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सत्र 15 (Mindfulness of Feelings)

1. Mindfulness of Feelings एवं चर्चा: 15 मिनट

उद्देश्य:
  • भावनाओं की पहचान करवाना।
  • भावनाओ के बारे में चर्चा और उन्हें बेहतर समझना।
क्या करें, क्या न करें:
  • एक सुरक्षित वातावरण बनाएं। हर एक बच्चे की भावनाओ को स्वीकार करें और सम्मान दें।
  • स्वयं के पक्षपात के अनुसार कोई निर्णय ना ले
गतिविधि के चरण:
  • शिक्षक विद्यार्थियों को बताएँ कि “आज हम हमारी भावनाओं/feelings के बारे में बात करेंगे। हमें कभी ख़ुशी महसूस होती है, कभी दुःख महसूस होता है, कभी डर लगता है। ये सब हमारी भावनाएँ/feelings होती हैं।”
  • शिक्षक कक्षा में अलग-अलग भावनाओं के चित्र ब्लैकबोर्ड पर बना सकते हैं।
  • शिक्षक विद्यार्थियों को बताएँ कि आज हम ऐसी ही एक भावना, ख़ुशी, के बारे में चर्चा करेंगे।
गतिविधि में चर्चा हेतु प्रस्तावित बिंदु :
  • जब आप खुश होते हैं, तब आपका चेहरा कैसा बनता है?
  • आपको कब कब ख़ुशी महसूस होती है ?
  • जब आप खुश होते हैं तब आप क्या करते हैं?
  • जब आपको ख़ुशी महसूस होती है तब क्या आपके शरीर में कुछ महसूस होता है? क्या महसूस होता है?
(ख़ुशी के एहसास को शरीर में महसूस करने की चर्चा करते समय, एक शरीर की आकृति बोर्ड पर बना ले और चर्चा ज़ारी रखें। )

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सत्र 14 (Mindful Walking)

1. Mindful Walking एवं चर्चा: 15 मिनट

उद्देश्य- विद्यार्थियों का ध्यान चलने की प्रक्रिया पर लाना।

क्या करें और क्या न करें
इस गतिविधि के लिए शिक्षक विद्यार्थियों को बाहर मैदान में भी लेकर जा सकते हैं।

गतिविधि के चरण:
  • शिक्षक विद्यार्थियों को बताएँ कि “अब हम सब ध्यान देकर चलने की प्रक्रिया का अभ्यास करेंगे।आप अपनी अपनी डेस्क से बाहर आ जाएँ और आराम से खड़े हो जाएँ। सभी बच्चे अपने हाथ, पैर ओर कंधो को ढीला छोड़ दे और अपना ध्यान अपनी साँसों पर ले जाएँ।”
  •  2 -3 लम्बी गहरी सांस ले ओर मुँह से छोड़ें।
  •  शिक्षक अब विद्यार्थियों को बताएँ कि वे अपना ध्यान अपने खड़े होने की स्थिति पर ले जाएँ। अपना ध्यान अपने पैरों की ओर ले जाएँ ओर देखें वह किस प्रकार जूतों को छू रहे हैं।
  • अब एक लम्बी गहरी सांस लें और धीरे से एक कदम आगे बढ़ाएं।
  • अपने कदम धीरे-धीरे और सावधानी से आगे बढ़ाएं जैसे आप किसी बादल पर चल रहे हों।
  • आप ध्यान दें कि आप कैसे चल रहे हैं और आपके पैर कब उठ रहे हैं और कब ज़मीन को छू रहे हैं। आपके शरीर में क्या-क्या महसूस हो रहा है इस पर ध्यान दें ।
  • अब आप सभी अपना दूसरा कदम आगे बढ़ाएं और अपना ध्यान अपने दूसरे पैर की ओर ले जाएँ। अब आप सभी धीरे-धीरे ऐसे अपने कदमों पर ध्यान देते हुए चलना शुरू करें और अपने सभी कदमों को एक-एक करके महसूस करें।
( शिक्षक लगभग 30 सेकंड के लिए विद्यार्थियों को यह गतिविधि करने दें)
  • शिक्षक विद्यार्थियों से पूछें कि क्या उन्हें इस वक़्त क्या किसी अंग में व शरीर में अपको कोई बदलाव महसूस हो रहा है?
( शिक्षक लगभग 30 सेकंड के लिए विद्यार्थियों को यह गतिविधि करने दें)
  • शिक्षक विद्यार्थियों से कहें कि वे वापस अपने बैठने के स्थान पर पहुंचें और एक लम्बी गहरी सांस लेकर छोड़ते हुए बैठ जाएं विद्यार्थियों को अपनी जगह पर आने के लिए 1-2 मिनट का समय दें ।
गतिविधि के चर्चा हेतु प्रस्तावित बिंदु: (शिक्षक अपनी तरफ़ से भी प्रश्न पूछ सकते हैं जिससे इस गतिविधि के उद्देश्य प्राप्त किए जा सकें।)
  • क्या आपने पहले कभी इस तरह से अपने चलने के ऊपर ध्यान दिया है?
  • आपने इस गतिविधि में क्या-क्या किया?
  • क्या आप अपने चलने पर ध्यान दे पाए?
शिक्षक के लिए नोट- शिक्षक यह भी ध्यान रखें कि विद्यार्थियों द्वारा दिए गए सभी उत्तर स्वीकार्य हैं और उन्हें सही या गलत होने की टिप्पणी न दें।

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सत्र 13 (Mindful Scribbling)

1. Mindful Scribbling एवं चर्चा: 15 मिनट

उद्देश्य: विद्यार्थी अपने मन की बातें चित्र (Scribbling) द्वारा व्यक्त करें और ऐसा करते हुए उनका ध्यान क्रिया के विभिन्न पक्षों पर जाए।

आवश्यक सामग्री: कागज़, क्रेयॉन (crayon)

