13. जीत किसकी

कहानी का उद्देश्य: विद्यार्थियों को अपने सकारात्मक विचारों के पोषण के लिए प्रेरित करना।
समय: कम से कम दो दिन अथवा शिक्षक के संतुष्ट होने तक

कक्षा की शुरुआत दो-तीन मिनट ध्यान देने की प्रक्रिया से की जाए

कहानी
एक दिन खेलते समय सलीम का अपने दोस्तों से झगड़ा हो गया। वह खेल छोड़कर अपने घर के बाहर बैठ गया। उसके भीतर द्वंद चल रहा था, इसलिए वह परेशान था।
सलीम से उसकी दादी ने पूछा, “सलीम, क्या हुआ?” सलीम बोला, “मेरे दोस्तों से मेरा झगड़ा हो गया है।”
“तो तुम परेशान क्यों हो?”, दादी ने फ़िर पूछा।
सलीम अपनी दादी से अपनी सब बातें साझा करता था, इसलिए उसने दादी को सब कुछ बता दिया। उसने कहा, “मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि मैं परेशान क्यों हूँ। मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है, क्योंकि मेरे दोस्तों ने मेरी बात नहीं मानी। मैं उनसे झगड़ना नहीं चाहता था। मैं तो उनको समझाना चाहता था।”
तभी दादी ने कहा, “मैं भी कई बार ऐसा ही महसूस करती हूँ। मेरे अंदर दो तरह के विचारों में द्वंद्व होता है। एक तरफ़ गुस्सा, बदला लेने और सबक सिखाने के विचार होते हैं तो दूसरी तरफ़ क्षमा, दया और मिलजुलकर रहने के विचार होते हैं।” सलीम के अंदर भी यही चल रहा था, इसलिए उसने दादी से पूछा, “दादी, ऐसे में आपके कौन से विचारों की जीत होती है।”
दादी ने कहा, “जिन विचारों का मैं साथ देती हूँ।”

चर्चा की दिशा:
कई परिस्थितियों में हमारे सकारात्मक व नकारात्मक विचारों में द्वंद्व होता है। प्रतिक्रिया के दौरान सामान्य रूप से नकारात्मक विचार आते हैं। यदि इन विचारों के आधार पर निर्णय लिया जाता है तो इससे हमारे संबंधों में दूरी बढ़ती है। बाद में सोचने पर हमें अच्छा महसूस नहीं होता है। सकारात्मक विचारों के आधार पर निर्णय लेने पर हमें हमेशा अच्छा महसूस होता है। इन प्रश्नों के माध्यम से विद्यार्थियों को सकारात्मक विचारों के आधार पर निर्णय लेने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया गया है।

पहला दिन:

चर्चा के प्रश्न:
1. क्या आपने भी कभी ऐसी स्थिति को महसूस किया है? उस स्थिति में कौनसे विचारों की जीत हुई? कक्षा में साझा करें।
2. जब सकारात्मक विचारों की जीत होती है तो कैसा महसूस होता है? उस घटना को बाद में भी याद करने पर कैसा महसूस होता है? एक उदाहरण देकर बताइए।
3. जब नकारात्मक विचारों के आधार पर निर्णय लेते हैं तो कैसा महसूस होता है? उस घटना को बाद में भी याद करने पर कैसा महसूस होता है? एक उदाहरण देकर बताइए।

घर जाकर देखो, पूछो समझो (विद्यार्थियों के लिए)
  • विद्यार्थियों से घर जाकर इस कहानी पर चर्चा करने और परिवार के अन्य सदस्यों के विचार व अनुभव जानने के लिए कहा जाए।
  • ऐसी स्थिति में अपने विचार व भावों के प्रति सजग रहने के लिए कहा जाए ताकि आगे अपने अनुभवों को ईमानदारी से साझा किया जा सके।
कक्षा के अंत में एक 2 मिनट शांति से बैठकर आज की चर्चा के निष्कर्ष के बारे में विचार करें

दूसरा दिन:

कक्षा की शुरुआत दो-तीन मिनट ध्यान देने की प्रक्रिया से की जाए
  • कहानी की पुनरावृत्ति विद्यार्थियों द्वारा करवाई जाए। पुनरावृत्ति के लिए एक या कई विद्यार्थियों से कहानी सुनना, रोल प्ले करना, जोड़े में एक-दूसरे को सुनाना आदि विविध तरीके अपनाए जा सकते हैं।
  • घर से मिले फीडबैक को विद्यार्थी छोटे समूहों में साझा कर सकते हैं। कुछ विद्यार्थियों को घर के अनुभव कक्षा में साझा करने के अवसर दिए जाएँ।
  • पहले दिन के चिंतन के प्रश्नों का प्रयोग शेष विद्यार्थियों के लिए पुनः किया जा सकता है।
चर्चा के प्रश्न:
1. आप अच्छे विचारों के पोषण के लिए क्या-क्या प्रयास करेगें? छोटे समूहों में चर्चा कर कक्षा में प्रस्तुत करें।
2. “सकारात्मकता जोड़ती है; नकारात्मकता तोड़ती है।” कैसे? कक्षा में चर्चा करें।

कक्षा के अंत में एक 2 मिनट शांति से बैठकर आज की चर्चा के निष्कर्ष के बारे में विचार करें

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  1. हाथी की रस्सी
  2. भूल जाना बेहतर है
  3. राष्ट्रपति
  4. शिकायतों का बोझ
  5. शहर की ओर /किसका फैसला
  6. शरीर का घमंड
  7. पिकासो की पेंटिग
  8. पार्क
  9. वर्कशॉप
  10. मेरा नया दोस्त
  11. व्यर्थ क्या
  12. कौन: पेन या मित्र?
  13. जीत किसकी
  14. दो दिन बाद
  15. मेरी गलती/नेपोलियन
  16. सही दर्पण
  17. तीन मज़दूर तीन नज़रिये
  18. बैंडेड
  19. चाँद तारे
  20. कहानी एक बीज की

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