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कक्षा 3: माइंडफुलनेस

शिक्षकों के लिए: सभी शिक्षक माइंडफुलनेस की क्लास लेने से पहले इस चैप्टर को ध्यान से पढ़ लें। इससे पूरे वर्ष माइंडफुलनेस की क्लास चलाने में आपको मदद मिलेगी।

माइंडफुलनेस क्या है?
इसे समझने के लिए 2 शब्दों को ध्यान से समझ लें।

माइंडफुलनेस (Mindfulness) और माइंड-फुल्ल (Mind-full)
  • माइंडफुलनेस (Mindfulness) का अर्थ है पूरा दिमाग लगाकर वर्तमान के प्रति सजग बने रहने की अवस्था।
  • माइंड-फुल्ल (Mind-full) का अर्थ है तरह-तरह के विचारों में डूबा दिमाग जिसे विचारों की उलझन में ख़याल ही नहीं है कि वह क्या कर रहा है।
इसलिए वर्तमान में बने रहना, अभी के प्रति सजग-सचेत रहना ही माइंडफुलनेस है।
माइंडफुलनेस ही हैप्पीनेस का आधार है।

इस क्लास के बारे में कुछ ख़ास बिंदु समझ लें:
माइंडफुलनेस क्लास हर सप्ताह के पहले दिन सोमवार या फिर उसके अगले दिन (यदि सोमवार को छुट्टी हुई) ली जाएगी। इस क्लास के दौरान 30-35 मिनट के पीरियड में तीन प्रमुख चरण होंगे:

1.a. शुरूआत में 3-5 मिनट का माइंडफुलनेस चेक इन।

1.b. इस अभ्यास के बाद बच्चों के अनुभव पर लगभग 5-8 मिनट की चर्चा। इसमें हर सप्ताह कुछ अलग-अलग बच्चों से उनका अनुभव पूछें और माइंडफुलनेस से उनके कार्य या बरताव में आए बदलाव पर चर्चा करें। शिक्षक से अनुरोध है कि वे बच्चों को किसी भी अपेक्षित परिणाम का सुझाव न दें बल्कि बच्चों को स्वयं के अंदर खोज कर जवाब देने में मदद करें।

2. माइंडफुलनेस के अभ्यास के तहत लगभग 5 मिनट अपने विचारों या शरीर में चल रही घटनाओं के प्रति सजगता के अभ्यास के लिए दी गई अलग-अलग गतिविधि को क्लास में करवाएँ। ये गतिविधियाँ हर सप्ताह अलग-अलग होंगी। इसके बाद किए गए अभ्यास पर विद्यार्थियों से लगभग 15 मिनट की चर्चा करें। शिक्षक से अनुरोध है कि प्रति सप्ताह होने वाले इस अभ्यास के उपरांत चर्चा में अलग-अलग विद्यार्थियों को अपनी बात रखने के लिए प्रोत्साहित करें और कोशिश करें कि 3 से 4 सप्ताह में हर बच्चा अपनी बात ज़रूर रखे।

3. क्लास के अंत में हर रोज़ की तरह 1-2 मिनट का माइंडफुलनेस का अभ्यास।

माइंडफुलनेस के अभ्यास से कई फायदे हैं, जैसे:
  • पढ़ाई के दौरान कक्षा में ध्यान बनाए रखने में मदद।
  • अध्यापक की बातों को ध्यान से सुनने में मदद।
  • स्कूल तथा घर पर पढ़ाई करते वक्त पढ़ाई पर फोकस बनाए रखने में मदद।
  • सोचने समझने की क्षमता और स्मरण-शक्ति में सुधार
  • पढ़ाई के अलावा भी किसी और काम को करते समय,, उस काम में ध्यान लगा कर रखने में सहायता
  • हर वक्त सजग रहने की क्षमता का बढ़ना
  • बात करते वक्त, खाते वक्त या कोई कार्य करते वक्त यह ध्यान रखने में मदद मिलना कि कहीं हम कुछ गलत काम तो नहीं कर रहे या गलत बात तो नहीं कह रहे।
विद्यार्थियों के लिए माइंडफुलनेस का अभ्यास:
माइंडफुलनेस के अभ्यास से विद्यार्थियों को कुछ ऐसी गतिविधियाँ करने का अभ्यास होगा जो वे अपने निजी जीवन में इस्तेमाल कर पाएँगे व लाभान्वित होंगे। यह ध्यान में रखा जाए कि प्रत्येक विद्यार्थी अलग-अलग गतिविधियों से कनेक्ट (connect) कर पाएँ ।

शिक्षक के लिए कुछ विशेष निर्देश (ऐसा करें):
  • ध्यान की इस कक्षा में ध्यान का अभ्यास करवाते समय आप स्वयं भी सक्रिय भागीदार बनें।
  • जब कक्षा में प्रवेश करें तो अपनी मनःस्थिति को लेकर सजग रहें व कोशिश करें कि आपके विचार और भावनाएँ स्थिर रहें। याद रखें कि बच्चा शिक्षक के व्यवहार पर भी ध्यान देता है।
  • विद्यार्थियों के साथ प्यार, सौहार्द व विनम्रता के साथ पेश आएँ और मधुर भाषा में बात करें।
  • ध्यान की प्रक्रिया शुरू होने के पहले यह सुनिश्चित करें कि कक्षा का वातावरण शांत हो और हर विद्यार्थी अपने आप को सहज महसूस करे।
  • यह भी देखें कि ध्यान के पश्चात वह अपने अनुभव साझा कर सके। कोई भी विद्यार्थी एक सुरक्षित और सहज वातावरण में ही अपनी बात कहना चाहता है या कह पाता है।
  • ध्यान दें कि आपके धैर्य और व्यवहार की आवश्यकता सिर्फ ध्यान की कक्षा में ही नहीं है, बल्कि दिन भर में कई बार आपके समक्ष ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं जहाँ पर आपको सहजता, सरलता और धैर्य की आवश्यकता होगी।
  • आपका विद्यार्थी न सिर्फ कक्षा में बल्कि कक्षा के बाहर भी आपके व्यवहार से सीख रहा होता है।
  • ध्यान के अभ्यास से हमारा उद्देश्य विचारों या भावनाओं से दूर होना या उनको दबाना कदापि नहीं हैं। हमारे इस प्रयास का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपने वातावरण, संवेदनाओं, विचारों एवं भावनाओं के प्रति सजग करना है जिससे वे अपने सामान्य व्यवहार में सोच-विचार करके बेहतर प्रतिक्रिया देने में सक्षम हो जाएँ।
  • विद्यार्थियों के शांत होने का इंतज़ार करें। उनके शांत होने पर ही ध्यान की गतिविधि शुरू करें।
ध्यान रखने की बातें (ऐसा न करें):
  • ध्यान रखें कि इस दौरान विद्यार्थियों को किसी शब्द या मंत्र का उच्चारण करने को न कहें।
  • हैप्पीनेस व ध्यान की कक्षा में किसी तरह के तनावपूर्ण अभिव्यक्ति जैसे- किसी बात पर विद्यार्थियों को डाँटने या सख्त शब्दों में निर्देश देने से बचें।
  • ध्यान देने के अभ्यास के लिए किसी भी तरह से किसी भी बच्चे पर दबाव न डालें।
  • ध्यान देने के अभ्यास को बच्चे कोई साधना न समझ लें।
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  • सत्र 1 (Understanding Breathing)
  • सत्र 2 (Mindful Listening- I)
  • सत्र 3 (Mindful Listening- II)
  • सत्र 4 (Mindful Breathing)
  • सत्र 5 (Temperature of Breath)
  • सत्र 6 (Smiling Breath)
  • सत्र 7 (Mindful Touch)
  • सत्र 8 ( Mindful Seeing- I)
  • सत्र 9 ( Mindful Seeing- II)
  • सत्र 10 (Mindful Smelling)
  • सत्र 11 (Mindful Scribbling)
  • सत्र 12 (Mindful Drawing/Scribbling)
  • सत्र 13 (Heartbeat Activity)
  • सत्र 14 (Mindful Stretching-I)
  • सत्र 15 (Mindful Stretching-II)
  • सत्र 16 (Mindful Sitting)
  • सत्र 17 (Mindful Standing)
  • सत्र 18 (Mindful Walking)
  • सत्र 19 (Mindfulness of Feelings-I)
  • सत्र 20 (Mindfulness of Feelings- II)  

4. सम्मान (Respect)

उद्देश्य: ख़ुद में और परिवार, दोस्त, विद्यालय व समाज में एक-दूसरे के लिए सम्मान देख पाना, महसूस करना और व्यक्त करना।

शिक्षक के संदर्भ के लिए नोट: सम्मान को दो तरह से देखा जाता है।

A. आत्मसम्मान (Self-respect): यदि हम एक व्यक्ति की अनिवार्य आवश्यकताओं को देखें तो रोटी, कपड़ा और मकान के बाद सम्मान और पहचान उसकी बहुत बड़ी आवश्यकताएँ हैं। अपमान के साथ शायद ही कोई व्यक्ति रोटी स्वीकार करता है। इस आधार पर हम कह सकते हैं कि एक व्यक्ति के लिए उसका सम्मान और पहचान रोटी, कपड़ा और मकान से भी बड़ा मुद्दा होता है।
अभी सम्मान पाने के प्रयासों के बारे में देखा जाए तो हम पाते हैं कि अधिकतर लोग पद, पैसा, रंग-रूप, भाषा और ताकत के आधार पर सम्मान पाना चाहते हैं। इस बात को हम अपने में अच्छे से जाँचकर देख सकते हैं कि यदि कोई व्यक्ति समाज के लिए किसी भी प्रकार से उपयोगी नज़र नहीं आता है या उसका व्यवहार दूसरे लोगों के प्रति ठीक नहीं है तो चाहे उसके पास कितने ही पैसे हों, कोई भी पद हो, कैसा भी रंग-रूप हो, कितनी ही अच्छी कोई भाषा बोलता हो और कितनी भी ताकत हो, हम मन से उसे सम्मानित व्यक्ति नहीं मानते हैं फिर चाहे दिखावे के रूप में हम उसे कितनी भी बड़ी माला पहनाते रहें।

सही मायने में आत्मसम्मान क्या है?
सभी व्यक्ति अपनी उपयोगिता व अपने महत्त्व को जानकर स्वयं में सम्मानित महसूस करते हैं। यहाँ उपयोगिता से मतलब है- स्वयं ख़ुश रहकर दूसरों के ख़ुश रहने में सहयोगी होना। ऐसी योग्यता सही समझ और अभ्यास से विकसित होती है।
यदि आत्मसम्मान शब्द का अर्थ देखें तो आत्म+सम्+मान अर्थात स्वयं का सही मूल्यांकन (right evaluation of self) करना ही आत्मसम्मान है। जब हम अपनी सोचने-समझने की असीम क्षमताओं को ‘सिखाने’ और ‘समझाने’ की योग्यताओं में विकसित करते हैं तो हम स्वयं ख़ुश रहकर दूसरों के ख़ुश रहने में सहयोगी होने के रूप में उपयोगी हो जाते हैं। अपनी इस उपयोगिता को जानकर ही हम आत्मसम्मान का भाव (feeling of self-respect) महसूस करते हैं।
जैसे-जैसे हम अपनी उपयोगिता बढ़ाते जाते हैं वैसे-वैसे हम स्वयं में सम्मानपूर्वक जीने लगते हैं। इससे हम अपने सम्मान के लिए दूसरों पर निर्भरता से मुक्त होते जाते हैं।
हम व्यवहार में देखते हैं कि जो लोग स्वयं में सम्मानित महसूस नहीं करते हैं वे कोई दिखावा करके दूसरों से सम्मान पाने का असफल प्रयास करते हैं। अब इस बात पर विचार किया जा सकता है कि स्वयं के प्रति सम्मान का भाव अपनी उपयोगिता से महसूस होगा या यह भाव किसी दूसरे व्यक्ति से मिलेगा जो ख़ुद ही इसकी तलाश में है।

B. परस्परता में सम्मान (Respect for each other):
यदि हम धरती के सभी लोगों की मूल चाहत को देखें तो पाते हैं कि सभी लोग हमेशा ख़ुश रहना चाहते हैं, सभी clarity के साथ जीना चाहते हैं। इसके साथ ही यदि हम सभी लोगों की मूल क्षमता के बारे में देखें तो पाते हैं कि सभी लोगों में सोचने-समझने की असीम ताकत (unlimited potential) होती है।
इस प्रकार प्राकृतिक आधार पर देखें तो धरती के सभी इनसान समान हैं और सभी में समानता की चाहत भी है। अत: जब हम किसी व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के अपने समान ही एक व्यक्ति के रूप में स्वीकार करते हैं तो उसके प्रति हम सम्मान का भाव महसूस करते हैं। इसे हम ख़ुशी (happiness) के रूप में महसूस करते हैं।
किसी व्यक्ति के श्रेष्ठ व्यक्तित्व और प्रतिभा को स्वीकार करने पर भी हम ऐसा ही महसूस करते हैं।
यदि सम्मान शब्द का अर्थ देखें तो सम्+मान अर्थात सही मूल्यांकन (right evaluation) करना ही सम्मान है। अत: किसी इनसान को बिना किसी भेदभाव के, अपने जैसे ही एक इनसान के रूप में स्वीकार (accept) करना ही उसका सही मूल्यांकन या सम्मान है। सम्मान एक व्यक्ति की पहचान का आधार होता है।
जब हम किसी के प्रति सम्मान के भाव के साथ होते हैं तो उसके प्रति हमारा व्यवहार सौहार्दपूर्ण (मित्रवत/दोस्ताना/cordial) रहता है।
जब हम किसी व्यक्ति को अपने समान ही (सोचने-समझने की मूल क्षमता और ख़ुशी की चाहत के आधार पर) एक व्यक्ति के रूप में स्वीकार करते हैं तो वह व्यक्ति भी सम्मानित महसूस करता है। किसी भी व्यक्ति को भेदभाव स्वीकार नहीं होता है। जब भी किसी व्यक्ति के साथ जाति, धर्म, लिंग, पद, भाषा, पैसे आदि के आधार पर कोई भेदभाव किया जाता है तो वह बहुत अपमानित महसूस करता है। साथ ही भेदभाव करने वाला व्यक्ति भी कभी अच्छा महसूस नहीं करता है, क्योंकि व्यक्ति-व्यक्ति में समानता प्रकृति के नियम के आधार पर है और प्राकृतिक नियम के विपरीत चलकर कोई भी ख़ुश नहीं रह सकता है। अत: दूसरों के प्रति सम्मान का भाव रखना किसी पर एहसान करना नहीं है बल्कि स्वयं के ख़ुश रहने के लिए एक प्राकृतिक बाध्यता है।
अत: दूसरे इनसान में समानता देखे बिना हम अपने में उसके प्रति सम्मान का भाव महसूस नहीं कर सकते हैं। जब कोई भाव महसूस न हो रहा हो और फिर भी हम उसे व्यक्त करने के तौर-तरीक़े (actions) अपनाते हैं तो उसे ‘दिखावा’ कहते हैं। जैसे- न चाहते हुए भी किसी को माला पहनाना, पैर छूना आदि।
सम्मान का भाव महसूस सभी को एक जैसा ही होता है, लेकिन उसे व्यवहार में व्यक्त करने के तौर-तरीक़े समय, स्थान और संस्कृति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। जैसे- सम्मान के भाव को कोई पैर छूकर, कोई झुककर या किसी अन्य तरीक़े से व्यक्त कर सकता है।
सम्मान के भाव (feeling of respect) को पहचानने (to explore), महसूस करने (to experience) और व्यक्त करने (to express) के लिए निम्नलिखित सत्र (sessions) रखे गए हैं।

