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25. पेन सेट

कहानी का उद्देश्य: विद्यार्थियों का ध्यान वस्तुओं के संग्रह की बजाय उनकी उपयोगिता पर जाए।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की क्रिया से की जाए।

कहानी:
पापा जी का बर्थडे!
हाँ, उस दिन ऋचा के पापा जी का बर्थडे था। पापा जी के बचपन के एक दोस्त आए थे। साथ में आंटीजी भी थीं और उनके दोनों बच्चे भी। उन्होंने पापा जी को एक पेन सेट गिफ्ट दिया, जिसमें दो पेन थे। जैसे ही गिफ्ट पापा के हाथ में आया ऋचा ने उनके हाथ से ले लिया।
पापा जी ने कहा, “आप तो पेन्सिल से लिखती हैं, इस पेन का क्या करेंगी?” जब उसने कहा कि उसे वो पेन अच्छे लगे और उन्हें वह संभाल कर रखेगी, उसके किसी विशेष काम का न होते हुए भी, पापा ने अपनी बेटी का मन रखने के लिए वह पेन सेट उसे दे दिया।
इतने सुन्दर पेन पाकर ऋचा बहुत खुश हुई। उसने उन्हें संभाल कर रखा। वह उन्हें रोज़ देखती, पर इस्तेमाल नहीं करती। वो उसके पेन्सिल बॉक्स की सुंदरता बढ़ाते।
कुछ महीने बीत गए। एक दिन पापा जी कुछ लिख रहे थे तो उनके पेन की स्याही ख़त्म हो गई। ऋचा ने देखा कि उन्हें कोई और पेन नहीं मिल रहा था। उसने गिफ्ट वाला पेन सेट उन्हें लिखने के लिए दिया। पर, यह क्या! उसमें से एक की स्याही तो सूख चुकी थी और सेट का दूसरा पेन अटक-अटक कर चल रहा था। खैर, थोड़ी कोशिश के बाद वह चलने लगा।
पापा ने अपना काम करके वह पेन उसे लौटा दिया। पर ऋचा सोच में पड़ गई। थोड़ी देर बाद उसने उन्हें वह पेन देते हुए कहा, “पापा जी, अब यह पेन आप अपने पास ही रख लीजिए।”

चर्चा के लिए प्रस्तावित प्रश्न:
1. ऋचा ने पेन सुंदर लगने के बावजूद उसे पापा जी को वापस क्यों कर दिया?
2. क्या आपने अपने मम्मी या पापा से कभी कोई चीज पाने की ज़िद की है, जो लेने के बाद आपने इस्तेमाल कम किया हो या न किया हो?
3. आपके पास ऐसी कौन-कौन सी वस्तुएँ हैं जो आपके काम की हैं?
4. आपके पास ऐसी कौन-कौन सी वस्तुएँ हैं जो आपके काम की नहीं हैं?

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट शांति से बैठें और अपने निष्कर्ष के बारे में विचार करें।

चर्चा की दिशा :
वस्तुओं का संग्रह महत्वपूर्ण नहीं, उस वस्तु की जीवन मे उपयोगिता क्या है यह महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों से चर्चा की जा सकती है कि अक्सर हम कुछ वस्तुओं का संग्रह करके रखते है और उसकी उपयोगिता हमारे लिए नहीं होती। जबकि वही वस्तु यदि सही समय पर उपलब्ध करा दिया जाए तो किसी दूसरे व्यक्ति के लिए उपयोगी हो सकती है।

घर जाकर देखो, पूछो, समझो (विद्यार्थियों के लिए)
आज हम देखेंगे कि हमारे घर पर कौन-कौन सी ऐसी चीज़ है जिसका कोई उपयोग हमारे लिए नहीं है, पर हमने संभाल कर रखा है।  

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  1. मीठा सेब
  2. राजू का टिफिन बॉक्स
  3. ख़ुशबूदार रबड़
  4. नया दोस्त
  5. गुठली किसकी?
  6. नोनी की चोट
  7. चलो बनाएँ पकौड़े
  8. रानी की गुड़िया
  9. भैया का रूमाल
  10. रिया गई स्कूल
  11. बड़ी बिल्डिंग
  12. मेरी गुल्लक
  13. रंग-बिरंगा दरवाज़ा 
  14. संजू का तौलिया
  15. बिस्कुट किसका?
  16. हम लोग
  17. मैं कर सकता हूँ
  18. डर भगाओ
  19. वाणी और लाल गुब्बारा
  20. मुझे अच्छा लगता है
  21. टूटी पेंसिल
  22. जॉय की खुशी
  23. नन्ही बहन
  24. मेला
  25. पेन सेट

24. मेला

कहानी का उद्देश्य: विद्यार्थियों का ध्यान इस ओर जाए कि संबंधों में अपनापन के साथ जीना, भौतिक सुविधाओं के उपभोग से अधिक सुखदाई है।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की क्रिया से की जाए।

कहानी:
एक दिन छह वर्ष का सोनू अपने पापा के साथ मेला देखने दिल्ली हाट गया। वहाँ बहुत भीड़ थी। सोनू पापा का हाथ पकड़ कर चल रहा था। उसने गुब्बारे वाले को एक बड़ा-सा गुब्बारा फूलाते हुए देखा।
“वाह! इतना सुंदर गुब्बारा! पापा, मुझे तो यही गुब्बारा चाहिए।”
पापा ने कहा, “पहले ज़रूरी सामान ले लें, वापिस लौटते समय गुब्बारा लेते हैं।”
सोनू पापा के साथ आगे बढ़ गया।
उसने देखा- इतना अच्छा झूला! मुझे भी झूलना है!
पापा ने उसे आगे चलने के लिए कहा।
थोड़ी देर बाद उसके पापा ज़रूरी सामान लेने लगे और सोनू को एक जगह खड़े होने को कहा। उस दुकान से थोड़ी दूरी पर एक सपेरा बीन बजा रहा था। उसकी टोकरी में एक लंबा-सा साँप था। साँप बीन के साथ लहरा रहा था। सोनू ने किसी साँप को नाचते हुए पहली बार देखा था। उसका मन साँप को और पास से देखने का हुआ। वह पापा को बिना बताए वहाँ से चला गया, जब वह वापस आया तो देखा पापा वहाँ नहीं थे।
वह पापा को यहाँ-वहाँ ढूंढने लगा, पर पापा तो कहीं दिख ही नहीं रहे थे। वह ज़ोर-ज़ोर से रोने लगा। वहीं एक पुलिस वाले अंकल ने सोनू को देखा। पुलिस अंकल ने उसे बहलाने की बहुत कोशिश की। वे उसे गुब्बारे वाले के पास लेकर गए। लेकिन अब सोनू को गुब्बारा नहीं चाहिए था।
फिर वे सोनू को झूला झुलाने के लिए लेकर गए। अब सोनू को झूला भी नहीं झूलना था। वह लगातार रोता जा रहा था। अब उसे सपेरे का बीन बजाना भी अच्छा नहीं लगा।
सोनू बार-बार कह रहा था, “मुझे पापा के पास जाना है।”
तभी “सोनू! सोनू!” की आवाज़ उसके कानों में पड़ी, उसने देखा कि उसके पापा उसकी तरफ़ आ रहे थे।

चर्चा के लिए प्रस्तावित प्रश्न:
● पापा से बिछड़ने पर सोनू ने गुब्बारा क्यों नहीं लिया?
● आप किन खिलौनों के साथ खेलना पसंद करते हैं?
● आप परिवार में किस किसके साथ खेलते हैं?
● आप घर के लोगों के साथ खेलने के अलावा और क्या कार्य करते हैं?

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट शांति से बैठें और अपने निष्कर्ष के बारे में विचार करें।

चर्चा की दिशा:
वस्तुओं से हमें सुख मिलता है। पर उससे गहरा सुख अपनों के साथ जीने में है। उनके साथ हम सुरक्षित भी महसूस करते हैं। अपनों की अनुपस्थिति में वही वस्तु सुखकारी नहीं दिखती, जो कभी हमारे सुख का आधार बनी थी। चर्चा के माध्यम से बच्चों का ध्यान इस ओर जाए और वे अपने सुख के गहरे आधार को पहचान सकें।

घर जाकर देखो, पूछो, समझो (विद्यार्थियों के लिए)
आज घर लौटकर ध्यान देंगे कि कौन-कौन से कार्य करते समय हमें बहुत अच्छा लगा? क्यों?
अगली हैप्पीनेस क्लास में हम अपनी बातें साझा करेंगे।

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  1. मीठा सेब
  2. राजू का टिफिन बॉक्स
  3. ख़ुशबूदार रबड़
  4. नया दोस्त
  5. गुठली किसकी?
  6. नोनी की चोट
  7. चलो बनाएँ पकौड़े
  8. रानी की गुड़िया
  9. भैया का रूमाल
  10. रिया गई स्कूल
  11. बड़ी बिल्डिंग
  12. मेरी गुल्लक
  13. रंग-बिरंगा दरवाज़ा 
  14. संजू का तौलिया
  15. बिस्कुट किसका?
  16. हम लोग
  17. मैं कर सकता हूँ
  18. डर भगाओ
  19. वाणी और लाल गुब्बारा
  20. मुझे अच्छा लगता है
  21. टूटी पेंसिल
  22. जॉय की खुशी
  23. नन्ही बहन
  24. मेला
  25. पेन सेट

23. नन्ही बहन

कहानी का उद्देश्य: बच्चों में संबंध की स्वीकार्यता की ओर ध्यान ले जाना।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की क्रिया से की जाए।

कहानी:
अभी कुछ दिन पहले ही धीरज के घर एक नन्हा सा मेहमान आया था। धीरज की नन्ही सी बहन का जन्म हुआ था और सब लोग बहुत ख़ुश थे। आज उसके नामकरण का कार्यक्रम था। बहुत सारे मेहमान घर पर आए थे। सभी कुछ न कुछ उपहार उस नन्ही बच्ची के लिए लाए थे।
सारे मेहमान उसी को देखना चाहते थे। जो भी आता उसे गोद में लेकर बहुत प्यार करता। ये सब देखकर धीरज को लगा- “आज मेरे लिए तो कोई भी उपहार लेकर नहीं आया और सभी उसे ही प्यार कर रहे हैं!” धीरज बहुत उदास हो गया और बाहर आकर अकेले बैठ गया।
तभी वहाँ उसके मामा जी आए और उन्होंने धीरज से पूछा, “तुम यहाँ अकेले क्यों बैठे हो?”
धीरज ने नाराज़गी से कहा, “मुझे नहीं जाना अंदर। मुझे कोई प्यार नहीं करता।”
मामाजी ने कहा, “मैं प्यार करता हूँ न तुम्हें! बताओ क्या बात हो गई?”
अभी वह कुछ बोलता कि तभी उसे अपनी नन्ही बहन के रोने की आवाज़ सुनाई दी। वह अंदर भागा। बहन उपहार में मिले झूले में लेटी थी। उसने अपनी बहन की ओर मुस्कुराकर देखा और झूले को हल्का सा झुलाया और उसमें टंगे झुनझुने को बजाने लगा। उसकी नन्ही बहन उसकी ओर टुकुर टुकुर देखकर मुस्कुराने लगी।

चर्चा के लिए प्रस्तावित प्रश्न:
1. धीरज उदास क्यों हो गया था?
2. क्या आप भी कभी नाराज़ हुए हैं? कब और क्यों?
3. आप परिवार में किनसे प्यार करते हैं?
4. आपको परिवार में कौन कौन प्यार करता है?