गतिविधि के चरण:
  • विद्यार्थियों को आरामदायक स्थिति में बैठने के लिए कहें। अब उन्हें नाक से तीन लम्बी गहरी साँस लेने और मुँह से छोड़ने के लिए कहें। शिक्षक स्वयं भी विद्यार्थियों के साथ उन्हें तीन लम्बी गहरी साँस लेकर दिखाएँ।
  • अब उन्हें अपना ध्यान अपने पास रखे क्रेयॉन (crayon) और कागज़ पर लेकर जाने के लिए कहें।
  • शिक्षक विद्यार्थियों से कहें कि अपना ध्यान सभी रंगो पर लेकर जाएँ। वे सभी रंगों को देखते हुए कोई भी एक रंग अपनी पसंद का निकाल लें।
  • उस क्रेयॉन को अपने हाथ में लें और महसूस करें कि उसका क्या वज़न है? क्या वह हल्का है या भारी?
  • अब शिक्षक विद्यार्थियों से उन्हें अपने पास रखे कागज़ पर कुछ भी बनाने के लिए कहें।
  • विद्यार्थियों को तेज़ी से क्रेयॉन रगड़ने (scribble) को कहें।
(10 सेकेण्ड के लिए कोई निर्देश न दें।)
  • शिक्षक चाहें तो विद्यार्थियों को क्रेयॉन रगड़ने (scribbling) के लिए ऐसे निर्देश दे सकते हैं:ऊपर-नीचे, दाएँ-बाएँ, आड़ा-तिरछा।
  • अब विद्यार्थियों से ध्यान देने को कहें कि उन्हें हाथों में या कंधों में क्या कोई खिंचाव या ज़ोर महसूस हो रहा है? क्या अपनी साँस लेने के तरीक़े में कोई बदलाव महसूस हो रहा है?
  • इस प्रक्रिया को दुबारा कराएँ, पर इस बार रगड़ना / scribbling धीरे-धीरे करवाएँ। विद्यार्थियों का ध्यान उनके हाथों, कंधों और साँसों पर लेकर जाएँ।
गतिविधि में चर्चा हेतु प्रस्तावित बिंदु:
  • क्या आपने जल्दी-जल्दी चित्र बनाते समय अपने हाथों व कंधों में खिंचाव या कुछ और महसूस किया?
  • क्या आपने धीरे - धीरे चित्र बनाते समय अपने हाथों व कंधों में खिंचाव महसूस किया?
  • क्या आपने दोनों तरीक़ों में कोई अंतर महसूस किया?
  • कौनसा तरीक़ा ज़्यादा अच्छा लगा?

सत्र 12 (Mindful Touch)

1. ध्यान देकर छूना (Mindful Touch) एवं चर्चा: 15 मिनट

उद्देश्य: विद्यार्थियों को ध्यान देकर छूने का अभ्यास करवाना।

गतिविधि के चरण :
  • शिक्षक विद्यार्थियों को अपना पेंसिल बॉक्स खोल कर उसमे से सारी चीज़ें बाहर मेज़ पर निकालने को कहें। (अगर किसी विद्यार्थी के पास पेंसिल बॉक्स न हो तो शिक्षक उन्हें कक्षा से अलग अलग वस्तु दे सकते हैं।)
  • विद्यार्थियों से कहा जाये कि इन वस्तुओं को अपने हाथ में पकड़ें और देखें कि जब आप किसी वस्तु को अपने हाथ में पकड़ते हैं तो आप कैसा महसूस करते हैं?
  • शिक्षक विद्यार्थियों से कहें, “अब हम सब ध्यान देकर छूने की प्रक्रिया का अभ्यास करेंगे जिसमें हम सभी अपना ध्यान अपनी पेंसिल के ऊपर लेकर जाएंगे।”
  •  “आप सभी विद्यार्थी आरामदायक स्थिति में बैठ जाएँ | अब अपना ध्यान अपने सामने रखी पेन्सिल के ऊपर लेकर जाएँ। इस पेंसिल का रंग कैसा है? इस पेंसिल की आकृति कैसी है? अब सभी विद्यार्थी एक लम्बी गहरी सांस लें और इस पेंसिल को अपने हाथ में पकड़े।
  • सभी विद्यार्थी इस पेंसिल के वज़न पर अपना ध्यान लेकर जाएँ। इस पेंसिल की बनावट कैसी है? यह पेंसिल ठंडी है या गरम? इस पेंसिल का स्पर्श आपको हाथों में कैसा महसूस हो रहा है? (यहाँ पर शिक्षक 5 सेकंड के लिए रुकें)
  • “अगर आपको लगता है कि आपका ध्यान इधर-उधर जा रहा है तो आप फिर से अपना ध्यान इस पेंसिल के ऊपर ले आएं।
  • "अब आप सभी एक लम्बी गहरी सांस लें और जब भी आप अच्छा महसूस करें तो आप इस पेंसिल को धीरे से वापस अपनी डेस्क पर रख सकते हैं।"
गतिविधि में चर्चा हेतु प्रस्तावित बिंदु :
(शिक्षक अपनी तरफ़ से भी प्रश्न पूछ सकते हैं जिससे इस गतिविधि के उद्देश्य प्राप्त किए जा सकें। )
  • आप सभी कैसा महसूस कर रहे हैं?
  • क्या आप सभी अपना पूरा ध्यान पेंसिल की ओर ले जा पाए?
  • क्या आपने इस पेंसिल के बारे में कोई ऐसी चीज़ देखी जो आपने पहले नहीं देखी थी?
  • जब आपने इस पेंसिल को पकड़ा तब आप कैसा महसूस कर रहे थे?
  • क्या किसी भी समय पर आपके विचार इधर उधर गए?
  • क्या आप अपने विचार वापस पेंसिल के ऊपर ला पाए?

सत्र 11 (Heartbeat Activity)

1. दिल की धड़कन पर ध्यान देना (Heartbeat Activity): 15 मिनट

उद्देश्य: इस गतिविधि का उद्देश्य विद्यार्थियों का ध्यान उनके दिल की धड़कन पर लाना है।

गतिविधि के चरण:
  • विद्यार्थियों को बताएँ, “हम एक गतिविधि करेंगे, जिसमें हम अपना ध्यान अपने दिल की धड़कन पर लाएंगे।’’
  • विद्यार्थियों को अपनी जगह पर खड़े होने के लिए कहें।
  • फिर उन्हें हल्का-हल्का(कम ऊंचाई तक), धीरे-धीरे कूदने के लिए कहें।
  • धीरे-धीरे कूदने की ऊँचाई एवं गति को बढ़ाया जाए।
  • कुछ समय तक उन्हें कूदने दें।
  • जब वे थक जाएँ, तब उन्हें रुकने को और अपने स्थान पर बैठ जाने को कहें।
  • अब उनसे कहें कि वे अपना हाथ अपने दिल पर रखें।
  • उनसे पूछें कि उन्हें क्या महसूस हो रहा है। क्या सबको धक-धक महसूस हो पा रहा है?
  • विद्यार्थियों का ध्यान धड़कन की गति के साथ उसकी आवाज़ पर भी ले कर जाएँ- “ध्यान से सुनिए, कान में धड़कन की हल्की-हल्की आवाज़ आएगी।’’
गतिविधि में चर्चा हेतु प्रस्तावित बिंदु:
  • कौन-कौन अपनी धड़कन को महसूस कर पाया?
  • क्या आपको धड़कन तेज़ लग रही थी?
  • क्या आपमें से किसी ने अपनी धड़कन को सुना?
  • क्या कुछ समय बाद आपकी धड़कन की गति बदली?
क्या करें, क्या न करें :
  • विद्यार्थियों को कूदते समय आनंद लेने दें एवं शोर मचाने दें।
  • ध्यान रखें कि किसी बच्चे को चोट न लगे।

सत्र 10 (Mindful Seeing- II)

1.ध्यान दे कर देखना (Mindful seeing)- III एवं चर्चा: 15 मिनट

उद्देश्य: छात्रों को ध्यान देकर देखने कि प्रक्रिया अभ्यास विभिन्न कक्षाओं को देखकर करवाना।