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सत्र: 1

उद्देश्य : बच्चे अपने अन्दर अपने कौशल या समझ का इस्तेमाल कर दूसरों के लिए उपयोगी होकर स्वयं में सम्मानित महसूस करे।

समय : प्रत्येक सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक सत्र को कम से कम दो दिन (दो अभिव्यक्ति दिन ) बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए।

शिक्षक नोट :जब भी हम किसी की आवश्यकता पड़ने पर उसकी मदद कर पाते हैं तो हमें अच्छा लगता है। हमारे कौशल या समझ से वह कार्य अच्छी तरह हो पाना स्वयं की उपयोगिता दर्शाता है। जब भी हम अपने माता पिता, भाई बहन या किसी और के लिए उपयोगी होते हैं तो उनकी मदद तो होती ही है, पर साथ ही हम स्वयं के लिए सम्मान महसूस करते हैं।

बच्चो द्वारा निम्न प्रश्नों पर अभिव्यक्ति :

  • आप कब घर के सदस्यों की मदद करते हो? 
  • जब भी आप किसी की मदद कर पाते है तब क्या अपने उस कार्य को दूसरो के साथ साझा करने में अच्छा लगता है? कैसा महसूस होता है? 
  • जब कोई ध्यान दे कर आपकी सारी बात सुनता है तब आपको कैसा महसूस होता है ? 
  • क्या कभी दोस्त, भाई बहन या मम्मी पापा से बात करते समय आपके मन में आया कि आप भी तो वही चाहते थे जैसा उन्होंने कहा? वह कौनसी बात थी? 
  • जब भी आपने किसी का ध्यान रखा या देखभाल की तब आपको ख़ुशी मिली या सिर्फ बोझ महसूस हुआ? 
  • पिछले सप्ताह आपने ऐसे कितने काम किये जो बड़ो द्वारा आपको करने के लिए कहे गए?


अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य : अगले अभिव्यक्ति दिवस पर अगले मूल्य की रूपरेखा की शुरुआत की जा सकती है | अगले मूल्य के लिए बच्चो को कुछ उदहारण देकर भी बात की स्पष्टता बनायीं जा सकती है | शिक्षक के लिए ये अत्यंत अनिवार्य रहेगा की जब भी वे अगले सत्र या अगले मूल्य की ओर अग्रसर हो वह सुनिश्चित कर ले की “ शिक्षक के लिए नोट “ में उनके लिए क्या बातें ध्यान में रखने के लिए की कही गयी है | यह सुनिश्चितता बात को तात्विकता और व्यवहारिकता से जोड़ने में बहुत लाभप्रद रहती है जिससे बात को उसी गहरायी से समझा और जाना जा सकता है जिस भाव में उसे प्रस्तुत करने की कोशिश की गयी है |

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3. कृतज्ञता (Gratitude)

उद्देश्य: अपने से बड़े, जैसे- माता-पिता, गुरु, परिवार व आप-पड़ोस में बड़े-बुजुर्ग आदि की अपनी ज़िंदगी में भागीदारी देख पाना, उनके लिए कृतज्ञता महसूस करना और व्यक्त करना।

शिक्षक के संदर्भ के लिए नोट:
ज़िंदगी में आगे बढ़ने के लिए बहुत से लोग हमारा सहयोग करते हैं। जब हम मन से उस सहयोग को स्वीकार करते हैं तो हम उनके प्रति आभार (कृतज्ञता) महसूस करते हैं। इससे अपने अंदर एक स्थिरता (ठहराव/stability) आती है, जिसे हम ख़ुशी (happiness) के रूप में महसूस (feel) करते हैं।
जब हम किसी के प्रति कृतज्ञता के भाव के साथ होते हैं तो उसके प्रति हमारा व्यवहार ‘सौम्य’ (विनम्र/humble) रहता है और हम स्वयं में नियंत्रित (disciplined) रहते हैं।
यदि हमारे समक्ष किसी का व्यवहार अशोभनीय है तो इसकी बड़ी संभावना है कि उसकी उन्नति में या तो हमारा कोई योगदान नहीं रहा है या वह उस योगदान को पहचान नहीं पा रहा है।
जब भी हम ख़ुश होते हैं तो अपनी ख़ुशी अपनों के साथ साझा (share) करना चाहते हैं। इससे हम और ज़्यादा ख़ुशी महसूस करते हैं। कोई व्यक्ति जब परेशान होता है तो वह अकेला रहना चाहता है, लेकिन ख़ुशी के समय शायद ही कोई व्यक्ति अकेला रहना पसंद करे। हम जब भी किसी भाव के साथ होंगे तो उसे व्यक्त करना चाहेंगे ही। भाव को व्यक्त करने वाले को ही ‘व्यक्ति’ कहते हैं।
आज हम जितनी सुविधाओं (भोजन, कपड़े, मोबाइल, बस, ट्रेन आदि) का उपयोग कर रहे हैं, उनके लिए यदि हम उनकी खोज या आविष्कार से लेकर उनके परिष्कृत रूप में आने तक लोगों के योगदान और मेहनत को देखें तो स्वयं को ऋणी महसूस करेंगे। इस ऋण को चुकाया भी नहीं जा सकता है। किसी ऋण के साथ एक व्यक्ति ख़ुशहालीपूर्वक नहीं जी सकता है। प्रकृति में इस ऋण के भार को कम करने का एक ही तरीका है और वह है- कृतज्ञ होना। कृतज्ञ होने का मतलब केवल thanks, धन्यवाद या शुक्रिया कहना नहीं है। जब हम मन से किसी के योगदान को हमेशा के लिए स्वीकारते हैं तभी कृतज्ञता का भाव महसूस होता है। ऐसा होने पर एक व्यक्ति समाज के विकास के लिए अपना योगदान देना शुरू कर देता है। समाज में अपनी भागीदारी के साथ जीना ही हमारी ख़ुशी का सही रास्ता है और यही जीवन की सार्थकता भी है।
यदि प्रकृति की यह व्यवस्था समझ में आती है तो इसके नियमानुसार यहाँ योगदान देनेवाला ही ख़ुश रह सकता है जबकि अभी अधिकतर लोग यही मानकर दिन-रात कड़ी मेहनत कर रहे हैं कि यहाँ अधिक से अधिक पाने से किसी दिन सुखी (happy) हो जाएँगे।
कृतज्ञता के भाव में विश्वास, सम्मान और स्नेह का भाव शामिल रहता है। कृतज्ञता को हम ग्रेटिट्यूड, आभार और एहसानमंदी के नाम से भी जानते हैं। कृतज्ञता के भाव (feeling of gratitude) को पहचानने (to explore), महसूस करने (to experience) और व्यक्त करने (to express) के लिए निम्नलिखित सत्र (sessions) रखे गए हैं।

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सत्र : 01

उद्देश्य : अपनी ख़ुशी के लिए दूसरों के द्वारा किए गए कार्यों की ओर बच्चो का ध्यान दिलाना।

समय : प्रत्येक सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक सत्र को कम से कम दो दिन (दो अभिव्यक्ति दिन ) बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए।

शिक्षक नोट : हमारी ख़ुशी में घर के सदस्यों का योगदान/भागीदारी होती ही है अतः जब भी हम अपने रोज़मर्रा के कार्यो को देखें तो ये सुनश्चित कर सके की हमारे छोटे छोटे कार्यो में बहुत सारे लोगो का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष योगदान होता ही है|

बच्चो द्वारा अभिव्यक्ति : हमारी ख़ुशी में दूसरे(घर के सदस्य)लोगों के योगदान/भागीदारी की ओर बच्चो का ध्यान दिलाने के लिए निम्नलिखित प्रस्तावित प्रश्नों पर समूह में या जोड़े में अपने अनुभव अभिव्यक्त करें ।
  • जब भी आपके लिए खाना बनता है तब किन किन बातों का ध्यान रखा जाता है ? 
  • आपकी गलतियों को सुधारने के लिए घर के सदस्य क्या-क्या करते है | बच्चे आपस में व्यक्त करेंगे |
  • आप परिवार में किन-किन की बात मानते है और उन्ही की क्यू मानते हैं ।
  • आपको परिवार में कौन-कौन अच्छी बातें बताते है और क्या बातें बतायी जाती हैं ।
  • रोज़मर्रा के सारे कार्य क्या आप अपने आप कर सकते है ?
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य : अगले अभिव्यक्ति दिवस पर इस बात पर ध्यान देना है कि घर के अलावा भी क्या कोई उनको रोज़मर्रा के कार्यो में भागिदार होता है ? (जैसे : स्कूल में खाना परोस कर देना, सड़क पार करवाना,बाज़ार से सामान ला कर देना,पढ़ाना इत्यादि) इस दौरान बच्चे घर के अलावा दूसरो के द्वारा अपनी ज़िन्दगी की उन्नति में योगदान को देखने का प्रयास करेंगे और अगले अभिव्यक्ति दिवस पर यही चर्चा का विषय रहेगा |

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सत्र 02:

उद्देश्य : बच्चे अपना ध्यान इस ओर देंगे की क्या घर के अलावा भी लोग है जो उनकी उन्नति में योगदान या भागीदार होते है चाहे वो उन्नति उनके शरीर सापेक्ष हो या मानसिकता के विकास के लिए |

समय : प्रत्येक सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक सत्र को कम से कम दो दिन (दो अभिव्यक्ति दिन ) बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए।

शिक्षक नोट : हमारी ख़ुशी में दूसरे(घर के अलावा के सदस्य)के योगदान/भागीदारी भी होती है अतः जब भी हम अपने रोज़मर्रा के कार्यो को देखें तो ये सुनश्चित कर सके की हमारे छोटे छोटे कार्यो में बोहोत सारे लोगो का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष योगदान होता ही है|

बच्चो द्वारा अभिव्यक्ति :
  • स्कूल में आप कितने लोगो को जानते है?
  • जिनको आप स्कूल में जानते है वे सब आपके लिए क्या-क्या कार्य करते है? बच्चे छोटे छोटे समूहों में व्यक्त होंगे | 
  • जिनको आप स्कूल में नहीं भी जानते क्या वो आपके लिए कोई कार्य करते है?कुछ कार्य जो उनके द्वारा किये जाते है वे कौन से कार्य है?
  • आपको कभी किसी बड़े द्वारा कुछ काम करने के लिए मना भी किया जाता है?वे कैसे कैसे काम होते है जब आपको उन्कोम्कारने की इजाजत नहीं मिलती? 
  • स्कूल में बाहर के लोगो को बिना इज़ाज़त अन्दर आने से कौन रोकता है? अगर वे न हो तो क्या कोई दिक्कत होगी?
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य : अगले अभिव्यक्ति दिवस पर आप इस बात पर चर्चा करेंगे कि घर के अलावा भी कितने लोग है जो हमारा ध्यान रखते है ,उन सभी लोगो के बारे में ध्यान से सोचना है और उनके कार्यो पर ध्यान भी देना है |

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सत्र 03:

उद्देश्य : बच्चे अपना ध्यान इस ओर देंगे की क्या घर के अलावा भी लोग है जो उनकी उन्नति में योगदान या भागीदार होते है चाहे वो उन्नति उनके शरीर सापेक्ष हो या मानसिकता के विकास के लिए |

समय : प्रत्येक सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक सत्र को कम से कम दो दिन (दो अभिव्यक्ति दिन ) बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए।

शिक्षक नोट : हमारी ख़ुशी में दूसरे(घर के अलावा के सदस्य)के योगदान/भागीदारी भी होती है अतः जब भी हम अपने रोज़मर्रा के कार्यो को देखें तो ये सुनश्चित कर सके की हमारे छोटे छोटे कार्यो में बोहोत सारे लोगो का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष योगदान होता ही है|

बच्चो द्वारा अभिव्यक्ति : हमारी ख़ुशी में दूसरे(घर के अलावा के सदस्य)के योगदान/भागीदारी की ओर बच्चो का ध्यान पूरे हफ्ते बना रहा | उस ध्यान को निम्न प्रस्तावित प्रश्नों के माध्यम से अभिव्यक्ति कराएं |
  • रोजाना स्कूल आने पर क्या आपको आपकी कक्षा साफ़ सुथरी मिलती है ? आप भी स्कूल को साफ़ रखने के लिए क्या कुछ कर सकते है ?
  • स्कूल और घर के साथ-साथ भी क्या कोई आपके लिए कुछ कार्य करते है ?अगर किसी दिन आपकी आंटी जी(आया) स्कूल ना आये तो क्या आपको कोई दिक्कत होगी?
  • क्या स्कूल के अलावा भी आस पड़ोस के कुछ लोग हमारा ध्यान रखते है ? वे हमारे लिए क्या क्या करते है |
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य : अगले सप्ताह इस बात पर चर्चा होगी कि जब भी कोई बड़ा आपकी मदद करता है तो उस समय आपको कैसा महसूस होता है। जैसे : मान लीजिये आपको सुबह स्कूल आने के लिए आपकी कोई ज़रुरत की चीज़ नहीं मिल रही थी और सारे घर में ढूंढ लेने पर भी आपको याद नहीं आ रहा था की पिछले दिन स्कूल से घर लौट कर उसे कहाँ रखा था | तभी आपकी दादी आती है और आपकी वस्तु दे देती है और आप उसका उपयोग कर लेते है | अब आपको ये देखना है की जब कोई उम्र में बड़ा व्यक्ति आपके पोषण , संरक्षण और समझ को निरंतर बढाने का दायित्व निभाता है तब आपको कैसा महसूस होता |

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सत्र : 04

उद्देश्य : बच्चो को बड़ो के प्रति कृतज्ञता का भाव महसूस कराना।

समय : प्रत्येक सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक सत्र को कम से कम दो दिन (दो अभिव्यक्ति दिन ) बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए।

शिक्षक के लिए नोट : ज़रूरत के समय जब भी कोई हमारी मदद करता है तो हमें अच्छा ही महसूस होता है। इतना ही नहीं, बाद में भी उसके बारे में सोचने पर हमें अच्छा महसूस करते है। ऐसा सभी के साथ होता है, क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से तय है। ज़रूरत के समय मदद करने पर, मदद करने वाले व मदद लेने वाले दोनों को ही अच्छा लगता है और नहीं करने पर दोनों को ही अच्छा नहीं लगता है। अत: इस सत्र का उद्देश्य है कि सभी बच्चे अपने में यह देख पाएँ कि किसी के द्वारा की गई मदद मिलने और करने पर हमें कैसा महसूस होता है।

