8. शिक्षा का अर्थ

कहानी का उद्देश्य: विद्यार्थियों का ध्यान इस ओर दिलाना कि शिक्षा केवल अंक प्राप्त करने के अर्थ में नहीं है बल्कि स्वयं की उपयोगिता बढ़ाकर दूसरों की ख़ुशी के लिए मददगार बनने में है।
समय: कम से कम दो दिन बाकी शिक्षक के संतुष्ट होने तक

Check In: कक्षा की शुरूआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की प्रक्रिया से की जाए।

कहानी:
अनीता और नंदिनी एक ही कक्षा में पढ़ती थीं। अनीता हमेशा क्लास में टॉप आने के बारे में सोचती थी और दूसरों की मदद करने से बचती थी। उसे अपने टॉपर होने का गरूर था, इसलिए कोई उसके साथ रहना पसंद नहीं करता था। नंदिनी हमेशा ख़ुश होकर दूसरों की मदद करती थी और अपनी पढ़ाई भी मन लगाकर करती थी, इसलिए उसके साथ हर कोई रहना पसंद करता था। इससे अनीता को नंदिनी से ईर्ष्या होती थी और वह टॉपर होने पर भी ख़ुश नहीं रह पाती थी।
यह घटना परीक्षा के दिनों की है। पहली परीक्षा के दिन नंदिनी लगभग आधा समय ख़त्म होने पर परीक्षा हॉल में पहुँची और किसी तरह से आधा पेपर कर पाई। जब परीक्षा समाप्त हुई तो सबने नंदिनी से देरी से आने का कारण पूछा। नंदिनी कुछ बोल पाती इससे पहले अनीता बोल पड़ी, “यह आलसी है। इसे परीक्षा के दिन भी समय के महत्त्व का नहीं पता।” नंदिनी बिना कुछ जवाब दिए वहाँ से चली गई।
अनीता जब अपने घर पहुँची तो उसे लगा कि घर में कुछ गड़बड़ है। घर में रिश्तेदार थे, माँ भी तनाव में थी, डॉक्टर भी आए हुए थे। वह दौड़कर अंदर पहुँची तो पिता जी को बिस्तर पर लेटे हुए देखा। उसके पिता ने बताया, “जब मैं सुबह घूमने गया था तो मुझे दिल का दौरा पड़ गया और मैं फुटपाथ पर गिर गया। वह तो भला हो तुम्हारी सहपाठी नंदिनी का जो वहाँ से गुज़र रही थी। उसी ने मुझे समय पर अस्पताल ले जाने में मदद की।’’
जब अनीता को पता चला कि जिस लड़की को वह थोड़ी देर पहले ताने मारकर आई है उसी ने उसके पिता जी की जान बचाई है तो उसे अपने बरताव पर बहुत पछतावा हुआ। वह समझ नहीं पा रही थी कि अब वह नंदिनी से कैसे आँख मिलाएगी। अगले दिन वह स्कूल पहुँची तो नंदिनी के गले लगकर ख़ूब रोई और अपने बरताव के लिए क्षमा माँगी।

चर्चा की दिशा:
वर्तमान शिक्षा प्रणाली में अपेक्षा तो ‘ख़ुशहाल ज़िंदगी की तैयारी’ की है, लेकिन वास्तविकता में तो यह ‘परीक्षा व नौकरी केंद्रित’ ही दिखाई पड़ती है।
यदि संबंधों में दूरियाँ, जाति-धर्म के आधार पर भेदभाव, आतंकवाद आदि को देखें तो लगता है कि अभी आदमी को आदमी के साथ जीना नहीं आया है। इसके साथ ही प्रदूषण और ग्लोबल वॉर्मिंग को देखें तो लगता है कि अभी आदमी को प्रकृति के साथ भी जीना नहीं आया है।
अत: अब शिक्षा को ख़ुशहाल ज़िंदगी की योग्यता विकसित करने की प्रक्रिया के रूप में देखने की आवश्यकता है। इसके साथ ही विद्यार्थियों की विश्लेषण क्षमता का विकास करने की आवश्यकता है ताकि उनमें कुछ नया और बड़ा सोचने का भरोसा जगे। इसी से मानवीयता के उत्थान में सभी का योगदान होगा और यह दुनिया और ख़ूबसूरत बनेगी।
इस कहानी और प्रश्नों के माध्यम से विद्यार्थियों को एक सामाजिक और उपयोगी नागरिक बनने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया गया है।

पहला दिन:

चर्चा के लिए प्रश्न:
1. क्या आपने भी कभी किसी की मदद के लिए अपना कोई ज़रूरी कार्य छोड़ा है? आपने ऐसा क्यों किया?
2. एक ऐसी घटना साझा करें जब किसी ने अपने से ज़्यादा आपकी ज़रूरत का ध्यान रखा हो? उस घटना के बारे में सोचने पर आपको कैसा महसूस होता है?
3. ज़िंदगी अधिक महत्त्वपूर्ण है या ज़िंदगी में आगे बढ़ने के अवसर अधिक महत्त्वपूर्ण हैं? चर्चा करें।

घर जाकर देखो, पूछो, समझो (विद्यार्थियों के लिए):
  • घर जाकर इस कहानी को अपने परिवार में सुनाएँ और इस पर परिवार के सदस्यों के विचार व अनुभव जानें।
  • अपने परिवार में यह देखें कि परिवार के दूसरे लोग कैसे अपनी ज़रूरतों से ज़्यादा आपकी ज़रूरतों का ख़याल रखते हैं।
Check out: कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठकर आज की चर्चा के निष्कर्ष के बारे में विचार करें।

दूसरा दिन:

Check In: कक्षा की शुरूआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की प्रक्रिया से की जाए।
  • कहानी की पुनरावृत्ति विद्यार्थियों द्वारा करवाई जाए। पुनरावृत्ति के लिए एक या कई विद्यार्थियों से कहानी सुनना, कहानी का रोल प्ले करना, जोड़े में एक-दूसरे को कहानी सुनाना आदि विविध तरीके अपनाए जा सकते हैं। 
  • कहानी पर घर से मिले फीडबैक को विद्यार्थी छोटे समूहों में साझा कर सकते हैं। कुछ विद्यार्थियों को घर के अनुभव कक्षा में साझा करने के अवसर दिए जाएँ। 
  • पहले दिन के चर्चा के लिए प्रश्नों का प्रयोग उन विद्यार्थियों के लिए पुन: किया जा सकता है जो रह गए थे या अनुपस्थित थे।
चर्चा के लिए कुछ अन्य प्रश्न:
1. यदि आपके सामने ऐसी परिस्थिति आती है कि आपके मित्र को आपकी बहुत ज़रूरत है, परंतु उसी समय आपको भी अपना कोई काम करना है तो आप क्या करेंगे और क्यों?
2. जब एक ही समय में आपको अपना काम भी करना है और दूसरे को भी आपकी मदद की ज़रूरत है तो आप किस आधार पर तय करेंगे कि कौनसा काम ज़्यादा ज़रूरी है?
3. यदि किसी की मदद करते समय आपका कोई नुकसान हो जाता है या आपको अपमानित होना पड़ता है तो क्या आप फिर भी लोगों की मदद करते रहेंगे? क्यों?
4. आप शिक्षा के माध्यम से अपने में कौन-कौनसी योग्यताएँ विकसित करने की अपेक्षा रखते हैं?

Check out: कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठकर आज की चर्चा के निष्कर्ष के बारे में विचार करें।  

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