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट शांति से बैठें और अपने निष्कर्ष के बारे में विचार करें।

चर्चा की दिशा:
हर व्यक्ति अपनापन चाहता है। वह महत्व पाना चाहता है। पर ज़िंदगी में आ रहे बदलावों की समझ के साथ अपनी अपेक्षाएँ निर्धारित करना भी ज़रूरी है। इसी समझ की तैयारी करवाना इस चर्चा का उद्देश्य है, जिससे वह बदलती परिस्थिति को स्वीकार करते हुए तालमेल बिठा सके। साथ ही वह खुशी के बड़े आधार की ओर अग्रसर हो।

घर जाकर देखो, पूछो, समझो (विद्यार्थियों के लिए)
आज हम घर पर सबसे बात करेंगे कि वे किसी से कब नाराज़ हुए थे और क्यों। उनकी नाराज़गी कैसे दूर हुई?

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  1. मीठा सेब
  2. राजू का टिफिन बॉक्स
  3. ख़ुशबूदार रबड़
  4. नया दोस्त
  5. गुठली किसकी?
  6. नोनी की चोट
  7. चलो बनाएँ पकौड़े
  8. रानी की गुड़िया
  9. भैया का रूमाल
  10. रिया गई स्कूल
  11. बड़ी बिल्डिंग
  12. मेरी गुल्लक
  13. रंग-बिरंगा दरवाज़ा 
  14. संजू का तौलिया
  15. बिस्कुट किसका?
  16. हम लोग
  17. मैं कर सकता हूँ
  18. डर भगाओ
  19. वाणी और लाल गुब्बारा
  20. मुझे अच्छा लगता है
  21. टूटी पेंसिल
  22. जॉय की खुशी
  23. नन्ही बहन
  24. मेला
  25. पेन सेट

22. जॉय की खुशी

कहानी का उद्देश्य: दूसरों की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील होकर सहयोग के लिए प्रेरित करना।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की क्रिया से की जाए।

कहानी:
जॉय और उसके दोस्त उस वक़्त पढ़ाई में मस्त थे। तभी बड़ी तेज़ आँधी आई। आँधी आने के कारण स्कूल का मैदान बहुत गंदा हो गया।
बच्चों ने सोचा कि क्यों न मिलकर मैदान साफ़ किया जाए। उन्होंने अपने कक्षा टीचर के सामने अपना विचार रखा। टीचर और बच्चे, सभी मैदान में आकर काम में जुट गए।
सभी एक-एक करके काग़ज़ के टुकड़े, पन्नी, पत्ते, टहनियाँ... उठाने लगे। जॉय भी मैदान को साफ़ करने के लिए बहुत मेहनत कर रहा था। इधर सूरज तेज़ चमक रहा था। सब पसीने से भीग गए थे। जॉय को बहुत तेज़ प्यास लगी। वह टीचर को बताकर पानी पीने के लिए चला गया।
कुछ देर बाद किसी ने टीचर को आकर बताया - “सर! सर! जॉय को गए हुए बहुत देर हो गई!”
(आपको क्या लगता है जॉय को देर क्यों हो रही होगी?)
‘सर’ ने ज़रा पीछे हटकर देखा तो जॉय कई बोतलों में पानी लिए सबको संभालते हुए उनकी ओर बढ़ रहा था।
‘सर’ के मुँह से निकला, “वह रहा जॉय!” दो बच्चे दौड़ कर उसके पास गए और गिर रही बोतलों को संभाला।
‘सर’ ने जॉय से मुस्कुराकर कहा, “जॉय! ये सब क्या है?"
जॉय बोला, "सर, सफ़ाई करते-करते सब थक गए थे। मेरी तरह इन्हें भी प्यास लगी होगी। मैंने सोचा, सब पानी पीने जाएँ, इससे बढ़िया मैं ही सबके लिए लेता चलूँ!”
पानी पीकर सभी का चेहरा खिल उठा। जॉय के साथ सभी बच्चे और उनके टीचर वापिस सफ़ाई में लग गए।

चर्चा के लिए प्रस्तावित प्रश्न:
1. जॉय को क्यों लगा कि अन्य बच्चों को भी प्यास लगी होगी?
2. जब जॉय सबके लिए पानी लाया तो सभी बच्चों को कैसा लगा होगा?
3. क्या कभी आपको ज़रूरत पड़ने पर आपके दोस्त ने आपकी मदद की है? कैसे?
4. क्या आपने किसी की ख़ुशी के लिए कभी कुछ किया है? यदि हाँ, तो क्या किया, बताएँ। (इस प्रश्न के तहत बच्चों का ध्यान- दूसरों के मदद माँगे बग़ैर भी उनके लिए कुछ करने के भाव पर लेकर जा सकते हैं।)

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठें और अपने निष्कर्ष के बारे में विचार करें।

चर्चा की दिशा:
जिन्हें भी हम अपना मानते हैं, उनकी आवश्यकताओं और भावनाओं के प्रति हम संवेदनशील होते हैं। उन सबकी ख़ुशी में हमारी स्वयं की ख़ुशी निहित होती है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि चाहे परिवार हो या समाज या प्रकृति, उनके प्रति संवेदनशील व्यक्ति ही उनकी बेहतरी में अपना योगदान देगा। इस कहानी के माध्यम से की गई चर्चा विद्यार्थियों में ऐसी संवेदनशीलता विकसित करे जो उन्हें आपसी सहयोग की ओर ले जाए।

घर जाकर देखो, पूछो, समझो (विद्यार्थियों के लिए)
आज हम ध्यान देंगे कि बिना मदद माँगे हमारी ज़रूरतों का ध्यान कौन-कौन रखता है और कैसे?

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  1. मीठा सेब
  2. राजू का टिफिन बॉक्स
  3. ख़ुशबूदार रबड़
  4. नया दोस्त
  5. गुठली किसकी?
  6. नोनी की चोट
  7. चलो बनाएँ पकौड़े
  8. रानी की गुड़िया
  9. भैया का रूमाल
  10. रिया गई स्कूल
  11. बड़ी बिल्डिंग
  12. मेरी गुल्लक
  13. रंग-बिरंगा दरवाज़ा 
  14. संजू का तौलिया
  15. बिस्कुट किसका?
  16. हम लोग
  17. मैं कर सकता हूँ
  18. डर भगाओ
  19. वाणी और लाल गुब्बारा
  20. मुझे अच्छा लगता है
  21. टूटी पेंसिल
  22. जॉय की खुशी
  23. नन्ही बहन
  24. मेला
  25. पेन सेट

21. टूटी पेंसिल

कहानी का उद्देश्य: विद्यार्थियों का ध्यान इस ओर दिलाना कि संबंधों में ज़िम्मेदारी निभाने से सुख मिलता है।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की क्रिया से की जाए।

कहानी:
विद्यालय से लौटते समय रागिनी बहुत ख़ुश थी। उसे आज मम्मी को कुछ विशेष बात बतानी थी। जब वह घर पहुँची तो रोज़ की तरह दरवाज़े पर मम्मी उसका इंतज़ार कर रही थी।
मम्मी ने मुस्कुराते हुए पूछा, "कैसा रहा आज का दिन?" रागिनी ने जवाब दिया कि आज उसे बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। मम्मी ने पूछा, "आख़िर आज ऐसा क्या हुआ जिस कारण मेरी बच्ची को अच्छा महसूस हो रहा है?"
यह पूछते वक़्त मम्मी ने उसका बैग खोल लिया था। मम्मी ने बैग में देखा कि रागिनी की नई पेंसिल टूटी हुई थी। जैसे ही उन्होंने टूटी पेंसिल देखी, वह पिछला प्रश्न भूल चुकी थीं और अगला प्रश्न किया, "रागिनी! पेंसिल कैसे टूटी?" रागिनी ने जवाब दिया, "मम्मी टूटी नहीं! मैंने ख़ुद ही तोड़ी है।"
मम्मी ने कहा, "क्या? ख़ुद तोड़ दी! मतलब अपनी पेंसिल ख़ुद तोड़ दी! यह तो ग़लत बात हुई न रागिनी!", मम्मी ने समझाया।
(रुककर पूछें - रागिनी ने पेंसिल क्यों तोड़ी होगी?)
रागिनी ने धीरे से कहा, "मम्मी! वह मेरी सहेली श्वेता है ना! आज उसके पास पेंसिल नहीं थी। वह काम पूरा नहीं कर पाती तो मैंने सोचा कि पेंसिल के दो टुकड़े करके एक से मैं लिख लूँ और दूसरे से वह लिख ले।"
इतना सुनते ही मम्मी ने उसे गले से लगा लिया।

चर्चा के लिए प्रस्तावित प्रश्न:
● आप अपने दोस्तों और विद्यालय की कौन-कौन सी बातें अपने घर में बताते हैं?
● आप अपनी कौन-कौन सी वस्तुएँ अपने दोस्तों या भाई-बहन के साथ साझा करते हैं और क्यों?
● रागिनी अगर पेंसिल न तोड़ती तो और किस तरह श्वेता की मदद कर सकती थी?
● आप रागिनी की जगह होते तो क्या करते?

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट शांति से बैठें और अपने निष्कर्ष के बारे में विचार करें।

चर्चा की दिशा:
किसी भी वस्तु का महत्व उसकी उपयोगिता से है। जब हम किसी को अपना स्वीकार कर लेते हैं, तब हम अपनी वस्तुओं को साझा करने को लेकर न केवल सहज हो जाते हैं, बल्कि वैसा करके हमें बड़ी ख़ुशी का एहसास होता है। बच्चे वस्तुओं को लेकर एक - दूसरे के सहयोगी बनें, ऐसा इस चर्चा का आशय है। पर एक सावधानी की आवश्यकता भी है। कहानी में सहयोग का एक तरीका साझा किया गया है। बच्चों का ध्यान अन्य ऐसे विकल्पों की तरफ ले जाया जाए, जिसमें नुकसान की संभावना कम हो। इस दिशा में अंतिम दो प्रश्न मददगार होंगे।

घर जाकर देखो, पूछो, समझो (विद्यार्थियों के लिए)
आज ध्यान देंगे कि अगर हम अपने परिवार के साथ सभी बातें साझा करते है तो हमें कैसा लगता है? आज की कहानी घर पर सुनाएँ और बातें करें।

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  1. मीठा सेब
  2. राजू का टिफिन बॉक्स
  3. ख़ुशबूदार रबड़
  4. नया दोस्त
  5. गुठली किसकी?
  6. नोनी की चोट
  7. चलो बनाएँ पकौड़े
  8. रानी की गुड़िया
  9. भैया का रूमाल
  10. रिया गई स्कूल
  11. बड़ी बिल्डिंग
  12. मेरी गुल्लक
  13. रंग-बिरंगा दरवाज़ा 
  14. संजू का तौलिया
  15. बिस्कुट किसका?
  16. हम लोग
  17. मैं कर सकता हूँ
  18. डर भगाओ
  19. वाणी और लाल गुब्बारा
  20. मुझे अच्छा लगता है
  21. टूटी पेंसिल
  22. जॉय की खुशी
  23. नन्ही बहन
  24. मेला
  25. पेन सेट