बच्चो द्वारा अभिव्यक्ति : निम्न प्रश्नों के माध्यम से बच्चो से पूछा जाए की पूरे हफ्ते जो कार्य(ध्यान देना) उन्होंने किया तो कैसे-कैसे भाव वे अन्दर महसूस कर पाए|
  • पिछ्ले सप्ताह ऐसे कितने कार्य थे जिनमें आपको ऐसा लगा की आपको किसी की मदद की ज़रूरत पड़ी ?आपस में साझा करेंगे|
  • कितने कार्य आप स्वयं भी कर पाए ?आपस में व्यक्त हो|
  • पिछले सप्ताह जिसने भी आपकी मदद की वो आपके खुद मांगने पर मिली या बिना बोले ही उन्होंने आपका कार्य कर दिया ?
  • जब भी कभी बिना मांगे आपको मदद मिली ,तब आपको कैसा महसूस हुआ ?
  • इसके विपरीत किसी को बोल कर मदद मांगी तब आपके में मन में कैसा महसूस हुआ?
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य : अगले अभिव्यक्ति दिवस पर आप इस बात पर चर्चा करेंगे कि जब भी कोई हमारे लिए अपना समय देता है चाहे कोई कार्य करने के लिए या हमारी बात ही सुनने के लिए ही तब हमे कैसा महसूस होता है और इसके विपरीत भी जब कभी भी हमारी तरफ ध्यान नहीं दिया जाता तब हम कैसा महसूस करते है |

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सत्र : 05

उद्देश्य : अपनी ख़ुशी के लिए दूसरों के द्वारा किए गए कार्यों की ओर बच्चो का ध्यान दिलाना।

समय : प्रत्येक सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक सत्र को कम से कम दो दिन (दो अभिव्यक्ति दिन ) बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए।

शिक्षक नोट : हमारी ख़ुशी में घर के सदस्यों का योगदान/भागीदारी होती ही है अतः जब भी हम अपने रोज़मर्रा के कार्यो को भी तो ये सुनश्चित कर सके की हमारे छोटे छोटे कार्यो में बहुत सारे लोगो का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष योगदान होता ही है|

समय : प्रत्येक सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक सत्र को कम से कम दो दिन (दो अभिव्यक्ति दिन ) बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए।

बच्चो द्वारा अभिव्यक्ति : हमारी ख़ुशी में दूसरे(घर के सदस्य)लोगों के योगदान/भागीदारी की ओर बच्चो का ध्यान दिलाने के लिए निम्नलिखित प्रस्तावित प्रश्नों पर समूह में या जोड़े में अपने अनुभव अभिव्यक्त करें ।
  • सुबह आपको कौन-कौन उठाता है और वे आपको कैसे-कैसे तरीको से उठाते है?
  • क्या कोई ऐसा भी बच्चा है जो अपने आप उठ जाता है ? ऐसा क्या रोज़ करते है या कभी ध्यान जाता है की पहले कोई और भी उठता था ?
  • आपको स्कूल भेजने में घर के सदस्य क्या-क्या तैयारी करते है ?जैसे :नहलाना ,खाना बनाना,साफ़ कपडे तैयार रखना इत्यादि | 
  •  आपके लिए घर में खाना कौन कौन बनाता है ?
  • जब कभी भी आपका स्वास्थ्य ठीक नहीं होता तो क्या सिर्फ मम्मी-पापा ही आपका ख़याल रखते है या कोई दूसरा भी आपका ध्यान रखता है ?
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य : अगले अभिव्यक्ति दिवस पर इस बात ध्यान देना है की आपके रोजाना के कार्यो में आपके घर के सदस्यों की क्या क्या भागीदारी होती है |किसी के द्वारा की गई मदद मिलने और करने पर हमें कैसा महसूस होता है।

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सत्र : 06

उद्देश्य : बच्चो को बड़ो के प्रति कृतज्ञता का भाव महसूस कराना।

समय : प्रत्येक सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक सत्र को कम से कम दो दिन (दो अभिव्यक्ति दिन ) बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए।

शिक्षक के लिए नोट : ज़रूरत के समय जब भी कोई हमारी मदद करता है तो हमें अच्छा ही महसूस होता है। इतना ही नहीं, बाद में भी उसके बारे में सोचने पर हमें अच्छा महसूस करते है। ऐसा सभी के साथ होता है, क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से तय है। ज़रूरत के समय मदद करने पर, मदद करने वाले व मदद लेने वाले दोनों को ही अच्छा लगता है और नहीं करने पर दोनों को ही अच्छा नहीं लगता है।

बच्चो द्वारा अभिव्यक्ति : निम्न प्रश्नों के माध्यम से बच्चो से पूछा जाए की पूरे हफ्ते जो कार्य(ध्यान देना) उन्होंने किया तो कैसे-कैसे भाव वे अन्दर महसूस कर पाए |
  • क्या कभी ऐसा हुआ आपके साथ की आपने किसी से कुछ मदद मांगी और दुसरे व्यक्ति ने आपकी मदद की तब आपको कैसा महसूस हुआ?जैसे :जूतों के फीते बांधना आपको नहीं आता तब इस कार्य में आपकी किस किस ने मदद की ,खाने की थाली उठाने में आप असमर्थ थे तब आपकी किसने मदद की ,आपके बालो में कंघी कौन करता है इत्यादि |
  • आपको क्या लगता है जब कोई आपके कहने पर भी आपके कार्यो में आपकी मदद नहीं कर पाया तो उस व्यक्ति को कैसा महसूस हुआ होगा ?जैसे आपको पढ़ाई कराना ,आपके साथ खेलना |
  • आपको क्या लगता है उन्होंने जानबूझ कर ऐसा किया या कोई अन्य कारण भी रहा होगा ?
  • आपने किस-किस की मदद की और किस तरह से?
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य : अभी तक बच्चे इतना ही देख पाए की उनकी उन्नति के लिए बड़ो की उनकी ज़िंदगी में क्या क्या भागीदारी और उपयोगिता होती है | इसके साथ साथ बच्चो का ध्यान इस ओर भी गया की मदद या भागीदारी देखने पर उनके मन में कैसे कैसे भाव उत्पन्न होते है | अब आगे के सप्ताह में बच्चो का ध्यान इस ओर चला जाये की वे मदद मिलने पर किस किस तरह से व्यक्त हो पाए जिससे उनमें दूसरों के प्रति कृतज्ञता के भाव को व्यक्त करने के लिए प्रेरणा मिली या बनी ।

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सत्र : 07

उद्देश्य : बच्चो को दूसरों के प्रति कृतज्ञता के भाव को व्यक्त करने के लिए प्रेरित करना।

समय : प्रत्येक सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक सत्र को कम से कम दो दिन (दो अभिव्यक्ति दिन ) बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए।

शिक्षक के लिए नोट : जब भी हम ख़ुश होते हैं तो अपनी ख़ुशी अपनों के साथ साझा करना चाहते हैं। इससे हमे और ज़्यादा ख़ुशी महसूस होती हैं। दूसरों तक अपने भावों को पहुचाने के लिए भाषाएँ (मौखिक, लिखित, सांकेतिक) विकसित हुई हैं साथ ही साथ कुछ कलाए भी विकसित हुई हैं, जैसे-संगीत, नृत्य, रंगमंच , ड्रॉइंग, पेंटिंग, स्कल्पचर आदि। इस प्रकार देखें तो हमारी ख़ुशी का संसार एक-दूसरे के प्रति सही भावों के साथ होने और विभिन्न माध्यमों व तरीकों से उन्हें व्यक्त करने से ही जुड़ा हुआ है। अत: इस सत्र का उद्देश्य है कि बच्चो को उनकी रुचि और कौशल के आधार पर विभिन्न माध्यमों से बड़ो के प्रति अपने कृतज्ञता के भाव को व्यक्त करने के लिए अवसर उपलब्ध कराए जाएँ।

बच्चो द्वारा अभिव्यक्ति : निम्नलिखित प्रस्तावित प्रश्नों के द्वारा बच्चो को दूसरों के प्रति अपने कृतज्ञता / आभार / धन्यवाद के भाव को विभिन्न माध्यमों से व्यक्त करने के अवसर दिए जाएँ। 
  • बड़ो द्वारा आपके लिए किये गए कार्य पर क्या आपने आभार जताया या धन्यवाद कहा और क्या ये ज़रूरी था ?
  • किसी बड़े के कहने पर आपने दूसरो को आभार जताते है या ये आपको अच्छा लगता है इसीलिए आप ऐसा कर पाए?
  • क्या ऐसा हुआ की आप आभार नहीं जता पाए या धन्यवाद नहीं कह पाए ,तब आपको कैसा महसूस हुआ ?
  • कितने लोगो का आपने आभार जताया ? आपस में साझा करें |
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य : अगले अभिव्यक्ति दिवस पर आप इस बात पर चर्चा करेंगे कि आपने दूसरों के ख़ुश रहने में कब-कब मदद की। अत: इस दौरान आप इसे देखने का प्रयास करें।

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सत्र : 08

उद्देश्य : बच्चो को दूसरों के प्रति कृतज्ञता के भाव को व्यक्त करने के लिए प्रेरित करना।

समय : प्रत्येक सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक सत्र को कम से कम दो दिन (दो अभिव्यक्ति दिन ) बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए।

शिक्षक के लिए नोट : जब भी हम ख़ुश होते हैं तो अपनी ख़ुशी अपनों के साथ साझा करना चाहते हैं। दूसरों तक अपने भावों को पहुचाने के लिए भाषाएँ (मौखिक, लिखित, सांकेतिक) विकसित हुई हैं साथ ही साथ कुछ कलाए भी विकसित हुई हैं, जैसे-संगीत, नृत्य, रंगमंच , ड्रॉइंग, पेंटिंग, स्कल्पचर आदि।

बच्चो द्वारा अभिव्यक्ति : निम्नलिखित प्रस्तावित प्रश्नों के द्वारा बच्चो को दूसरों के प्रति अपने कृतज्ञता / आभार / धन्यवाद के भाव को विभिन्न माध्यमों से व्यक्त करने के अवसर दिए जाएँ।
  • क्या क्या तरीके अपनाये आपने thanku कहने के लिए ? और क्या क्या तरीके खोजे जा सकते है आभार व्यक्त करने के लिए , बच्चे आपस में चर्चा करेंगे |
  • आपको क्या लगा आपके आभार व्यक्त करने से बड़ो को कैसा लगा होगा?
  • जब भी आप किसी का आभार जताते है तब उसका व्यवहार हमारे लिए कैसा हो जाता है ?
  • जब कोई आपका आभार जताता है तब आपको उसके प्रति कैसा महसूस होता है ?
  • स्कूल में अगर आपको किसी का आभार व्यक्त करना हो तो क्या उनके सामने जा कर उन्हें बोल पाएंगे?
  • अगर अभी किसी का thanku कहना हो तो किस का कहना चाहोगे और क्या तरीका अपनाओगे ?


अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य : अगले अभिव्यक्ति दिवस पर आप इस बात पर चर्चा करेंगे कि आपने दूसरों के ख़ुश रहने में कब-कब मदद की। अत: इस दौरान आप इसे देखने का प्रयास करें।

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सत्र : 09

उद्देश्य : दूसरों की ख़ुशी के लिए बच्चो को कृतज्ञता के भाव के साथ भागीदारी करने के लिए प्रेरित करना।

समय : प्रत्येक सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक सत्र को कम से कम दो दिन (दो अभिव्यक्ति दिन ) बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए।

शिक्षक के लिए नोट : इस सत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों को कृतज्ञता के भाव के साथ दूसरों की ख़ुशी के लिए अपने योगदान/भागीदारी के लिए प्रेरित करना है |

विद्यार्थियों द्वारा अभिव्यक्ति : निम्नलिखित प्रस्तावित प्रश्नों के माध्यम से बच्चो को अभिव्यक्ति के अवसर उपलब्ध कराए जाएँ।
  • आपने अपने माता-पिता के प्रति अपना आभार कैसे व्यक्त किया ?
  • मम्मी-पापा का हमे संसार में लाने का आभार भी क्या कोई आभार हो सकता है ?
  • अगर बड़ो के प्रति आभार न भी व्यक्त किया जाए तो क्या इससे कुछ उन्हें फ़र्क पड़ता है ?
  • आपके बड़े आपसे क्या-क्या अपेक्षा करते है ?
  • आपने अपने बड़ो के साथ कितना समय बिताया ?
  • बड़ो के साथ समय बिताना भी क्या आभार व्यक्त करने का एक तरीका हो सकता है ?
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य : अगले अभिव्यक्ति दिवस पर आप इस बात पर चर्चा करेंगे कि आपने दूसरों के ख़ुश रहने में कब-कब मदद की। अत: इस दौरान आप इसे देखने का प्रयास करें।

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सत्र : 10

उद्देश्य : दूसरों की ख़ुशी के लिए बच्चो को कृतज्ञता के भाव के साथ भागीदारी करने के लिए प्रेरित करना।

समय : प्रत्येक सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक सत्र को कम से कम दो दिन (दो अभिव्यक्ति दिन ) बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए।

शिक्षक के लिए नोट : कृतज्ञ होने का मतलब केवल thanks, धन्यवाद या शुक्रिया कहना मात्र नहीं अपितु जब हम मन से किसी योगदान को हमेशा के लिए स्वीकारते हैं तभी कृतज्ञता का भाव महसूस होगा | अत: इस सत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों को कृतज्ञता के भाव के साथ दूसरों की ख़ुशी के लिए अपने योगदान/भागीदारी के लिए प्रेरित करना है ताकि वे भी उन लोगों में शामिल न हो जाएँ जो बहुत कुछ पाकर भी परेशान रहते हैं।

विद्यार्थियों द्वारा अभिव्यक्ति : निम्नलिखित प्रस्तावित प्रश्नों के माध्यम से बच्चो को अभिव्यक्ति के अवसर उपलब्ध कराए जाएँ।
  • जिनको हम नहीं भी जानते क्या उनके प्रति भी आभार व्यक्त किया जा सकता है ? 
  • ऐसी कितनी वस्तुए है जो आपने नहीं बनायीं परन्तु उनका उपयोग करते है ?
  • जिन वस्तुओ का उपयोग आप करते है अगर वे न होती तो क्या आपको कोई दिक्कत होती ?
  • आप उन लोगो के प्रति कैसे आभार व्यक्त कर सकते है जिन्होंने आपके उपयोग के लिए वस्तुओ का निर्माण किया ?
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य : अगले अभिव्यक्ति दिवस पर अगले मूल्य की रूपरेखा की शुरुआत की जा सकती है | अगले मूल्य के लिए बच्चो को कुछ उदहारण देकर भी बात की स्पष्टता बनायीं जा सकती है | शिक्षक के लिए ये अत्यंत अनिवार्य रहेगा की जब भी वे अगले सत्र या अगले मूल्य की ओर अग्रसर हो वह सुनिश्चित कर ले की “ शिक्षक के लिए नोट “ में उनके लिए क्या बातें ध्यान में रखने के लिए की कही गयी है | यह सुनिश्चितता बात को तात्विकता और व्यवहारिकता से जोड़ने में बहुत लाभप्रद रहती है जिससे बात को उसी गहरायी से समझा और जाना जा सकता है जिस भाव में उसे प्रस्तुत करने की कोशिश की गयी है |