गतिविधि के चरण
  • विद्यार्थियों को यह बताया जाए- “आज हम एक गतिविधि करेंगे, जिसमें हम अपना ध्यान अपने कक्षा की वस्तुओं पर लेकर जाएँगे।”
  • "आप सभी इस वक़्त अपने आस-पास क्या क्या देख पा रहे हैं?" (टेबल, कुर्सी, ब्लैकबोर्ड, डस्टर, दरवाजा, खिड़की इत्यादि)
  • कक्षा में उपस्थित किसी भी एक वस्तु पर उनका ध्यान लेकर जाएँ। उदाहरण के लिए, डेस्क पर ले जाएँ। 
  • कक्षा में कईं डेस्क होते हैं। विद्यार्थियों का ध्यान पहले एक किसी डेस्क पर ले जाएँ, उसकी विशेताओं को ध्यान देकर देखने को कहें। इसके बाद, उनका ध्यान कक्षा के किसी और डेस्क पर ले जाएँ और उन्हें अब इसकी विशेषताओं पर ध्यान देने को कहें।
  • इन 2 डेस्क में कुछ विशेषताएं एक जैसी होंगी, जैसे 4 टाँगे, लकड़ी का बना हुआ, इत्यादि। कुछ विशेषताएं भिन्न भी होंगी, जैसे अगर एक डेस्क की टांग पर स्क्रैच है तो दुसरे डेस्क के ऊपर है, किसी का रंग कहीं से हल्का है तो दुसरे का कहीं और से। इन एक जैसी और विभिन विशेषताओं पर विद्यार्थियों का ध्यान ले जाया जाये।
  • यह गतिविधि अलग-अलग वस्तुओं से करवाई जाये।
चर्चा हेतु प्रस्तावित बिंदु:
  • क्या-क्या विशेषताएं दोनों डेस्क में एक जैसी थी ?
  • क्या-क्या विशेषताएं दोनों डेस्क में एक दुसरे से भिन्न थीं ?
  • आप दोनों को अलग-अलग कैसे देख पाए?
  • क्या आपको यह गतिविधि करने में कोई कठिनाई महसूस हुई?

सत्र 9 (Mindful Seeing- I)

1. ध्यान दे कर देखना (Mindful seeing)- II एवं चर्चा: 15 मिनट

उद्देश्य: छात्रों को देखने पर ध्यान देने की प्रक्रिया से परिचित करवाना।

क्या करें और क्या न करें: शिक्षक छात्रों को उनकी भावनाओं पर विस्तार से बताने के लिए प्रेरित करें।

गतिविधि के चरण:
  • शिक्षक विद्यार्थियों से पूछें कि -
हम कैसे देखते हैं?
हमारी आंखें कहां हैं? (आंखों की तरफ इशारा करें)
अभी आप इस कक्षा में क्या-क्या चीज़ें देख सकते हैं? (टेबल, कुर्सी, किताबें इत्यादि)
  • शिक्षक अब कक्षा में प्रस्तुत किसी वस्तु के बारे में बताएँ और बच्चे अनुमान लगाएं कि किस वस्तु की बात की जा रही है।
उदाहरण - मैं कुछ काले रंग का देख रही हूँ। (बैकबोर्ड)
मैं कुछ चौकोर आकार का देख रही हूँ| (डेस्क)
(यदि एक ही विशेषता वाली एक से अधिक वस्तु हो तो 1-2 और विशेषताएं बताकर उस वस्तु को सुनिश्चित करवाया जाए।)
  • शिक्षक इस प्रकार से कक्षा में से कई उदाहरण विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं जिससे इस गतिविधि का उद्देश्य प्राप्त हो सकता है। इस गतिविधि के माधयम से हम विद्यार्थियों को अपने आस-पास की वस्तुओं को ध्यान से देखने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं।
  • अब शिक्षक विद्यार्थियों का ध्यान किसी एक वस्तु पर लेकर जाएँ जैसे कि डस्टर (duster), पंखा, कुर्सी, मेज़, इत्यादि। विद्यार्थियों का ध्यान उस वस्तु के आकार, आकृति, रंग, कमरे में स्थिति, आदि की तरफ ले जाया जाए।
जैसे, विद्यार्थियों के अपने डेस्क पर ध्यान दिलाते हुए ये बिंदु पूछे जा सकते हैं -
  • क्या आप इस डेस्क की चार टाँगे देख पा रहे हैं?
  • क्या आपके आस-पास के चार डेस्क एक जैसे हैं?
  • क्या आपका डेस्क कहीं से टूटा हुआ है? या उस पर कोई स्क्रैच/निशान है?
  • क्या पूरी डेस्क का रंग एक जैसा है?
  • क्या आप डेस्क में किसी और बात पर भी ध्यान दे पा रहे हैं?
गतिविधि में चर्चा हेतु प्रस्तावित बिंदु:
  •  क्या आपने पहले भी कभी वस्तुओं को ऐसे ध्यान देकर देखा है?
  • (यहाँ विद्यार्थियों को बताया जाए कि जब हम ध्यान देकर देखते हैं, तो हमारे आस-पास जो कुछ भी हो रहा होता है, उसके बारे में ज़्यादा अच्छे से जान पाते हैं।)
  • कहाँ-कहाँ हम ध्यान देकर देख सकते हैं? (पढ़ते, खेलते, खाते समय या फिर कोई और काम करते समय भी?)
  • ध्यान देकर देखने से आपको कैसा महसूस हुआ?
  • आपने टेबल की कौन कौन-सी बातों पर ध्यान दिया?
  • क्या आपने इस टेबल की किसी ऐसी बात पर ध्यान दिया जिस पर आपने पहले कभी ध्यान नहीं दिया था?

सत्र 8 (Mindful Listening)- IV

1. Mindful Seeing- I : आँखों देखी एवं चर्चा: 15 मिनट

उद्देश्य: इस गतिविधि का उद्देश्य विद्यार्थियों की सतर्कता को बढ़ाना व दिए जाने वाले निर्देशों पर ध्यान एकाग्र करवाना है।

गतिविधि के चरण:
  • इस गतिविधि के लिए विद्यार्थियों को बताया जाये कि जब शिक्षक
उँगलियों से चुटकी मारें तो उन्हें खड़े हो जाना है
हाथों से ताली बजाये तो उन्हें बैठ जाना है
डेस्क पर ऊँगली से ‘ठक ठक’ की आवाज़ करे तो कूदना है
  •  इसके अनुसार शिक्षक चुटकी, ताली एवं ठक-ठक की आवाज़ निकलते रहें और विद्यार्थियों को निर्देश अनुसार खड़े, बैठने और कूदने दें। शिक्षक धीरे-धीरे इस गतिविधि की गति बढ़ा सकते हैं, और निर्देश के क्रम को बदल सकते हैं | जैसे विद्यार्थियों को चुटकी बजाने पर बैठ जाना है, ताली बजाने पर कूदना और डेस्क पर ठक-ठक करने पर खड़े होना है।
क्या करें और क्या न करें:
  • शिक्षक यह सुनिश्चित करें की सभी विद्यार्थी गतिविधि में हिस्सा ले रहे हैं।
  • शिक्षक गतिविधि को विद्यार्थियों के क्रम के अनुसार कराएँ।
गतिविधि में चर्चा हेतु प्रस्तावित बिंदु:
  • क्या यह गतिविधि कठिन थी या आसान ?
  • इस गतिविधि को करने के लिए हमे क्या करना पड़ा? (ध्यान दे कर सुनना व देखना पड़ा)
  • क्या आपको इस गतिविधि में मज़ा आया?
  • आप कब कब गतिविधि ठीक से कर पाए और कब आप से चूक हुई? ऐसा क्यों?