20. मुझे अच्छा लगता है

कहानी का उद्देश्य: कुछ कार्य हमें अच्छे लगते हैं। पर कुछ समय बाद, हमें उनसे परेशानी होने लगती है। विद्यार्थी अच्छा लगने और अच्छा होने के अंतर को समझ पाएँ।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की क्रिया से की जाए।

कहानी:
देव को झूला झूलना बहुत अच्छा लगता था। मम्मी-पापा के साथ जब भी वह कहीं घूमने जाता था, तो हमेशा झूले पर चढ़ने की ज़िद करता था।
एक दिन वह झूले से उतर ही नहीं रहा था। “मुझे फिर से झूलना है।” कहकर ज़ीद कर रहा था।
पापा उसे समझा रहे थे कि ज़्यादा झूलने से चक्कर आ जाएँगे पर वह था कि उतर ही नहीं रहा था। बड़ी मुश्किल से उसके पापा ने उसे झूले से उतारा।
अगले महीने उसके घर के सामने वाले मैदान में दशहरे का मेला लगा।
“अरे वाह! अब तो मुझे बहुत सारे झूले झूलने को मिलेंगे। कितना मज़ा आएगा!” देव ने सोचा।
मम्मी, पापा, देव और उसकी छोटी बहन मेला देखने गए। देव और उसकी बहन सबसे छोटे झूले की तरफ बढ़े। “चल बहन! सबसे पहले हम तेरी पसंद के झूले पर झूलते हैं।
उस झूले से उतरा तो बहन को मम्मी-पापा के पास छोड़ कर अब अकेला ही बड़े झूले पर चढ़ा। झूला धीरे-धीरे तेज़ हो रहा था। देव को बड़ा मज़ा आ रहा था।
2 मिनट का समय पूरा हो गया पर किसी गड़बड़ी की वजह से झूला 2 मिनट और चलता रहा। पहले तो देव को बड़ा मज़ा आया, पर 1 मिनट बाद ही उसे चक्कर आने लगे और डर लगने लगा। वह “मम्मी-मम्मी” चिल्लाने लगा।
जैसे ही झूला रुका, वह लड़खड़ाता हुआ मम्मी-पापा के पास गया और वहीं बैठ कर रोने लगा।

चर्चा के प्रश्न:
1. ऐसे कौन-कौन से काम हैं जो मम्मी-पापा आपको करने से मना करते हैं?
2. क्या तब भी आप वह काम करते हैं? क्यों या क्यों नहीं?
3.आपको क्या लगता है कि वे आपको क्यों मना करते हैं?

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट शांति से बैठें और अपने निष्कर्ष के बारे में विचार करें।

चर्चा की दिशा :
अच्छा लगने और अच्छा होने मे अंतर होता है। किसी भी चीज की अधिकता हमारी परेशानी का कारण बन सकती है।विद्यार्थियो के साथ चर्चा की जा सकती है कि ऐसा क्या-क्या है जो उन्हें अच्छा तो लगता है पर अच्छा होता नहीं। अपने बड़ों की बात न मान कर कब-कब पछताना पड़ा, बच्चे अपना अनुभव साझा कर सकते हैं।

घर जाकर देखो, पूछो, समझो (विद्यार्थियों के लिए)
आज ध्यान देंगे कि हमने ऐसी कौन-सी चीज़ें लीं या कौन-से काम किए जो हमें अच्छे तो लगते हैं, पर ज़्यादा लेने या करने पर नुकसान पहुँचाते हैं।

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  1. मीठा सेब
  2. राजू का टिफिन बॉक्स
  3. ख़ुशबूदार रबड़
  4. नया दोस्त
  5. गुठली किसकी?
  6. नोनी की चोट
  7. चलो बनाएँ पकौड़े
  8. रानी की गुड़िया
  9. भैया का रूमाल
  10. रिया गई स्कूल
  11. बड़ी बिल्डिंग
  12. मेरी गुल्लक
  13. रंग-बिरंगा दरवाज़ा 
  14. संजू का तौलिया
  15. बिस्कुट किसका?
  16. हम लोग
  17. मैं कर सकता हूँ
  18. डर भगाओ
  19. वाणी और लाल गुब्बारा
  20. मुझे अच्छा लगता है
  21. टूटी पेंसिल
  22. जॉय की खुशी
  23. नन्ही बहन
  24. मेला
  25. पेन सेट

19. वाणी और लाल गुब्बारा

कहानी का उद्देश्य: विद्यार्थियों का ध्यान इस ओर जाए कि वस्तु की उपयोगिता हमारे जीवन मे कितनी है और वस्तुएँ साझा करने से हमें भी अच्छा महसूस होता है।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की क्रिया से की जाए।

कहानी:
वाणी अपने दोस्तों के साथ मैदान में खेल रही थी। तभी उसके कानों में एक आवाज़ आई- “गुब्बारे ले लो! रंग-बिरंगे गुब्बारे!” वह दौड़ कर गुब्बारे वाले के पास पहुँची। वह रंग-बिरंगे गुब्बारे लेकर खड़ा था। उसके पास लाल, हरे, नीले, गुलाबी रंगों के बहुत सारे गुब्बारे थे।
वह एक गुब्बारे की ओर इशारा करते हुए बोली, “मुझे वह लाल वाला गुब्बारा चाहिए।”
गुब्बारे वाले ने कहा, “पैसे हैं?”
वह अंदर जाकर माँ से रुपए ले आई और गुब्बारे वाले को देकर अपनी पसंद का गुब्बारा ले लिया। वह बहुत ख़ुश हुई। वह पूरे दिन अपने गुब्बारे के साथ खेलती रही। माँ ने वाणी को खाना खाने के लिए कहा तो वाणी ने अपना गुब्बारा दरवाज़े की कुंडी पर बाँध दिया और खाना खाने लगी। गुब्बारे की गाँठ कुछ हल्की लगी थी।
अचानक वह गुब्बारा खुलकर आसमान में उड़ गया। वाणी उसके पीछे भागी लेकिन उसे पकड़ नहीं पाई। उसे बहुत बुरा लगा। परंतु तभी उसकी नज़र मैदान में कुछ बच्चों पर पड़ी जो उसके उड़ते गुब्बारे को देख तालियाँ बजाते हुए उछल रहे थे।
बच्चों की मुस्कराहट और ख़ुशी देखकर उसके चेहरे पर भी मुस्कुराहट छा गई। वाणी अब बहुत अच्छा महसूस कर रही थी और वो भी उड़ते हुए गुब्बारे को निहारने लगी।

चर्चा के प्रश्न:
1. जब आपकी कोई पसंद की चीज आपसे खो जाती है, तब आपको कैसा लगता है?
2. अगर कोई चीज़ खो जाती है, तो क्या आप हमेशा उदास रहते हैं?
3. कभी ऐसा हुआ है कि आपकी कोई चीज़ किसी और के काम आई हो?
4. तब आपको कैसा लगा?
5. जब आपके किसी काम से किसी को खुशी मिलती है तब आपको कैसा लगता है?

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट शांति से बैठें और अपने निष्कर्ष के बारे में विचार करें।

चर्चा की दिशा :
किसी भी वस्तु की सही उपयोगिता तभी है यदि वह ज़्यादा व्यक्तियों के लिए उपयोगी और उपलब्ध हो जाए। साथ ही परस्परता में ही सुख है। विद्यार्थियों से चर्चा की जा सकती है कि यदि उनकी कोई वस्तु अन्य लोगों के लिए भी उपयोगी हो जाती है तो उन्हें कैसा लगता है।

घर जाकर देखो, पूछो, समझो (विद्यार्थियों के लिए)
आज हम घर पर देखेंगे कि कब-कब किसी एक की वस्तु किसी दूसरे के काम आई। साथ ही हम पता लगाएंगे कि तब उन्हें कैसा लगा?

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  1. मीठा सेब
  2. राजू का टिफिन बॉक्स
  3. ख़ुशबूदार रबड़
  4. नया दोस्त
  5. गुठली किसकी?
  6. नोनी की चोट
  7. चलो बनाएँ पकौड़े
  8. रानी की गुड़िया
  9. भैया का रूमाल
  10. रिया गई स्कूल
  11. बड़ी बिल्डिंग
  12. मेरी गुल्लक
  13. रंग-बिरंगा दरवाज़ा 
  14. संजू का तौलिया
  15. बिस्कुट किसका?
  16. हम लोग
  17. मैं कर सकता हूँ
  18. डर भगाओ
  19. वाणी और लाल गुब्बारा
  20. मुझे अच्छा लगता है
  21. टूटी पेंसिल
  22. जॉय की खुशी
  23. नन्ही बहन
  24. मेला
  25. पेन सेट

18. डर भगाओ

कहानी का उद्देश्य: विद्यार्थियों का ध्यान इस ओर जाए कि सही की समझ न होना कई बार किसी के लिए डराने का आधार बन जाता है और किसी के लिए डर का कारण।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की क्रिया से की जाए।

कहानी:
मोहित पहली कक्षा मे पढ़ता था I कक्षा में वह सबसे लंबा-चौड़ा बच्चा था I कक्षा के सभी बच्चे उसकी सभी बातें मानते थे I सभी को लगता मोहित तो किसी से भी नहीं डरता। मोहित कभी किसी का खाना खा जाता तो कभी किसी बच्चे के पैसे छीन लेता I बच्चे उसके इस व्यवहार से परेशान थे I
दो दिन पहले की ही बात है। मोहित ने सूरज के बैग से टिफ़िन निकालकर सारा खाना खा लिया। वो तो अन्य साथियों ने सूरज के साथ अपना खाना साझा किया, नहीं तो वह भूखा ही रह जाता।
अब एक दिन क्या हुआ कि कहीं से एक चूहा आ गया और पूरी कक्षा मे इधर-उधर फुदकने लगाI फुदकते- फुदकते चूहा मोहित के बैग मे घुस गयाI चूहे को देखकर मोहित चिल्ला कर उछल पड़ा और भागने लगा। मोहित चूहे को देखकर पसीने-पसीने हो गया।
तभी सूरज ने अपने स्कूल बैग में से एक कपड़े का थैला निकालकर मोहित के बैग के खुले भाग की ओर लगा दिया। जैसे ही चूहा उस थैले में आया, उसने थैले का मुँह बंद कर दिया और लेकर चल पड़ा स्कूल के गेट की ओर। आगे-आगे सूरज, पीछे-पीछे बाक़ी बच्चे पर मोहित कक्षा से बाहर ही नहीं निकला। गेट पर जाकर सूरज ने थैला गार्ड अंकल को थमा दिया। उन्होंने स्कूल के बाहर ले जाकर जैसे ही थैले का मुँह खोला, चूहा उछलकर भाग गया।
अगले दिन मोहित कक्षा मे आया तो देखा कुछ बच्चे खाना खा रहे थे। मोहित चुपचाप अपने खाने का डिब्बा लेकर उनके साथ खाने बैठ गया I सभी एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे। तभी मोहित बोला, “अरे भाई! मैं भी तो तुम्हारा दोस्त हूँ। आज तुम मेरा खाना भी खा सकते होI”

चर्चा के प्रश्न:
1. सारे बच्चे मोहित की सभी बातें क्यों मान लेते थे?
2. क्या आप को भी किसी से डर लगता है?
3. आपको किस-किस से डर लगता है ?
4. इस घटना के बाद मोहित मे क्या बदला होगा?
5. आप अपने डर को कैसे भगा सकते हो?