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2. स्नेह (Affection)

उद्देश्य: भाई-बहन, मित्र और सहपाठियों के साथ आपसी सहयोग और ख़ुशीपूर्वक साथ-साथ जीना देख पाना, एक-दूसरे के लिए स्नेह महसूस करना और व्यक्त करना।

शिक्षक के संदर्भ के लिए नोट:
हमारे जीवन का अधिकतर सुख-दु:ख अपने और अपनों के साथ जुड़ा हुआ है। ज़िंदगी में यह अपनों की संख्या भी बदलती रहती है। साथ ही अपना-पराया की मानसिकता भी हमारे सुख-दु:ख का एक बड़ा कारण है। संबंधों में दूरियाँ अपनेपन के एहसास का अभाव पैदा करती हैं जो बड़ा पीड़ादायक होता है। अत: एक ख़ुशहाल जीवन के लिए अपनों के प्रति अपनापन का एहसास बहुत ज़रूरी है। इसके साथ ही अपनी ख़ुशी का दायरा बढ़ाने के लिए अपनेपन का विस्तार भी ज़रूरी है ताकि सारा परायापन ख़त्म हो जाए, क्योंकि आज समाज में सबसे ज़्यादा भय इनसान के द्वारा बनाई गई अपने-पराए की दीवारों के कारण ही है।
सभी इनसान किसी न किसी रूप में एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। हम जैसे ही उस जुड़ाव या संबंध को स्वीकार करते हैं तो इससे अपने अंदर अपनेपन और सुरक्षा की भावना आती है, जिसे हम ख़ुशी के रूप में महसूस करते हैं।
जब हम किसी व्यक्ति के साथ कोई संबंध स्वीकार कर लेते हैं, जैसे- भाई, बहन, मित्र आदि तो अब उस व्यक्ति से मिलने पर या उसे याद करने पर हमारा बेचैन मन भी प्रसन्न हो जाता है।
जिन लोगों के प्रति हमारे अंदर स्नेह का भाव होता है उनसे कोई काम न होने पर भी सिर्फ़ ख़ुशी के लिए, ख़ुशी से और ख़ुशी में मिलने का मन करता है।
किसी व्यक्ति की मूल चाहत (ख़ुशी) के प्रति आश्वस्त (assure) होने पर उसके प्रति विश्वास का भाव विकसित होता है। विश्वास के आधार पर उसे एक व्यक्ति के रूप में अपने जैसा स्वीकार करने पर उसके प्रति सम्मान का भाव विकसित होता है।
विश्वास और सम्मान के आधार पर उसके साथ किसी संबंध की स्वीकृति होने पर स्नेह का भाव विकसित होता है। अत: संबंधों में विश्वास (trust) और सम्मान (respect) होने पर ही स्नेह (affection) हो पाता है।
प्रकृति में सब कुछ एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है, इसलिए ख़ुशी से जीने के लिए प्रकृति में अकेले का कोई कार्यक्रम नहीं है बल्कि मिल-जुलकर रहने का ही प्रावधान है। अत: जो हमसे आगे हैं उनसे सहयोग लेकर और जो हमसे पीछे हैं उनका सहयोग करके हम सभी निर्विरोधपूर्वक अर्थात स्नेहपूर्वक ख़ुशहाल जीवन जी सकते हैं।
जब हम किसी के प्रति स्नेह के भाव के साथ होते हैं तो हम उसके प्रति निष्ठावान (committed) बने रहते हैं अर्थात हर हाल में हम उसके साथ ठहरे रहते हैं।
स्नेह के भाव (feeling of affection) को पहचानने (to explore), महसूस करने (to experience) और व्यक्त करने (to express) के लिए निम्नलिखित सत्र (sessions) रखे गए हैं।

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सत्र :1.1

उद्देश्य : बच्चे अपने घर के बच्चे या आसपडोस के बच्चो के साथ अपने व्यवहार को देख पाए ।

समय : सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक सत्र को कम से कम दो दिन या बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए ।

शिक्षक नोट : इस सत्र में बच्चे परिवार में अपने भाई बहनों के साथ रोज़मर्रा के काम में सहयोग और पूरकता की ओर ध्यान दे पाएं |

बच्चो द्वारा अभिव्यक्ति :
निम्न प्रश्नों के माध्यम से बच्चो में दूसरों के प्रति स्नेह का भाव देख पाने के लिए अभिव्यक्ति के अवसर दिए जाएँ।
  • आप अपने भाई बहनों के साथ क्या-क्या वस्तुएं बाँटते है?जैसे: खिलोने,कॉपी किताब, कपडे इत्यादि |
  • अपने भाई बहनों के साथ क्या सिर्फ चीज़ें ही बांटी जा सकती है? या कुछ और भी बाँटते है जैसे ख़ुशी के पल,कोई परेशानी,स्कूल की घटनाये,दोस्तों की बातें | कोई एक उद्धरण देकर अपनी बात प्रस्तुत करें |
  • आप अपने भाई बहनों लिए रोजाना के क्या-क्या काम करते है ?बच्चे छोटे समूहों में साझा करें | 
  • आपके भाई बहन आपकी क्या-क्या ज़रूरतों का ध्यान रखते है? (जैसे : आपके खाना पीना ,पढ़ाई,आपके खिलोने, मम्मी पापा की डांट से बचाना) 
  • अपनी ख़ुशी या कोई परेशानी के पल हम घर पर सबसे पहले किसको बताते है ?
  • कोई एक घटना साझा कीजिये जिसमें आपने अपने भाई या बहन या आसपडोस के किसी साथी के साथ मिल कर किसी परेशानी को सुलझाया?
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य : अगले अभिव्यक्ति दिवस पर आप इस बात पर बच्चो का ध्यान आकर्षित करेंगे की जब भी उनके प्रति दूसरे किस प्रकार से स्नेह का भाव प्रस्तुत करते है , और बच्चे कितनी गहराई से ये देख पाते है की कब कब उनके लिए स्नेह का भाव प्रस्तुत हुआ |

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सत्र : 1.2

उद्देश्य : बच्चे अपने घर के बच्चे या आसपडोस के बच्चो के साथ अपने व्यवहार को देख पाए

समय : सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक सत्र को कम से कम दो दिन या बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए ।

शिक्षक के लिए नोट : इस सत्र में बच्चे परिवार में अपने भाई बहनों के साथ किये गए कार्यो की भागीदारी और पूरकता की ओर ध्यान दे पाएं |

बच्चो द्वारा अभिव्यक्ति :
निम्न प्रश्नों के माध्यम से बच्चो में दूसरों के प्रति स्नेह का भाव देख पाने के लिए अभिव्यक्ति के अवसर दिए जाएँ।
  • आपने कब-कब अपनी चीज़ें अपने भाई बहनों या किसी दूसरे बच्चो के साथ साझा की ? ऐसा आपने क्यों किया ?
  • अपने भाई बहनों की चीज़ें हम पूछ कर इस्तेमाल करते है या बिना पूछे ही इस्तेमाल कर लेते है ?
  • ऐसी कितनी चीज़ें है जो आप अपने भाई बहनों के साथ कॉमन साझा करते है ?
  • आपकी भाई बहनों के साथ कब तक नाराज़गी बनी रहती है ?और कैसे खत्म होती है ?
  • अपने भाई बहनों के साथ आप क्या- क्या खेलते हो ?
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य : अगले अभिव्यक्ति दिवस पर आप इस बात पर बच्चो का ध्यान आकर्षित करेंगे की जब भी उनके प्रति दूसरे किस प्रकार से स्नेह का भाव प्रस्तुत करते है , और बच्चे कितनी गहराई से ये देख पाते है की कब कब उनके लिए स्नेह का भाव प्रस्तुत हुआ |

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सत्र 2.1

उद्देश्य : बच्चे अपने स्कूल के बच्चो के साथ अपना रोज़मर्रा का व्यवहार और अपनी अपनी भागीदारी में पूरकता को देख पाएं ।

समय : सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक सत्र को कम से कम दो दिन या बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए ।

शिक्षक के लिए नोट : बच्चे इस ओर ध्यान दे पाएं की वे अपनी कक्षा के दूसरे बच्चो के साथ कैसा व्यवहार करते है | बच्चो को निम्नलिखित उदहारण से स्नेह के भाव को समझने के लिए प्रेरित करें | मान लीजिये यदि आपकी कापी आपके प्रिय मित्र से फट जाती है तब आप अपने मित्र से कैसा व्यवहार करेंगे और यदि वही कापी किसी दूसरे बच्चे से फट जाती तब आप उसके साथ कैसा व्यवहार करेंगे ?

बच्चो द्वारा अभिव्यक्ति :
निम्न प्रश्नों के माध्यम से बच्चे स्कूल के बच्चो के साथ स्नेह का भाव देख पाने के बाद अभिव्यक्ति के अवसर दिए जाएँ।
  • आप नए मित्र कैसे बनाते है?
  • स्कूल खुलने के बाद आपने कितने नए मित्र बनाए?
  • हमारा व्यवहार नए मित्रो के साथ कैसा रहा और पुराने के साथ कैसा?
  • आपको किसके साथ बैठना अच्छा लगता है?
  • आप अपना टिफ़िन कितने बच्चो के साथ बैठ कर खाते हो?
  • आप खेलने के समय किस-किस के साथ खेलते है?
  • आप अकेले क्या
  • आप क्या-क्या अपने दोस्तों के साथ बाँटते हो?जैसे : कापी पेंसिल,पानी,खाना,
  • क्या सब कुछ अपनी कक्षा में सब बच्चो के साथ बांटा जा सकता है या ये कुछ बच्चो के साथ के साथ ही किया जाता है?
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य : अगले अभिव्यक्ति दिवस पर आप इस बात पर चर्चा करेंगे कि आप किन कारणों से दूसरों के साथ जुड़ाव/संबंध महसूस करते हैं। अत: इस दौरान आप इसे अपने में देखने का प्रयास करें।

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सत्र : 2.2

समय : सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक सत्र को कम से कम दो दिन या बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए ।

उद्देश्य : बच्चे अपने आसपास के बच्चो के साथ अपनी पूरकता और भागीदारी को देख पाए |

शिक्षक नोट : शिक्षक बच्चो का ध्यान इस ओर जाए की वे अपने आसपास के बच्चो के साथ क्या-क्या कार्य करते है|,
  • आप किस-किस के साथ विद्यालय जाते आते हो?
  • अगर आपका दोस्त किसी दिन विद्यालय न जाये तब आपको कैसा महसूस होगा ? उस दिन आप अपने दोस्त की क्या कमी महसूस करेंगे?
  • आप आसपडोस के बच्चो के साथ क्या-क्या चीज़ें साझा करते है?जैसे खेलने ,खाने की चीज़ें,
  • क्या कभी आपने कोई सबसे प्यारी चीज़ अपने दोस्त के साथ साझा की?
  • आप अपने मन की बातें क्या अपने दोस्तों के साथ साझा करते है?
  • क्या आपने कभी आसपडोस के दोस्तों के साथ मिल कर कोई समस्या का हल ढूँढा?
  • आप अपने आसपडोस के बच्चो के घर कब-कब जाते हो?
  • कितने त्यौहार आप एक साथ मनाते हो?
उपरोक्त गतिविधि के प्रश्न यदि एक सत्र में न पूरे हो पाए तो आगे के प्रश्नों को अगले अभिव्यक्ति दिवस पर ले जा कर पूरे करें |

अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य : अगले अभिव्यक्ति दिवस पर आप इस बात पर चर्चा करेंगे कि आप किन कारणों से दूसरों के साथ जुड़ाव/संबंध महसूस करते हैं। अत: इस दौरान आप इसे अपने में देखने का प्रयास करें।

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सत्र : 3

उद्देश्य : बच्चो को दूसरों के प्रति स्नेह के भाव को महसूस करने के लिए प्रेरित करना ।

शिक्षक नोट :सत्र का उद्देश्य इसी बात को इंगित करता है की बच्चे अपने संबंधों में स्नेहपूर्वक व्यवहार करते हुए एक ख़़ुशहाल जीवन जी सकें और अपने जीवन में अपनेपन का विस्तार करते हुए अपनी ख़ुशी का दायरा बढ़ाते रहें।

समय : सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक सत्र को कम से कम दो दिन या बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए ।

बच्चो द्वारा अभिव्यक्ति : निम्नलिखित प्रस्तावित प्रश्नों के माध्यम से बच्चो को अभिव्यक्ति के अवसर उपलब्ध कराए जाएँ ।
  • अपने मित्रो के साथ मित्रता निभाने के लिए आपने क्या-क्या किया?कोई एक घटना साझा कीजिये| 
  • जिन बच्चो को आप नहीं भी जानते उनके साथ किस प्रकार से बातचीत करते हो? 
  • मित्रो के साथ खेलने में ज्यादा मज़ा आता है या भाई-बहनों के साथ?क्यों? 
  • अगर भाई बहन और दोस्त एक साथ खेलें तब आप क्या क्या खेल खेलते है? 
  •  गर्मियों की छुट्टियों में जब आपके क्स्न्स(चचेरे,ममेरे ,मौसेरे)आपके घर आते है तब आप उनके साथ क्या-क्या खेल खेलते है?
  • अपने भाई-बहन या दोस्तों की कौन सी ऐसी अच्छी बातें या आदतें है जो आप अपनाना चाहते है?
  • पिकनिक पर जाते समय हमे किसके साथ घूमना पसंद आता है?
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य : अगले अभिव्यक्ति दिवस पर आप इस बात पर चर्चा करेंगे कि दूसरों के प्रति स्नेहपूर्वक व्यवहार की अभिव्यक्ति आप किस किस तरह कर सकते है । अत: इस दौरान आप इसे अपने में देखने का प्रयास करें।

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सत्र : 4

समय : सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक सत्र को कम से कम दो दिन या बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए ।

उद्देश्य : बच्चो को दूसरों के प्रति स्नेह के भाव को व्यक्त करने के लिए प्रेरित करना । बच्चे अपने संबंधों में स्नेहपूर्वक व्यवहार करते हुए एक ख़़ुशहाल जीवन जी सकें और अपने जीवन में अपनेपन का विस्तार करते हुए अपनी ख़ुशी का दायरा बढ़ाते रहें।

शिक्षक के लिए नोट : प्रस्तुत सत्र का मात्र उद्देश्य बच्चो में उठते स्नेह के भाव की अभिव्यक्ति है ,बच्चा किस-किस के प्रति अपना स्नेह का भाव व्यक्त करना चाहता है और उसकी अभिव्यक्ति का क्या माध्यम अपनाया जा सकता है |

