को नोटिस करते रहिये। यह बहुत नरम झुनझुनी सनसनी का एहसास हो सकती है।”
  • “अब विद्यार्थियों को कहें कि धीरे से साँस अंदर लें..... और साँस छोड़े। सांस अंदर लेते हुए सोचिये, मैं मुस्कुरा रहा/रही हूँ। साँस बाहर छोड़ते हुए सोचिये , मैं मुस्कुरा रहा/रही हूँ।”
  • “अब विद्यार्थियों को कहें कि वे धीरे-धीरे अपने आसपास के वातावरण में वापस आएं और जब वे तैयार हों तो आप अपनी आँखें खोल सकते हैं”
  • “अब एक दूसरे को देखें और कोमल कोमल मुस्कान दें”
2.b. Mindfulness of Feelings- II पर चर्चा: 10 मिनट
  • आप कैसा महसूस कर रहे है?
  • आपके शरीर में आपको कहाँ-कहाँ ख़ुशी का एहसास हुआ?
  • आपने ऐसी कौनसी जगह की कल्पना की जहां आपको खुशी मिलती है । आपने कौनसी खुशी की जगह की कल्पना की?
  • कल्पना करने पर आपको कैसा महसूस हुआ?
शिक्षक कथन
भावनाओं को अच्छी तरह से नियंत्रित करने के लिए हमें पहले उनके बारे में पता होना चाहिए। इनके प्रति जागरूकता जरूरी है। भावनाएं हमें अपने आप के साथ और दूसरों के साथ संवाद करने में मदद करती हैं। भावनाएँ हमारे व्यवहार को प्रभावितकरती हैं। वे हमें कार्यवाही करने के लिए तैयार करती हैं। दुनिया का हर एक आदमी कई प्रकार की भावनाएं महसूस करता है।
किसी भी भावना को महसूस करना अच्छा या बुरा नहीं होता।हम भावनाओ के कारण कैसे व्यवहार करते है, वह महत्वपूर्ण होता है।

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सत्र 14 (Mindfulness of Feelings)

समय वितरण
1. a. माइंडफुल चेक-इन (Mindful Check In): 3-5 मिनट
b. ध्यान देने की प्रक्रिया पर चर्चा: 10 मिनट
2. a. Mindfulness of Feelings- I : 5 मिनट
b. Mindfulness of Feelings- I पर चर्चा: 10 मिनट
3. साइलेंट चेक आउट (Silent Check Out): 1-2 मिनट

1 a) माइंडफुल चेक-इन (Mindful Check In): 3-5 मिनट

उद्देश्य: इस गतिविधि के माध्यम से शिक्षक विद्यार्थियों को ध्यान देने की कक्षा के लिए तैयार करेंगे।