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट शांति से बैठें और अपने निष्कर्ष के बारे में विचार करें।

चर्चा की दिशा :
कुछ मान्यताओं के कारण या भ्रम-वश हमें डर लगता है, भ्रम ही डर का कारण है। विद्यार्थियों से चर्चा की जा सकती है कि डर क्या है और हम डरते क्यों हैं। शिक्षक भी कोई अपना अनुभव साझा कर सकते हैं जब उन्हें भ्रम-वश डर लगा हो।

घर जाकर देखो, पूछो, समझो (विद्यार्थियों के लिए)
आज हम घर पर बात करेंगे कि किसे किस बात से डर लगता है और क्यों?

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  1. मीठा सेब
  2. राजू का टिफिन बॉक्स
  3. ख़ुशबूदार रबड़
  4. नया दोस्त
  5. गुठली किसकी?
  6. नोनी की चोट
  7. चलो बनाएँ पकौड़े
  8. रानी की गुड़िया
  9. भैया का रूमाल
  10. रिया गई स्कूल
  11. बड़ी बिल्डिंग
  12. मेरी गुल्लक
  13. रंग-बिरंगा दरवाज़ा 
  14. संजू का तौलिया
  15. बिस्कुट किसका?
  16. हम लोग
  17. मैं कर सकता हूँ
  18. डर भगाओ
  19. वाणी और लाल गुब्बारा
  20. मुझे अच्छा लगता है
  21. टूटी पेंसिल
  22. जॉय की खुशी
  23. नन्ही बहन
  24. मेला
  25. पेन सेट

17. मैं कर सकता हूँ

कहानी का उद्देश्य: विद्यार्थियों मे एक-दूसरे की विशेषता के प्रति सम्मान का भाव जागृत करना और अपने विश्वास को सुदृढ़ करना कि मैं भी कर सकता हूँ।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की क्रिया से की जाए।

कहानी:
हर्ष पहली कक्षा का छात्र था और आपके जैसा ही एक प्यारा सा बच्चा था। बचपन से ही वह सुन नहीं सकता था। इसी कारण से वह ठीक तरह बोल भी नहीं पाता था। देखने में भी हर्ष एक दम पतला-दुबला और छोटा सा था।
कुछ ही दिन में स्कूल में स्पोर्ट्स डे मनाया जाने वाला था। हर्ष बहुत उत्साहित था क्योंकि वह भी दौड़ में भाग लेना चाहता था। हर्ष टीचर के पास दौड़ में भाग लेने के लिए अपना नाम देने गया तो टीचर ने इशारे से समझाया कि उन्हें डर है कहीं वह गिर न जाए और उसे चोट न लग जाए क्योंकि वह कमज़ोर है।
पर हर्ष का दौड़ में भाग लेने का बहुत मन था। यह देखकर टीचर ने कहा, “अच्छा! तुम भी दौड़ना, पर ध्यान से!”
स्पोर्ट्स डे के दिन, हर्ष दौड़ में भाग लेने स्कूल पहुँच गया। कुछ बच्चे दौड़ की जगह खड़े हुए हर्ष का मज़ाक उड़ा रहे थे, लेकिन हर्ष को उन्हें देखकर लगा कि वो उसे दौड़ मे भाग लेता देखकर ख़ुश हो रहे हैं क्योंकि वो सुन तो सकता नहीं था ।
तभी टीचर ने दौड़ शुरू करने का इशारा किया और सभी बच्चे दौड़ने लगे। हर्ष भी पूरी ताक़त से दौड़ने लगा। दौड़ते-दौड़ते हर्ष ने देखा कि सभी बच्चे तालियाँ बजा रहे हैं और साथ- साथ कुछ चिल्ला भी रहे हैं। हर्ष को लगा कि सारे बच्चे उसके लिए ही तालियाँ बजा रहे हैं। अब हर्ष पूरी ताक़त लगाकर और तेज़ी से दौड़ने लगा। देखते ही देखते हर्ष दौड़ में सबसे आगे निकल गया ।
तभी हर्ष का दोस्त हर्ष के पास आया और इशारे से पूछा कि तुम दौड़ कैसे जीत गए, तुम्हारा तो सब मज़ाक उड़ा रहे थे!”
हर्ष ने और बच्चों की तरफ़ इशारा करते हुए बताया कि ये सब तो मेरे लिए ही ताली बजा रहे थे इसलिए मैं और तेज़ी से दौड़ने लगा।

चर्चा के प्रश्न:
1. अगर आप सुन या बोल न पाएँ तो आपको कैसा लगेगा?
2. क्या कभी आपको ऐसा लगा कि आप कुछ कर सकते हैं, पर दूसरों को भरोसा नहीं है? ऐसे में आपने क्या किया?
3. किसी को प्रोत्साहित करना आपको कैसा लगता है? क्यों?
4. क्या कभी किसी ने आपका मज़ाक उड़ाया है? तब आपने क्या किया?

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट शांति से बैठें और अपने निष्कर्ष के बारे में विचार करें।

चर्चा की दिशा :
हम सभी में कोई न कोई विशेषता होती है। एक-दूसरे की विशेषताओं का सम्मान कर पाना और एक-दूसरे का पूरक बन पाना ही सुख का आधार है। विद्यार्थियों से चर्चा की जा सकती है कि वह अपनी और अपने साथियों की विशेषताओं को पहचान कर आपस में एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं।

घर जाकर देखो, पूछो, समझो (विद्यार्थियों के लिए)
आज घर जाकर ध्यान देंगे कि कभी आपको भी लगा कि कोई काम आप नही कर पाएँगे पर कुछ प्रयास करने पर या किसी के प्रोत्साहित करने पर आप वो काम कर पाए।

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  1. मीठा सेब
  2. राजू का टिफिन बॉक्स
  3. ख़ुशबूदार रबड़
  4. नया दोस्त
  5. गुठली किसकी?
  6. नोनी की चोट
  7. चलो बनाएँ पकौड़े
  8. रानी की गुड़िया
  9. भैया का रूमाल
  10. रिया गई स्कूल
  11. बड़ी बिल्डिंग
  12. मेरी गुल्लक
  13. रंग-बिरंगा दरवाज़ा 
  14. संजू का तौलिया
  15. बिस्कुट किसका?
  16. हम लोग
  17. मैं कर सकता हूँ
  18. डर भगाओ
  19. वाणी और लाल गुब्बारा
  20. मुझे अच्छा लगता है
  21. टूटी पेंसिल
  22. जॉय की खुशी
  23. नन्ही बहन
  24. मेला
  25. पेन सेट

16. हम लोग

कहानी का उद्देश्य: विद्यार्थियों का ध्यान हमारे सहयोगियों की तरफ ले जाना ताकि वो उनके योगदान को समझकर उनके प्रति कृतज्ञ हो सकें।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की क्रिया से की जाए।

कहानी:
शुभम दूसरी कक्षा में पढ़ता था। अपनी कक्षा में जाते ही उसने देखा कि आज उसका कक्षा रूम रोज़ाना की तरह साफ़ नहीं था। यहाँ-वहाँ काग़ज़ के टुकड़े बिखरे पड़े थे। फर्श भी रोज़ की तरह नहीं चमक रहा था।
सुबह की प्रार्थना के बाद सर ने आते ही कहा कि आज पढ़ाई शुरू करने से पहले हम अपनी कक्षा की सफ़ाई करेंगे। शुभम ने पूछा, “सर! हमारी कक्षा की सफ़ाई करने वाले ऋषि भैया आज नहीं आए क्या?”
सर ने बताया कि वो आज बीमार हैं इसलिए हमारी कक्षा की सफ़ाई नहीं हो पाई। शुभम ने भी बाक़ी बच्चों की तरह अपना बैग बाहर रखा और पूरे उत्साह से कक्षा की सफ़ाई में लग गया।
सभी बच्चे मिल-जुलकर सफ़ाई करने लगे। अंकित तो झाड़ू के ऊपर बैठकर हैरी पॉटर ही बन गया था। विशाल कोने-कोने में जाकर जैसे कूड़े के साथ ‘ऑईस-पाईस ’ खेल खेलकर कूड़ा ढूँढ रहा था। लगभग 15 मिनट में सबने मिलकर कक्षा को साफ़ कर दिया और अपने हाथ-पैर धो कर वापस कक्षा में आ गए।
शिक्षक ने कहा, “क्योंकि हम सबको अपनी कक्षा की सफ़ाई करने में समय लगा इसलिए हमें पढ़ाई के लिए आज कम समय मिलेगा।” शुभम का ध्यान गया कि ऋषि भैया कक्षा की सफ़ाई करके उनका कितना वक़्त बचाते हैं और उन्हें पढ़ाई करने के लिए साफ़ कमरा देते हैं।
अगले दिन जब ऋषि भैया कक्षा में आए, इस बार उन्हें फ़र्श पर न तो कागज़ के टुकड़े मिले और न पेंसिल की छीलन। कक्षा के कूड़ेदान का कूड़ा उन्होंने अपने बड़े कूड़ेदान में उड़ेला और बच्चों की ओर मुस्कुराकर देखते हुए कहा, “सहयोग के लिए धन्यवाद बच्चों!” शुभम ने कहा, “आप हमारे लिए इतनी मेहनत करते हैं, हम इतना तो कर ही सकते हैं!”

चर्चा के लिए प्रस्तावित प्रश्न:
● आपके विद्यालय को चलाने में कौन-कौन अपना सहयोग देता है?
● यदि ये लोग अपना काम न करें तो क्या होगा?
● इन सब के साथ बेहतर संबंध बनाने के लिए अब आप क्या प्रयास कर सकते हैं?
● क्या हमारे घर में और घर के आस-पास भी कुछ लोग हैं, जिनके होने से हमारे काम आसान हो जाते हैं? वे कौन कौन हैं?

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठें और अपने निष्कर्ष के बारे में विचार करें।

चर्चा की दिशा :
हमारा जीवन सुचारु रूप से चल सके, इसके लिए बहुत सारे सहयोगियों का योगदान होता है। हमें उन सभी का आभारी होना चाहिए। साथ ही यदि हम वह काम नहीं कर सकते, तो उनका काम बढ़ाएँ तो नहीं। विद्यार्थियों की चर्चा इस निष्कर्ष की ओर बढ़े।

घर जाकर देखो, पूछो, समझो (विद्यार्थियों के लिए)
आज घर मे ध्यान देंगे कि हमारा जीवन आराम से चल पाए, इसके लिए घर पर कौन- कौन हमारा सहयोग करते हैं।

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  1. मीठा सेब
  2. राजू का टिफिन बॉक्स
  3. ख़ुशबूदार रबड़
  4. नया दोस्त
  5. गुठली किसकी?
  6. नोनी की चोट
  7. चलो बनाएँ पकौड़े
  8. रानी की गुड़िया
  9. भैया का रूमाल
  10. रिया गई स्कूल
  11. बड़ी बिल्डिंग
  12. मेरी गुल्लक
  13. रंग-बिरंगा दरवाज़ा 
  14. संजू का तौलिया
  15. बिस्कुट किसका?
  16. हम लोग
  17. मैं कर सकता हूँ
  18. डर भगाओ
  19. वाणी और लाल गुब्बारा
  20. मुझे अच्छा लगता है
  21. टूटी पेंसिल
  22. जॉय की खुशी
  23. नन्ही बहन
  24. मेला
  25. पेन सेट

15. बिस्कुट किसका?