बच्चो द्वारा अभिव्यक्ति :
इस दिन अभिव्यक्ति दिवस पर कुछ हट के किया जा सकता है । सत्र का उद्देश्य मात्र इतना ही है की बच्चे अपने लिए प्रस्तुत स्नेह के भाव को देख और समझ पाए और किसी न किसी रूप में व्यक्त हो पाए |
  • अपने साथियों के लिए का भाव देखा और महसूस किया , उसके लिए thanku कार्ड या कोई छोटी सी चिट्ठी रूप में कुछ पंक्तियाँ लिख सकते है ? बच्चो को ये कार्य करने के लिए थोडा समय दें |
  • अपने भाई बहन के स्नेह के बदले क्या कोई रास्ता ढूँढा जा सकता है जिससे बच्चे का स्नेह झलक पाए ? शिक्षक बच्चो की राय सुन भी सकते है और किसी रूप में भी व्यक्त होने का समय दे सकते है |
  • आपको क्या लगता है की सिर्फ thanku कार्ड या चिट्ठी से ही सारी बात बन जाती है या स्नेह किसी और रूप में भी व्यक्त कर सकते है ?
  • अपने दोस्तों को किस-किस प्रकार से स्नेह का भाव दिखा सकते है ?
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य अगले अभिव्यक्ति दिवस पर अगले मूल्य की रूपरेखा की शुरुआत की जा सकती है | अगले मूल्य के लिए बच्चो को कुछ उदहारण देकर भी बात की स्पष्टता बनायीं जा सकती है | शिक्षक के लिए ये अत्यंत अनिवार्य रहेगा की जब भी वे अगले सत्र या अगले मूल्य की ओर अग्रसर हो वह सुनिश्चित कर ले की “ शिक्षक के लिए नोट “ में उनके लिए क्या बातें ध्यान में रखने के लिए की कही गयी है | यह सुनिश्चितता प्रश्नों को तात्विकता और व्यवहारिकता से जोड़ने में बहुत लाभप्रद रहती है जिससे बात को उसी गहरायी से समझा और जाना जा सकता है जिस भाव में उसे प्रस्तुत करने की कोशिश की गयी है |

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1. ममता (Care)

उद्देश्य: अपने पालन-पोषण में माता-पिता व परिवार के अन्य बड़े-बुजुर्गों की भागीदारी देख पाना और एक-दूसरे की देखभाल के लिए स्वयं भी भागीदारी करना।

शिक्षक के संदर्भ के लिए नोट:
जब हम अपने संबंधों में किसी व्यक्ति के शरीर के पोषण और संरक्षण की ज़िम्मेदारी को स्वीकार करते हैं तो हमारा मन एक स्थिरता महसूस करता है और इस ज़िम्मेदारी को निभाने पर हमें संतुष्टि होती है। इसे ही हम ममता का भाव (feeling of care) कहते हैं।
बच्चे के शरीर के पोषण और संरक्षण के लिए उसे पौष्टिक व स्वादिष्ट भोजन खिलाना, उसे शरीर की सफ़ाई करना सिखाना, उसे व्यायाम, दौड़ इत्यादि का अभ्यास कराना, मेहनत व श्रम के प्रति उसकी मानसिकता बनाना, उसे अलग-अलग कौशल (skills) का exposure देना - इन सभी प्रक्रियाओं से बच्चा स्वस्थ होता है और स्वस्थ बना रहता है। स्वस्थ होने से पोषण देने वाले व्यक्ति को ममता का एहसास होता है। यही स्वस्थ बच्चा बड़ा होने पर स्वावलंबी होता है और अपने माता-पिता के शरीर के पोषण और संरक्षण की ज़िम्मेदारी सहजता से स्वीकारता है। उनकी सेवा करता है, घर की ज़िम्मेदारियाँ स्वीकारता है और अपनी संतान के पोषण-संरक्षण के लिए भी सक्षम होता है। ऐसा होने पर उसके माता-पिता में सही रूप में ममता के भाव की तृप्ति होती है और हमेशा के लिए बनी रहती है।
प्रकृति के नियमानुसार जो व्यक्ति जिसके लिए ममता भाव के साथ होता है उसके लिए वह माता (mother) के स्वरूप में होता है फिर चाहे वह स्त्री हो या पुरुष, आयु में छोटा हो या बड़ा। अत: संबंध और उसके संबोधन का प्राकृतिक आधार भाव ही होता है जबकि अभी व्यवहार में हम माता सिर्फ़ उसे ही मानते हैं जिसने हमें जन्म दिया है और/या जो हमारा पालन-पोषण करती है, क्योंकि बच्चे को जन्म देने के साथ ही उसके पोषण और देखभाल की ज़िम्मेदारी प्रधानत: वही निभाती है।
बच्चे, वृद्ध, रोगी और वे व्यक्ति जो किसी अन्य भूमिका में व्यस्त रहते हैं, ऐसे व्यक्तियों को अपने शरीर के पोषण व संरक्षण के लिए मदद की आवश्यकता होती है। किसी न किसी परिस्थिति या आयु में यह आवश्यकता सभी को रहती है। अत: इस ज़िम्मेदारी को स्वीकार करके निभाने वाला व्यक्ति ही ममता का भाव महसूस करता है।
ममता के भाव (feeling of care) को पहचानने (to explore), महसूस करने (to experience) और व्यक्त करने (to express) के लिए निम्नलिखित सत्र (sessions) रखे गए हैं।

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सत्र: 1

उद्देश्य : बच्चे अपने लिए ममता के भाव को महसूस कर पाए और स्वयं भी उसकी अभिव्यक्ति कर पाए ।

समय : प्रत्येक सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक सत्र को कम से कम दो दिन (दो अभिव्यक्ति दिन) बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए।

शिक्षक नोट : सत्र का उद्देश्य इसी बात को इंगित करता है की बच्चे अपने लिए और अपने द्वारा किये गए प्रदर्शित ममता के भाव को देख पाए | निम्लिखित प्रश्नों में बच्चो को भागीदारी को सुनिश्चित कर पाने के लिए एक परिस्थिति दी गयी है जिससे बच्चा अपनी बात रखने में सहज महसूस करे |

बच्चो द्वारा अभिव्यक्ति गतिविधि:
बच्चो को निम्नलिखित स्थिति के बारे में सुन कर सोचने के लिए कहा जाए:
" आज मैंने रोजाना की तरह अपनी छोटे भाई को नह्लाया और स्कूल के लिए तैयार होने में उसकी मदद की , मैं जानती थी की माँ उस समय हम दोनों के लिए टिफ़िन तैयार कर रही होंगी और पापा सुबह सुबह काम पर निकल गए होंगे | माँ ने भी तो काम पर जाना था और हम दोनों को उठाने से लेकर तैयार करने में बहुत समय जाता है इसीलिए मैंने माँ के साथ सच्चे मन से कुछ ज़िम्मेदारी बाँट ली “|


बच्चो द्वारा निम्न प्रश्नों पर अभिव्यक्ति :
  • घर में आपकी देखरेख किसने की और जिसने भी आपकी देखरेख की उनका ध्यान किसने रखा?
  • क्या आपने कभी अपने बड़े या छोटे भाई या बहन या किसी अन्य की देखरेख की ज़िम्मेदारी उठाई और उसे निभाने की कोशिश की?
  • देखरेख की ज़िम्मेदारी क्या सिर्फ बड़ो के ही हिस्से आती है या ज़रूरत पड़ने पर आप भी उसको निभा सकते है?कैसे कैसे तरीके अपना सकते है दूसरो की देखरेख के लिए?
  • जब भी आपने किसी का ध्यान-ध्यान रखा या देखभाल की तब आपको ख़ुशी मिली या सिर्फ बोझ महसूस हुआ?
  • पिछले सप्ताह आपने ऐसे कितने काम किये जो बड़ो द्वारा आपको करने के लिए कहे गए?
अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य : अगले अभिव्यक्ति दिवस पर इसी चर्चा और अभिव्यक्ति का अगला सत्र ज़ारी रहेगा | अगले सत्र में भी इसकी सुनिश्चिता पर ध्यान दिया जायेगा की हम ममता का भाव दूसरो में अपने प्रति और खुद उसकी अभिव्यक्ति किस प्रकार से कर और देख पाते है |

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सत्र : 2

उद्देश्य : बच्चे अपने लिए ममता के भाव को महसूस कर पाए और स्वयं भी उसकी अभिव्यक्ति कर पाए ।

समय : प्रत्येक सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक सत्र को कम से कम दो दिन (दो अभिव्यक्ति दिन) बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए।

शिक्षक नोट : सत्र का उद्देश्य इस बात को खोलता है की जब भी बच्चो के लिए ममता का भाव प्रदर्शित होता है बच्चे उसको महसूस कर पाए | कभी कभी किसी अपने लिए किये गए काम के प्रति हम दुसरे व्यक्ति की भावनाओ को गहरायी से देख या महसूस नहीं पाते , अतः निम्न प्रश्नों के माध्यम से बच्चे अपने अन्दर ममता भाव को महसूस कर पाए |

बच्चो द्वारा निम्न प्रश्नों पर अभिव्यक्ति :
  • गत सप्ताह आपने जो भी काम किये वे मात्र अपने बड़ो का कहना भर मानने के लिए किये या आपका मन भी किया उन कार्यो को करने के लिए?जैसे :पढ़ाई करना,मिल बांट कर खाना खाना , माँ पिताजी की बात सुनना |
  • पिछले सप्ताह आपके लिए घर के सदस्यों द्वारा क्या-क्या काम किये गए ?
  • क्या लगता है जब भी आपके लिए कोई काम किया जाता है तब दूसरे कैसा महसूस करते है?
  • जिन व्यक्तियों का ख़याल रखा क्या उनको अच्छा लगा ?
  • दूसरो का ख़याल किन-किन तरीको से रख सकते है ?
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य : अगले अभिव्यक्ति दिवस पर आप इस बात पर चर्चा करे कि दूसरों ने कब-कब आपके साथ ममता का भाव प्रदर्शित किया ? यह काम आप अपने स्कूल और घर दोनों स्थानों पर देखने का प्रयास करेंगे | इस पूरे प्रयास का औचित्य सिर्फ इतना ही है की बच्चा ये देख पाने की स्तिथि में आ पाए की जब कोई बड़ा या छोटा , पिता या माता , दादा/दादी , नाना/नानी या कोई और जब भी कभी हमारे शरीर के पोषण और संरक्षण के लिए पूरे भाव के साथ ज़िम्मेदारी को निभाते है तब हम कैसा महसूस करते है?

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सत्र 3

उद्देश्य : बच्चे अपने लिए प्रस्तुत ज़िम्मेदारी के साथ निर्वाहित ममता के भाव को महसूस कर पाए ।

शिक्षक नोट : सत्र का उद्देश्य मुख्यतः इसी भाव को समझना समझाना है की हमारे शरीर के पोषण और संरक्षण के लिए जो भी ज़िम्मेदारी का निर्वाह करते है हम उनके प्रति मन में उठते ममता के भाव को स्पष्ट रूप से देख पाए |

समय : प्रत्येक सत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक सत्र को कम से कम दो दिन (दो अभिव्यक्ति दिन) बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक चलाया जाए।

बच्चो द्वारा निम्न प्रस्तावित प्रश्नों पर अभिव्यक्ति करवाई जाए :
  • ऐसा आप क्या क्या खाते है जो आपके शरीर के लिए अच्छा होता है?
  • क्या सिर्फ खान-पान से ही शरीर का ध्यान रखा जाता है या कोई अन्य तरीका भी है जिससे हमारा शरीर ठीक से चलता रहे?
  • घर में आपका का ध्यान किस-किस ने रखा?
  • आपका ध्यान सिर्फ घर में ही रखा गया या बाहर भी कुछ लोग आपका ध्यान रखते है?
  • जो भी आपके शरीर के पोषण और संरक्षण का ध्यान रखते है वे ऐसा कार्य रोजाना करते है या कभी-कभी ऐसा करते है?
अगले अभिव्यक्ति दिवस के लिए कार्य : अगले अभिव्यक्ति दिवस पर अगले मूल्य की रूपरेखा की शुरुआत की जा सकती है | अगले मूल्य के लिए बच्चो को कुछ उदहारण देकर भी बात की स्पष्टता बनायीं जा सकती है | शिक्षक के लिए ये अत्यंत अनिवार्य रहेगा की जब भी वे अगले सत्र या अगले मूल्य की ओर अग्रसर हो वह सुनिश्चित कर ले की “ शिक्षक के लिए नोट “ में उनके लिए क्या बातें ध्यान में रखने के लिए की कही गयी है | यह सुनिश्चितता बात को तात्विकता और व्यवहारिकता से जोड़ने में बहुत लाभप्रद रहती है जिससे बात को उसी गहरायी से समझा और जाना जा सकता है जिस भाव में उसे प्रस्तुत करने की कोशिश की गयी है |

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कक्षा 3: अभिव्यक्ति खंड

हर इनसान में अपने विचारों और भावों (thoughts and feelings) को व्यक्त करने की स्वाभाविक चाहत (natural desire) होती है। जिन चीज़ों को हम सीखते और समझते हैं, उन्हें व्यक्त करने पर हम आराम (relax) महसूस करते हैं।
अभिव्यक्ति से ही हम एक-दूसरे को ठीक से समझ पाते हैं। अभिव्यक्त होने पर दूसरों के साथ-साथ ख़ुद की भी यह स्पष्टता बढ़ती है कि हम कैसा सोचते हैं और कैसा महसूस करते हैं। अपनी समझ और भावनाओं को व्यक्त करने में समर्थ होने के कारण ही इनसान को 'व्यक्ति' भी कहते हैं। एक व्यक्ति को ख़ुद को व्यक्त करने पर ही संतुष्टि मिलती है। अत: अभिव्यक्ति एक व्यक्ति के जीवन का अभिन्न हिस्सा है।