गतिविधि के चरण
  • शिक्षक विद्यार्थियों को बताएँ कि इस गतिविधि के द्वारा विद्यार्थी अपना ध्यान पहले से कर रहे कार्य से हटाकर, वर्तमान में लेकर आते हैं। इसका अभ्यास विद्यार्थी कभी भी, कहीं भी कर सकते हैं।
  • शिक्षक सभी विद्यार्थियों से कहें कि वे आरामदायक स्थिति में बैठकर, चाहें तो कमर सीधी करके आँखें बंद कर लें। अगर किसी को आँखें बंद करने में मुश्किल महसूस हो रही हो तो वह नीचे की ओर देख सकता है।
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपने हाथ डेस्क पर या अपने पैरों पर रख सकते हैं।
  • शिक्षक विद्यार्थियों से कहें कि हम शुरूआत माइंडफुल चेक इन गतिविधि से करेंगे। यह गतिविधि हम लगभग 3 मिनट तक करेंगे।
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपना ध्यान पहले अपने आस-पास के वातावरण में उत्पन्न हो रही आवाज़ों पर ले जाएँ और उसके बाद अपनी साँसों की प्रक्रिया पर ले जाएँगे।
  • विद्यार्थियों को बताएँ कि ये आवाज़ें धीमी हो सकती हैं...या तेज़, रुक-रुककर आ सकती हैं...या लगातार।
(20 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि जैसी भी हों, इन आवाज़ों के प्रति सजग हो जाएँ। ध्यान दें कि ये आवाज़ें कहाँ से आ रही हैं।
(30 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि अब वे अपना ध्यान अपनी साँसों पर लेकर जाएँ। साँसों के आने और जाने पर ध्यान दें।
  • विद्यार्थियों को बताएँ कि वे साँसों को किसी प्रकार बदलने की कोशिश न करें। केवल अपनी साँसों के प्रति सजग हो जाएँ।
(10 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे ध्यान दें कि साँस कब अंदर आ रही है और कब बाहर जा रही है। अंदर आने और बाहर जाने वाली साँस में कोई अंतर है या नहीं। क्या ये साँसें ठंडी हैं या गरम...तेज़ी से आ रही हैं या आराम से….हल्की हैं या गहरी। 
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपनी हर साँस के प्रति सजग हो जाएँ।
(20 सेकंड रुकें)
  • अब विद्यार्थियों से कहें कि वे धीरे-धीरे अपना ध्यान अपने बैठने की स्थिति पर ले आएँ और जब भी ठीक लगे, वे अपनी आँखें खोल सकते हैं।
क्या करें और क्या नहीं करें:
  • चेक इन शुरू करने के पहले विद्यार्थियों को अपनी जगह पर आराम से बैठने का वक़्त दें।
  • गतिविधि के दौरान यदि किसी विद्यार्थी का ध्यान आपको भटकता हुआ प्रतीत हो तो उसका नाम लिए बिना, पूरी कक्षा को ध्यान देने के लिए कहें।
1 b) ध्यान देने की प्रक्रिया पर चर्चा: 10 मिनट

उद्देश्य: माइंडफुलनेस की प्रक्रिया और उसके फ़ायदों पर विद्यार्थियों के अनुभव जानना।

चर्चा के लिए प्रस्तावित बिंदु:
  • शिक्षक विद्यार्थियों से चर्चा कर सकते हैं कि माइंडफुलनेस सीखने से विद्यार्थी अपने जीवन में क्या सुधार महसूस कर रहे हैं।
    • मन के अंदर तनाव की कमी
    • क्लास में ध्यान देने में मदद
    • इस बात का एहसास होना कि मेरे अंदर क्या चल रहा है (सुख, दुःख, क्रोध आदि)
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपने विचार अपनी नोटबुक में लिख सकते हैं। इसके बाद कुछ विद्यार्थियों को अपने विचार साझा करने के लिए कहें।
  • इस दौरान माइंडफुलनेस गतिविधि से संबंधित विद्यार्थियों के विशेष अनुभव, चुनौतियों या प्रश्नों पर भी चर्चा की जा सकती है।
क्या करें और क्या नहीं करें:
  • सभी विद्यार्थियों को उत्तर देने के लिए प्रेरित करें।
  • शिक्षक सभी विद्यार्थियों के उत्तर स्वीकार करें।
  • विद्यार्थियों द्वारा दिए गए उत्तर पर कोई नकारात्मक टिप्पणी न करें।
2. a. Mindfulness of Feelings- I : 5 मिनट

उद्देश्य:
  • भावनाओं की पहचान करवाना।
  • भावनाओं के बारे में चर्चा करना और उन्हें बेहतर समझ पाना
आवश्यक सामग्री: अलग-अलग भावनाओं के बारे में कटे हुए चित्र ले सकते हैं।