कहानी का उद्देश्य: विद्यार्थियों का ध्यान इस ओर जाए कि परस्परता में वस्तुओं से अधिक महत्त्वपूर्ण संबंध हैं।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की क्रिया से की जाए।

कहानी:
स्कूल के मैदान में एक बेंच पर अजय और कविता बैठे थे।
अजय ने देखा कि बेंच पर एक बिस्कुट का पैकेट रखा था।
“अरे ये तो मेरा पैकेट है! मम्मी ने सुबह मेरे बैग में रखा था।”
उसने झट से उसमें से एक बिस्कुट खा लिया।
कविता ने भी उसमें से एक बिस्कुट खा लिया।
दोनों खेलते-खेलते बिस्कुट खा रहे थे। कुछ ही देर में आधा पैकेट ख़ाली हो गया था।
अजय ने सोचा, “अब अपने बचे हुए बिस्कुट मुझे अकेले खाने चाहिए।”
उसने उस पैकेट को उठाकर अपनी जेब में भर लिया।
उसने जैसे ही जेब में हाथ डाला, उसने पाया कि मम्मी वाला बिस्कुट का पैकेट तो उसकी जेब में ही था।
अजय को तब समझ आया की जिस पैकेट में से उन्होंने बिस्कुट खाए वो तो कविता का था!
अब उसने दोनों पैकेट जेब से निकाल कर बेंच पर रख दिए और दोनों बिस्कुट खाते-खाते खेलने लगे।

चर्चा के प्रश्न:
1- अजय ने आधा बिस्कुट का पैकेट जेब में क्यों रख लिया?
2- कविता ने अजय को क्यों नहीं बताया कि वो पैकेट उसका था?
3- क्या आपको अपनी चीज़ें दूसरों के साथ मिल कर प्रयोग करना अच्छा लगता है?
4- यदि आपके पास सामान कम हो, क्या तो भी आप उसे किसी से साझा करते हैं?

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट शांति से बैठें और अपने निष्कर्ष के बारे में विचार करें।

चर्चा की दिशा :
किसी भी वस्तु से अधिक महत्वपूर्ण संबंध होता है। जब संबंधों की स्वीकृति होती है तो हम विश्वास के साथ जीते हैं और वस्तुओं को साझा करने के प्रति सहज हो जाते हैं। इससे संबंधों में उभय तृप्ति (दोनो को संतोष) का एहसास भी होता है। विद्यार्थियों से चर्चा की जा सकती है कि जब हम विभिन्न वस्तुओं को अपने संबंधों में साझा करते हैं, तब हमें कैसा महसूस होता है? क्या यह भी हमारे सुख का आधार है?

घर जाकर देखो, पूछो, समझो (विद्यार्थियों के लिए)
आज कोशिश करें कि घर पर सब साथ बैठकर खाना खाएँ। इस दौरान ग़ौर करें कि क्या सभी एक- दूसरे का ख़याल रख रहे हैं।

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  1. मीठा सेब
  2. राजू का टिफिन बॉक्स
  3. ख़ुशबूदार रबड़
  4. नया दोस्त
  5. गुठली किसकी?
  6. नोनी की चोट
  7. चलो बनाएँ पकौड़े
  8. रानी की गुड़िया
  9. भैया का रूमाल
  10. रिया गई स्कूल
  11. बड़ी बिल्डिंग
  12. मेरी गुल्लक
  13. रंग-बिरंगा दरवाज़ा 
  14. संजू का तौलिया
  15. बिस्कुट किसका?
  16. हम लोग
  17. मैं कर सकता हूँ
  18. डर भगाओ
  19. वाणी और लाल गुब्बारा
  20. मुझे अच्छा लगता है
  21. टूटी पेंसिल
  22. जॉय की खुशी
  23. नन्ही बहन
  24. मेला
  25. पेन सेट

14. संजू का तौलिया

कहानी का उद्देश्य: अपने सहयोगियों की पहचान कर पाना एवं संबंधों को मधुरता की तरफ ले जाना।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की क्रिया से की जाए।

कहानी:
संजू ने दीवार पर टंगी घड़ी की तरफ देखा। 7:30 बज चुके थे। वह नहाने के लिए भागा। जब नहाना हो गया तो उसका ध्यान गया कि तौलिया तो वह लाया ही नहीं! उसने पुकारा, “मम्मी!, तौलिया!”
दरवाज़ा ज़रा सा खोलकर उसने हाथ बढ़ाया। किसी ने उसके हाथ में तौलिया पकड़ा दिया। वह बाहर निकला और देखा मम्मी तो रसोई में है फिर तौलिया किसने पकड़ाया?
अगले दिन उसे तौलिया ले जाना याद था। पर वह जानबूझकर नहीं ले गया। उसने बाथरूम से आज फिर पुकारा, “मम्मी!, तौलिया!” पर उसने इस बार हाथ की घड़ी से पहचान लिया -“अरे! ये तो दीदी है!” उसने दीदी से दो दिन से ‘कुट्टी’* कर रखी थी। वह बाहर निकला और सीधे दीदी के पास गया और बोला, “दीदी!, थैंक यू!”

चर्चा के लिए प्रस्तावित प्रश्न:
1. क्या आपकी भी कभी किसी से ‘कुट्टी’ हुई है? (क्या कभी नाराज़गी के कारण किसी से आपकी बोल-चाल बंद हुई है?) किस बात पर?
2. फिर आपकी बोलचाल कैसे शुरू हुई?
3. किसी से नाराज़ होकर रहने पर आपको कैसा लगता है? और क्यों?
4. किसी की नाराज़गी दूर करने के लिए आप क्या करते हैं?

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट शांति से बैठें और अपने निष्कर्ष के बारे में विचार करें।

चर्चा की दिशा :
संवाद बंद करना समस्या का समाधान नहीं है। बातचीत के अवसर उपलब्ध होने से ही नाराज़गी दूर करने या समस्या का समाधान ढूंढने में मदद मिलेगी। वैसे भी नाराज़गी के पल ख़ुद को भी दुःख देते हैं। इस चर्चा के माध्यम से विद्यार्थियों का ध्यान इस ओर जाए और वे नाराज़गी दूर करने के लिए पहल करने की कोशिश करें।

घर जाकर देखो, पूछो, समझो (विद्यार्थियों के लिए)
आज हम पूरे दिन इस बात पर ध्यान देंगे कि कोई मुझसे या मैं किसी से नाराज़ तो नहीं हुआ। यदि हुआ तो क्यों हुआ? वह नाराज़गी दूर कैसे हुई?
*कुट्टी - बोलचाल बंद करना 

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  1. मीठा सेब
  2. राजू का टिफिन बॉक्स
  3. ख़ुशबूदार रबड़
  4. नया दोस्त
  5. गुठली किसकी?
  6. नोनी की चोट
  7. चलो बनाएँ पकौड़े
  8. रानी की गुड़िया
  9. भैया का रूमाल
  10. रिया गई स्कूल
  11. बड़ी बिल्डिंग
  12. मेरी गुल्लक
  13. रंग-बिरंगा दरवाज़ा 
  14. संजू का तौलिया
  15. बिस्कुट किसका?
  16. हम लोग
  17. मैं कर सकता हूँ
  18. डर भगाओ
  19. वाणी और लाल गुब्बारा
  20. मुझे अच्छा लगता है
  21. टूटी पेंसिल
  22. जॉय की खुशी
  23. नन्ही बहन
  24. मेला
  25. पेन सेट

13. रंग-बिरंगा दरवाज़ा

कहानी का उद्देश्य: विद्यार्थियों को यह समझ आए कि ग़लती होने पर समस्या का समाधान रचनात्मक रूप से किया जा सकता है।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की क्रिया से की जाए।

कहानी:
गर्मियों की छुट्टियाँ थी और चिंटू और पिंकी के घर में सफ़ेदी का काम चल रहा था। पेंटर भैया सीढ़ी पर चढ़कर छत पर पेंट कर रहे थे। चिंटू और पिंकी उन्हें बड़े ध्यान से देख रहे थे। चिंटू और पिंकी का भी मन किया कि वो भी पेंटिंग करें। पिंकी बोली, “चिंटू, चल हम भी दरवाज़ा पेंट करते हैं!”
पिंकी बोली, “ “चलो पेंटर भैया से पूछते हैं।” दोनों पेंटर भैया के पास गए और पिंकी बोली “भैया हमें भी पेंट करना है।”
पेंटर भैया बोले “देखो ये पेंट और ब्रश रखा है। तुम पेंट करो मैं तुम दोनों को देखता रहूँगा।” पेंटर भैया अपना काम करने लगे। दोनों ने रंग का एक-एक डिब्बा और ब्रश उठाया। तभी पिंकी बोली, “चिंटू तुम दरवाज़े के एक तरफ़ पेंट करो, मैं दूसरी तरफ़ करती हूँ।”
दोनों बड़े मज़े से पेंट करने लगे। थोड़ी देर बाद चिंटू बोला, “पिंकी दिखा तो तूने कैसा पेंट किया है!” चिंटू ने देखा पिंकी ने तो लाल रंग कर दिया था। चिंटू बोला “अरे पिंकी ये तूने क्या कर दिया? मैंने तो दरवाज़े के दूसरी तरफ़ पीला रंग किया है।” पिंकी बोली, “चिंटू तुमने मुझे बताया क्यों नहीं कि तुम कौन-सा रंग कर रहे हो?”
चिंटू बोला “तुमने भी तो नहीं बताया तुम कौन-सा रंग कर रही हो!”
चिंटू बोला मम्मी पापा आकर डांटेंगे, पिंकी बोली अरे पेंटर भैया भी नाराज़ होंगे। दोनो सोच में पड़ गए अब क्या करें!
तभी पिंकी बोली “ये लो लाल रंग और तुम आधे दरवाज़े पर लाल रंग करो और मुझे पीला रंग दो मैं अपनी तरफ़ के आधे दरवाज़े पर पीला रंग कर दूंगी। ऐसा करने से दरवाज़े पर एक नया डिज़ाइन बन जाएगा!”
दोनों ने दरवाज़ा आधा लाल और आधा पीला रंग दिया।
मम्मी ने जब दरवाज़ा देखा तो वो हैरान रह गई और कहा, “कितने सुंदर रंग है, कितना अच्छा पेंट किया है !” “पर दोनो रंगों के बीच की लाइन ठीक नहीं हैं।” और पेंटर भैया ने कहा “अरे मुझसे अच्छा काम तो तुम दोनों ने कर दिया, मैं तो शायद एक ही रंग का पेंट करता।” फिर पेंटर भैया बोले चलो “इसकी लाइन को ठीक करना तुम दोनों को मैं सिखाता हूँ।” फिर पेंटर भैया ने दोनो को छोटे ब्रश से लाइन को सीधा करना सिखाया।

चर्चा के प्रश्न:
1. चिंटू और पिंकी ने दरवाज़े पर अलग-अलग रंग क्यों कर दिया था?
2. क्या हम सभी से कभी न कभी ग़लती हो जाती है?
3. चिंटू और पिंकी ने अपनी ग़लती कैसे सुधारी?
4. क्या कभी आपके साथ भी ऐसा हुआ है, जब आपसे कोई ग़लती हुई और उसे आपने सुधार लिया?
5. किसी काम को सुधारने में क्या आपने किसी की मदद ली है? कैसे?