हैप्पीनेस कक्षा में अभिव्यक्ति क्यों? (Why to express?)
प्रकृति में हर चीज़ की एक निश्चित भूमिका (definite role/purpose) है। हम किसी वस्तु की उस निश्चित भूमिका को उसकी उपयोगिता के रूप में पहचानते हैं। यह उपयोगिता समय, स्थान और परिस्थिति के आधार पर कभी भी बदलती नहीं है। जैसे- चावल की उपयोगिता को हम शरीर के पोषक के रूप में पहचानते हैं। चावल की यह उपयोगिता समय, स्थान और परिस्थिति के आधार पर बदलती नहीं है। किसी वस्तु की इस सार्वभौमिक उपयोगिता (universal utility) को हम उस वस्तु के मूल्य (value) के रूप में पहचानते हैं।
दूसरी वस्तुओं की तरह ही इनसान की भी इस दुनिया में कोई भूमिका है। जैसे:- माता-पिता अपने बच्चों का पालन-पोषण करते हैं। पुत्र-पुत्री अपने वृद्ध माता-पिता की देखभाल और सेवा करते हैं। वृद्ध माता-पिता अपनी संतान का मार्गदर्शन करते हैं। गुरु अपने शिष्यों को शिक्षित करते हैं। भाई-बहन और मित्र एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। इस प्रकार एक-दूसरे के ख़ुशहाल जीवन के लिए हम जो भागीदारी करते हैं, यही एक-दूसरे की ज़िंदगी में हमारा मूल्य है। इन मूल्यों को ही हम भावों के रूप में महसूस करते हैं। अपने ख़ुशहाल जीवन के लिए माता-पिता, भाई-बहन, गुरु, मित्र आदि की भागीदारी को देख पाने पर और अपनी भागीदारी को निभाने पर धरती के सभी लोग समान रूप से भावों को महसूस करते हैं। अत: इस खंड में हमारे भावों को ही सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों (universal human values) के रूप में अभिव्यक्ति का आधार माना गया है। जैसे- कृतज्ञता का भाव, सम्मान का भाव, स्नेह का भाव आदि।
जब हम अपने संबंधों में एक-दूसरे के लिए इन भावों को देख पाते हैं, महसूस करते हैं तो हमें ख़ुशी होती है। जब भी हम ख़ुश होते हैं तो अपनी ख़ुशी अपनों के साथ साझा (share) करना चाहते हैं। इससे हम और ज़्यादा ख़ुशी महसूस करते हैं। अत: ख़ुशहाल जीवन के लिए संबंधों में भावों को पहचानना, महसूस करना और व्यक्त करना बहुत ज़रूरी है। इसके साथ ही इन भावों की स्थिरता (stability of feelings) के लिए सजग (aware) रहने का अभ्यास करना भी आवश्यक है।
एक-दूसरे से अपने भावों के आदान-प्रदान के लिए ही भाषाएँ (मौखिक, लिखित, सांकेतिक) विकसित हुई हैं। किसी कौशल के साथ अपने भावों को व्यक्त करने के लिए निष्पादन कलाएँ (performing arts) विकसित हुई हैं, जैसे-संगीत, नृत्य, रंगमंच आदि। सौंदर्य के साथ अपने भावों को व्यक्त करने के लिए दृश्य कलाएँ (visual arts) विकसित हुई हैं, जैसे- ड्रॉइंग, पेंटिंग, स्कल्पचर आदि। इस प्रकार देखें तो हमारी ख़ुशी का संसार एक-दूसरे के प्रति सही भावों के साथ होने और विभिन्न माध्यमों व तरीकों से उन्हें व्यक्त करने से ही जुड़ा हुआ है। अत: एक व्यक्ति के समुचित विकास और ख़ुशहाल जीवन के लिए भावों की अभिव्यक्ति (expression of feelings) अति आवश्यक है, इसीलिए हैप्पीनेस कक्षा में अभिव्यक्ति को शामिल किया गया है।

हैप्पीनेस कक्षा में अभिव्यक्ति क्या? (What to express?)
कक्षा तीसरी के लिए अभिव्यक्ति के इस खंड में निम्नलिखित चार भावों/मूल्यों को पहचानने (to explore), महसूस करने (to experience) और उन्हें व्यक्त करने (to express) के लिए रखा गया है।
  1. ममता (Care)
  2. स्नेह (Affection)
  3. कृतज्ञता (Gratitude)
  4. सम्मान (Respect)
उपर्युक्त मूल्यों को 20 सत्रों (sessions) में फैलाया गया है।

अभिव्यक्ति का आधार:
  • सभी सत्रों में अभिव्यक्ति भावों (सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों) की ही होगी।
  • अभिव्यक्ति विद्यार्थी के अपने संबंधों में जीने पर केंद्रित होगी। जीने में व्यवहार व कार्य करना और महसूस करना निहित हैं।
  • अभिव्यक्ति की कक्षा में किसी प्रकार की चर्चा नहीं होगी। इस प्रकार के प्रश्न पूछे जाना भी अपेक्षित नहीं हैं कि इस बारे में आप क्या सोचते हो, क्या करना चाहते हो, इस स्थिति में क्या करना चाहिए, आगे क्या करेंगे आदि। हैप्पीनेस कक्षा की कहानियाँ चिंतन प्रधान, गतिविधियाँ विचार प्रधान और अभिव्यक्तियाँ भाव प्रधान हैं।
  • अभिव्यक्ति के प्रश्न मुख्यत: निम्नलिखित चार स्थितियों पर आधारित हैं।
    • विद्यार्थी अपने संबंधों में-
      • 1. क्या देखता है? (Observation)
      • 2. कैसा व्यवहार करता है? (Behaviour)
      • 3. क्या ज़िम्मेदारी निभाता है? (responsibility)
      • 4. क्या महसूस करता है? (Feeling)
  • सामान्यतया अभिव्यक्ति गत सप्ताह के अनुभवों पर ही आधारित रहेगी, लेकिन कुछ स्थितियों में पहले के अनुभवों को भी साझा किया जा सकता है।
  • सभी सत्रों में दिए गए प्रश्न केवल प्रस्तावित हैं। उपर्युक्त स्थितियों को ध्यान में रखते हुए शिक्षक स्वयं भी आवश्यकतानुसार प्रश्न बनाएँ/पूछें।
हैप्पीनेस कक्षा में अभिव्यक्ति कैसे? (How to express?)
प्रस्तावित शिक्षण-विधियाँ (Proposed pedagogies): कक्षा में सभी विद्यार्थियों की भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग प्रश्नों के अनुसार अलग-अलग शिक्षण-विधियाँ (pedagogies) अपनाने की आवश्यकता है। इसके लिए निम्नलिखित प्रस्तावित विधियों को अपनाया जा सकता है।
  • व्यक्तिगत अभिव्यक्ति (individual expression)
  • जोड़े में अपने अनुभव साझा करना (sharing their experiences in pairs)
  • छोटे समूहों में अपने अनुभव साझा करना (sharing their experiences in small groups)
अभिव्यक्ति के तरीके:
  • सामान्यतया कक्षा में व्यक्तिगत मौखिक अभिव्यक्ति (Individual oral expression in whole class) ही कराई जाए। कभी-कभी कक्षा की आवश्यकता या प्रश्न की आवश्यकता के अनुसार जोड़े में या छोटे समूहों में भी अभिव्यक्ति के अवसर दिए जाएँ।
  • प्रश्न की आवश्यकता या किसी विद्यार्थी की विशेष आवश्यकता के अनुसार अभिव्यक्ति के अन्य तरीकों को भी अपनाया जाए। जैसे:- लिखकर (पत्र, कार्ड, डायरी आदि), रोल प्ले करके, चित्र या चिह्न बनाकर, सांकेतिक भाषा द्वारा आदि।
कक्षा कार्यनीतियाँ (Class strategies):
  • कुछ प्रश्न ऐसे हैं जो प्रत्येक विद्यार्थी से पूछे जा सकते हैं। कुछ प्रश्न ऐसे हैं जो केवल उन्हीं विद्यार्थियों से पूछे जा सकते हैं जिनका उस प्रश्न से संबंधित अनुभव रहा हो।
  • प्रश्न पूछने के लिए हमेशा एक ही क्रम न अपनाएँ। कभी कक्षा के पीछे या बीच से भी प्रश्न पूछना शुरू कर सकते हैं।
  • यदि किसी प्रश्न के जवाब में ऐसा लगे कि विद्यार्थी अपना अनुभव न बताकर एक जैसा जवाब ही दोहरा रहे हैं तो उन्हें अपना अनुभव बताने के लिए प्रेरित करें या प्रश्न को बदल दें।
  • यदि किसी प्रश्न के एक से अधिक भाग हैं तो विद्यार्थी द्वारा एक भाग का जवाब देने के बाद ही उस प्रश्न का दूसरा भाग पूछें।
  • यदि किसी प्रश्न को समझने में विद्यार्थी दिक्कत महसूस करें तो शिक्षक उस प्रश्न को स्पष्ट करने की कोशिश करे।
  • प्रश्न पूछने का एक तरीका यह भी हो सकता है कि एक प्रश्न 8-10 विद्यार्थियों से पूछें और अगले 8-10 विद्यार्थियों से दूसरा प्रश्न पूछें। इसके बाद तीसरा प्रश्न या पुन: पहला प्रश्न पूछा जा सकता है। कुछ प्रश्न सभी के लिए समान भी हो सकते हैं।
  • एक सत्र के लिए कम से कम प्रस्तावित दिन संबंधित सत्र के साथ दिए गए हैं बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक उस सत्र को चलाया जा सकता है।
क्या करें और क्या न करें (Dos and don'ts):
  • प्रत्येक सत्र का 'उद्देश्य' और ‘शिक्षक के लिए नोट’ सिर्फ़ शिक्षक के संदर्भ के लिए हैं। इन्हें विद्यार्थियों को पढ़कर न सुनाएँ और न ही समझाएँ।
  • प्रश्नों के उत्तर विद्यार्थियों से ही निकलवाएँ। उन्हें उत्तर समझाने या उपदेश देने का प्रयास न किया जाए।
  • शिक्षक की मुख्य भूमिका सभी विद्यार्थियों की सहज अभिव्यक्ति के लिए वातावरण प्रदान करना और प्रश्न पूछना है।
  • सभी विद्यार्थियों को अपने अनुभव साझा करने के लिए प्रेरित करें। जो विद्यार्थी शुरूआत में कक्षा के सामने असहज महसूस करते हैं उन्हें पहले अपने साथ बैठे सहपाठियों से या छोटे समूहों में अपने अनुभव साझा करने के अवसर दें।
  • किसी विद्यार्थी की अभिव्यक्ति पर कोई नकारात्मक टिप्पणी न करें अन्यथा कक्षा में उसकी भागीदारी कम हो सकती है। इसका परिणाम यह भी हो सकता है कि अगली बार वह विद्यार्थी ईमानदारी से अपनी बात साझा न करे।
  • शिक्षक का स्नेहपूर्वक प्रोत्साहित करने वाला व्यवहार सबसे अधिक प्रभावी रहता है।

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20. आवश्यकता तथा पसंद

गतिविधि का उद्देश्य: मानवों में कौन-कौन सी आवश्यकताएँ समान हैं तथा कौन सी असमान हैंI
समय: कम से कम दो दिन अथवा शिक्षक के संतुष्ट होने तक
आवश्यक सामग्री: कोई विशेष सामग्री की आवश्यकता नहीं है।

शिक्षक के लिए नोट: हम सभी की कुछ आवश्यकताएँ एक समान होती हैं लेकिन इन आवश्यकताओं को पूरी करने के लिए वस्तुओं के लिए हमारी पसंद नापसंद अलग अलग हो सकती है। इस गतिविधि द्वारा बच्चे पहचान पाएँगे कि उनकी व उनके दोस्तों की शरीर की आवश्यकताएँ एक समान हैं,जैसे खाना,पानी,कपड़े,जूते तथा घर आदि, इनके लिए हमारी पसंद नापसंद तथा मात्रा की एक समान हमें ज़रूरत नहीं होती। किसी को ये अधिक चाहिए तो किसी को कम।
इस गतिविधि के हर सेट का पहला प्रश्न आवश्यकता को दिखाता है। इस प्रश्न के उत्तर पर सभी बच्चे एक साथ होंगे क्योंकि पहले प्रश्न में पूछी गई वस्तुएँ सबकी आवश्यकता है। जैसे खाना,घर और कपड़े सभी मनुष्यों की आवश्यकता हैं जो सभी के लिए समान है। जबकि अन्य प्रश्नों के उत्तर इन आवश्यकताओं के लिए पसंद नापसंद है जो सबकी अलग अलग होती है।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की प्रक्रिया से की जाए।

गतिविधि के चरण: 
  • एक ही माह (जैसे जनवरी) जन्म लेने वाले बच्चों को कक्षा में आगे बुलाएँ ।
  • इनसे चार चार बच्चों के समूह बनाएँ । इसी प्रकार समान ऊंचाई, कद ,तारीख,(किसी एक समानता के अनुसार) बच्चों के विभिन्न समूह बनवाएँ।
  • प्रत्येक समूह के बच्चों को बारी बारी से कक्षा में सबसे पीछे खड़ा करें।
  • पहले समूह एक से सेट एक,समूह दो से सेट दो,समूह तीन से सेट तीन तथा समूह चार से सेट चार के प्रश्न पूछें।
  • जिन बच्चों के उत्तर हाँ में हो उन्हें एक कदम आगे बढ़ने को कहें जिनके उत्तर न में हों वह अपने स्थान पर ही खड़े रहेंगे।
सेट एक के प्रश्न
  • क्या आप सभी खाना खाते हैं ?
  • क्या आप दही खाते हैं ?
  • क्या आपको कद्दू की सब्जी पसंद है?
  • क्या आप दूध पीते हैं?
सेट दो के प्रश्न
  • क्या आप घर में रहते हो?
  • क्या आपका घर दो मंजिला है?
  • क्या आपके घर की दीवारें नीले रंग की हैं?
  • क्या आपके घर के सामने पार्क है?
पहला दिन: चर्चा के लिए प्रस्तावित प्रश्न
1. इस गतिविधि के अंत में क्या आप सभी एक ही स्थान पर थे? हाँ तो क्यों? नहीं तो क्यों नहीं? अपने अपने समूह में चर्चा करें।
2. एक ही कक्षा में पढ़ने वाले आप सभी विद्यार्थियों की पसंद व नापसंद एक जैसी हैं या अलग-अलग?
3. ऐसी कौन सी चीजें हैं जो आप सभी चाहते हैं? साझा करें।
4. क्या एक ही अक्षर से शुरू होने वाले नाम के बच्चों की आवश्यकताएँ एक जैसी ही थीं या अलग-अलग?