गतिविधि के चरण
  • शिक्षक विद्यार्थियों को बताएँ कि, “आज हम अपनी भावनाओं के बारे में बात करेंगे।”
  • “हमारे जीवन में हम कई प्रकार की भावनाएँ महसूस करते है , जैसे की ख़ुशी, दुःख, गुस्सा, डर,उदासी,संतुष्ट,परेशानी आदि।”
  • (शिक्षक कक्षा में अलग-अलग भावनाओं के चित्र लेकर सभी विद्यार्थियों को कक्षा में दिखाएँ अन्यथा अलग अलग भावनाओं को दर्शाते हुए चित्र ब्लैकबोर्ड पर बना सकते हैं।)
  • विद्यार्थियों को इन चित्रों को पहचानने को कहें।
  • शिक्षक विद्यार्थियों को बताएँ कि कुछ लोग किसी एक भावना ज़्यादा महसूस करते है, और कुछ लोग कम।
  • “कोई भी भावना सही/ गलत/ अच्छी या बुरी नहीं होती।”
  • “हर एक इंसान अपने जीवन में यह सारी भावनायें कभी न कभी महसूस करता है।”
2.b. Mindfulness of Feelings- I पर चर्चा: 10 मिनट
  • जब आप खुश/संतुष्ट होते हो, तब आपका चेहरा कैसा बनता है?
  • आपको कब ख़ुशी महसूस होती है?
  • जब आप ख़ुश होते हो तब आप क्या करते हो?
  • जब आपको ख़ुशी महसूस होती है तब आपके शरीर में क्या महसूस होता है?
  • जब आप दुखी या परेशान होते हो, तब आपका चेहरा कैसा बनता है?
  • आपको दुःख या परेशानी कब महसूस होती हैं ?
  • आप तब क्या करते हो?
क्या करें, क्या न करें:
  • एक सुरक्षित वातावरण बनाएं। हर एक बच्चे की भावनाओं को स्वीकार करें और सम्मान दें।
  • सकारात्मक भावनाओं और व्यवहारों पर कोई प्रशंसा ज़ाहिर न करें।
  • पक्षपाती हो कर कोई निर्णय ना ले।
3. साइलेंट चेक आउट (Silent Check Out): 1-2 मिनट 

उद्देश्य: इस गतिविधि का उद्देश्य है कि विद्यार्थी हैप्पीनेस कक्षा में आज की गई गतिविधियों से उत्पन्न हुए विचारों और भावनाओं पर मनन (reflection) कर पाएँ।

गतिविधि के चरण:
  • ध्यान की कक्षा का अंत शांत बैठकर किया जाए। 
  • इस दौरान विद्यार्थी आज की गई गतिविधियों से उत्पन्न विचारों और भावनाओं पर मनन (reflection) करें।
  • इस दौरान विद्यार्थियों को कोई अन्य निर्देश न दिया जाए।
  • विद्यार्थी आँखें बंद रखें या खुली रखकर नीचे की ओर देखें, यह उनकी इच्छा पर छोड़ दें। 
क्या करें और क्या नहीं करें: 
  • साइलेंट चेक आउट के बाद शिक्षक कोई भी प्रश्न न पूछें।
  • अगर कोई विद्यार्थी अपना अनुभव साझा करना चाहता है तो शिक्षक उसे मौका दे सकते हैं।
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सत्र 13 (Heartbeat)

समय वितरण
1. a. माइंडफुल चेक-इन (Mindful Check In): 3-5 मिनट
b. ध्यान देने की प्रक्रिया पर चर्चा: 10 मिनट
2. a. Heartbeat: 5 मिनट
b. Heartbeat पर चर्चा: 10 मिनट
3. साइलेंट चेक आउट (Silent Check Out): 1-2 मिनट

1 a) माइंडफुल चेक-इन (Mindful Check In): 3-5 मिनट

उद्देश्य: इस गतिविधि के माध्यम से शिक्षक विद्यार्थियों को ध्यान देने की कक्षा के लिए तैयार करेंगे।