सत्र 7 (Mindful Listening)- III

1. ध्यान दे कर सुनना (Mindful Listening)- III एवं चर्चा: 15 मिनट

उद्देश्य: विद्यार्थियों का ध्यान एक ही आवाज़ पर केंद्रित करने का अभ्यास करना है।
  • शिक्षक विद्यार्थियों को बताएँ, “अब हम सब Mindful Listening का अभ्यास करेंगे जिसमे हम सभी अपना ध्यान अपने आस-पास की आवाज़ों पर लेकर जाएंगे।”
  • शिक्षक विद्यार्थियों से कहें कि सभी विद्यार्थी अपना ध्यान अपने बैठने की स्थिति पर ले जाएँ। सभी विद्यार्थी कुर्सी के सहारे सीधे होकर बैठ जाएँ और 2 से 3 लम्बी गहरी सांसें लें।
  • शिक्षक विद्यार्थियों से कहें कि सब अपनी आँखें बंद कर लें।
  • अब आप सभी एक बार फिर से लम्बी गहरी सांस लें और अपना ध्यान अपनी कक्षा में या कक्षा से बाहर आने वाली आवाज़ों की ओर ले जाएँ। यह आवाज़ किसी के बात करने की, किसी के चलने की, कुछ सामान के गिरने की, बाहर से चिड़िया की हो सकती हैं।”
(कुछ सेकेण्ड तक उन्हें उन आवाज़ों को सुनने दें।)
  • अब शिक्षक विद्यार्थियों से कहें कि वे अपना ध्यान किसी एक प्रकार की आवाज़ जो कक्षा या कक्षा के बाहर लगातार बनी हुई है, उसकी ओर ले जाएँ। उदाहरण के लिए पंखे की आवाज़, चिड़िया की आवाज़, ट्रैफिक की आवाज़ इत्यादि।
  • इन निर्देशों के दौरान शिक्षक अपने आप से किसी एक प्रकार की आवाज़ को बनाएं और उस आवाज़ को बनाते वक़्त ध्यान रखें की इस आवाज़ में गिनती का एक पैटर्न बन रहा है।
उदाहरण के लिए - शिक्षक 3 बार ताली बजा सकते है।
शिक्षक 2 बार अपनी उँगलियों से चुटकी बजा सकते हैं।
शिक्षक 4 बार अपने पैरों को ज़मीन पर टैप कर सकते हैं इत्यादि।
  • शिक्षक अब विद्यार्थियों से कहें कि “क्या आप सभी लोग अलग-अलग प्रकार की आवाज़ें सुन सकते हैं?
  • शिक्षक विद्यार्थियों से ध्यान देने के लिए कहें कि क्या ये आवाज़ें एक समान हैं या अलग हैं? क्या यह आवाज़ें तेज हैं या धीरे हैं? क्या यह आवाज़ें आपके पास हैं या आप से दूर हैं?
  • शिक्षक यह गतिविधि 4 से 5 बार कक्षा में विभिन्न आवाज़ों के साथ करवा सकते हैं।
क्या करें और क्या न करें:
  • शिक्षक यह सुनिश्चित करें कि सभी विद्यार्थी गतिविधि में हिस्सा ले रहे हैं।
  • शिक्षक गतिविधि के दौरान ध्यान दें कि आवाज़ उत्पन्न करते वक़्त वह गिनती का ध्यान रखें।
गतिविधि में चर्चा हेतु प्रस्तावित बिंदु :
  • आप सभी कैसा महसूस कर रहे हैं?
  • क्या आप सभी ने विभिन्न प्रकार की आवाज़ें सुनी?
  • क्या आप सभी ने ताली बजने की आवाज़ सुनी?
  • ताली कितनी बार बजायी गयी थी?
  • क्या आप सभी ने चुटकी लेने की आवाज़ सुनी?
  • चुटकी कितनी बार बजायी गयी थी?
  • कुछ ऐसी आवाज़ें थी जिन्हे विभिन्न वस्तुओं से उत्पन्न किया गया था। क्या आप उन वस्तुओं के नाम बता सकते हैं?
  • क्या आप इन आवाज़ों की गिनती कर सकते थे?

सत्र 6 (Mindful Listening)- II

1. ध्यान दे कर सुनना (Mindful Listening)- II एवं चर्चा: 15 मिनट

उद्देश्य: बच्चे अपने आसपास की आवाज़ों के प्रति सजग होकर ध्यान देने लग जाएँ।

गतिविधि के चरण:
  • शिक्षक विद्यार्थियों को बताएँ कि “आज हम सब ध्यान देकर सुनने की प्रक्रिया का अभ्यास करेंगे जिसमें हम सभी अपना ध्यान अपने आस-पास की आवाज़ों पर लेकर जाएंगे।”
  • “सभी अपनी कुर्सी के सहारे सीधे होकर एक आरामदायक स्थिति में बैठ जाएँ। अपने हाथ या तो अपने टांगों पर रख सकते हैं या फिर डेस्क पर रख सकते हैं।
  • अब 2 से 3 लम्बी गहरी सांस लें। शिक्षक पहले ख़ुद उन्हें लम्बी गहरी साँस लेकर दिखा सकते हैं।
  • अब विद्यार्थियों से कहें कि वे अपनी आंखें बंद कर लें। यदि वे अपनी आंखें बंद करने में असहज महसूस कर रहे हों तो आंखें खुली रखते हुए नीचे की ओर भी देख सकते हैं।
  • अब अपना ध्यान कक्षा में आने वाली अलग-अलग आवाज़ों की ओर ले जाएँ। ये आवाज़ें पंखे की, ट्रैफिक की, पंछियों की, किसी जानवर की, बाहर किसी के बात करने की, कक्षा में विद्यार्थियों के हँसने की, इत्यादि हो सकती हैं।
  • (यहाँ पर शिक्षक कुछ सेकंड के लिए रूकें।)
  • शिक्षक विद्यार्थियों को कहें अगर आपको लगता है कि आपका ध्यान इधर-उधर जा रहा है तो आप फिर से अपना ध्यान वापस कक्षा में आ रही आवाज़ों के ऊपर ले आएं।"
  • फिर से अपना ध्यान कक्षा में आने वाली अलग-अलग आवाज़ों की ओर ले जाएँ। ये आवाज़ें पंखे की, ट्रैफिक की, पंछियों की, किसी जानवर की, बाहर किसी के बात करने की, कक्षा में विद्यार्थियों के हँसने की, इत्यादि हो सकती हैं।
(कुछ सेकंड तक उन्हें आवाज़ें सुनने दें व कोई निर्देश न दें।)
  • शिक्षक विद्यार्थियों से कहें अब आप सभी एक लम्बी गहरी सांस लें और जब भी आप अच्छा महसूस करें तो आप धीरे-धीरे अपनी आँखें खोल सकते हैं।"
गतिविधि में चर्चा हेतु प्रस्तावित बिंदु :
(शिक्षक अपनी तरफ से भी प्रश्न पूछ सकते हैं जिससे इस गतिविधि के उद्देश्य प्राप्त किये जा सकें।)
  • आप कैसा महसूस कर रहे हैं?
  • आपने कौन कौन सी आवाज़ें सुनी?
  • क्या यह सभी आवाज़ें एक जैसी थी या एक दूसरे से भिन्न थी?
  • आवाज़ आपसे बहुत दूर थी या आपके नज़दीक?
  • आपको एक समय में एक ही आवाज़ सुनाई दे रही थी या एक से ज़्यादा?
  • क्या आप कोई ऐसी आवाज़ें सुन पाए जो आपने पहले न सुनी हों?