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठकर आज की चर्चा के निष्कर्ष के बारे में विचार करें

दूसरा दिन:
कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की प्रक्रिया से की जाए।

गतिविधि के चरण:
  • कक्षा में उन बच्चों के नाम पुकारें जिनके नाम एक ही अक्षर से शुरू होते हैं जैसे स से साक्षी ,सुरेश, सीमा , सरिता ,सागर आदि।
  • किसी एक समानता के अनुसार बच्चों के विभिन्न समूह बनवाएँ।
  • सभी समूहों से सेट तीन और चार के प्रश्न पूछें।
  • जिन बच्चों के उत्तर हाँ में हो उन्हें एक कदम आगे बढ़ने को कहें जिनके उतर नहीं में हो वह अपने स्थान पर ही खड़े रहेंगे।
सेट तीन के प्रश्न
  • क्या आप कपड़े पहनते हैं?
  • क्या आप सभी को नीले रंग के कपड़े पसंद हैं?
  • क्या आप सभी सूती कपड़े पहनते हैं?
  • क्या आप सभी को लंबे कपड़े पहनना पसंद है?
सेट चार के प्रश्न
  • क्या आप अपने पैरों को चोट से बचाने के लिए जूते पहनते हैं?
  • क्या आपके जूते भूरे रंग के हैं?
  • क्या आपके पास दो जोड़ी जूते हैं?
  • क्या आपके जूते कपड़े से बने हैं?
दूसरा दिन: चर्चा के लिए प्रस्तावित प्रश्न
1. प्रत्येक सेट के पहले प्रश्न के उत्तर में एक ही माह में जन्मे विद्यार्थियों को किस तरह की चीजों की आवश्यकता थीं? समूह में चर्चा कर साझा करें।
2. क्या एक ही अक्षर से शुरु होने वाले नाम वाले बच्चों की भोजन,घर,कपड़ों,तथा जूतों की
3. आवश्यकताएँ एक जैसी थीं? चर्चा करके साझा करें।
4. क्या ये आवश्यकताएँ एक समान साधनों से प्राप्त की जा सकती हैं? चर्चा करके साझा करें।
5. ऐसी कौन कौन सी ज़रूरतें हैं जो आपकी भी हैं जो आपके दोस्तों की भी हैं? साझा करें।

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठकर आज की चर्चा के निष्कर्ष के बारे में विचार करें

क्या करें, क्या न करें:
  • सभी बच्चे एक दूसरे से कुछ अंतर पर खड़े होI
  • इस गतिविधि को करते हुए बच्चे आपस में बात नहीं करें।
  • यदि बच्चे अपने अनुभव/संस्मरण सुनाना चाहें तो उन्हें इसकी अनुमति अवश्य दें I
  • ध्यान रखें कि बच्चे धक्का-मुक्की ना करेंI
  • अगर कक्षा में स्थान बहुत कम हो तो गतिविधि खुले में भी कराई जा सकती हैI
  • समूह चर्चा में विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त निष्कर्षों को अवश्य साझा कराएँ ।
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  1. आओ मिलकर आकार बनाएँ
  2. चलो पिकनिक चलें
  3. देखो हम समान हैं
  4. धन्यवाद करें हम उनका
  5. मेरी पसंदीदा जगह
  6. मेरा हीरो कौन?
  7. मेरी सच्ची ख़ुशी
  8. मेरे सहयोगी
  9. मैं और प्रकृति
  10. मुझे ऐसा लगता है
  11. हैप्पीनेस वॉल
  12. ख़ुशी की रेखा
  13. मेरा भाव मेरी ख़ुशी
  14. प्रकृति की सैर
  15. आपका आभार
  16. मददगार
  17. गलती में अनेक सही में एक
  18. काला या सफेद
  19. सभी की भूमिका
  20. आवश्यकता तथा पसंद

19. सभी की भूमिका

गतिविधि का उद्देश्य: छात्र परिवार में कार्य करने वाले सदस्यों की विभिन्न भूमिकाओं के महत्त्व की पहचान करने में सक्षम होंगे और यह भी जान पाएँगे कि परिवार में कोई भी किसी की भी भूमिका निभा सकता है।
समय: कम से कम दो दिन अथवा शिक्षक के संतुष्ट होने तक

शिक्षक के लिए नोट:
बच्चे अपने परिवार के सदस्यों की उपयोगिता की पहचान करने में सक्षम होंगे। वे परिवार को सुचारु रूप से चलाने के लिए क्या-क्या करते हैं? बच्चे परिवार के सदस्य के रूप में अपनी भूमिका को पहचानने में भी सक्षम होंगे। बच्चे यह भी समझ पाएँगे, कि यदि परिवार का कोई सदस्य किसी विशेष कारण से कुछ करने में सक्षम नहीं है तो परिवार में कोई और व्यक्ति उस भूमिका को निभाता हैं।
इस गतिविधि द्वारा बच्चे यह समझ पाएँ कि परिवार में सभी लोगों की कोई न कोई भागीदारी अवश्य होती है। बच्चे परिवार समझ पाएँगे कि परिवार के सदस्य एक दूसरे के पूरक होते हैं।

आवश्यक सामग्री: किसी भी सामग्री की आवश्यकता नही है

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की प्रक्रिया से की जाए।

गतिविधि के चरण:
1. शिक्षक विद्यार्थियों को परिवार के निम्नलिखित सदस्यों में से किसी एक की( परिवार में सभी के लिए सहयोगी के रूप में) भूमिका निभाने के लिए कहें।
2. इस भूमिका को निभाने से पहले विद्यार्थियों को कुछ समय सोचने व तैयारी करने के लिए दें।
माँ
पिता
दादी
दादा
बेटा
बेटी
भाई
बहन
  • कुछ छात्र कक्षा के सामने अभिनय करेंगे तथा अन्य छात्र को इस अभिनय का अनुमान लगाएँगे कि यह परिवार का कौन सा सदस्य यह कार्य कर सकता है। 
  • छात्र स्वयं भी परिवार के इन सदस्यों के अलावा अन्य सदस्यों का अभिनय कर सकते हैं।
  • यदि सभी छात्र अभिनय करने में संकोच कर रहे हों तो इच्छुक छात्र अभिनय के लिए आगे आ सकते है और अन्य अनुमान लगा सकते हैं।
पहला दिन: चर्चा के लिए प्रस्तावित प्रश्न
1. परिवार के जिस सदस्य का अभिनय किया है उसका क्या कारण है? चर्चा करें।
2. यदि परिवार का कोई सदस्य किसी कारणवश अपनी भूमिका नहीं निभा पाए तो इसका परिवार पर क्या प्रभाव होगा?
3. क्या यह संभव है कि परिवार के हर सदस्य की भूमिका किसी अन्य सदस्य द्वारा भी पूरी की जा सकती है? हाँ या नहीं? क्यों?
4. यदि परिवार का कोई सदस्य किसी कारणवश अपना काम नहीं कर पा रहा हो तो, आपके घर में उनका काम कौन निभाता है?

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठकर आज की चर्चा के निष्कर्ष के बारे में विचार करें

दूसरा दिन:

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की प्रक्रिया से की जाए।

गतिविधि के चरण:
शिक्षक विद्यार्थियों के पाँच समूह बनाएँ।
शिक्षक बच्चों को कहें कि वे अपने अपने समूह में नीचे दी गई परिस्थितियों का अभिनय करें।
1. बड़े भाई का छोटे भाई बहनों की पढ़ने लिखने में मदद करना।
2. माता जी का आपको स्कूल छोड़ना।
3. दादी का आपको कहानी सुनाना।
4. दादाजी का बाज़ार से सब्जी लेकर आना।
5. चाचा का आपके साथ खेलना।
विद्यार्थियों को ऐसे लोगों को पहचानकर उनकी भूमिका निभाने के लिए कहें।

दूसरा दिन: चर्चा के लिए प्रस्तावित प्रश्न
1. क्या आपने कभी परिवार के किसी सदस्य का काम किया है जब वह अपना काम नहीं कर पा रहे हों? साझा करें।
2. आपने किसकी भूमिका निभाई और कैसे?
3. क्या आपके घर के सदस्य कभी कभी एक दूसरे का काम करते हैं? अपने समूह में चर्चा करें।
4. क्या एक दूसरे का काम करने के लिए आपके परिवार के सदस्य काम के बदले कुछ लेते हैं? अपने समूह में चर्चा करें।
5. घर अथवा आस पड़ोस में बड़ों के कौन-कौन से काम ऐसे हैं जिनमें बच्चे उनकी मदद कर सकते हैं?अपने साथी से चर्चा करें।
6. आजकल आप परिवार की मदद करने के लिए क्या काम करते हैं? साझा करें।

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठकर आज की चर्चा के निष्कर्ष के बारे में विचार करें

क्या करें, क्या न करें:
  • शिक्षक ध्यान दें कि किसी भी बच्चे के अभिनय पर प्रश्न न उठाएँ।
  • विद्यार्थियों को सबकी सोच का सम्मान करने के लिए प्रेरित करें।
  • शिक्षक विद्यार्थियों की अपेक्षाओं को सही या ग़लत न ठहराकर, उनके पीछे के कारणों को ढूँढने का प्रयास करें।
  • शिक्षक स्वयं भी गतिविधि में भागीदारी करें और चर्चा को उद्देश्य की ओर ले जाएँ ।
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  1. आओ मिलकर आकार बनाएँ
  2. चलो पिकनिक चलें
  3. देखो हम समान हैं
  4. धन्यवाद करें हम उनका
  5. मेरी पसंदीदा जगह
  6. मेरा हीरो कौन?
  7. मेरी सच्ची ख़ुशी
  8. मेरे सहयोगी
  9. मैं और प्रकृति
  10. मुझे ऐसा लगता है
  11. हैप्पीनेस वॉल
  12. ख़ुशी की रेखा
  13. मेरा भाव मेरी ख़ुशी
  14. प्रकृति की सैर
  15. आपका आभार
  16. मददगार
  17. गलती में अनेक सही में एक
  18. काला या सफेद
  19. सभी की भूमिका
  20. आवश्यकता तथा पसंद

18. काला या सफेद

गतिविधि का उद्देश्य: बच्चों का ध्यान इस ओर ले जाना कि वस्तु/स्थिति/घटना एक ही होती है किन्तु उसे देखने का सबका दृष्टिकोण एक न होने के कारण अलग अलग व्यक्तियों के लिए वह अलग अलग होती हैं। बच्चे यह जान पाएँगे कि जब वे किसी वस्तु को पूरा समझ लेते हैं तो उसे पूरा जान पाते हैं पूरा जानकर वे उसे दूसरों को भी समझा पाते हैं।
समय: कम से कम दो दिन अथवा शिक्षक के संतुष्ट होने तक
आवश्यक सामग्री: एक कॉपी जिसका आधा भाग सफेद तथा आधा भाग काला हो।

शिक्षक के लिए नोट: कई बार हम किसी वस्तु,/घटना/स्थिति, का एक ही पहलू देखते हैं और उसी से प्रभावित हो जाते हैं।इस गतिविधि द्वारा बच्चे किसी वस्तु,/घटना/स्थिति के सभी पहलू जानने की कोशिश करेंगे। हमें वस्तु/ परिस्थिति/घटना को वास्तव में समझने के लिए उसके हर दृष्टिकोण(सोचने का तरीका) को देखने की आवश्यकता होती है। इससे पूरी स्पष्टता हो जाती है और द्वंद नहीं रहता। जब हम किसी वस्तु/ परिस्थिति/घटना को समझ लेते हैं तो उसे दूसरों को भी समझा सकते हैं।
उदाहरण: इंजेक्शन लगाना या कड़वी दवा खाना किसी बच्चे को प्रिय न हो परन्तु वास्तव में वह उसके हित के लिए है। जब यह दृष्टिकोण बच्चे तक पहुँचेगा तभी वह इंजेक्शन अथवा कड़वी दवा का महत्त्व समझ पाएगा और दूसरे लोगों को भी समझ पाएगा।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की प्रक्रिया से की जाए।

गतिविधि के चरण:
1. कक्षा को दो भागों में बाँट देंI
2. कक्षा में कोई बॉल अथवा गोल चीज लेकर जाएँ जिसके आधे भाग पर सफेद रंग हो और दूसरे आधे भाग पर कालाI
3. कक्षा के बच्चों को दो समूहों में आमने-सामने बैठाएँ।
4. बच्चों को पूछें कि बॉल का रंग कैसा है?
5. एक समूह के बच्चे बॉल को सफेद बताएँगे जबकि दूसरे समूह के बच्चे उसे काला बताएँगे।
6. अब बॉल पलटें और बच्चों से पूछे कि बॉल का रंग अब उन्हें कैसे दिखाई देता है। जिन बच्चों को बॉल का रंग पहले सफेद दिखाई दिया था उन्हें वही बॉल अब काले रंग की दिखाई देगी। जबकि जिन बच्चों को पहले बॉल का रंग काला दिखाई दिया था अब उनको बॉल का सफेद रंग की दिखाई देगी।

पहला दिन: चर्चा के लिए प्रस्तावित प्रश्न
1. क्या आपके व आपके किसी साथी के बीच'’मैं ही सही हूं'’को लेकर मन मुटाव या मतभेद हुआ है? साझा करें।
2. आपके और आपके दोस्त के बीच मतभेद क्यों होते हैं? चर्चा करें।
3. क्या आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप जिस बात को सही ठहरा रहे थे। वो वैसी नहीं थी? अपने साथ घटी घटना साझा करें।
4. क्या आपका सोचने का तरीका हमेशा आपके मित्र के सोचने का तरीके के समान ही होता है? यदि हाँ तो क्यों? यदि नहीं तो क्यों नहीं?
5. सोचने के तरीके अलग-अलग होने के कौन कौन से कारण होते हैं?

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठकर आज की चर्चा के निष्कर्ष के बारे में विचार करें

क्या करें, क्या न करें:
  • बच्चों के दोनों समूह एक दूसरे के आमने सामने बैठें।
  • बॉल को ऐसी स्थिति में रखें कि बॉल का आधा भाग(सफेद) एक ओर बैठे बच्चों को दिखाई दे तथा दूसरा आधा भाग (काला) दूसरी ओर बैठे बच्चों को दिखाई दे।
  • चर्चा को उद्देश्य की ओर ले जाएँ ।
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  1. आओ मिलकर आकार बनाएँ
  2. चलो पिकनिक चलें
  3. देखो हम समान हैं
  4. धन्यवाद करें हम उनका
  5. मेरी पसंदीदा जगह
  6. मेरा हीरो कौन?
  7. मेरी सच्ची ख़ुशी
  8. मेरे सहयोगी
  9. मैं और प्रकृति
  10. मुझे ऐसा लगता है
  11. हैप्पीनेस वॉल
  12. ख़ुशी की रेखा
  13. मेरा भाव मेरी ख़ुशी
  14. प्रकृति की सैर
  15. आपका आभार
  16. मददगार
  17. गलती में अनेक सही में एक
  18. काला या सफेद
  19. सभी की भूमिका
  20. आवश्यकता तथा पसंद

17. गलती में अनेक सही में एक

गतिविधि का उद्देश्य: बच्चों का ध्यान इस ओर जाएगा कि सही उत्तर हमेशा एक ही होगा, गलत उत्तर अनेक हो सकते हैं।
समय: कम से कम दो दिन अथवा शिक्षक के संतुष्ट होने तक
आवश्यक सामग्री: कोई आवश्यक सामग्री नहीं।

शिक्षक के लिए नोट: जो हम सभी किसी वस्तु को सही तरह जान लेते हैं तो हम सभी उस वस्तु को एक सा ही जान पाते हैं। जब तक हम वस्तु को ठीक से नहीं जान पाते तब तक हम उसे अलग- अलग ही मानते हैं,इसी कारण भ्रमवश हमारे उत्तर अलग-अलग होते हैं लेकिन जब हम सही होते हैं तब हम सब के उत्तर एक समान ही होते हैं।
जैसे पहले चाँद क्या है? इस प्रश्न के अलग अलग लोगों के अलग अलग उत्तर थे परंतु आज सभी जानते हैं कि चंद्रमा धरती का एक उपग्रह है।
अलग अलग वस्तुओं के साथ इस गतिविधि को दूसरे दिन भी करवाया जा सकता है।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की प्रक्रिया से की जाए।

