2. सौ रूपए का नोट

कहानी का उद्देश्य: बच्चे अपने विचारों के प्रति सजग और सतर्क रहें और सोच समझकर सही निर्णय ले पाएँ।
समय: कम से कम दो दिन अथवा शिक्षक के संतुष्ट होने तक

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की प्रक्रिया से की जाए।

कहानी
सायरा आज स्कूल पहुँची ही थी कि उसकी नज़र गेट के पास पड़े एक सौ रुपए के एक नोट पर पड़ी। नोट को सायरा ने उठाकर बैग में डाल लिया। वह सोच रही थी कि आधी छुट्टी में अपनी मनपसंद की चीजें खाऊंगी, फिर वह सोचने लगी कि आज वह स्कूल से खाना न लेकर बाज़ार से कुछ लेकर खाएगी। वह इन्हीं विचारों में खोई थी कि प्रार्थना की घंटी बज गई। प्रार्थना में प्रिंसीपल मैडम ने घोषणा की कि सातवीं की कक्षा की छात्रा कृष्णा का एक सौ रुपए का नोट स्कूल के आस पास ही कहीं गिर गया है जिस किसी को यह नोट मिले वह उसे प्रिंसीपल मैडम के ऑफिस में जमा करवा दे। सायरा ने यह सुना तो तुरंत प्रिंसीपल मैडम के ऑफिस में गई, और मैडम से बोली, “मैडम ये सौ रूपए का नोट मुझे गेट के पास मिला था शायद यह कृष्णा दीदी का होगा’’ यह कहकर उसने सौ रुपए का नोट मैडम को दे दिया।
मैडम ने कृष्णा को बुलाया और कुछ बातचीत करके उसको वह नोट दे दिया। नोट देखते ही कृष्णा ने मैडम को धन्यवाद दिया। मैडम ने सायरा की तरफ इशारा करते हुए कहा, “धन्यवाद सायरा को दो इसी को तुम्हारा सौ का नोट मिला था। कृष्णा ने सायरा को धन्यवाद दिया। सायरा के चेहरे पर ईमानदारी की चमक और खुशी थी।
चर्चा की दिशा: यदि किसी को नुकसान या तकलीफ हो रही हो, और हमें फायदा हो रहा हो, तब हमें अच्छा नहीं लगता। किसी को कष्ट देकर मज़े करना हमें अच्छा नहीं लगता। प्रश्नों और चर्चा के माध्यम से बच्चों का ध्यान इस तरफ चला जाए। हम सब एक दूसरे के लिए उपयोगी और पूरक हैं।किसी का सहयोग करना न केवल उसकी खुशी के लिए वरन अपनी खुशी के लिए भी आवश्यक है। कुछ पाने की इच्छा लेकर मदद करने से दुख होने की संभावना हैI व्यवस्था में रहकर बिना कुछ चाहे एक दूसरे का सहयोग करना हमेशा खुशी देता है।

पहला दिन:

चर्चा के लिए प्रश्न
1. यदि आपको कोई चीज़ रास्ते पर पड़ी मिली, तब आप क्या करोगे ?
2. जब आपकी कोई वस्तु खो जाती है तब आपको कैसा महसूस होता है ?
3. अपनी खोई चीज़ पाकर आपको कैसा महसूस हुआ?
4. क्या कभी आपकी खोई हुई वस्तु वापस मिली? कैसे?

घर जाकर देखो, पूछो,समझो: (विद्यार्थियों के लिए)
  • घर जाकर इस कहानी को अपने परिवार में सुनाएँ और परिवार के अन्य सदस्यों के विचार व अनुभव जानें।
  • आपको क्या लगता है कोई सामान क्यों खो जाता है? अपने परिवार के सदस्यों तथा आस पड़ोस के लोगों से सामान खो जाने के कारण जानने की कोशिश करें ।
कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठकर आज की चर्चा के निष्कर्ष के बारे में विचार करें

दूसरा दिन:

कक्षा की शुरुआत 2-3 मिनट श्वास पर ध्यान देने की प्रक्रिया से की जाए।
  • कक्षा में पिछले दिन की कहानी की एक बार पूरी तरह से कक्षा में पुनरावृत्ति की जाए। कहानी की पुनरावृत्ति विद्यार्थियों द्वारा की जाए, आवश्यकता होने पर शिक्षक उसमें सहयोग कर सकते हैं।( पुनरावृत्ति के लिए कई विद्यार्थियों से कहानी सुनना, रोल प्ले करना, जोड़े में एक-दूसरे को कहानी सुनाना आदि विविध तरीके अपनाए जा सकते हैं।)
  • घर से मिले फीडबैक को विद्यार्थी छोटे समूहों में साझा कर सकते हैं। कुछ विद्यार्थियों को घर के अनुभव कक्षा में साझा करने के अवसर दिए जाएँ।
  • पहले दिन के के प्रश्नों का प्रयोग उन विद्यार्थियों के लिए पुनः किया जा सकता है जो पिछले दिन अनुपस्थित रहे हों या समय की कमी के कारण प्रश्नों के उत्तर न दे पाए हों।
चर्चा के लिए कुछ अन्य प्रश्न:
1. किसी की खोई हुई चीज़ लौटा कर आपको कैसा महसूस होता है? अपने साथ घटी किसी घटना को साझा करें।
2. किसी दूसरे की वस्तु को बिना उससे पूछे इस्तेमाल करना आपको कैसा लगता है?
3. जब कोई आपकी वस्तु का प्रयोग आपसे पूछे बिना करता है तो आपको कैसा लगता है?
4. आप अपने स्कूल में खोया-पाया क्लब कैसे बना सकते हैं?समूह में चर्चा करें।

कक्षा के अंत में 1-2 मिनट, शांति से बैठकर आज की चर्चा के निष्कर्ष के बारे में विचार करें

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  1. बेहतर भविष्य की ओर
  2. सौ रूपए का नोट
  3. एहसास
  4. अखबार
  5. इनाम
  6. माँ की देखभाल
  7. कमज़ोर प्रदर्शन
  8. कहानी मैं सुनाऊँगी
  9. गुल्लक
  10. मेरा लकी (Lucky) पेन
  11. नानी के लड्डू
  12. मनजीत के घर में पिकनिक
  13. मैं सबसे तेज़ दौड़ना चाहती हूँ
  14. स्वादिष्ट कस्टर्ड
  15. बड़े भैया का जन्मदिन
  16. संगत का प्रभाव
  17. एक जला पराँठा
  18. छोटी सी कोशिश
  19. टम टम और उसका ड्रम
  20. रोहन का बग़ीचा

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