सत्र 5 (Mindful Listening)-I

1. ध्यान दे कर सुनना (Mindful Listening): 15 मिनट

उद्देश्य: बच्चे अपने आसपास की आवाज़ों के प्रति सजग होकर ध्यान देने लग जाएँ।

क्या करें, क्या न करें: शिक्षक ध्यान दें कि सभी बच्चे गतिविधि में हिस्सा ले रहे हैं।

गतिविधि के चरण:
  • इस गतिविधि में शिक्षक विद्यार्थियों से पूछें की ऐसी कौन-कौन सी जगह हैं जहाँ बहुत शोर होता है और कौन कौन सी जगह हैं जो एकदम शांत होती हैं।
  • शिक्षक यह उदाहरण दे सकते हैं:
जगह जहाँ शोर होता है
जगह जो शांत होती हैं
ट्रैफिक की आवाज़
गार्डन में शांत बैठे वक़्त
मार्किट में लोगो की आवाज़
कमरे में अकेले बैठे हुए
स्कूल में छुट्टी के वक्त
लाइब्रेरी (Library) में
  • शिक्षक अब विद्यार्थियों को बताएँ कि हम अब अलग-अलग आवाज़ें पहचानने और सुनने के लिए एक गतिविधि करेंगे।
  • शिक्षक अब कुछ विद्यार्थियों को कक्षा में सामने बुलाकर अलग-अलग प्रकार की आवाज़ें निकालने के लिए कह सकते हैं और बाकी कक्षा के बच्चे उस आवाज़ पर ध्यान देकर पहचानने का प्रयास करेंगे । (जैसे बिल्ली की आवाज़, शेर के दहाड़ने की आवाज़, रेलगाड़ी की आवाज़, कार की आवाज़, दौड़ने की आवाज़ इत्यादि)
  • जब बच्चे आवाज़ों की पहचान कर लें, शिक्षक यही गतिविधि विद्यार्थियों की आँखें बंद करके करवाएं और विद्यार्थियों से यह पहचान करने को कहें कि कौन से बच्चे ने कौन सी आवाज़ निकाली थी। 
  • इस गतिविधि को करवाने के लिए 4-5 विद्यार्थियों को आगे बुलाया जा सकता है।
गतिविधि में चर्चा हेतु प्रस्तावित बिंदु : (शिक्षक अपनी तरफ से भी प्रश्न पूछ सकते हैं जिससे विद्यार्थियों को उस गतिविधि के उद्देश्य तक पहुँचाया जा सके। )
  • हम रोज़ किस-किस प्रकार की आवाज़ें सुनते हैं?
  • क्या यह सभी आवाज़ें एक प्रकार की होती हैं या एक दूसरे से भिन्न होती हैं?
  • क्या शोर वाली जगहों पर आवाज़ सुनना आसान होता है या शांत जगह पर?
  • आपको यह गतिविधि कैसी लगी?
  • अपनी आस पास की आवाज़ें ध्यान से सुनने से क्या फ़ायदा हो सकता है?

सत्र 4 (निर्देश अनुसार कार्य करना)

1. निर्देश अनुसार कार्य करना: 15 मिनट

उद्देश्य: इस गतिविधि का उद्देश्य विद्यार्थियों की सतर्कता को बढ़ाना व दिए जाने वाले निर्देशों पर ध्यान एकाग्र करवाना है।

क्या करें, क्या न करें:
  • इस गतिविधि में विद्यार्थियों को मज़े लेने दें, हंसने खेलने दें, और उन्हें टोकें नहीं |
  • ध्यान रखें कि किसी विद्यार्थी का मज़ाक न बने और किसी को चोट न पहुंचे|
गतिविधि के चरण:
  • इस गतिविधि में शिक्षक निर्देश कुछ अलग देंगे, और खुद करेंगे कुछ और, परन्तु विद्यार्थियों को केवल बोले गए निर्देश का पालन करना है। उदहारण के लिए:
    • शिक्षक निर्देश दें ‘हाथ अपने पेट पर रखो’, परन्तु खुद का हाथ डेस्क पर रखें,
    • शिक्षक निर्देश दें ‘हाथ कन्धों पर रखो’, परन्तु खुद का हाथ पेट पर रखें,
    • शिक्षक निर्देश दें ‘कूदो’, परन्तु खुद बैठ जाएँ, इत्यादि
  • इसी प्रकार से इस गतिविधि को आगे बढ़ाना है।
गतिविधि में चर्चा हेतु प्रस्तावित बिंदु : (शिक्षक अपनी तरफ से भी प्रश्न पूछ सकते हैं जिससे विद्यार्थियों को उस गतिविधि के उद्देश्य तक पहुँचाया जा सके। )
  • क्या इस गतिविधि में आपको कोई परेशानी आयी ?
  • यह गतिविधि मुश्किल थी या आसान?
  • यह करने के लिए आपने शरीर के कौन से अंगों का इस्तेमाल किया?
  • आप यह गतिविधि अच्छे से कब कर पाए? क्यों?