गतिविधि के चरण
  • शिक्षक विद्यार्थियों को बताएँ कि इस गतिविधि के द्वारा विद्यार्थी अपना ध्यान पहले से कर रहे कार्य से हटाकर, वर्तमान में लेकर आते हैं। इसका अभ्यास विद्यार्थी कभी भी, कहीं भी कर सकते हैं।
  • शिक्षक सभी विद्यार्थियों से कहें कि वे आरामदायक स्थिति में बैठकर, चाहें तो कमर सीधी करके आँखें बंद कर लें। अगर किसी को आँखें बंद करने में मुश्किल महसूस हो रही हो तो वह नीचे की ओर देख सकता है।
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपने हाथ डेस्क पर या अपने पैरों पर रख सकते हैं।
  • शिक्षक विद्यार्थियों से कहें कि हम शुरूआत माइंडफुल चेक इन गतिविधि से करेंगे। यह गतिविधि हम लगभग 3 मिनट तक करेंगे।
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपना ध्यान पहले अपने आस-पास के वातावरण में उत्पन्न हो रही आवाज़ों पर ले जाएँ और उसके बाद अपनी साँसों की प्रक्रिया पर ले जाएँगे।
  • विद्यार्थियों को बताएँ कि ये आवाज़ें धीमी हो सकती हैं...या तेज़, रुक-रुककर आ सकती हैं...या लगातार।
(20 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि जैसी भी हों, इन आवाज़ों के प्रति सजग हो जाएँ। ध्यान दें कि ये आवाज़ें कहाँ से आ रही हैं।
(30 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि अब वे अपना ध्यान अपनी साँसों पर लेकर जाएँ। साँसों के आने और जाने पर ध्यान दें।
  • विद्यार्थियों को बताएँ कि वे साँसों को किसी प्रकार बदलने की कोशिश न करें। केवल अपनी साँसों के प्रति सजग हो जाएँ।
(10 सेकंड रुकें)
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे ध्यान दें कि साँस कब अंदर आ रही है और कब बाहर जा रही है। अंदर आने और बाहर जाने वाली साँस में कोई अंतर है या नहीं। क्या ये साँसें ठंडी हैं या गरम...तेज़ी से आ रही हैं या आराम से….हल्की हैं या गहरी। 
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपनी हर साँस के प्रति सजग हो जाएँ।
(20 सेकंड रुकें)
  • अब विद्यार्थियों से कहें कि वे धीरे-धीरे अपना ध्यान अपने बैठने की स्थिति पर ले आएँ और जब भी ठीक लगे, वे अपनी आँखें खोल सकते हैं।
क्या करें और क्या नहीं करें:
  • चेक इन शुरू करने के पहले विद्यार्थियों को अपनी जगह पर आराम से बैठने का वक़्त दें।
  • गतिविधि के दौरान यदि किसी विद्यार्थी का ध्यान आपको भटकता हुआ प्रतीत हो तो उसका नाम लिए बिना, पूरी कक्षा को ध्यान देने के लिए कहें।
1 b) ध्यान देने की प्रक्रिया पर चर्चा: 10 मिनट

उद्देश्य: माइंडफुलनेस की प्रक्रिया और उसके फ़ायदों पर विद्यार्थियों के अनुभव जानना।

चर्चा के लिए प्रस्तावित बिंदु:
  • शिक्षक विद्यार्थियों से चर्चा कर सकते हैं कि माइंडफुलनेस सीखने से विद्यार्थी अपने जीवन में क्या सुधार महसूस कर रहे हैं।
    • मन के अंदर तनाव की कमी
    • क्लास में ध्यान देने में मदद
    • इस बात का एहसास होना कि मेरे अंदर क्या चल रहा है (सुख, दुःख, क्रोध आदि)
  • विद्यार्थियों से कहें कि वे अपने विचार अपनी नोटबुक में लिख सकते हैं। इसके बाद कुछ विद्यार्थियों को अपने विचार साझा करने के लिए कहें।
  • इस दौरान माइंडफुलनेस गतिविधि से संबंधित विद्यार्थियों के विशेष अनुभव, चुनौतियों या प्रश्नों पर भी चर्चा की जा सकती है।
क्या करें और क्या नहीं करें:
  • सभी विद्यार्थियों को उत्तर देने के लिए प्रेरित करें।
  • शिक्षक सभी विद्यार्थियों के उत्तर स्वीकार करें।
  • विद्यार्थियों द्वारा दिए गए उत्तर पर कोई नकारात्मक टिप्पणी न करें।
2. a. Heartbeat: 5 मिनट