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठें और अपने निष्कर्ष के बारे में विचार करें।

चर्चा की दिशा :
किसी भी काम के ग़लत हो जाने पर घबराने से ज़्यादा महत्वपूर्ण यह है कि किस प्रकार उस काम को रचनात्मक सोच द्वारा सुधारा जा सकता है। विद्यार्थियों से चर्चा की जा सकती है कि समस्या से ज्यादा समाधान महत्वपूर्ण है। समाधान ही सुख का आधार है। किसी काम को किसी से समझ कर बेहतर किया जा सकता है।

घर जाकर देखो, पूछो, समझो (विद्यार्थियों के लिए)
आज घर पर सभी से पूछेंगे कि जब कभी भी कोई ग़लती उनसे हुई तो उन्होंने क्या किया।

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  1. मीठा सेब
  2. राजू का टिफिन बॉक्स
  3. ख़ुशबूदार रबड़
  4. नया दोस्त
  5. गुठली किसकी?
  6. नोनी की चोट
  7. चलो बनाएँ पकौड़े
  8. रानी की गुड़िया
  9. भैया का रूमाल
  10. रिया गई स्कूल
  11. बड़ी बिल्डिंग
  12. मेरी गुल्लक
  13. रंग-बिरंगा दरवाज़ा 
  14. संजू का तौलिया
  15. बिस्कुट किसका?
  16. हम लोग
  17. मैं कर सकता हूँ
  18. डर भगाओ
  19. वाणी और लाल गुब्बारा
  20. मुझे अच्छा लगता है
  21. टूटी पेंसिल
  22. जॉय की खुशी
  23. नन्ही बहन
  24. मेला
  25. पेन सेट

12. मेरी गुल्लक

कहानी का उद्देश्य: परिवार के किसी बड़े उद्देश्य में सहभागिता की ओर ध्यान जाए और उपयोगिता आधारित कार्य करने की प्रेरणा मिले।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की क्रिया से की जाए।

कहानी:
प्रीति एक बार अपनी सहेली सलमा के घर गई। सलमा ने उसे अपनी गुल्लक दिखाई। प्रीती ने उसे उठाकर देखा...”कितनी भारी है!”...हिलाकर देखा...”कैसी खनक है!”
सलमा ने बताया, “जब भी मुझे कोई पैसे देता है, मैं इसमें डाल देती हूँ। इस इकट्ठे पैसे से मैं अपनी पसंद की खूब सारी चीजें खरीदूंगी।” प्रीति को लगा कि यह तो बड़ा अच्छा विचार है। अब तक तो जब भी किसी रिश्तेदार ने पैसे दिए, उसने उन्हें किसी छोटी-मोटी चीज़ पर खर्च कर दिए।
उसने घर आकर मम्मी से गुल्लक ख़रीदवाई और अब उसे जो भी पैसे मिलते उसे गुल्लक मे डालने लगी। कुछ दिन बाद प्रीति का इस ओर ध्यान गया कि जब भी कोई ज़रूरत होती, मम्मी-पापा उसे वह सामान पहले ही ला देते । कभी पैसों की दिक़्क़त होती तो भी गुल्लक तोड़ने नहीं देते और पैसों का इंतज़ाम होते ही ला देते। एक पल को उसे लगा उसकी गुल्लक तो किसी काम की है ही नहीं!
एक दिन उसने मम्मी-पापा को बात करते सुना कि वे अपना घर ख़रीदने के लिए पैसे जमा कर रहे हैं।
प्रीति ने तय किया कि जब पापा घर लेंगे, तब वो भी अपने जमा किये सारे पैसे पापा को घर ख़रीदने के लिए दे देगी। वह अपनी गुल्लक की खनक अब भी सुनती थी, पर उसका सपना पापा के सपने से जुड़ गया था।

चर्चा के प्रश्न:
1. क्या आपका भी मन करता है कि अपने पैसे अलग से इकट्ठा करें? क्यों या क्यों नहीं?
2. मम्मी पापा आपके लिए क्या-क्या करते हैं?
3. यदि कभी मम्मी या पापा ने आपके मर्ज़ी की चीज़ नहीं ख़रीदी, तो उसका क्या कारण रहा होगा?
4. आप घर के किन कार्यों में सहयोग देते हैं और कैसे?

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट शांति से बैठें और अपने निष्कर्ष के बारे में विचार करें।

चर्चा की दिशा :
परिवार मे बहुत सी जिम्मेदारियों का निर्वाह करना होता है, यदि परिवार में सभी अपना छोटा-छोटा सहयोग दें तो बड़े से बड़े काम किये जा सकते हैं। विद्यार्थियों से चर्चा की जा सकती है कि अपने परिवार के किसी बड़े लक्ष्य की पूर्ति में किस प्रकार वह भी सहयोगी हो सकते हैं। परिवार मे सामंजस्य, संबंधों में विश्वास और प्रेम को मज़बूत करता है।

घर जाकर देखो, पूछो, समझो (विद्यार्थियों के लिए)
आज हम अपने-अपने घर पर बात करके पता लगाएँगे कि क्या कोई ऐसी चाहत है जो पूरे परिवार की एक ही है।

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  1. मीठा सेब
  2. राजू का टिफिन बॉक्स
  3. ख़ुशबूदार रबड़
  4. नया दोस्त
  5. गुठली किसकी?
  6. नोनी की चोट
  7. चलो बनाएँ पकौड़े
  8. रानी की गुड़िया
  9. भैया का रूमाल
  10. रिया गई स्कूल
  11. बड़ी बिल्डिंग
  12. मेरी गुल्लक
  13. रंग-बिरंगा दरवाज़ा 
  14. संजू का तौलिया
  15. बिस्कुट किसका?
  16. हम लोग
  17. मैं कर सकता हूँ
  18. डर भगाओ
  19. वाणी और लाल गुब्बारा
  20. मुझे अच्छा लगता है
  21. टूटी पेंसिल
  22. जॉय की खुशी
  23. नन्ही बहन
  24. मेला
  25. पेन सेट

11. बड़ी बिल्डिंग

कहानी का उददेश्य: विद्यार्थियों का ध्यान शिक्षा पाने और उसमें विद्यालय के महत्व की ओर जाए।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की क्रिया से की जाए।

कहानी:
आहान को मम्मी के साथ बाज़ार जाना बहुत पसंद था।
एक दिन मम्मी दुकानदार को पैसे देकर सामान ले ही रही थीं कि आहान झट से बोला, “नहीं अंकल! हमें प्लास्टिक की थैली मत दीजिए, यह हमारे वातावरण के लिए हानिकारक है।”
दुकानदार और मम्मी एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराए।
“यह तो सही बात है!” मम्मी ने पूछा,” पापा ने बताया?”
आहान ने कहा, “नहीं! हमारी मैम ने बताया।”
कुछ दिन बाद शाम को आहान, मम्मी और पापा एक साथ बैठें हुए थे। पापा बोले,”अगले साल आहान का एडमिशन बड़े स्कूल में करवाएँगे। "
मम्मी ने कुछ सोचा फिर पूछा, “बड़ा स्कूल क्यों?”
“अरे! वहाँ बड़ी बिल्डिंग है, और भी अच्छी-अच्छी सुविधाएँ हैं। आहान वहाँ बहुत कुछ सीख पाएगा।"
अभी तक आहान चुप-चाप अपने मम्मी-पापा की बातें सुन रहा था।
मम्मी ने आहान की तरफ़ देखकर पूछा, “बेटा! आपको अपने स्कूल जाना पसंद है?”
आहान की आँखें चमक उठीं। उसने कहा, “बहुत पसंद है! हमें मैम बहुत प्यार करती हैं। खेल भी खिलाती हैं और अच्छी-अच्छी बातें भी बताती हैं और मेरे सारे दोस्त भी बहुत अच्छे हैं।”
“यह बात तो सही है।", मम्मी ने पापा को दुकानदार वाली बात भी बताई।
आहान ने पापा से कहा कि वह इसी स्कूल में पढ़ना चाहता है। तीनों ने मिलकर तय किया कि जिस स्कूल में आहान जा रहा है, उसी में जाएगा।

चर्चा के प्रश्न:
1. क्या घर के तीनों सदस्यों ने मिलकर सही तय किया? क्यों?
2. मम्मी और दुकानदार एक- दूसरे को देखकर क्यों मुस्कुराए?
3. क्या आपको स्कूल आना पसंद है? क्यों?
4. विद्यालय में आप जो भी सीखते हैं क्या आप उन्हें घर पर बताते हैं?
5. जब आप कुछ बताते हैं, तब आपके परिवार के लोग क्या कहते हैं?

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट शांति से बैठें और अपने निष्कर्ष के बारे में विचार करें।

चर्चा की दिशा :
सही शिक्षा ठीक समझ के विकास में सहयोगी होती है और मानवीयता पूर्ण जीवन जीने में सहायक होती है। विद्यार्थियों से चर्चा की जा सकती है कि किस प्रकार शिक्षा हमारे जीवन के लिए और सही समझ के लिए महत्वपूर्ण है। सही समझ से ही हम व्यवस्था में भागीदारी कर सकते हैं।

घर जाकर देखो, पूछो, समझो (विद्यार्थियों के लिए)
घर जाकर चर्चा करें कि आपके मम्मी-पापा या दादा-दादी का विद्यालय कैसा था और वहाँ पढ़ाई कैसी होती थी।

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  1. मीठा सेब
  2. राजू का टिफिन बॉक्स
  3. ख़ुशबूदार रबड़
  4. नया दोस्त
  5. गुठली किसकी?
  6. नोनी की चोट
  7. चलो बनाएँ पकौड़े
  8. रानी की गुड़िया
  9. भैया का रूमाल
  10. रिया गई स्कूल
  11. बड़ी बिल्डिंग
  12. मेरी गुल्लक
  13. रंग-बिरंगा दरवाज़ा 
  14. संजू का तौलिया
  15. बिस्कुट किसका?
  16. हम लोग
  17. मैं कर सकता हूँ
  18. डर भगाओ
  19. वाणी और लाल गुब्बारा
  20. मुझे अच्छा लगता है
  21. टूटी पेंसिल
  22. जॉय की खुशी
  23. नन्ही बहन
  24. मेला
  25. पेन सेट

10. रिया गई स्कूल

कहानी का उद्देश्य: विद्यार्थियों का ध्यान इस ओर जाए कि विद्यालय में भी उन्हें अपना मानने वाले हैं और वे वहाँ भी सुरक्षित हैं। शिक्षक भी उनके माता-पिता समान ही स्नेह-प्यार देने वाले हैं।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की क्रिया से की जाए।