सत्र 3 (आलाप)

1. आलाप गतिविधि (Vocalization): 15 मिनट

उद्देश्य: इस गतिविधि का उद्देश्य विद्यार्थियों का ध्यान अध्यापक द्वारा दिए गए निर्देशों की ओर केंद्रित करवाना है। इस गतिविधि के द्वारा बच्चे ध्यान से देखना सीखेंगे। हाथ के उतार-चढ़ाव को ध्यान से देखने के साथ-साथ, बच्चे अपने स्वर को ऊँचा या नीचा करेंगे।

क्या करें क्या न करें:
  • गले पर रखी हुई उंगलियों का विशेष ध्यान रखें। कोई भी बच्चा गले को जोर से न दबाए।
  • इस गतिविधि के दौरान विद्यार्थियों को अपनी अभिव्यक्ति खुलकर देने दें। जैसे हँसकर, मुस्कुराकर, खिलखिलाकर आदि।
  • स्तर का बदलाव तेजी से न करें। आराम से गति को बढ़ाएँ-घटाएँ।
गतिविधि के चरण:
इस गतिविधि में विद्यार्थियों को शिक्षक के हाथों की गति के अनुसार “आआआ” बोलना है।
इस गतिविधि के अगले स्तर के रूप में विद्यार्थियों का ध्यान उनके गले में उत्पन्न होने वाली कम्पन को महसूस करवाना है।
  • शिक्षक कक्षा में कहें, “विद्यार्थियों, मेरे हाथ पर ध्यान दीजिए। जैसे-जैसे मेरा हाथ ऊपर जाए तो आपको “आआआआआआ” की आवाज ऊँची करते जाना है और जैसे-जैसे मेरा हाथ नीचे आए तो यही “आआआआआ” की आवाज घटाते जाना है।“
  • विद्यार्थियों को अपने गले पर दो उंगलियाँ रखकर कंपन को महसूस करने के लिए कहा जाए। (इसके लिए अध्यापक पहले स्वयं ऐसा करके दिखाएँ।)
  • अगर कोई बच्चा अपने गले की कम्पन महसूस नहीं कर पा रहा हो, तो अध्यापक उसे सही क्रिया करने में मदद करें। या फिर समझ बनाने के लिए अपने गले पर उसकी उंगली रखवाकर कम्पन महसूस करवा सकते हैं।
  • हाथ के उतार-चढ़ाव के साथ विभिन्न स्तर पर इसका अभ्यास करवाया जाए।
  • दूसरे विकल्प के रूप में शिक्षक चाहें तो विद्यार्थियों को इस प्रकार निर्देश दे सकते हैं- दोनों हाथों को एक साथ जोड़ने पर शाँत हो जाएँ और उनके बीच की दूरी बढ़ाने पर आलाप का स्वर ऊँचा करें, इस प्रकार अभ्यास करा सकते हैं। हाथ के बीच के अंतर बढ़ाने या घटाने की गति कम-ज्यादा की जा सकती है। ऐसा करने से बच्चे अपना ध्यान शिक्षक के हाथों की गति पर देने के साथ अपनी आवाज़ में भी उतार चढ़ाव कर रहे हैं। 
  • तीसरे विकल्प के रूप में अध्यापक एक बच्चे को कक्षा के आगे बुलाकर इस गतिविधि को करवाने के लिए कह सकते हैं। वह छात्र चाहे तो इस गतिविधि को ‘आआआआआ’ की आवाज के बजाय अपने नाम के पहले अक्षर के साथ भी कर सकता है।
गतिविधि में चर्चा हेतु प्रस्तावित बिंदु : (शिक्षक अपनी तरफ से भी प्रश्न पूछ सकते हैं जिससे विद्यार्थियों को उस गतिविधि के उद्देश्य तक पहुँचाया जा सके। )
  • क्या आपने मेरे हाथ की गति को देखा?
  • क्या आपको गले में कंपन महसूस हुआ?
  • कंपन को महसूस करते समय कैसा लगा?
  • क्या तेज़ आवाज़ में कंपन महसूस हुआ?
  • क्या धीमी आवाज़ में कंपन महसूस हुआ?
  • आवाज़ तेज़ या धीमी होने पर क्या कंपन में कोई अंतर महसूस हुआ?
  • क्या पहले कभी आपका ध्यान अपने गले के कम्पन पर गया था?
  • इस गतिविधि को करने के लिए आपको कहाँ ध्यान देना पड़ा?

सत्र 2 (साइमन कहता है)

1. साइमन कहता है (Simon Says): 15 मिनट

उद्देश्य: इस गतिविधि का उद्देश्य विद्यार्थियों की सतर्कता को बढ़ाना व दिए जाने वाले निर्देशों पर ध्यान एकाग्र करवाना है।

गतिविधि के चरण: विद्यार्थियों को गतिविधि के नियम बताए जाएँ। करना कुछ इस प्रकार होगा - उन्हें केवल साइमन के आदेश को मानना है। मतलब, जब यह कहा जाए, “साइमन कहता है - कूदो”, तभी कूदना है। पर जब केवल यह कहा जाए – “कूदो”, तो कूदना नहीं है क्योंकि साइमन ने ऐसा नहीं कहा।
अब गतिविधि शुरू की जाए जिसमें निम्नलिखित आदेश दिए जा सकते हैं: साइमन कहता है (या बिना साइमन का नाम लिए):
  • हाथ ऊपर उठाएँ।
  • पैरों को छुएँ।
  • अपने नाक को हिलाएँ।
  • घुटनों को छुएँ।
  • मजाकिया चेहरा बनाएँ।
  • सिर को छुएँ।
  • कंधों को छुएँ।
  • एक पांव पर खड़े हो जाएँ।
  • अपनी पलकें झपकाएँ।
  • पैरों की उंगलियों के बल खड़े हों।
  • कमर पर हाथ रखें।
  • आसमान को छूने की कोशिश करें।
  • खुद को गले लगाएँ, आदि।
गतिविधि में चर्चा हेतु प्रस्तावित बिंदु : (शिक्षक अपनी तरफ से भी प्रश्न पूछ सकते हैं जिससे इस गतिविधि के उद्देश्य प्राप्त किए जा सकें।)
  • आपके शरीर के किस अंग ने आपको सुनने में मदद की? (कान)
  • आदेश का सही-सही पालन करने के लिए आपको क्या करना पड़ा? (सतर्क रहते हुए ध्यान से सुनना पड़ा।)
  • क्या यह गतिविधि मुश्किल थी या आसान?
  • क्या आपको यह गतिविधि करने में कोई कठिनाई हुई?
  • इस गतिविधि से आपको क्या लाभ होगा? (जो भी हम सुन रहे होते हैं यदि उस पर ध्यान देते हैं तो हम बेहतर तरीके से सुन पाते हैं।

सत्र 1 (Understanding Breathing)

1. a. श्वास की समझ (Understanding Breathing) एवं श्वास पर ध्यान देना: 15 मिनट

उद्देश्य: इस गतिविधि का उद्देश्य विद्यार्थियों को साँस के अंदर आने और बाहर जाने की प्रक्रिया के प्रति सजग करना है।