उद्देश्य: विद्यार्थी अपनी धड़कन व साँसो के प्रति सजग हो पाएँ

गतिविधि के चरण:
  • शिक्षक सभी विद्यार्थियों को शांत भाव से एक आरामदायक स्थिति में बैठने को कहें। विद्यार्थियों को अपनी आँखें बंद करने या नीचे की ओर देखने को कहें।
  • विद्यार्थियों को तीन गहरी सांस अंदर और बाहर लेने को कहें।
अंदर….. बाहर। (तीन बार)
  • विद्यार्थियों को अपनी उंगलियों या हाथों को अपने शरीर के उस हिस्से पर रखने को कहें जहां वे अपनी नाड़ी (या दिल) की धड़कन महसूस कर सकते हैं। जैसे - अपनी गर्दन के किनारे, अपने जबड़े के नीचे, अपनी कलाई में, अपने दिल पर।
  • विद्यार्थियों को नोटिस करने को कहें कि उनका दिल कितनी तेज़ या धीरे-धीरे धड़क रहा है।
  • विद्यार्थियों को ध्यान देने को कहें कि अभी वे क्या महसूस कर रहे हैं।
(10 सेकंड रुकें)
  • अब विद्यार्थियों को आँखें खोलने के लिए कहें और बिना बोले, शांति व सजगता से खड़े होकर, दस बार कूदने को कहें।
  • विद्यार्थियों को बैठने को कहें और अपने दिल की धड़कन पर फिर से ध्यान ले जाने को कहें।
  • विद्यार्थियों को इस बात पर ध्यान देने के लिए कहें कि क्या वे कोई बदलाव महसूस कर रहे हैं। क्या दिल की धड़कन की गति बदली है? क्या सांस में कोई बदलाव हुआ है?
  • विद्यार्थियों को आँखें बंद करने को बोलें और अपने दिल की धड़कन पर तब तक ध्यान केंद्रित करने को कहें जब तक कि यह फिर से सामान्य न हो जाए।
(30 सेकंड बाद)
  • विद्यार्थियों से कहें कि जब उन्हें ठीक लगे वे अपनी आँखें खोल सकते हैं।
2. b. Heartbeat पर चर्चा: 10 मिनट
  • कूदने से पहले आपको कैसा लग रहा था?
  • कूदने के बाद आपको कैसा महसूस हुआ?
  • जब आपने आज पहली बार अपनी धड़कन महसूस की तब आपको कैसा लगा?
  • कूदने के बाद धड़कनों में क्या अंतर आया?
क्या करें क्या नहीं करें:
यदि किसी विद्यार्थी कूदने में कोई परेशानी महसूस करे तो उस पर ऐसा करने के लिए दबाव न डाला जाए।
धड़कन महसूस करने में यदि विद्यार्थियों को कठिनाई हो रही हो तो उनकी मदद करें।(अपनी गर्दन के किनारे, अपने जबड़े के नीचे, अपनी कलाई में या अपने दिल द्वारा)

3. साइलेंट चेक आउट (Silent Check Out): 1-2 मिनट 

उद्देश्य: इस गतिविधि का उद्देश्य है कि विद्यार्थी हैप्पीनेस कक्षा में आज की गई गतिविधियों से उत्पन्न हुए विचारों और भावनाओं पर मनन (reflection) कर पाएँ।

गतिविधि के चरण:
  • ध्यान की कक्षा का अंत शांत बैठकर किया जाए। 
  • इस दौरान विद्यार्थी आज की गई गतिविधियों से उत्पन्न विचारों और भावनाओं पर मनन (reflection) करें।
  • इस दौरान विद्यार्थियों को कोई अन्य निर्देश न दिया जाए।
  • विद्यार्थी आँखें बंद रखें या खुली रखकर नीचे की ओर देखें, यह उनकी इच्छा पर छोड़ दें। 
क्या करें और क्या नहीं करें: 
  • साइलेंट चेक आउट के बाद शिक्षक कोई भी प्रश्न न पूछें।
  • अगर कोई विद्यार्थी अपना अनुभव साझा करना चाहता है तो शिक्षक उसे मौका दे सकते हैं।
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