कहानी:
रिया अपना नया रंग-बिरंगा बैग उठाकर स्कूल जाने के लिए बहुत उत्सुक थी। मम्मी ने बताया था कि स्कूल में कई तरह के झूले हैं। वहाँ बहुत सारे बच्चों से उसकी दोस्ती होगी और वह सबके साथ मिलकर तरह-तरह के खेल खेलेगी।
जब वह स्कूल जा रही थी तो उसे लग रहा था कि उसका दिन बहुत ही अच्छा बीतने वाला है। परन्तु जैसे ही उसके मम्मी-पापा ने उसका हाथ छोड़ा और कक्षा में जाने का इशारा किया, वह रोने लगी।
(रिया रोई क्यों?)
रिया अभी अकेले जाने के लिए तैयार नहीं थी। तभी एक टीचर ने आकर उसको गोद में लिया और कक्षा में ले गयी।
कुछ दिनों तक रिया स्कूल जाते समय रोती थी। बार-बार मम्मी का हाथ कसके पकड़ लेती और छोड़ने के लिए राज़ी नहीं होती। रोज़ टीचर उसे प्यार से कहानियाँ सुनाते-सुनाते अंदर ले जाती।
और फिर कुछ दिनों बाद…
(आपको क्या लगता है, इसके आगे कहानी में क्या होगा?)
एक दिन खेलते हुए रिया गिर पड़ी और उसे चोट लग गई और वह रोने लगी। उसके दोस्तों ने उसे हाथ पकड़ कर उठाया। तभी उसकी टीचर भागी-भागी आई और रिया को चुप कराने लगी और एक टीचर ने उसकी चोट पर दवा लगा कर पट्टी बांध दी। उसकी कक्षा के बच्चे उसे पकड़ कर कक्षा में ले गए। रिया ने सोचा कि यहाँ स्कूल में तो सब मेरा बहुत ध्यान रखते हैं।
रिया अब रोज़ आराम से, ख़ुशी-ख़ुशी स्कूल जाने लगी। उसे स्कूल में अच्छा लगने लगा। अपनी टीचर और दोस्तों का साथ अच्छा लगने लगा।
उसे अब अपनी टीचर पर भरोसा था कि वह भी उसकी मम्मी की तरह उसका ध्यान रखेगी। अब उसे अपने दोस्तों पर भरोसा था कि वे उसके भाई-बहन की तरह उसके साथ खेलेंगे।

चर्चा के प्रश्न:
1. रिया को स्कूल जाना अच्छा क्यों लगाने लगा ?
2. आपको स्कूल और घर में कौन-कौन अच्छे लगते हैं?
3. आपको किस-किस पर भरोसा है?
4. आपको स्कूल आना कैसा लगता है और क्यो?
5. आपके टीचर आपके लिए क्या-क्या करते हैं?

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट शांति से बैठें और अपने निष्कर्ष के बारे में विचार करें।

चर्चा की दिशा :
शिक्षक और विद्यार्थी का संबंध सहज होना और विश्वास-पूर्ण होना बहुत महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों से चर्चा की जा सकती है कि विद्यार्थी और शिक्षक का संबंध कैसे और सहज हो सकता है। शिक्षक भी साझा करें कि वह विद्यार्थियों के साथ प्रेम-पूर्ण संबंध बनाने के लिए क्या-क्या करते हैं और उनको कैसा लगता है।

घर जाकर देखो, पूछो, समझो (विद्यार्थियों के लिए)
हम इस बारे में सोचकर आएँगे कि आपको मुझ में (अध्यापक/अध्यापिका में) क्या अच्छा लगता है और मुझे आप में क्या अच्छा लगता है। कल हम इस बारे में बात करेंगे। 

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  1. मीठा सेब
  2. राजू का टिफिन बॉक्स
  3. ख़ुशबूदार रबड़
  4. नया दोस्त
  5. गुठली किसकी?
  6. नोनी की चोट
  7. चलो बनाएँ पकौड़े
  8. रानी की गुड़िया
  9. भैया का रूमाल
  10. रिया गई स्कूल
  11. बड़ी बिल्डिंग
  12. मेरी गुल्लक
  13. रंग-बिरंगा दरवाज़ा 
  14. संजू का तौलिया
  15. बिस्कुट किसका?
  16. हम लोग
  17. मैं कर सकता हूँ
  18. डर भगाओ
  19. वाणी और लाल गुब्बारा
  20. मुझे अच्छा लगता है
  21. टूटी पेंसिल
  22. जॉय की खुशी
  23. नन्ही बहन
  24. मेला
  25. पेन सेट

9. भैया का रूमाल

कहानी का उद्देश्य: संबंधों में जीने का सुख वस्तु से मिलने वाले सुख से बड़ा होता है। वस्तु की उपयोगिता ही उसका मूल्य है।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की क्रिया से की जाए।

कहानी:
वेद देखता कि उसके भैया अपने रूमाल का विशेष ध्यान रखते थे। उसमें थोड़ी भी गंदगी उन्हें पसंद नहीं थी। रोज़ घर लौटते ही उसे धोया करते थे। वेद ने अपने भैया से एक दिन काम पर जाते वक़्त सुबह-सुबह पूछ लिया,”भैया!आप रोज़ यह रूमाल अपने साथ क्यों रखते हैं?’’
भैया मुस्कुराए और बोले, “वेद! रूमाल हमारा चेहरा या हाथ पोछने के काम आता है, पर यह तो मेरे बहुत ख़ास दोस्त ने मुझे दिया था, इसलिए मुझे यह और भी प्यारा है।”
इतना कह भैया स्कूल चले गए और वेद भी अपने स्कूल चला गया।
स्कूल से वापस आने के बाद हर शाम वेद सामने वाले पार्क में खेलने जाता था, और कुछ देर बाद भैया उसे लेने आ जाते थे। आज खेलते-खेलते वेद गिर पड़ा और उसे चोट लग गयी। उसकी कोहनी में से ख़ून बहने लगा। वेद को बहुत दर्द भी हो रहा था। उसी समय सामने से भैया दौड़े-दौड़े आए। भैया ने वेद की चोट देखी और तुरंत जेब में से रूमाल निकालकर उसकी कोहनी पर बाँधा और डॉक्टर के पास ले गए।
जब वेद की नज़र अपनी कोहनी पर गई तो उसने पाया कि यह वही रूमाल था, जो भैया को सबसे प्यारा था और अब तो रूमाल पर सारा ख़ून लग गया था।

चर्चा के लिए प्रस्तावित प्रश्न:
1. क्या भैया का प्यारा रूमाल वेद की चोट पर बाँधने से ख़राब हो गया होगा?
2. क्या भैया को पता था कि वेद की चोट पर रूमाल बाँधने से वह ख़राब हो जाएगा? तब भी भैया ने रुमाल क्यों बाँध दिया?
3. भैया को रूमाल ज़्यादा प्यारा था या अपना भाई वेद? क्यों?
4. क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि आपकी कोई प्यारी चीज़ दूसरों की मदद करने में ख़राब हो गई हो? तब आपको कैसा लगा था?

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट शांति से बैठें और अपने निष्कर्ष के बारे में विचार करें।

चर्चा की दिशा:
इस चर्चा से विद्यार्थियों का ध्यान इस बात पर जाए कि किसी भी वस्तु का मूल्य या महत्व उसकी उपयोगिता से है। साथ ही संबंधों से मिलने वाली ख़ुशी संबंधों को जीने में है। जिसने संबंधों को जान लिया है, वह वस्तु के लिए व्यक्ति को नज़र अंदाज़ नहीं कर सकता।

घर जाकर देखो, पूछो, समझो (विद्यार्थियों के लिए)
घर पर सबसे बात करें कि कौन-सी एक वस्तु उन्हें बहुत प्रिय है और क्यों।

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  1. मीठा सेब
  2. राजू का टिफिन बॉक्स
  3. ख़ुशबूदार रबड़
  4. नया दोस्त
  5. गुठली किसकी?
  6. नोनी की चोट
  7. चलो बनाएँ पकौड़े
  8. रानी की गुड़िया
  9. भैया का रूमाल
  10. रिया गई स्कूल
  11. बड़ी बिल्डिंग
  12. मेरी गुल्लक
  13. रंग-बिरंगा दरवाज़ा 
  14. संजू का तौलिया
  15. बिस्कुट किसका?
  16. हम लोग
  17. मैं कर सकता हूँ
  18. डर भगाओ
  19. वाणी और लाल गुब्बारा
  20. मुझे अच्छा लगता है
  21. टूटी पेंसिल
  22. जॉय की खुशी
  23. नन्ही बहन
  24. मेला
  25. पेन सेट

8. रानी की गुड़िया

कहानी का उद्देश्य: हर समय सजग बने रहने का अभ्यास हो और विद्यार्थी सकारात्मक सोच के लिए प्रेरित हों। विद्यार्थी वस्तुओं की उपयोगिता अपने जीवन में समझ पाएँ।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की क्रिया से की जाए।

कहानी:
6 साल की रानी को अपनी गुड़िया से बहुत प्यार था। वह उसे रोज़ नए-नए कपड़े पहनाती। अपनी पुरानी चूड़ियों से सजाती। उसके माथे पर बिंदी लगाती। उसके बाल सँवारती और उसे अपने साथ ही सुलाती थी।
एक दिन वह गुड़िया के साथ खेल रही थी कि तभी उसे चूड़ी वाले की आवाज़ सुनाई दी। वह दौड़ती हुई बाहर गई और आवाज़ लगाई, “सुनो भैया ज़रा रुकना ” चूड़ीवाला रंग-बिरंगी चूड़ियाँ लिए खड़ा था। रानी ने अपनी गुड़िया के लिए लाल रंग की चूड़ियाँ ली और उनको पैसे दे दिए।
चूड़ी वाले ने कहा, “प्यास लगी है, थोड़ा पानी पिला दो?” रानी ने अपनी गुड़िया को साइड में रख दिया और भैया के लिए पानी लेने चली गई। चूड़ीवाले भैया ने पानी पिया और अपनी टोकरी उठाकर घर चला गया।
अचानक रानी ने देखा कि उसकी गुड़िया बाहर नहीं है तो वह बहुत उदास हो गयी और सोचने लगी - “अरे! मेरी गुड़िया कहाँ गई? मैं अपनी गुड़िया को कहाँ ढूँढूँ?” उसने अपनी प्यारी गुड़िया को हर जगह ढूँढा लेकिन उसे वह कहीं नहीं मिली।
अब शिक्षक विद्यार्थियों से प्रश्न पूछ सकते हैं-
1. अब रानी को कैसा लग रहा होगा?
2. आपको क्या लगता है कि रानी को अपनी गुड़िया वापस मिलेगी?
ढूँढते-ढूँढते वह बहुत थक गयी और जाकर अपने घर के दरवाज़े के पास बैठ गयी। तभी उसकी मम्मी ने रानी को उदास बैठे देखा । मम्मी ने पूछा क्या हुआ? रानी बोली “ मम्मी! मेरी गुड़िया नहीं मिल रही, अभी तो यहीं थी।” मम्मी बोली, “तुम अपनी चीज़ों का ध्यान नहीं रखती हो, कहीं रख कर भूल गई होगी।”
रानी सोचने लगी हां शायद मुझे और सजग हो कर काम करना चाहिए। तभी उसे ध्यान आया कि जब वो चूड़ी वाले भैया के लिए पानी लेने गई थी गुड़िया वहीं रख कर गई थी। शायद भैया ही गुड़िया ले गए होंगे। रानी ने सोचा कि गुड़िया ही तो है, चूड़ी वाले भैया की बेटी भी खेल लेगी।

विद्यार्थियों से प्रश्न पूछें -
1. रानी ने ऐसा क्यों सोचा कि चूड़ीवाले भैया की बेटी भी गुड़िया से खेल लेगी?
2. अगर आपके पास आपके खिलौना न हों तो आपको कैसा लगेगा?
इतने में ही किसी ने दरवाज़ा खटखटाया। खट्ट खट्ट!
उसने लपक कर दरवाज़ा खोला तो देखा चूड़ीवाले भैया उसकी गुड़िया लिए खड़े थे । भैया बोले “ये लो तुम्हारी गुड़िया, ये मेरी टोकरी में गिर गई थी शायद!” चूड़ी वाले भैया गुड़िया वापस देकर मुस्कुराते हुए चले गए।