गतिविधि के चरण: विद्यार्थियों से ये प्रश्न करते हुए शुरूआत करें-
  • हम सब किस अंग से सूंघते हैं? (अपनी नाक से)
  • आपकी नाक कहाँ है? (नाक की तरफ इशारा कर सकते हैं|)
  • आपने कौन-कौन सी चीजों /वस्तुओं की ख़ुशबू सूंघी है?
  • क्या आपने कभी कोई फूल सूँघा है? कौन सा फूल आपको सबसे अधिक पसंद है? (गुलाब, गेंदा, चंपा आदि।)
निर्देश देते हुए यह गतिविधि स्वयं भी करें और विद्यार्थियों से अनुकरण करने के लिए कहें -
  • अपने एक हाथ को अपने नाक के नीचे लेकर आएँ। मान लीजिए कि हमारे हाथ में एक फूल है। इस फूल को सूंघने का प्रयास करें। जब हम फूल को सूंघ रहे हैं, तो हम साँस अंदर ले रहे हैं। अब फूल को फूंक मारकर उड़ा देते हैं। जब हम फूँक मारते हैं तो हम साँस बाहर छोड़ रहे होते हैं। हवा नाक से अंदर आती है और इसी तरह साँस छोड़ने पर हवा नाक या मुँह से बाहर जाती है।
इस फूल वाली गतिविधि को कम से कम 2 सप्ताह तक कराया जाए। जब लगे कि विद्यार्थी साँस के अंदर आने और बाहर जानें के बारे में जागरूक हो चुके हैं तो इस गतिविधि को बंद किया जा सकता है।

गतिविधि में चर्चा हेतु प्रस्तावित बिंदु: (शिक्षक अपनी तरफ से भी प्रश्न पूछ सकते हैं जिससे इस गतिविधि के उद्देश्य प्राप्त किए जा सकें। )
  • विद्यार्थियों! हमारे हाथ में क्या था? (फूल) 
  • हमने फूल की ख़ुशबू कैसे सूंघी? (अपनी नाक से) 
  • हम साँस कहाँ से लेते हैं? (अपनी नाक से) 
  • ख़ुशबू सूंघने के लिए हमने साँस अंदर ली या बाहर छोड़ी? (अंदर) 
  • फूल हमारे हाथों से कैसे उड़ा? (साँस बाहर निकालने पर)
b. श्वास पर ध्यान देना

उददेश्य: इस गतिविधि का उद्देश्य छात्रों का ध्यान अपनी अंदर आती और बाहर जाती साँस पर ले जाना है।

क्या करें और क्या न करें:
  • यह सुनिश्चित करें कि हर बच्चा साँस लेने व छोड़ने की प्रक्रिया से अवगत हो।
  • ध्यान रखें कि विद्यार्थियों को साँस के अंदर-बाहर होने और पेट के अंदर-बाहर होने का तालमेल समझ आ रहा हो।
गतिविधि के चरण:
  • विद्यार्थियों को बताया जाए कि Mindful Breathing में हम अपना ध्यान अपनी साँस पर ले कर आते हैं और हर अंदर-बाहर जाती साँस पर ध्यान केंद्रित करते हैं। यह ध्यान देने की प्रक्रिया का मूल अभ्यास है और इसे हम हर बार करेंगे।
  • आरामदायक स्थिति में बैठकर अपनी आँखें बंद करने को कहें।
  • उसके बाद अपने पेट पर एक हाथ रखने के लिए कहें।
  • विद्यार्थियों के ध्यान को श्वास के साथ-साथ पेट पर भी लेकर आना है। विद्यार्थियों को कहें कि वे इस बात पर ध्यान दें कि सांस लेते और छोड़ते समय आपका पेट कब फूलता है और कब सिकुड़ता है।
  • इस बीच यदि यह दिखता है कि विद्यार्थियों का ध्यान अपने श्वास एवं पेट से हट गया है तो सहज रूप से निर्देश दोहराएं।
  • गतिविधि को 1 से 2 मिनट तक करवाने के बाद विद्यार्थियों से यह गतिविधि पेट पर हाथ रखकर दुबारा करने को कहें।
  • विद्यार्थियों से पूछें कि अब सांस लेते हुए और छोड़ते समय पेट कब अंदर आया और कब बाहर गया।
  • गतिविधि को 1 से 2 मिनट तक करवाने के बाद निम्न बिंदुओं पर चर्चा करें। इसके बाद, गतिवधि को पुनः करवाएँ।
गतिविधि में चर्चा हेतु प्रस्तावित बिंदु:
  • क्या आपने अपने पेट को फूलते हुए महसूस किया?
  • क्या आपने अपने पेट को अंदर जाते हुए महसूस किया?
  • आपका पेट कब अंदर गया? (जब साँस बाहर निकाला।)
  • क्या पहले कभी आपका ध्यान ‘साँस लेते समय पेट के अंदर-बाहर होने’ पर गया था?
  • जब हम पेट के साथ-साथ श्वास पर भी ध्यान देते हैं तो हमारी साँस धीमी और गहरी होती है। हम कभी भी कहीं भी इस प्रकार का अभ्यास कर सकते हैं।
शिक्षक के लिए नोट- शिक्षक बच्चो से उत्तर लेते समय उनके द्वारा दिए गए सभी उत्तरों को सहजता से लें एवं उन पर सही या गलत होने की टिप्पणी न दें।  

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कक्षा- नर्सरी और KG: माइंडफुलनेस

ध्यान देने की प्रक्रिया (Mindfulness) – एक परिचय

किताब के इस पृष्ठ को पढ़ने के लिए थोड़ा सा कुछ अलग करते हैं...
यदि आप भी मेरी तरह किसी किताब का परिचय वाला पन्ना छोड़ देते हैं, तो आप इस क्षण नीचे दिए गए प्रयोग को करके देखें -
आप यह पढ़ते समय ध्यान दें कि आपका ध्यान कहाँ है? आपने जो इस पल अपने हाथ में किताब पकड़ी हुई है, उसके प्रति सजग हो जाएँ। देखें, क्या आप इस किताब के भार को महसूस कर पा रहे हैं? इस किताब के पन्ने के रंग को देखें; हर अनुच्छेद (paragraph) के बीच के अंतर पर ध्यान दें; हर वाक्य के बीच के अंतर पर ध्यान दें; अक्षर की बनावट को देखें।
अब अपना ध्यान अपनी बैठने की स्थिति पर दें। यदि आप कुर्सी पर बैठे हैं तो आप अपने शरीर और कुर्सी के संपर्क को महसूस करें। ध्यान दें कि आप इस क्षण कैसा महसूस कर रहे हैं? यदि मन में किसी विचार और भावनाएँ हैं, तो एक क्षण के लिए उन पर ध्यान दें। बिना किसी तरह के विचार में उलझे हुए अपना ध्यान अपने अंदर आती हुई साँस पर ले आएँ और फिर बाहर जाती हुई साँस के साथ अपने आस-पास के वातावरण में मौजूद आवाज़ों के प्रति सजग हो जाएँ।
स्वयं के साथ बिताए गए इस क्षण के लिए आप, अपने आप की सराहना करें। आपने अभी जो अनुभव किया, यह ध्यान देने की प्रक्रिया का एक उदाहरण है।
जब हम अपना ध्यान अपने आस-पास के वातावरण व स्वयं पर लेकर जाते हैं तब हम अपने अंदर एक नई ऊर्जा एवं स्थिरता का अनुभव करते हैं और वह हमारी अंतर्दृष्टि विकसित करता है।
अन्य किसी भी कौशल की तरह ही ध्यान की प्रक्रिया को भी सीखा जा सकता है। जिस तरह से संगीत, नृत्य, गाड़ी चलाना, आदि को सीखने के लिए निरंतर अभ्यास की आवश्यकता पड़ती है, ठीक उसी तरह ध्यान के लिए भी अभ्यास की आवश्यकता होती है। ध्यान के माध्यम से हम मन की स्थिरता व संतुलन का अनुभव कर सकते हैं।