गतिविधि के चरण:
  • बच्चों को 5-5 के समूह में बाँट।
  • शिक्षक बच्चों को कक्षा में लगे श्यामपट्ट को दिखाकर उनसे उसकी लंबाई पूछें।
  • जैसे:-(श्यामपट्ट कितने स्केल के बराबर होगा)
  • सभी बच्चे उस श्यामपट्ट की जो जो लंबाई बताएँ उन्हें शिक्षक श्यामपट्ट पर लिख लें।(यह माप अलग अलग होगा)
  • कक्षा के प्रत्येक छात्र के साथ इसी गतिविधि को करें।
  • विद्यार्थियों से पूछें कि सभी बच्चों के द्वारा बताए गए उत्तर एक ही हैं अथवा अनेक।
  • एक विद्यार्थी को बुलाएँ और एक स्केल देकर उस श्यामपट्ट की लंबाई मापने को कहें।
  • अब उस बच्चे द्वारा बताए गया उत्तर श्यामपट्ट पर लिख लें।
  • अब श्यामपट्ट की लंबाई बच्चों से दुबारा पूछें।
  • अब सबके उत्तर समान होंगे।
पहला दिन: चर्चा के लिए प्रस्तावित प्रश्न
1. जब आपसे पहली बार श्यामपट्ट की लंबाई पूछी गई थी तब आपके उत्तर एक जैसे थे या अलग अलग? ऐसा क्यों था? चर्चा करें।
2. श्यामपट्ट मापने के बाद सभी विद्यार्थियों के लिए उसकी लंबाई एक जैसी थी या अलग अलग थी? ऐसा क्यों था? साझा करें।
3. सभी विद्यार्थियों उत्तर समान कब था तथा क्यों? चर्चा करके साझा करें।

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठकर आज की चर्चा के निष्कर्ष के बारे में विचार करें

क्या करें,क्या न करें:
  • दूसरे दिन अन्य वस्तुओं के साथ इस गतिविधि को करवा सकते हैं?
  • गतिविधि के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए शिक्षक प्रश्न पूछ सकते हैं।
  • सभी विद्यार्थियों को गतिविधि में भाग लेने का अवसर दें।
  • श्यामपट्ट की लंबाई को लेकर बच्चों के जो भी अनुमान हों उनका मज़ाक न बनने दिया जाए।
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  1. आओ मिलकर आकार बनाएँ
  2. चलो पिकनिक चलें
  3. देखो हम समान हैं
  4. धन्यवाद करें हम उनका
  5. मेरी पसंदीदा जगह
  6. मेरा हीरो कौन?
  7. मेरी सच्ची ख़ुशी
  8. मेरे सहयोगी
  9. मैं और प्रकृति
  10. मुझे ऐसा लगता है
  11. हैप्पीनेस वॉल
  12. ख़ुशी की रेखा
  13. मेरा भाव मेरी ख़ुशी
  14. प्रकृति की सैर
  15. आपका आभार
  16. मददगार
  17. गलती में अनेक सही में एक
  18. काला या सफेद
  19. सभी की भूमिका
  20. आवश्यकता तथा पसंद

16. मददगार

गतिविधि का उद्देश्य: बच्चों का ध्यान सहयोग देकर मिलने वाली खुशी की ओर जाएगा तथा वे इस खुशी को महसूस कर पाएँगे।
समय: कम से कम दो दिन अथवा शिक्षक के संतुष्ट होने तक
आवश्यक सामग्री : किसी विशेष सामग्री की आवश्यकता नहीं है।

शिक्षक के लिए नोट: यह गतिविधि सहयोग के महत्त्व और उससे मिलने वाली खुशी के बारे में है। इस गतिविधि में छात्र अपने जीवन में किसी का सहयोग करने वाले कार्य या अपने आसपास किसी को सहयोग देने के कार्य को भावों के साथ प्रस्तुत करेंगे।शिक्षक छात्रों को यह ज़रूर बताएँ कि सहयोग की भावना स्वयं के प्रति, दूसरों के प्रति या पर्यावरण के प्रति हो सकती है। शिक्षक कोशिश करेंगे कि छात्र अपने आसपास हो रहे क्रियाकलापों पर ध्यान दें और उनमें से ही कोई उदाहरण लें ।
इन कार्यों को तीन स्टिल पिक्चर्स में प्रस्तुत करेंगे । एक शुरू करने की स्थिति,दूसरी बीच की स्थिति तथा तीसरी अंतिम स्थिति।

स्टिल पिक्चर्स की परिभाषा: यहाँ role play का मतलब है अपने शरीर को एक मूर्ति/स्टैचू की तरह बनाकर अर्थात मूक अभिनय द्वारा (जिसमें आपको हिलाए-डुलाए बिना) छात्र अपने भाव को दर्शाएँ ।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की प्रक्रिया से की जाए।

गतिविधि के चरण :-
  • सबसे पहले शिक्षक छात्रों के 5 समूह बनाएँगे।
  • बच्चों को स्टिल पिक्चर द्वारा दूसरों से मिलने वाले सहयोग को दर्शाने को कहा जाएगा।
  • बच्चे तीन भागों में सहयोग को दर्शाएँगे।
  • बच्चे सबसे पहले सहयोग करने की पहली स्थिति का अभिनय करेंगे।
  • शिक्षक बोर्ड पर छात्रों द्वारा दिए गए उत्तर लिखेंगे और उदाहरण दे कर छात्रों को बतायेंगे कि यदि कोई हमारी उन्नति के लिए और हम किसी की उन्नति के लिए तन,मन,धन से उपयोगी होते हैं तो हम उसका और वे हमारा सहयोग करते हैं।
जैसे:- लाइन में किसी को धक्का न दें , किसी ज़रूरतमंद को बस में या मेट्रो में सीट दें, अपने आसपास कूड़ा गिरा हुआ देखें तो उसे कूड़ेदान में डालें। सोने से पहले रोज़ अपने दिन को याद करें और अपने व्यवहार के बारे में सोचें।
  • इसके बाद शिक्षक छात्रों से पूछें, “जब कोई आपके साथ अच्छा व्यवहार करता है और आप भी उनके प्रति उसी भाव से पेश आते हैं, तो आपको कैसा लगता है?
  • ऐसा कोई किस्सा बताएँ जब किसी ने आपकी या आपने किसी की मदद की हो ” तब आपको कैसा लगा? शिक्षक कुछ छात्रों से अपने अनुभव साझा करने को कहेंगे |
पहला दिन: चर्चा के लिए प्रस्तावित प्रश्न
1. आपके आस पास आपके मदद करने वाले कौन-कौन हैं? साझा करें।
2. यदि कोई आपकी मदद नहीं करता तो आपको कैसा लगता है और क्यों? चर्चा करें।
3. जब किसी ने आपकी मदद की तब आपको कैसा लगा? और क्यों? साझा करें।
4. क्या कभी ऐसा हुआ है कि आप चाहते हुए भी किसी की मदद नहीं कर पाए? यदि हाँ तो ऐसा क्यों हुआ, साझा करें।

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठकर आज की चर्चा के निष्कर्ष के बारे में विचार करें

दूसरा दिन:

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की प्रक्रिया से की जाए।

गतिविधि के चरण:
  • कक्षा में छात्रों को 4-5 समूहों में विभाजित करें। हर समूह में 5 से अधिक छात्र न हों।
  • शिक्षक छात्रों से पूछेंगे, “अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी में हम ऐसा क्या करें कि हम किसी के लिए सहयोगी हो पाएँ ? प्रत्येक छात्र किसी का सहयोग करने की अपनी कहानी या किस्सा, अपने समूह के साथियों के साथ साझा करे ।
  • इसके बाद सभी साथी मिलकर कोई एक कहानी चुनें जिसको वे स्टिल पिक्चर (still picture) बना कर क्लास के सामने प्रस्तुत करेंगे। आप मदद करने के दो तरीके दिखा सकते हैं।
  • स्टिल पिक्चर में बच्चों को बिना बोले कहानी का शुरू वाला भाग,बीच वाला भाग तथा अंत वाला भाग दर्शाना है।
दूसरा दिन: चर्चा के लिए प्रस्तावित प्रश्न
1. आप किसी की मदद करने के लिए कौन सा कार्य करना चाहेंगे? घर तथा विद्यालय में आप कहाँ-कहाँ मदद कर सकते हैं?
2. किसी की मदद करना मुश्किल है या आसान? ऐसा क्यों ?
3. ऐसे लोगों के प्रति कृतज्ञता कैसे व्यक्त करेंगे, जो आप के प्रति मददगार रहे हैं?
4. जब आपने किसी की मदद की और उसने आपके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया तब आपको कैसा लगा? साझा करें।

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठकर आज की चर्चा के निष्कर्ष के बारे में विचार करें

क्या करें,क्या न करें:
  • छात्रों को “हाँ या नहीं, अच्छा या बुरा ” के आगे की बात करने के लिए प्रोत्साहित करें |
  • शिक्षक छात्रों को गतिविधि शुरू करने से पहले स्टिल पिक्चर के बारे में बतायेंगे कि वो क्या है और कैसे बनाई जा सकती है ।
  • शिक्षक ध्यान दे कि इस गतिविधि में सभी छात्र हिस्सा लें। छात्रों को एक दूसरे का परस्पर सहयोग करने के लिए प्रेरित करें ।
  • शिक्षक कोशिश करें कि सभी समूहों के स्टिल पिक्चर का विषय एक-दूसरे से अलग और भिन्न हों
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  1. आओ मिलकर आकार बनाएँ
  2. चलो पिकनिक चलें
  3. देखो हम समान हैं
  4. धन्यवाद करें हम उनका
  5. मेरी पसंदीदा जगह
  6. मेरा हीरो कौन?
  7. मेरी सच्ची ख़ुशी
  8. मेरे सहयोगी
  9. मैं और प्रकृति
  10. मुझे ऐसा लगता है
  11. हैप्पीनेस वॉल
  12. ख़ुशी की रेखा
  13. मेरा भाव मेरी ख़ुशी
  14. प्रकृति की सैर
  15. आपका आभार
  16. मददगार
  17. गलती में अनेक सही में एक
  18. काला या सफेद
  19. सभी की भूमिका
  20. आवश्यकता तथा पसंद

15. आपका आभार

गतिविधि का उद्देश्य: विद्यार्थियों का ध्यान इस बात की ओर जाए कि विद्यालय में कई लोग हमारे सहायक हैं जो न केवल विद्यालय चलाने में बल्कि अच्छी तरह पढ़ाई लिखाई करने में भी हमारी सहायता करते हैं।
समय: कम से कम दो दिन अथवा शिक्षक के संतुष्ट होने तक
आवश्यक सामग्री: किसी भी सामग्री की आवश्यकता नहीं है।

शिक्षक के लिए नोट: हमारे विद्यालय को चलाने में बहुत से लोगों का योगदान होता है। यह गतिविधि विद्यार्थियों का ध्यान इन लोगों की ओर ले जाएगी। विद्यार्थी जान पाएँगे कि उनके प्रधानाचार्य/ प्रधानाचार्या, शिक्षकों के अतिरिक्त कई अन्य लोग उनके पढ़ने लिखने में सहायक होते हैं।जैसे चौकीदार, सफाई कर्मचारी,खाना विद्यालय तक लाने वाले तथा बांटने वाले लोग,पुस्तक छापने वाले तथा उन्हें विद्यार्थियों तक पहुंचाने वाले लोग,कॉपी, पेन,पेंसिल आदि बनाने तथा बेचने वाले लोग। विद्यार्थी इन सभी का सहयोग पहचानकर उनके प्रति कृतज्ञता का भाव व्यक्त करने का प्रयास कर पाएँगे।।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की प्रक्रिया से की जाए।

गतिविधि के चरण:
  • शिक्षक बोर्ड पर विद्यालय का एक चित्र बनायें।
  • सबसे पहले शिक्षक विद्यार्थियों से पूछेंगे कि विद्यालय में कौन-कौन लोग पढ़ने लिखने में आपकी सहायता करते हैं? चित्र देखकर आपके मन में विद्यालय से संबंधित किन-किन व्यक्तियों का ध्यान आया।
  • जो भी विद्यार्थी बोर्ड पर कुछ भी जोड़ने के लिए अपना हाथ उठाता है, वे अपने अभिनय द्वारा यह बताने का प्रयत्न करेगा कि वह व्यक्ति क्या कार्य करता है।
  • शेष कक्षा अनुमान लगाएगी कि विद्यार्थी किसका अभिनय कर रहा/रही है?
  • विद्यार्थी जिस सहायक का नाम बताएँ , शिक्षक बोर्ड पर विद्यालय के चित्र के चारों ओर उसका नाम एवं उसकी भूमिका लिख दें।(संभावित शब्द - शिक्षक,प्रधानाचार्य/ प्रधानाचार्या,विद्यार्थी आदि)
  • इन व्यक्तियों के अलावा कौन कौन अन्य लोग हैं जो पढ़ने लिखने में आपकी मदद करते हैं। उदाहरण: दुकानदार जो कॉपी,पेंसिल,रंग आदि आपको आसानी से उपलब्ध करवाता है।
पहला दिन: चर्चा के लिए प्रस्तावित प्रश्न
1. विद्यालय में अच्छी तरह पढ़ने लिखने के लिए कौन कौन हमारी सहायता करता है? अपने अपने समूह में चर्चा करें।
2. यदि सफाई करने वाले लोग आपके विद्यालय में सफाई न करें, तो आपकी पढ़ाई लिखाई पर क्या असर पड़ेगा? चर्चा करें।
3. समाज के इतने लोग आपका विद्यालय बनाने और चलाने में मदद करते हैं यह जानकर आप उन लोगों के प्रति कैसा महसूस करते हो?तथा क्यों?अपने समूह में चर्चा कर साझा करें।
4. आप पढ़ लिखकर उन लोगों के लिए क्या करना चाहोगे जो आज पढ़ने लिखने में आपकी सहायता कर रहे हैं?
5. घर पर आपकी पढ़ाई लिखाई करने में आपकी कौन कौन तथा कैसे सहायता करता है?चर्चा करें।
6. आपके मित्र पढ़ने लिखने में आपकी मदद कैसे करते हैं? चर्चा करें।
7. जो भी लोग आपको पढ़ने लिखने में मदद करते हैं, क्या उनको आपने इसके लिए उनके प्रति आभार व्यक्त किया है? यदि हाँ तो कैसे? यदि नहीं तो क्यों नहीं?

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठकर आज की चर्चा के निष्कर्ष के बारे में विचार करें

क्या करें, क्या न करें:
  • शिक्षक स्वयं भी गतिविधि में भाग लें
  • शिक्षक चर्चा को उद्देश्य तक पहुंचाएँ ।
  • यदि कोई विद्यार्थी अभिनय करने में संकोच करें तो उस पर ऐसा करने के लिए दबाव न बनाएँ ।
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  1. आओ मिलकर आकार बनाएँ
  2. चलो पिकनिक चलें
  3. देखो हम समान हैं
  4. धन्यवाद करें हम उनका
  5. मेरी पसंदीदा जगह
  6. मेरा हीरो कौन?
  7. मेरी सच्ची ख़ुशी
  8. मेरे सहयोगी
  9. मैं और प्रकृति
  10. मुझे ऐसा लगता है
  11. हैप्पीनेस वॉल
  12. ख़ुशी की रेखा
  13. मेरा भाव मेरी ख़ुशी
  14. प्रकृति की सैर
  15. आपका आभार
  16. मददगार
  17. गलती में अनेक सही में एक
  18. काला या सफेद
  19. सभी की भूमिका
  20. आवश्यकता तथा पसंद