चर्चा के प्रश्न:
  • जब आपकी कोई वस्तु खो जाती है तो आप क्या सोचते हैं कि आपकी वस्तु कहाँ चली गई होगी?
  • कब-कब ऐसा हुआ कि आपकी खोई वस्तु मिल गई हो? कैसे मिली? साझा करें।
  • क्या कभी ऐसा हुआ है कि आपके मित्र की कोई वस्तु खो गई हो? क्या आपने उसकी मदद की? मदद कैसे की?
  • अपनी चीज़ों का ध्यान आप किस प्रकार रखते हैं?
कक्षा के अंत में 1-2 मिनट शांति से बैठें और अपने निष्कर्ष के बारे में विचार करें।

चर्चा की दिशा :
यदि हम अपने आस-पास के वातावरण के प्रति सजग रहते हैं, तो हम सभी कार्य अच्छी तरह कर सकते हैं। विद्यार्थियों से चर्चा की जा सकती है कि यदि हम सजग नही रहते तो क्या-कुछ होने की संभावनाएँ रहती हैं । चर्चा कर सकते हैं कि हमारी प्यारी वस्तुएँ कितनी उपयोगी हैं और अगर वह हमारे पास न रहें तो हमारे जीवन पर क्या प्रभाव होगा।

घर जाकर देखो, पूछो, समझो (विद्यार्थियों के लिए)
आज हम घर जाकर यह देखेंगे कि -
1. क्या घर में कभी किसी को कुछ ढूंढने में कोई परेशानी आई? क्यों?
2. यदि किसी को भी परेशानी नहीं आई, तो स्कूल आने से पहले सबको सारे सामान ठीक स्थान पर रखने के लिए धन्यवाद कहें।

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  1. मीठा सेब
  2. राजू का टिफिन बॉक्स
  3. ख़ुशबूदार रबड़
  4. नया दोस्त
  5. गुठली किसकी?
  6. नोनी की चोट
  7. चलो बनाएँ पकौड़े
  8. रानी की गुड़िया
  9. भैया का रूमाल
  10. रिया गई स्कूल
  11. बड़ी बिल्डिंग
  12. मेरी गुल्लक
  13. रंग-बिरंगा दरवाज़ा 
  14. संजू का तौलिया
  15. बिस्कुट किसका?
  16. हम लोग
  17. मैं कर सकता हूँ
  18. डर भगाओ
  19. वाणी और लाल गुब्बारा
  20. मुझे अच्छा लगता है
  21. टूटी पेंसिल
  22. जॉय की खुशी
  23. नन्ही बहन
  24. मेला
  25. पेन सेट

7. चलो बनाएँ पकौड़े

कहानी का उद्देश्य: विद्यार्थियों को दूसरों का सहयोग पहचान कर स्वयं सहयोग करने के लिए प्रेरित करना।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की क्रिया से की जाए।

कहानी
पिंकी और उसके दोनों बड़े भाइयों, टोनी और सोनू, की छुट्टी थी और मम्मी-पापा काम पर गए हुए थे। पिंकी का पकौड़े खाने का मन करने लगा। वह बहुत छोटी थी, इसलिए उसने अपने बड़े भाइयों से पकौड़े बनाने का आग्रह किया।
पकौड़े खाने की बात उन दोनों भाइयों को भा गई और वे तीनों रसोई की तरफ चल पड़े। टोनी ने सब्ज़ी काटने का काम लिया और सोनू ने पकौड़े तलने का। दोनों ने कहा कि पिंकी तुम तो बहुत छोटी हो और कुछ बना नहीं पाओगी।
पिंकी ने सोचा कि मैं छोटी हूँ तो क्या हुआ, मैं अपने भाइयों का सहयोग तो कर सकती हूँ! वह कभी भाग कर पानी लाती, कभी तेल और कभी बेसन पकड़ाती। पकौड़े बनने पर सब ने गरम-गरम पकौड़े खाए और पिंकी बोली, “अरे वाह! आप दोनों ने कितने टेस्टी पकौड़े बनाए हैं!”
इस बात पर सोनू बोला, “तुम्हारी मदद के बिना हम इतनी जल्दी इतने स्वादिष्ट पकौड़े नहीं बना सकते थे। तुमने बहुत अच्छा काम किया।” और फिर दोनों ने उसे “थैंक यू” कहा।

चर्चा के प्रश्न:
1. एक-दूसरे का सहयोग करना क्यों ज़रूरी है?
2. आप अपने घर में सबका सहयोग कैसे करते हैं?
3. पूरे दिन में परिवार में कौन-कौन आपकी मदद करता है? किसी एक बार की बात बताइए?
4. आप अपनी कक्षा में कौन- कौन से कार्य मिल-जुल कर करते हैं?

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट शांति से बैठें और अपने निष्कर्ष के बारे में विचार करें।

चर्चा की दिशा :
यदि हम किसी कार्य में सहयोगी बनते हैं तो हमें अच्छा लगता है और उस कार्य को अच्छी तरह कर सकते है। विद्यार्थियों से चर्चा की जा सकती है कि किसी कार्य में सहयोगी बनना हमारी भागीदारी को सुनिश्चित करता है और यह भी सुख का आधार है। महत्वपूर्ण, सहयोग करना ही नहीं ,सहयोग को स्वीकारना भी है । क्योंकि हम सभी काम अकेले नहीं कर सकते। सहयोग करना और सहयोग लेना संबंधों में विश्वास को सुदृढ़ करता है, क्योंकि हमारा विश्वास होता है कि आवश्यकता पड़ने पर हम एक-दूसरे के साथ मिलकर कोई भी काम कर सकते हैं। एक दूसरे की परस्पर मदद करना ही सहयोग होता है।

घर जाकर देखो, पूछो, समझो (विद्यार्थियों के लिए)
आज ध्यान देंगे कि आप घर में किस-किस काम में मदद या सहयोग करते हैं।

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  1. मीठा सेब
  2. राजू का टिफिन बॉक्स
  3. ख़ुशबूदार रबड़
  4. नया दोस्त
  5. गुठली किसकी?
  6. नोनी की चोट
  7. चलो बनाएँ पकौड़े
  8. रानी की गुड़िया
  9. भैया का रूमाल
  10. रिया गई स्कूल
  11. बड़ी बिल्डिंग
  12. मेरी गुल्लक
  13. रंग-बिरंगा दरवाज़ा 
  14. संजू का तौलिया
  15. बिस्कुट किसका?
  16. हम लोग
  17. मैं कर सकता हूँ
  18. डर भगाओ
  19. वाणी और लाल गुब्बारा
  20. मुझे अच्छा लगता है
  21. टूटी पेंसिल
  22. जॉय की खुशी
  23. नन्ही बहन
  24. मेला
  25. पेन सेट

6. नोनी की चोट

कहानी का उद्देश्य: विद्यार्थियों में संवेदनशीलता विकसित हो और वे अपनी ग़लती को पहचान कर स्वीकार कर पाएँ।

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की क्रिया से की जाए।

कहानी:
नोनी अभी तीन साल की थी। उसे अपने बड़े भाई उमंग के साथ खेलना बहुत अच्छा लगता था। जो कभी-कभी उसके साथ खेल लेता था।
उमंग जब भी किसी काम से बाहर जाने लगता,
नोनी उसके पीछे भागती रहती थी। “मैं भी भैया के साथ जाऊँगी" बोल-बोल कर ज़िद करती थी।
एक सुबह, नोनी पार्क से रोती हुई घर आई और माँ को अपनी चोट दिखाने लगी।
“देखिए मम्मी! मुझे चोट लग गई।” कहकर रोने लगी।
तभी उमंग भी अंदर आया और बोला, “नोनी तुम्हें चोट तो नहीं लगी!” और मम्मी को बताने लगा, “नोनी मेरे पीछे पीछे स्कूल आ रही थी, तो मैं तेज़ भागने लगा। यह दौड़ते हुए गिर गई।” उमंग बहुत उदास दिख रहा था।
माँ ने नोनी की चोट पर बैंडेड लगा दी। इधर नोनी अपनी आँसू भरी आँखों से उमंग की ओर देख रही थी।
माँ ने नोनी को समझाया, “ नोनी! उमंग स्कूल पढ़ने जाता है। वह आपको अपने स्कूल लेकर नहीं जा सकता।”
नोनी ने मासूमियत से कहा “ मैं भैया के साथ कब स्कूल जाऊँगी?”
न जाने उमंग को क्या हुआ! वह उदास होकर बोला, “मुझे माफ़ करना नोनी! मैं तुम्हें गिराना नहीं चाहता था।”

चर्चा के लिए प्रस्तावित प्रश्न:
1.क्या आपको भी अपने भाई-बहन के साथ खेलना पसंद है? क्यों?
2. नोनी ने माँ को क्यों नहीं बताया कि भाई के कारण वह गिर गई??
3. क्या उमंग से कोई ग़लती हुई थी? उसने पहले ही पूरी बात क्यों नहीं बताई?
4. उमंग ने आख़िर में अपनी ग़लती क्यों मान ली?
5.क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है, जब आपसे कोई ग़लती हुई हो और आपने किसी को नहीं बताया? क्यों?

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठें और अपने निष्कर्ष के बारे में विचार करें।

चर्चा की दिशा :
यदि हमसे कोई ग़लती हो जाती है तो महत्वपूर्ण ग़लती नहीं उस ग़लती को स्वीकार करना है। मानव मूलतः ग़लती नहीं करना चाहता। विद्यार्थियों से चर्चा की जा सकती है कि यदि कोई ग़लती हो भी जाती है तो उस ग़लती को स्वीकारना और उसे न दोहराना महत्वपूर्ण क्यों है। हम ग़लती करना नहीं चाहते, फिर भी हम से ग़लती कैसे और क्यों हो जाती है? अगर किसी दूसरे से कोई ग़लती हो जाती है तो हमें ऐसा क्यों लगता हैं कि उसने वह ग़लती जानबूझकर की होगी।

घर जाकर देखो, पूछो, समझो (विद्यार्थियों के लिए)
आज घर पर ध्यान देंगे कि जब कभी हमें चोट लगी या नुक़सान हुआ, तो उसमें अपनी ग़लती थी या किसी और की?
आप कब-कब अपनी ग़लती को स्वीकार कर लेते हैं और क्यों?

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  1. मीठा सेब
  2. राजू का टिफिन बॉक्स
  3. ख़ुशबूदार रबड़
  4. नया दोस्त
  5. गुठली किसकी?
  6. नोनी की चोट
  7. चलो बनाएँ पकौड़े
  8. रानी की गुड़िया
  9. भैया का रूमाल
  10. रिया गई स्कूल
  11. बड़ी बिल्डिंग
  12. मेरी गुल्लक
  13. रंग-बिरंगा दरवाज़ा 
  14. संजू का तौलिया
  15. बिस्कुट किसका?
  16. हम लोग
  17. मैं कर सकता हूँ
  18. डर भगाओ
  19. वाणी और लाल गुब्बारा
  20. मुझे अच्छा लगता है
  21. टूटी पेंसिल
  22. जॉय की खुशी
  23. नन्ही बहन
  24. मेला
  25. पेन सेट