बच्चे एवं ध्यान देने की प्रक्रिया (Mindfulness)
बच्चों का मूल स्वभाव रचनात्मक एवं कल्पनाशील होता है। उनकी सहज प्रवृत्ति (natural tendency) वर्तमान में रहने की ही होती है। जब वे कोई भी कार्य करते हैं तो वे उसी के बारे में सोचते हैं। जैसे - अगर वे खेल रहे हैं, तो वे उस समय खेलने के बारे में ही सोचते हैं। जब वे खा रहे हैं तो वे केवल खाने के बारे में ही सोचते हैं। परन्तु आजकल की भाग-दौड़ और प्रतियोगिता के दौर में, बच्चों पर कई प्रकार के दबाव बनने शुरू हो जाते हैं। जैसे-जैसे वे बड़े होने लगते हैं, स्कूल जाने लगते हैं, उनके ऊपर उम्मीदों का बोझ बढ़ने लगता है। ऐसे में, खेलते समय उनके मन में पढ़ाई का विचार आ जाना या फिर पढ़ाई करते समय घर की किसी और बात का विचार आ जाना अब सामान्य बात होने लगी है। उनका ध्यान और मन भटकने लगता है। वे या तो गुज़रे हुए समय के बारे में सोच रहे होते हैं, या फिर उनका ध्यान भविष्य की योजना में लगा होता है। ध्यान देने के अभ्यास में हम बच्चों को वर्तमान में रहना सिखाएंगे। इस अभ्यास की एक और विशेषता यह भी है कि वे इसमें बिना किसी पूर्वधारणा के, अच्छे - बुरे का निर्णय लिए बिना, वस्तुओं और परिस्थितियों को अपने वास्तविक रूप में देखना सीखेंगे।
ध्यान देने के अभ्यास में हम अलग-अलग गतिविधियों के माध्यम से बच्चों का ध्यान केंद्रित करवाएंगे, जैसे- ध्यान दे कर सुनना, जिसमें बच्चे अपने वातावरण में मौजूद आवाज़ों के प्रति जागरूक (aware) होंगे; ध्यान दे कर देखना, जिसमें बच्चे अपने वातावरण या किसी वस्तु को देखेंगे; श्वास पर ध्यान देना, जिसमें बच्चे अपना ध्यान अपनी साँसों की प्रक्रिया पर केंद्रित करेंगे; शरीर के खिंचाव पर ध्यान देना, जिसमें हाथ या पैर की अलग-अलग स्थिति में शरीर के खिंचाव की ओर ध्यान देंगे; विचारों पर ध्यान देना, जिसमें बच्चे अपने विचारों को पहचानेंगे और वर्तमान क्षण में अपने विचारों को आते-जाते देखेंगे। ध्यान के अभ्यास से बच्चों को कई तरह के लाभ होते हैं, जैसे-
  • लम्बी अवधि के लिए एक कार्य पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता का विकास (sustained attention)
  • शैक्षिक प्रदर्शन (academic performance) का बेहतर होना
  • भावनात्मक सुढृढ़ता (emotional stability) का बेहतर होना
  • शाँति और ख़ुशी का एहसास बढ़ना (sustained happiness)
  • हाइपर-एक्टिविटी (hyperactivity) कम होना
  • क्रोध कम आना
  • एक-दूसरे को समझने की क्षमता का विकास (empathy)
  • वर्तमान में जीने की क्षमता का विकास
  • सोच-समझ कर निर्णय लेने की क्षमता का विकास
ध्यान की कार्यप्रणाली (Methodology)

हैप्पीनेस पीरियड का दिन
कक्षा नर्सरी एवं केजी
सोमवार

ध्यान देने की प्रक्रिया(Mindfulness)
गुरुवार
ध्यान देने की प्रक्रिया(Mindfulness)
  • ध्यान की कक्षा का अभ्यास सार्वभौमिक एवं लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है। इसका किसी भी तरह के धर्म, संप्रदाय, जाति या वर्ग से कोई संबंध नहीं है।
  • कक्षा नर्सरी व केजी में हर सप्ताह 2 दिन (सोमवार व गुरूवार) ‘ध्यान देने’ का पीरियड होगा। हर पीरियड में एक सेशन करवाएँ। सेशन को अपनी कक्षा के स्तर के अनुसार दोहराएँ।
ध्यान रखने की बातें :
  • ध्यान रखें कि इस दौरान बच्चों को किसी शब्द या मंत्र का उच्चारण करने को न कहें।
  • हैप्पीनेस व ध्यान की कक्षा में किसी तरह के तनावपूर्ण अभिव्यक्ति जैसे- किसी बात पर बच्चों को डाँटने या सख्त शब्दों में निर्देश न दें व उन पर किसी प्रकार का दबाव न डालें।
  • चर्चा के दौरान सभी विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करें।
शिक्षक के लिए कुछ विशेष ध्यान में रखने की बातें:
  • ध्यान की इस कक्षा में आप स्वयं भी सक्रिय भागीदार बनें। जैसे, ध्यान का अभ्यास करवाते समय आप भी अभ्यास करें।
  • जब कक्षा में प्रवेश करें तो अपनी मनःस्थिति को लेकर सजग रहें व कोशिश करें कि आपके विचार और भावनाएँ स्थिर रहें। याद रखें कि बच्चा शिक्षक के व्यवहार पर भी ध्यान देता है।
  • बच्चों के साथ प्यार, सौहार्द व विनम्रता के साथ पेश आएँ और मधुर भाषा में बात करें।
  • ध्यान की प्रक्रिया शुरू होने के पहले यह सुनिश्चित करें कि कक्षा का वातावरण शांत हो और हर बच्चा अपने आप को सहज महसूस करे। यह भी देखें कि ध्यान के पश्चात वह अपने अनुभव साझा कर सके। कोई भी बच्चा एक सुरक्षित और सहज वातावरण में ही अपनी बात कहना चाहता है या कह पाता है।
  • ध्यान के अभ्यास से हमारा उद्देश्य विचारों या भावनाओं से दूर होना या उनको दबाना नहीं हैं। हमारे इस प्रयास का उद्देश्य बच्चों को अपने वातावरण, संवेदनाओं, विचारों एवं भावनाओं के प्रति सजग करना है जिससे वे अपने सामान्य व्यवहार में सोच-विचार करके बेहतर प्रतिक्रिया देने में सक्षम हो जाएँ।  
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